रूस से सस्ता तेल लेकर खूब मलाई चांपी है तेल कंपनियों ने,
लगभग 100 करोड़ प्रतिदिन मुनाफा कमाया है।
और अब तेल मंहगा होने पर घाटा होने का रोना रो रहे हैं, जबकि सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी भी घटा दी है।
इन सबके बावजूद भी तेल का रेट बढ़ा तो समझो कि सरकार सिर्फ उद्योगपतियों की है।
आपका नाम रेवंत रेड्डी है।
आप तेलंगाना के कांग्रेस मुख्यमंत्री हैं।
मंच पर सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैठे थे। आपने Telangana के pending projects, funds और approvals की बात उठाई। आपने कहा कि जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब PM Manmohan Singh ने “बड़े दिल” से गुजरात की मदद की थी, इसलिए अब केंद्र को तेलंगाना के projects भी बड़े दिल से clear करने चाहिए।
लेकिन राजनीति में सामने अगर मोदी हों, तो लाइन वापस भी आ सकती है।
मोदी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि तेलंगाना को विकास चाहिए तो Centre के साथ चलना बेहतर है। उनका punchline था कि बेहतर है आप मुझसे ही जुड़ जाएं / मेरे साथ आ जाएं। सभा हंस पड़ी, लेकिन message साफ था .. funds की मांग को भी मोदी ने political banter में बदल दिया।
मतलब मंच पर बातचीत development की थी ,
लेकिन अंदर राजनीति पूरी चल रही थी।
रेवंत बोले ....
गुजरात को मदद मिली, तेलंगाना को भी दो।
मोदी बोले ....
मदद चाहिए तो Centre से लड़ो मत, साथ चलो।
कड़वी बात है कि
कांग्रेस CM ने Gujarat model का reference देकर funding मांगी ,
Modi ने उसी reference को political googly बना दिया।
एक तरफ Telangana projects।
दूसरी तरफ Centre-state politics।
एक तरफ funds की मांग।
दूसरी तरफ Modi का “मेरे साथ आ जाओ” वाला तंज।
यही भारतीय राजनीति है ,
जहां मंच development का होता है,
लेकिन हर line में election, alliance और power का हिसाब चलता है।
आपका नाम राजू नारायणस्वामी है।
1991 में आपने UPSC में AIR 1 हासिल की थी। पूरे देश में पहला स्थान।
आप IIT मद्रास से कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट थे। MIT ने स्कॉलरशिप ऑफर की। लेकिन आपने ठुकरा दी। आपने कहा — IIT की पढ़ाई गरीब भारतीयों के टैक्स से हुई है, अब देश को लौटाना मेरा कर्तव्य है।
फिर आपने IAS जॉइन किया।
पहली पोस्टिंग में एक बिल्डर धान के खेत को भरना चाहता था। 60 गरीब परिवारों ने कहा इससे उनका इलाका डूब जाएगा। आपने अनुमति नहीं दी। आपका ट्रांसफर हो गया।
केरल के PWD मंत्री के बच्चों के अवैध जमीन सौदे उजागर किए। मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। आपका ट्रांसफर हो गया।
Coconut Development Board में भ्रष्टाचार पकड़ा। अफसर सस्पेंड हुए। आपका ट्रांसफर हो गया।
सिविल सप्लाई विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। जांच पूरी होने से पहले हटा दिए गए।
34 साल की सेवा में 32 ट्रांसफर।
एक बार आपने सरकार को चिट्ठी लिखकर पूछा “जब मुझे कोई काम ही नहीं दिया जा रहा, तो मुझे वेतन क्यों दिया जा रहा है?”
