मान लेते हैं कि नई पीढ़ी की भाषा फूहड़ और अभद्र है, पर उसने सीखी कहाँ से? परिवार और परिवेश से। स्कूल-कॉलेज जितने भी घटिया हों, वहाँ कोई शिक्षक तो उन्हें ऐसा सिखाएगा नहीं। परिवार-परिवेश में आप-हम सभी आते हैं। जब सब ओर कीचड़ हो तो गंगा स्नान की कल्पना कैसे कर सकते हैं? अब तो गंगा कितनी पवित्र रह गई है, यह भी सब जानते हैं।
"जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।"
~कबीर
कॉकरोच जंतर मंतर पर धरने पर नहीं बैठते तो हमें पता ही नहीं चलता हमारे Gen Z का एक वर्ग बिल्कुल असभ्य, अश्लील और अभद्र हो चुका है विशेषकर लड़कियां .इनकी अश्लील रील्स, भाषा शैली और अंगप्रदर्शन करती ड्रेसेज़ *देखकर पता चला आजकल संस्कारों की कमी लवजि'हाद, रे'प जैसी घटनाएं क्यों है?😐
न्यूटन जेब में रख लो अपना गुरूत्वाकर्षण का नियम
धरती का गुरूत्वाकर्षण ख़त्म हो रहा है ।
अब तो इस गोल-मटोल और ढलुआ पृथ्वी पर
किसी एक जगह पाँव टिका कर खड़े रहना भी मुमकिन नहीं
फिसल रही है हर चीज़ अपनी जगह से
कौन कहाँ तक फिसल कर जाएगा,
किस रसातल तक जाएगी यह फिसलन
कोई नहीं कह सकता
हमारे समय का एक ही सच है
कि हर चीज़ फिसल रही है अपनी जगह से ।
पृथ्वी का गुरूत्वाकर्षण ख़त्म हो रहा है ।
फिजिक्स की पोथियो !
न्यूटन के सिद्धान्त वाले सबक की ज़रूरत नहीं बची ।
पृथ्वी का गुरूत्वाकर्षण ख़त्म हो रहा है ।
कभी भी फिसल जाती है राष्ट्राध्यक्ष की जबान
कब किसकी जबान फिसल जाएगी कोई नहीं जानता
श्लोक को धकियाकर गिरा देती है फिसलकर आती गालियाँ
गड्डमड्ड हो गए है सारे शब्द
वाक्य से फिसलकर बाहर गिर रहे हैं उनके अर्थं
ऐसी कुछ भाषा बची है हमारे पास
जिसमें कोई किसी की बात नहीं समझ पाता
संवाद सारे ख़त्म हो चुके है, स्वगत कर रहा है
नाटक का हर पात्र ।
आँखों से फिसल कर गिर चुके हैं सारे स्वप्न ।
करोड़ों वर्ष पहले ब्रह्माण्ड में घूमती हज़ारों चट्टानों को
अपने गुरूत्वाकर्षण से समेट कर
धरती ने बनाया था जो चाँद
अपनी जगह से फिसल कर
किसी कारपोरेट के बड़े से जूते में दुबक कर बैठा है
बिल्ली के बच्चे की तरह ।
फिसलन ही फिसलन है पूरे गोलार्ध पर
और पृथ्वी का गुरूत्वाकर्षण ख़त्म हो गया है !
ओ नींद
मुझे इस भयावह स्वप्न-सत्य से बाहर आने का रास्ता दे !
राजेश जोशी
भाग्य..
कोई बंद दरवाज़ा नहीं,
न ही पूरी तरह खुली खिड़की,
वो तो बस
एक हल्की सी हवा है,
जो दिशा तो देती है,
पर चलना
हमें ही पड़ता है।
कभी हार मिली,
तो लगा
शायद क़िस्मत ने मुँह मोड़ लिया है,
पर वक़्त ने धीरे से कहा..
“ये भी तुम्हारे हिस्से का ही है,
इसे भी जी कर देखो।”
मैंने #विश्वास करना सीखा,
अंधा नहीं,
पर इतना कि
हर गिरावट के बाद
उठने की वज़ह मिल जाए।
और शायद
यही #विश्वास
हमें आगे बढ़ाता है,
हर अनजाने कल की ओर…
#अशोक_मसरूफ़
#बज़्म_काव्य_मंच
#बज़्म #विश्वास
@RailMadad ,सर,मेरा IRCTC रेल कनेक्ट एप के Ewallet में राशि है,उसे रेल वन ऐप में टिकिट बुक करते समय कैसे उपयोग करूं ??? दोनों एप में यह वॉलेट एक्टिव होना चाहिए।
सर,चुनाव में तो माइक्रो ऑब्जर्वर भी होते हैं,वह कहते सुनते कुछ नहीं,बस मतदान दल की गोपनीय रिपोर्टिंग करते हैं,कुछ जो रिपोर्टिंग करना नहीं जानते,वह मतदान दल प्रमुख से कागज भरवा लेते हैं!!!
