@sureshk678@tarunjatav50 Khula challenge hai tum ye karo, ham kah rhe hai , aur ye sab tum log aaj jane kitne salo se karne ki koshish kar rhe ho par bal nahi ukhaad pate ulta chatne lagte ho ki hamko daan do
@imtyazalimlxp@KarishmaAziz_ कैसे कैसे चौमू है ये लोग, अनपढ़ ने पहाड़ी से सुना, आकर लिख दिया, धरती चपटी बना दी, चांद के दो टुकड़े कर दिए।
ईंट के ऊपर ये भी लिखा है क्या कि मैं मूल रूप से मस्जिद की हूं।
पुरानी इमारतों को कब्जा करके
तोड़ फोड़कर थोड़ा बदलाव करके, उनको नए रूप दे दिए गए,भिखारी नयी बनाने से रहे।
@Swiggy@SwiggyCares I am trying to get help since last night but Swiggy didn't care for customer. They only care for their commission and let customer go to hell. Order number -247591893145256
जौहर राजपूतों की एक युद्धकालीन प्रथा थी। जब किला घिरा होता और हार पक्की लगती, तो महिलाएं (और बच्चे) सामूहिक रूप से आग में कूदकर आत्मदाह कर लेती थीं। इसका मकसद यह था कि दुश्मन उन्हें पकड़कर अपमानित न कर सके, गुलाम न बना सके या बलात्कार न कर सके।
यह रोजमर्रा का रीति-रिवाज नहीं था। सिर्फ घेराबंदी के समय होता था। महिलाएं शादी के कपड़े पहनकर रात को जौहर कुंड में आग लगाकर प्रवेश करती थीं। अगली सुबह पुरुष साका करते थे — केसरिया वस्त्र पहनकर, माथे पर राख लगाकर किले से निकलकर लड़ते हुए मृत्यु को गले लगाते थे।
सबसे प्रसिद्ध जौहर चित्तौड़गढ़ में हुए:
1303 में अलाउद्दीन खिलजी के हमले के समय (रानी पद्मिनी की कहानी से जुड़ा)
1535 में बहादुर शाह के हमले के समय (रानी कर्णावती)
1568 में अकबर के घेरे के समय
राजपूत संस्कृति में जौहर को कायरता नहीं, बल्कि अभय राजपूत जौहर माना जाता था। यह सम्मान (मर्यादा) की रक्षा का सबसे बड़ा प्रतीक था। दुश्मन के हाथों जीवित बचना अपमान से भी बड़ा माना जाता था, इसलिए आग को चुना गया।
यह सती से अलग है। सती में विधवा अपने पति की चिता पर बैठती थी। जौहर सामूहिक होता था और युद्ध के दौरान, जब पुरुष अभी जीवित या लड़ रहे होते थे।
आज यह प्रथा नहीं है, लेकिन राजपूत इतिहास और लोकगीतों में इसे साहस और बलिदान का प्रतीक माना जाता है।
#jauhar #जोहार #history
मुल्ले शवों के साथ भी रेप करते थे। पाकिस्तान में आज भी वही हो रहा है। इसलिए हिन्दू स्त्रियाँ जौहर करती थीं। किसी दो कौड़ी की मुल्ला प्रेमी, करियर में फुँक चुकी लौंडी के लिए यह समझना कठिन हो सकता है क्योंकि उसके लिए उसकी ‘पुसी फॉर अ रेंट’ ही जीवन का सत्य है।
ऐसी लौंडियाँ सेक्स को स्वतंत्रता मानती हैं, जितनों के साथ सेक्स, उतनी अधिक स्वतंत्र। हर स्त्री ऐसा नहीं मानती। उनके लिए अरब के बाजारों में सेक्स स्लेव बनना उतना अडवेंचरस और फुलफुलिंग नहीं दिखा होगा, जितना आइडेंटिटी क्राइसिस से जूझती, भैया कह कर सैंया बनाने वाली के लिए दिखता हो।
तुम नंगी हो कर एम्सटर्डम के बाजारों के शीशे में नाचों, तुम्हारी मुटल्ली देह भी किसी को पसंद आ जाएगी। हाँ, किसी योनि-केन्द्रित लौंडिया का नारीवाद यह तय नहीं करेगा कि दूसरी स्त्रियाँ रंडी बन कर ही घूमें क्योंकि तुम्हें रंडीपना बहुत पसंद है।