2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी Chief Secretary पदोन्नति की याचिका खारिज कर दी।
AIR 1 होने के बावजूद।
30 साल की ईमानदार सेवा के बावजूद।
उन्होंने 34 किताबें भी लिखीं। साहित्य अकादमी पुरस्कार जीता। कानून में PhD की।
MIT उन्हें अमेरिका देना चाहता था।
उन्होंने भारत के लोगों को चुना।
लेकिन भारत की व्यवस्था ने उन्हें 34 साल तक सिर्फ एक संदेश दिया
“ईमानदारी की कीमत सब कुछ खोकर चुकानी पड़ती है।”
और उन्होंने हर बार वो कीमत चुकाई।
ऐसी कहानियों के लिए फॉलो करें, जिन्हें भारत की सुर्खियाँ कभी जगह नहीं देतीं।
आपका नाम समीर वानखेड़े है , आप 2008 बैच के IRS अधिकारी हैं।
आपने 2021 में उन्होंने क्रूज़ शिप ड्रग केस में बड़ी कार्रवाई की थी।
इसी केस में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की गिरफ्तारी हुई थी।
लेकिन इसके बाद मामला सिर्फ कानून तक सीमित नहीं रहा।
इस केस के बाद समीर वानखेड़े पर दबाव, विवाद और राजनीतिक हमला शुरू हो गया।
उन्हें NCB से हटाकर चेन्नई भेज दिया गया।
बाद में ट्रिब्यूनल ने उनके ट्रांसफर को गलत, मनमाना और पक्षपातपूर्ण बताया।
यानी जिस अफसर ने कार्रवाई की, उसी अफसर को सिस्टम ने साइडलाइन कर दिया।
फिर 2025 में सरकार ने उनके खिलाफ चार्जशीट जारी कर दी।
वह भी उस घटना के लगभग तीन साल बाद।
जनवरी 2026 में ट्रिब्यूनल ने इस चार्जशीट को रद्द कर दिया।
ट्रिब्यूनल ने इसे दुर्भावना और प्रक्रिया के दुरुपयोग जैसा माना।
लेकिन सरकार दिल्ली हाई कोर्ट चली गई और वहां से वह आदेश पलट गया।
अब पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार ने उनके खिलाफ जांच अधिकारी नियुक्त करने से पहले उन्हें जवाब देने का मौका नहीं दिया।
यह कोई छोटी बात नहीं है।
किसी भी अफसर के खिलाफ कार्रवाई से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अधिकार होता है।
यही प्राकृतिक न्याय का मूल सिद्धांत है।
नोट : समीर वानखेड़े ने अपना काम किया।
उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए!!
Issue raised by Opposition MP
Raghav Chadha - Food Adulteration, high LTCG, Gig worker rights, copyright reforms
Swati Maliwal - loots by Private hospitals, Insurance claims rejection
Shashi Tharoor - Middle class squeeze and unaffordable Home prices
Supriya Sule - Right to disconnect for employees after office hours
Meanwhile MPs from the party having highest MP are just busy clapping inside parliament when PM makes speech blaming Nehru for every issue and then come on Twitter to share and like PM post.
None of the MP from party in power are using their own brain or thinking to look for the day to day public issues which can be brought in parliament for discussion.
The disconnect between people in power and middle class is real.
There is a creator named Arpit Sharma who allegedly made a video provoking people to do in India what happened during the Nepal riots. Was any case filed against him? No.
Dhruv Rathee made false claims — was any case filed against him? No.
An AI-generated video of Amit Shah about removing the Constitution went viral — a case was filed, but bail was granted immediately.
On the other hand, Nitish Rajput, who is considered center to right-leaning, raised student-related issues and was directly hit with a defamation case.
In a democracy, is it easier to file cases only against people on the right wing?
Whoever stands or doesn’t stand with him, we are with Nitish Rajput..
30% इनकम टैक्स दिया।
कार खरीदी तो 30–50% टैक्स अलग से।
कार इंश्योरेंस पर 18% GST।
गाड़ी पर स्टेट रोड टैक्स।
पेट्रोल-डीज़ल में 50–60% टैक्स।
इतना टैक्स देने के बाद इनाम क्या मिला?
नगर निगम की खुदी हुई स्विमिंग-पूल साइज खाई जिसमें गिरकर आदमी की मौत।
टैक्स वर्ल्ड-क्लास ,
सड़कें मौत-क्लास।
सवाल सीधा है 👇
अगर ज़िंदा रहने की गारंटी नहीं दे सकते,
तो टैक्स किस बात का?
What is this obsession of Bollywood with songs? Every movie don't need songs and unnecessary romanticism.
Dhurandhar could be better if they have avoided unnecessary songs and bgm. They just ruined a good movie
⭐️⭐️⭐️
#DhurandharReview#honestreview@RanveerOfficial