#UPCM@myogiadityanath ने बेसिक शिक्षा विभाग के सेवारत शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता पर माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश का रिवीजन दाखिल करने का विभाग को निर्देश दिया है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि प्रदेश के शिक्षक अनुभवी हैं और समय-समय पर सरकार द्वारा उन्हें प्रशिक्षण प्रदान किया जाता रहा है। ऐसे में उनकी योग्यता और सेवा के वर्षों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
माननीय प्रधानमंत्री जी को पत्र लिखकर #NPS#UPS के प्रति रोष जताया और गुजारिश की है कि कर्मचारी को 25 वर्ष की जगह 20 वर्ष की सेवा के बाद ही 50% #DA सहित पेंशन की गारंटी दी जाय और हर हाल में कर्मचारी अंशदान की ब्याज सहित #GPF की तरह बिना किसी कटौती के पूर्ण अंशदान की वापसी की जाए। साथ ही #VRS की समय सेवा भी 25 वर्ष से घटाकर 20 वर्ष की जाए। सबसे गंभीर बात यह कि सरकार VRS लेने वाले को पेंशन देने की शुरुआत 60 वर्ष की उम्र पर ही शुरू करेगी और अगर इस दरम्यान सेवानिवृत्ति की उम्र 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी गई तो उसे 65 वर्ष तक इंतजार करना पड़ेगा। तो क्या सरकार ने ऐसी कोई तकनीक विकसित कर ली है क्या जिससे वीआरएस लेने वाले सभी लोग 60/65 वर्ष की उम्र तक हर हाल में जिंदा ही रहेंगे! और अगर किसी की वीआरएस के बाद लेकिन 60/65 वर्ष से पहले डेथ हुई तो क्या होगा? उसकी फैमिली को कौन सी और कब से पेंशन मिलेगी? क्या टीवी सोमनाथन जी ने किसी समस्या का समाधान दिया है या समस्या को और अधिक विकराल कर दिया है? माननीय @PMOIndia जी इस पर जरूर विचार करें। #ManjeetSinghPatel
#NoNPS_NoUPS_OnlyOPS
https://t.co/rU1rZIArko
समूचे देश में #पेंशन की एक ही व्यवस्था होनी चाहिए ---- जो पेंशन व्यवस्था सरकारी कर्मचारियों के लिए हो वही सांसद - विधायक के लिए होनी चाहिए --- अन्यथा जो पेंशन व्यवस्था MP/MLA के लिए है वही सरकारी कर्मचारी के लिए हो ---अब भेदभाव स्वीकार नहीं होगा देश को ---
योग्यता का साथ देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में विपक्ष के द्वारा भ्रमाकर सीट रुकवाने के विरोध में मॉडिफिकेशन अपील दायर करके हम सभी चयनित अभ्यर्थियों के एक लक्ष्य नियुक्ति पत्र के सपने को साकार करें।
👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻
#ThanksYogiJi_अब_मोडिफिकेशन_डलवाइए_69K
ये शिक्षक बनना चाहते हैं।इन पर @Uppolice ध्यान दे,ये सार्वजनिक धमका रहे हैं।
बच्चों को ऐसी शिक्षा देने वाले #शिक्षाशत्रु नहीं चाहिए।
शिक्षा का मतलब केवल अक्षर ज्ञान या जोड़-घटाना ही नहीं बल्कि संस्कार व चरित्र निर्माण है।
आपकी मानसिक अवस्था शिक्षक होने के अनुरूप नहीं है अवस्थी जी