यह पोस्ट मैंने बहुत माइल्ड लिखा है। हिन्दू नारियों पर ऐसे आक्षेप का उत्तर मैं और भी अच्छी शब्दावली के साथ दे सकता हूँ।
@Lawyer_Kalpana@ReallySwara@ndtvindia इस ज़लील बाहरी औरत का कहना ये है कि जौहर से अच्छा रेप करवा लेती और जीवन को महत्व देती क्योंकि जीना जरूरी है,जिसका रेप नहीं हुआ उन्होंने मर्यादा को जीवन से ऊपर रखा उसकी तुलना रेप हुए वाले से कर रही,रेपिस्टों के साथ रहते हुए उनको महान बता रही है।रेप सर्वाइवल की बेज्जती है ये।
@ReallySwara@ndtvindia इसमें तेरी गलती नहीं है छिनाल जिसको भी भारत में फेमस होना होता है वह राजपूतों का सहारा लेता है तुने भी वही किया वैसे तेरी जैसी रखेलों के लिए
मौलाना सैयद इमाम बुखारी ने सही कहा था
@ReallySwara
अगर मांस खाना ही “घृणित” और “अमानवीय” है, तो फिर चिकन, मटन और मछली खाने वालों के लिए भी वही पैमाना होना चाहिए।
फर्क सिर्फ इतना है कि एक जगह मांस खाने को लेकर तांत्रिक संदर्भ जोड़ दिया गया है और दूसरी जगह उसे सामान्य भोजन माना जाता है।
मांस तो मांस है—चाहे चिकन हो, मटन हो या मछली।
अगर मांस खाने वाले को सिर्फ मांस खाने के आधार पर “घृणित” कहा जा रहा है, तो यह दोहरा मापदंड है।
@ChaoticRitzz@sarvanonthemove Why don't they made any of these type adds on eid, bakra eid , bec they knows very well , वहाँ सर तन से जुदा होगा,और OVEREDUCATED या कहो कुपडे, ज़ाहिल अंग्रेज या मुगलों की नाजायज औलादें यहां गद्दार हमेशा से दीमक की तरह घर कुनबे में ही है।
@ChaoticRitzz गलती लोगो की है कि कुतियो को सिंबल बनाओगे फिर उनको आईना दिखाओगे तो क्या ही होगा।
औरत मांगी होना चाहती है खुद को दिखाना चाहती है उसको कपड़ों में पढ़ा लिखा और आजाद महसूस नहीं होता। उसको या पूरे समाज को उसकी शिक्षा पद्धति ने ये ही सिखा पाया कि पढ़ा लिखा और आजाद होना नहीं दिखना होगा।
@JamesBond6029@420cjpwale@ranvijaylive ओ चाटुकारिता के ब्लैकहोल में गुम हुए आदिमानव, blinkit aur jiomart दो के स्क्रीनशॉट लगा दिये हैं। फुटकर भी 64 में दुकानदार के पास,लखनऊ सीतापुर हरदोई उन्नाव कानपुर फर्रुखाबाद शाहजहांपुर ये आस पास के एरिया में यही रेट है,तुम्हारे यहां 30-35 में कोई बेच रहा हो तो लेकर आओ & प्रूफ भेज
@ibmindia20@SherSingh968995 इतिहास का अधिकतम भ्रष्टाचार, सिर्फ नेताओं को खुश करने के लिए उनकी चुनी हुई कंपनी के टेंडर भले गुणवत्ता नेगेटिव हो। इथेनॉल मंत्री की देश पर तानाशाही,पानी और वातावरण की बर्बादी से नेता के बेटों की भर्ती हुई जेब। कटते हुए जंगल और मिटता हुआ भारत का भविष्य।
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@ibmindia20@SherSingh968995 2012 se 2026, 14 साल जिस युवा के बर्बाद हुए जो 18 का हुआ ही था वो 32 का हो गया, overage हो गया या होने को है उससे पूछो ये एक देश भक्ति के लिए किया हुआ त्याग और उसके पूरे जीवन की खुशियों का बलिदान। बीजेपी ने क्या किया बदले में, यूजीसी दिया, ईद पर मोहब्बत के गिफ्ट, और बेइंतहा लूट।