2017 के चुनाव में भाजपा ने केशव प्रसाद मौर्या को प्लांट किया ताकि यूपी में पिछड़े वर्ग के नाम प�� वोट लिया जा सके
बीजेपी को भी पता था किसी सवर्ण चेहरे पर बीजेपी को उत्तर प्रदेश में वोट नहीं मिलेगा और मिलता भी नहीं है,
तभी 20,30 पिछड़े वर्ग के लोडर नेताओं को अभी भी बीजेपी न चाहते हुए भी पाल पोश रही हैं, जिनका काम ��ै अपनी जाति का Rrr रोना है ताकि उनकी जाति वाले वोट दे सके, और सुबह शाम अखिलेश पर अभद्रता करना है
पिछड़े वर्ग में यादव समाज के खिलाफ इतना ज़हर फैलाया गया इतना फैलाया गया कि जिन लोगों ने OBC आरक्षण लागू कराने में सबसे अहम भूमिका निभाई थी, उसी हीरो को विलन बना दिया गया और जातिवादी 15% वाले सत्ता में आ गए
और हा जिनको लगता है cm योगी के चेहरे पर यूपी 2022 भाजपा जीती थी उनसे बड़ा मूर्ख कोई नहीं है, यहां चेहरा नह���ं जाति का चुनाव होता है,
लेकिन 2027 में समीकरण बदलते दिख रहे हैं, पिछड़ा, दलित वर्ग बीजेपी के आरक्षण विरोधी मंसूबों को भांप गया है
सपा ने बाबूसिंह कुशवाहा जी और नवल किशोर शाक्य जी, लाल जी वर्मा जी, हरेंद्र मालिक जी, राजकुमा�� भाटी जी को 5-5 जिलों की जिम्मेदारी दी है,
वहीं अखिलेश जी पिछड़े वर्ग के सम्मेलन में सीधे समाज से संवाद कर रहे हैं।
पिछड़ा, दलित वर्ग 10 साल के सवर्णवाद और सामंतवाद और इनके जातिवाद से काफ़ी नाराज़ दिख रहा है
अगर यह नाराजगी वोट में बदली, तो 2027 में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है
सत्ता परिवर्तन की जमीन तैयार होती दिख रही है 🚲
दिल्ली के ख़िलाफ़ लड़ाई में बनाया बनारस के मेयर ने लखनऊ के संग पेयर।
भाजपाइयों का एक घिसापिटा फ़ार्मूला है : ख़ुद गलत काम करो, दूसरे को ��दनाम करो।
अब तो सुरंगजीवियों की सियायत सीवर तक उतर गई है और कितना नीचे जाएगी।
Lately, some people have been calling out how Yadavs are portrayed in #MirzapurTheMovie .
Trust me, this isn't accidental; it’s part of a bigger conspiracy that started all the way back with Prakash Jha’s Gangaajal.
Here’s my breakdown exposing it from two years back:
फिल्में कम ही देखता हूं, लेकिन कल देर रात एक फिल्म देखी, मिर्जापुर. हालांकि औपचारिक डिस्क्लेमर लगा था कि उसका वास्तविक घटनाओं-पात्रों स�� कोई लेना-देना नहीं है. फिर एक बड़े फिल्मकार की बात ��ाद आई कि ‘(सिनेमा) एक आईना है जो समाज को प्रतिबिंबित करता है.’ जैसलमेर, जहां यादवों की आबादी नगण्य है, वहां का बब्बन यादव नशीले पदार्थों का कारोबारी दिखाया गया और उत्तर प्रदेश में करीब दस साल से कोई यादव मुख्यमंत्री नहीं है वहां एक यादव मुख्यमंत्री को माफियाओं से पैसे लेते दिखाया गया. और फिल्म में दिखाए गए ब्राह्मण माफिया की अगली पीढी के तीन चेहरों को विजेता की तरह दिखाया गया है. मुझे समझ नही��� आया कि कथाकार क्या कहना चाहते हैं. -- जैसा मैंने पहले कहा, मैं सिनेमा कम देखता हूं और कोई समझ भी नहीं है. और हां, मेरा उपनाम कुछ भी हो, मैं अपने को पत्रकार के सिवा कुछ नहीं मानता.
नाम बदलनेवाले अब ‘प्रेस वार्ता’ का नाम बदलकर ‘प्रेस एकालाप’ कर दें क्योंकि जब सिर्फ़ बयान दिया जाना है और प्रेस को सवाल पूछने का अधिकार ही नहीं है तो बिना वार्तालाप ‘वार्ता’ शब्द का क्या अर्थ रह जाता है? माननीय सबका समय क्यों ख़राब कर रहे हैं, प्रेस ��िलीज़ भेजकर ही काम चलाएं और दोनों का समय बचाएं।
सत्य ये है कि उप्र में सवालों की भरमार है लेकिन इनके पास जवाब ही नहीं हैं। मुँह मोड़ कर जाना, मैदान छोड़कर भागना भी कहलाता है।
ये शासन में पक्षपात करते हैं और प्रेस वार्ता में एकतरफ़ा बयानबाज़ी। अब क्या ये भी कहेंगे कि ‘प्रश्न सुनने के मूड में नहीं है।’
#प्रेस_एकालाप
बलिया की एक बच्ची वायरल हो रही थी, जो कूदते हुए स्कूल जा रही थी, क्योंकि उसका पैर एक्सिडेंट की वजह से खराब हो गया था।
आज सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बच्ची से मिलकर उसकी ट्राईसाइकिल और अन्य जरूरतों के लिए ₹2,00,000 की आर्थिक मदद की।
साथ ही उन्होंने स्थानीय सपा नेता को बच्ची की पढ़ाई से लेकर सभी जरूरतों को पूरा करने का आदेश भी दिया।
CM Yogi was seen running away from media questions during the press conference.
Now Yogi will also never hold a press conference in his life like Modi.