आज राहुल गांधी जी के सरकारी आवास, 5 सुनेहरी बाग रोड, नई दिल्ली में प्रियंका गांधी जी, तेलंगाना के मुख्यमंत्री श्री रेवंत रेड्डी जी, केरल के गृह मंत्री श्री रमेश चेन्निथला जी, AICC महासचिव एवं पंजाब प्रभारी श्री सचिन पायलट जी और महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रभारी महासचिव डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद जी सहित INDIA गठबंधन के साथी सांसदों और अन्य नेताओं से मुलाकात हुई।
इस अवसर पर लोकतंत्र की रक्षा, संविधान की मजबूती और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए INDIA गठबंधन की एकजुटता और सामूहिक प्रयासों पर चर्चा हुई।
. @aradhanam7000 👇
*तानाशाह सरकार के हाथों में दमनकारी सत्ता का अहंकार और प्रियंका जी के हाथों में संविधान की ताकत... यह मंजर चीख-चीखकर बता रहा है कि हाथों में संविधान लेकर डटीं श्रीमती @priyankagandhi जी की यह तस्वीर लोकतांत्रिक प्रतिरोध का सशक्त प्रतीक है। देश की बेटी के साथ पुलिस द्वारा किया गया दुर्व्यवहार बेहद निंदनीय और अक्षम्य है।
सत्ता याद रखे, जनता अपने अधिकारों और सम्मान पर किया गया प्रहार कभी नहीं भूलती। इंदिरा जी की विरासत का साहस लिए प्रियंका जी सत्ता से सवाल पूछती रहेंगी ! पहरे कितने भी हों, जनता के अधिकारों और संविधान की रक्षा की यह आवाज़ न झुकेगी, न रुकेगी।"
पिछले 24 घंटों में कांग्रेस नेताओं को दो बार हिरासत में लिया गया।अमित शाह की पुलिस ने हमें जंतर-मंतर और CEC कार्यालय तक जाने से रोक दिया।
लेकिन हमारी लड़ाई रुकेगी नहीं। संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। ✊🇮🇳
लोकशाहीच्या रक्षणासाठी लोकसभा विरोधी पक्षनेते आदरणीय राहुलजी गांधी व अन्य काँग्रेस नेत्यांचा शांततेत सत्याग्रह सुरू असताना दिल्ली पोलीसांनी राहुलजी,प्रियंकाजी व काँग्रेस नेत्यांना चुकीच्या पद्धतीने ताब्यात घेतले याचा मी #निषेध करतो.
मताधिकार आणि लोकशाहीच्या रक्षणासाठी आज देशाच्या राजधानीत विरोधकांचा आवाज दडपण्याचा प्रयत्न होत आहे. निवडणूक प्रक्रियेबाबत उपस्थित केलेल्या प्रश्नांवर निवडणूक आयोगाशी संवाद साधण्यासाठी संसदेतून निघालेल्या विरोधी पक्षांच्या मोर्चाला दिल्ली पोलिसांनी अडवले. त्यानंतर राहुलजी गांधी, प्रियंकाजी गांधी यांच्यासह काँग्रेसचे नेते आकाशवाणी भवन परिसरात ठिय्या देऊन सत्याग्रह करत होते.
राहुलजी गांधींचा हा सत्याग्रह केवळ काँग्रेसचा लढा नसून मतदारांच्या अधिकारांशी संबंधित प्रश्नांवर आवाज उठवण्याचा प्रयत्न आहे.
लोकशाहीचा आवाज अशा पद्धतीने कधी ही दडपता येणार नाही.
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@RahulGandhi@priyankagandhi@INCMaharashtra@INCIndia@IYC@IYCMaha
श्री ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा अविलंब होना चाहिए ; प्राइम मिनिस्टर मोदी जी और अमित शाह जी को हस्तक्षेप कर इनका इस्तीफा करवाना चाहिए।
चुनाव आयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के संदर्भ में मीडिया से बातचीत की :
सवाल: राहुल गांधी जी ने फॉर्म नंबर 6 में बदलाव को लेकर ट्वीट किया है और इन दिनों चुनाव आयोग पर लगातार कई आरोप लग रहे हैं। आप इस पूरी स्थिति को किस तरह देखते हैं?