प्रेक्षक (Observer)- किसी घटना, प्रयोग या स्थिति का गहराई और निष्पक्षता से निरीक्षण करने वाले व्यक्ति को कहते हैं जिसका उद्देश्य केवल देखना ही नहीं, बल्कि जाँचना, समझना या डेटा इकट्ठा करना भी हो सकता है (जैसे: चुनाव प्रेक्षक या वैज्ञानिक प्रयोग का प्रेक्षक)।
@pratyush_ranjan
भोपाल आए तो उनके साथ राजा भोज के बनाए बांध और अधूरे भोजपुर मंदिर की हेरिटेज वॉक की। वे पहली बार भोपाल की एक हजार साल पुरानी स्मृतियों से जुड़े। राजा भोज के समय इतने मेगा प्रोजेक्ट पर काम हुआ। क्या वे अपनी राजधानी धार से यहाँ लाना चाहते थे?
@DrMohanYadav51
@IRCTCofficial आज टिकिट के बारे में @epanchjanya पर ट्वीट पढ़ा,मैं irctc एप पर खाता बनाकर ,अपनी परिवार के टिकिट बुक करता हूं,क्या मेरे ईमेल और मेसेज के टिकिट मान्य होंगे या नहीं??
॥योगक्षेमो नःकल्पताम्॥
हमें अप्राप्त की प्राप्ति और प्राप्त की सुरक्षा का सामर्थ्य प्राप्त हो।
May we be blessed with the attainment of what we lack and the protection of what we already possess.
@shuklasingota Hi, that doesn’t seem right, and we’d never want you to have such an experience. Kindly share your registered contact details with us via DM, so we can review the matter thoroughly. Thanks, Team Airtel
चोट कड़ी है काल प्रबल की,
उसकी मुस्कानों से हल्की,
राजमहल कितने सपनों का पल में नित्य ढहा करता है
मुझ से चाँद कहा करता है
तू तो है लघु मानव केवल,
पृथ्वी- तल का वासी निर्बल,
तारों का असमर्थ अश्रु भी नभ से नित्य बहा करता है
मुझ से चाँद कहा करता है
हरिवंश राय 'बच्चन'
बोलना होगा अजीत भारती की तरह।
हमारे गले में मटकी बांध दी गई ,झाड़ू बांधा गया, ये सब फर्जी बाते है, वामपंथियों की बकलोली है। जो 70 दशक में गढ़ी गई है।
@AjeetBhartii जैसे पत्रकारों का जमकर समर्थन करें म
एक वार्षिक अंक निकला था,मनोरमा इंडिया का,रहस्य रोमांच नाम से,उसमें इसी तरह की अनेक सत्य घटनाओं पर स्टोरी बना कर प्रकाशित हुईं थीं।मैं पुरानी किताबों की दुकान से लाया था,आज भी सुरक्षित है।हो गए होंगे,30/35 साल !!!!
3 दिन तक समंदर में मौत से लड़ता रहा सहारा था सिर्फ एक फाइबर बॉक्स का ढक्कन लेकिन हिम्मत ने हार नहीं मानी!
इंडोनेशिया के 47 वर्षीय जहाज़ के कप्तान वान ज़ैदान के साथ कुछ ऐसा ही हुआ।
जहाज़ हादसे के बाद वह समुद्र में बह गए और तीन दिन तक सिर्फ फाइबर बॉक्स के ढक्कन को पकड़कर लहरों, भूख, प्यास और तेज़ धूप से लड़ते रहे।
हर गुजरता पल मौत के और करीब ले जा रहा था लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी आखिरकार 72 घंटे बाद रेस्क्यू टीम ने उन्हें ज़िंदा ढूंढ निकाला।
क्या आप ऐसे हालात में उम्मीद बनाए रख पाते? अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताइए।
जा दिन तें जदुनाथ चले ब्रज गोकुल से मथुरा गिरिधारी।
ता दिन तें ब्रजनायिका सुंदर रंपति झंपति कंपति प्यारी।
वाहि के नैनन की सरिता भई शंकर सीस चले जल भारी।
गंग कहै सुन शाह अकब्बर ता दिन ते जमुना भई कारी॥
- कवि गंग