मुख्यमंत्री के सकारात्मक एवं रचनात्मक दृष्टिकोण वाले बयान का संघर्ष समिति ने किया स्वागत : ऊर्जा निगमों में प्रबंधन बना रहा है टकराव का वातावरण:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री मा योगी आदित्यनाथ जी द्वारा शिक्षामित्रों की बैठक में दिए गए इस वक्तव्य का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने कर्मचारियों से अपनी मांगों को मनवाने के लिए टकराव के बजाय सकारात्मक एवं रचनात्मक (Positive & Constructive) दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया है।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि वह प्रारंभ से ही इसी मार्ग पर चल रही है। पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में प्रदेश सरकार का ध्यान आकर्षित करने हेतु संघर्ष समिति ने सदैव शांतिपूर्ण, संयमित और जिम्मेदार तरीके से आंदोलन किया है।
इसके बावजूद यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। इससे ऊर्जा निगमों में अनावश्यक टकराव का वातावरण उत्पन्न हो रहा है, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन की है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने डाउन साइजिंग के नाम पर अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों को नौकरी से निकाला। माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देश के बावजूद ऊर्जा निगम के संविदा कर्मी अभी तक आउटसोर्स निगम के अंतर्गत नहीं लाए गए हैं और उनका मनमानी ढंग से उत्पीड़न हो रहा है। नियमित कर्मचारियों के लिए अनुशासन सेवा नियमावली में संशोधन करके बिना चार्ज शीट दिए, बिना सफाई का मौका दिए सेवा से बर्खास्त करने का अधिकार ले लिया गया है। इससे ज्यादा उत्पीड़न की कार्यवाही और क्या हो सकती है, जिससे अनावश्यक टकराव का वातावरण बन रहा है।
संघर्ष समिति ने बताया कि ध्यानाकर्षण आंदोलन के तहत पिछले 525 दिनों से बिजली कर्मचारी कार्यालय समय के बाद अथवा भोजनावकाश के दौरान ही विरोध सभाएं कर रहे हैं। आंदोलनरत रहते हुए भी कर्मचारियों ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा से किया है। विशेष रूप से जनवरी–फरवरी 2025 में महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कर कर्मचारियों ने अद्वितीय कार्य किया, जिसकी देश-विदेश में सराहना हुई और उत्तर प्रदेश सहित भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी।
संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि पूरे आंदोलन के दौरान यह सुनिश्चित किया गया है कि उपभोक्ताओं एवं किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। उनकी समस्याओं का समाधान हर परिस्थिति में सर्वोच्च प्राथमिकता पर किया जा रहा है।
संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि संविदा कर्मियों, कर्मचारियों एवं अभियंताओं के हितों की रक्षा तथा निजीकरण के विरोध में भी पूरी तरह सकारात्मक एवं रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाया गया है—ठीक उसी भावना के अनुरूप, जैसा माननीय मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा है।
किन्तु यह अत्यंत खेदजनक है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने इस सकारात्मक दृष्टिकोण को नजरअंदाज करते हुए लगातार दमनात्मक कार्रवाइयां की हैं। दिनांक 19 मार्च 2023 को प्रदेश के ऊर्जा मंत्री मा श्री अरविंद कुमार शर्मा जी द्वारा दिए गए निर्देशों के बावजूद बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं पर की गई कार्रवाइयां अब तक वापस नहीं ली गई हैं, बल्कि नई कार्रवाइयां की जा रही हैं। इससे स्पष्ट है कि प्रबंधन जानबूझकर टकराव का वातावरण बना रहा है।
संघर्ष समिति ने माननीय मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे इस मामले में प्रभावी हस्तक्षेप करें, जिससे बिजली कर्मचारियों को न्याय मिल सके। साथ ही अब तक आंदोलन के दौरान की गई सभी दमनात्मक एवं उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लिया जाए तथा ऊर्जा मंत्री के निर्देशों के अनुरूप कार्यवाही समाप्त की जाए।
संघर्ष समिति ने दोहराया कि बिजली कर्मचारी हर परिस्थिति में प्रदेश की जनता को निर्बाध विद्युत आपूर्ति देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, किंतु प्रबंधन का रवैया लगातार तनाव और टकराव को बढ़ावा दे रहा है, जिसे तत्काल रोका जाना आवश्यक है।
उत्पीड़न के विरोध में चल रहे प्रदेशव्यापी जनजागरण अभियान के अंतर्गत आज औरैया एवं इटावा में सभाएं आयोजित की गईं, जिन्हें मुख्य रूप से श्री जितेंद्र सिंह गुर्जर एवं श्री महेंद्र राय ने संबोधित किया।
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मेरठ मुख्यालय पर बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं का जोरदार जमावड़ा : उत्पीड़नात्मक कार्रवाई वापस न होने पर प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन की चेतावनी : पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन पर गर्मियों में बिजली व्यवस्था बिगाड़ने की नियत का आरोप:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर चल रहे प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान के अंतर्गत आज पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय, मेरठ पर सैकड़ों बिजली कर्मचारियों, अभियंताओं एवं संविदा कर्मियों का विशाल जमावड़ा हुआ। इस दौरान प्रदेश के अन्य जनपदों में भी निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया गया तथा प्रभावी विरोध सभाएं आयोजित कर कर्मचारियों ने अपना आक्रोश प्रकट किया।