जवाब : देखिए, एक दौर था जब भारतीय निर्वाचन आयोग की साख न केवल देश में, बल्कि पूरी दुनिया में स्थापित थी। दुनिया के कई देशों में जब चुनाव होते थे, तो भारतीय निर्वाचन आयोग से मार्गदर्शन और सहयोग लिया जाता था।
दुर्भाग्य से, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आने के बाद जिस प्रकार मिलीभगत से फैसले लिए गए, उसने आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राहुल गांधी जी ने बहुत पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वोटों की चोरी हो रही है और SIR गलत हो रहा है , लेकिन तब किसी ने ध्यान नहीं दिया। ज्ञानेश कुमार जी ने जिस भाषा और शैली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की, वैसी उम्मीद देश के मुख्य चुनाव आयुक्त से कदापि नहीं की जा सकती। विपक्षी दलों को सम्मान देना उनकी ड्यूटी है, लेकिन उन्होंने किसी का सम्मान नहीं किया। यह तमाशा देश पिछले लगभग एक साल से देख रहा है।
अब एक-एक कर उनके झूठ पकड़े जा रहे हैं। हाल ही में जब 'द इंडियन एक्सप्रेस' में यह खुलासा हुआ, तो पूरा देश स्तब्ध रह गया। आयोग के ही दो सदस्य यह आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने 14 बार आपत्तियां दर्ज कराईं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई और अंततः उन्हें कैबिनेट सचिव को पत्र लिखना पड़ा। हालांकि उन्हें राष्ट्रपति जी को पत्र लिखना चाहिए था। परंतु देश की शीर्ष निर्वाचन संस्था की यह नौबत आ जाना बेहद चिंताजनक है।
आज पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और सभी राजनीतिक दल सड़कों पर हैं। पूरे देश में इस स्थिति को लेकर आक्रोश है। यदि निर्वाचन आयोग ही निष्पक्ष नहीं रहेगा, तो लोकतंत्र कहाँ बचेगा? और यदि लोकतंत्र ही समाप्त हो जाएगा, तो क्या यहाँ तानाशाही पूर्ण शासन करना चाहते हैं ? जैसा कि चीन, उत्तर कोरिया या रूस जैसे देशों में नाममात्र के चुनावों के रूप में देखा जाता है? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद पूरा देश ज्ञानेश कुमार जी से पूछ रहा है कि अब कोई शर्म बची हुई है आपकी ?
इन्होंने आपसी बैठक करके और तीनों सदस्यों को साथ बिठाकर एक प्रेस नोट जारी करने तथा सफाई देने का प्रयास किया। उसमें यह दावा किया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने उनके फैसले को बरकरार रखा (Upheld) है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि उन्होंने न तो कोई फैसला बरकरार रखा है और न ही इस पर कोई टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट के इस स्पष्टीकरण के बाद अब क्या बच जाता है? अब बच गया है उनका इस्तीफ़ा होना।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और गृह मंत्री अमित शाह जी इस मामले में इंटरवीन क्यों नहीं कर रहे हैं? यदि तत्कालीन उपराष्ट्रपति जी का अचानक 'स्वास्थ्य कारणों' से इस्तीफा कराया जा सकता है जिसके पीछे का सच क्या था, यह तो वे ही जानते होंगे और लोगों को भी उस पर संदेह था तो ज्ञानेश कुमार जी का इस्तीफा स्वास्थ्य कारणों से क्यों नहीं कराया जा सकता? कम से कम एक चैप्टर क्लोज़ तो हो और पक्ष-विपक्ष अपनी भूमिका अदा करना शुरू तो करे। अगर 19 दिन तक हाउस के अंदर प्राइम मिनिस्टर और अमित शाह जी नहीं आए यह एक बड़ा इश्यू था। इसलिए मैं कहना चाहूंगा कि ज्ञानेश कुमार जी का इमीडिएटली इस्तीफा होना चाहिए।
हमारी चुनाव प्रणाली और लोकतंत्र पर बने इस संकट से दुनिया भर में भारत का क्या संदेश जा रहा है? जो देश कभी भारत से प्रेरणा लेते थे कि भारत ने दुनिया में लोकतंत्र के संदेश को फैलाया और मजबूत किया है, आज वही देख रहे हैं कि यहाँ चुनाव आयोग स्वयं SIR के नाम पर 12-13 करोड़ मतदाताओं के नाम काट रहा है। पश्चिम बंगाल में जो स्थिति बनी है, वह अलग चिंता का विषय है।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक जज साहब की यह टिप्पणी भी आई कि "अगली बार वोट दे देंगे।" मैं इसे बहुत खतरनाक संदर्भ मानता हूँ। हो सकता है कि माननीय जज साहब ने यह बात किस परिप्रेक्ष्य में कही हो, लेकिन जनता में संदेश गलत गया कि जो मतदाता इस बार वोट देने से वंचित रह गए, वे अगली बार दे दें यह तर्कसंगत नहीं है।
तो ये तमाम जो हालात हुए हैं ना, वो बहुत ही मैं समझता हूं कि ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं, अब अविलंब प्राइम मिनिस्टर को, अमित शाह जी को इंटरवीन करना चाहिए और इनका इस्तीफा करवाना चाहिए, मेरा मानना है।
मुंबई पोलीस देशातले क्युट पोलीस आहेत हे म्हणण्याची संधी या आंदोलकांना पण मिळायला हवी ना? यांना का नाही बरं मिळत?
यांचे आंदोलन स्थळ तर आंदोलनाची परवानगी असलेले आझाद मैदानच आहे
मग कुठल्या नियमाचं उल्लंघन केलंय यांनी? पक्षाच्या कार्यालयात थांबणं हा गुन्हा आहे?
मुंबई काँग्रेस अध्यक्षा आणि खासदार @VarshaEGaikwad यांनी आंदोलनासाठीची जागा मर्यादित करण्यावरून सरकारवर सवाल उपस्थित केला.
त्यांनी सांगितले की, आझाद मैदानातील वरिष्ठ अधिकाऱ्यांशी झालेल्या चर्चेत जनसुरक्षा विधेयकाच्या माध्यमातून आंदोलने रोखण्याची मोहीम सुरू असल्याचे त्यांना सांगण्यात आले. आझाद मैदानाचे क्षेत्र सातत्याने मर्यादित केले जात असून, आंदोलनासाठीची जागा कमी करण्यापासून आंदोलने दडपण्यापर्यंतचे प्रयत्न होत असल्याचे त्यांनी म्हटले.
@CMOMaharashtra@MumbaiPolice
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