सिर्फ 2.5 महीने पहले सपनों के साथ बैंक में शामिल हुआ एक युवा अधिकारी आज पीछे छोड़ गया एक दर्दनाक सुसाइड नोट।
उस नोट में लिखा है "असहनीय मानसिक दबाव, स्टाफ की भारी कमी, बिना उचित प्रशिक्षण के शाखा में फेंक देना, ग्राहकों की प्रताड़ना, परिवार से दूर पोस्टिंग और ₹5 लाख का बंधनकारी बॉन्ड"
क्या यही “प्रोफेशनल वर्क कल्चर” है?
यह केवल एक आत्महत्या नहीं बल्कि बैंकिंग व्यवस्था पर बहुत बड़ा सवाल है। Bank of Baroda सहित सभी बैंकों के शीर्ष प्रबंधन को आत्ममंथन करना चाहिए।
बैंक क्रुरता से नहीं, इंसानों से चलते हैं। कोई नौकरी इतनी क्रूर नहीं होनी चाहिए कि एक युवा अधिकारी लिखे “यह दुनिया मेरे लिए नहीं है”
@SunilLa58275710@ramshankarsingh@ManishkBarnwal9@manish3065365@idesibanda@iSourabhMishra@bankofbaroda@AllBaroda
To everyone who thinks bankers are KAAMCHOR.
I have a little suggestion for you.
Take a day off. And visit the branch you think have kaamchor employees.
Stay there for an entire day. Then share ur experience. Deal?
(P.S. Your breakfast lunch etc will be arranged by me)