सभा को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन की “डर और दमन” की नीति की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तत्काल वापस नहीं ली गईं, तो प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। उन्होंने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर गर्मियों में प्रदेश की बिजली व्यवस्था बिगाड़ने की नियत का आरोप लगाते हुए कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने हाल ही में पनकी ताप बिजली घर और जवाहरपुर ताप बिजली घर के संचालन और अनुरक्षण का 25 साल के लिए निजी कंपनी को टेंडर जारी करने का फरमान निकाला है । यह सब कर्मचारियों के बीच में आंदोलन भड़काने वाला कदम है।
सभा को ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के सेक्रेटरी मुख्यालय दिल्ली के यशपाल शर्मा ने संबोधित किया। केन्द्रीय पदाधिकारियों जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, मोहम्मद वसीम, योगेन्द्र लाखा, आर सी पाल, सी पी सिंह ,एवं निखिल कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण, ओबरा एवं अनपरा विद्युत परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया, गंगा कैनाल स्थित जल विद्युत परियोजनाओं को लीज पर देने तथा ट्रांसमिशन क्षेत्र में टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग के जरिए निजीकरण के प्रयास बिजली व्यवस्था और उपभोक्ताओं—दोनों के हित में नहीं हैं।
वक्ताओं ने ग्रेटर नोएडा में निजी कंपनियों के कार्यों तथा आगरा में टोरेंट पावर की फ्रेंचाइजी के खिलाफ उपभोक्ताओं से मिल रही लगातार शिकायतों और करार उल्लंघनों का उल्लेख करते हुए संबंधित कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि 03 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री एवं शासन के साथ हुए लिखित समझौते का आज तक पालन नहीं किया गया है, जिससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। मार्च 2023 के आंदोलन एवं सांकेतिक हड़ताल के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई दमनात्मक कार्रवाइयों—जैसे एफआईआर, निलंबन, दूरस्थ स्थानांतरण एवं अनुशासनात्मक कार्यवाहियां—को तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
इसके साथ ही डाउनसाइजिंग एवं वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर हटाए गए संविदा कर्मियों की पुनर्बहाली, आउटसोर्स कर्मियों को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम में समाहित करने, निलंबित कर्मचारियों की सम्मानजनक बहाली तथा लंबित अनुशासनात्मक कार्यवाहियों को समाप्त करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
संघर्ष समिति ने मई 2025 में सेवा नियमों में किए गए संशोधनों को तानाशाहीपूर्ण बताते हुए उनका विरोध किया और कहा कि बिना जांच, बिना सुनवाई और बिना स्पष्टीकरण का अवसर दिए सेवा समाप्ति जैसे प्रावधान पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। साथ ही फेशियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन कटौती, विरोध सभाओं में भाग लेने पर स्थानांतरण, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अलग होने पर कार्रवाई तथा कर्मचारियों के आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने जैसी कार्यवाहियों को तत्काल बंद करने की मांग की गई।
संघर्ष समिति ने प्रदेश की जनता, किसानों एवं उपभोक्ताओं से अपील की कि यह आंदोलन केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि सस्ती, सुलभ और विश्वसनीय बिजली व्यवस्था को बचाने का साझा संघर्ष है। निजीकरण से उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होगी।
सभा में संघर्ष समिति ने संकल्प दोहराया कि बिजली कर्मी उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आंदोलन के दौरान भी निर्बाध एवं बेहतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे और निजीकरण एवं उत्पीड़न के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
#stop_victimization_of_uppcl_employees
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@DiwediRc@ChairmanUppcl ट्रांसफार्मर की क्वालिटी अत्यंत खराब है इस पर केवल लीपापोती होगी अधिकतर ट्रांसफार्मर पचासों बार रिपेयर हो चुके इसके बाद भी बदले जा रहे जिस पर कोई ध्यान नहीं पहले के ट्रांसफार्मर कॉपर wound होते थे बीसों साल चलते थे यह भी विचार करने का विषय है। केवल जेई को प्रताड़ित करना है
आदरणीय सुल्तानपुर जिलाधिकारी महोदय
@SultanpurDm आपको अवगत करा दु कि मेरा एलपीजी कनेक्शन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम राणा गैस एजेंसी में है, हमने सिलेंडर 6 मार्च को बुक किया, हमें एजेंसी द्वारा सूचित किया गया कि 10 के बाद मिलेगा और आज दिनांक 16/03/2026 को सिलेंडर लेने गया तो 8 को डिलीवरी हो गई बता रहे हैं। और यही msg हमारी माता जी के नंबर पर आया है। अब हमें गैस 3 अप्रैल के पहले नहीं मिलेगी ऐसा msg आया है। ऐसे में मुझे अब सिलेंडर 1500-2000 का ब्लैक में लेना पड़ेगा मान्यवर ये सब फ़्रॉड नहीं है तो क्या है, मेरा सिलेंडर किसे दिया गया और क्यों दिया गया?
उचित कार्यवाही की अपेक्षा रखता हूँ।
@myogiadityanath@sultanpurpolice
Prepaid meter में रिचार्ज करने के बाद भी auto रीकनेक्ट नहीं हो रहा । polris कंपनी कोई जवाब नहीं दे रही । hardoi exen साहब ने स्वयं kai jagah par baat कर सप्लाई चालू करवाया. विद्युत विभाग का धन्यवाद 🫡 @dmhardoi@MVVNLmd@aksharmaBharat
prepaidमीटर के रिचार्ज करने के बाद भी ऑटो reconnect नहीं हो रहा है । पोलरिस कंपनी ने उपभोक्ता के साथ अच्छा नहीं किया वो तो विद्युत विभाग के अधिकारीगण और कर्मचारी रात ९ बजे तक लगे हुए है तब जाकर उपभोक्ताओ को supply चालू हो पायी @dmhardoi@UPPCLLKO@MVVNLmd
VIDEO | हरदोई: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर बिजली उपभोक्ताओं के लिए सुविधा और पारदर्शिता का नया आधार बन रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बिजली व्यवस्था सुरक्षित और विश्वस्तरीय हो रही है। यूपीपीसीएल ने अब तक 62.65 लाख स्मार्ट मीटर स्थापित किए हैं, जबकि लक्ष्य 3 करोड़ 9 लाख 78 हजार से अधिक है।
आज से ठीक 3 साल पहले 3 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी व माननीय मुख्यमंत्री जी के मुख्य सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी जी की अध्यक्षता में बिजली कर्मचारियों के साथ एक लिखित समझौता हुआ था, उस समझौते में बिजली क्षेत्र में निजीकरण नहीं किया जाएगा यह भी लिखा था तथा अन्य मांगे भी थी जिन पर सहमति बनी थी।
लेकिन दुर्भाग्य का विषय है कि आज 3 साल पूरे होने के बाद भी वह समझौता लागू नहीं किया जा रहा है और मनमाने तरीके से पूंजीपतियों के हित में बिजली के निजीकरण का प्रयास किया जा रहा है।
अब माननीय मंत्री जी ही समझौते का पालन नहीं कराएगे, तो फिर जनता का लोकतंत्र से ही विश्वास उठ जाएगा।
माननीय ऊर्जा मंत्री श्री @aksharmaBharat जी से पुनः अनुरोध है कि आपके द्वारा 3 दिसंबर 2022 को बिजली कर्मचारियों के साथ किए गए समझौते का पालन कराये जाने की कृपा करें, जिससे कर्मचारियों व जनता का विश्वास आप पर बना रहे।
#stop_privatization_of_uppcl
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ऊर्जा प्रबंधन द्वारा अभियंताओं पर की गई उत्पीड़न की कार्रवाइयों के विरोध में दिनांक 20 नवंबर 2025 से चरणबद्ध तरीके से आंदोलन प्रारंभ।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि उत्पीड़न की समस्त कार्रवाइयों को निरस्त कराने की कृपा करें।
@UPPCLLKO@chairmanuppcl
वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर राजधानी लखनऊ के लेसा में हजारों पदों को समाप्त किए जाने के विरोध में बिजली कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों बिजली कर्मियों ने शक्ति भवन मुख्यालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
@narendramodi@myogiadityanath@UPPCLLKO
निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में विद्युत अभियंता संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी : अभियंताओं पर की गयी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस न ली गई तो 20 नवंबर के बाद होगा आंदोलन:
उ.प्र. राज्य विद्युत अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी ने पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन को चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस न ली गयी और अभियंताओं की ज्वलंत समस्याओं का समय रहते समाधान न किया गया तो प्रदेश के तमाम विद्युत अभियंता 20 नवंबर के बाद आंदोलन प्रारंभ करने हेतु बाध्य होंगे।
अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा पारित प्रस्ताव में यह संकल्प दोहराया गया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण का टेंडर होते ही तमाम अभियंता सामूहिक जेल भरो आंदोलन प्रारंभ करने के लिए बाध्य होगें जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा पारित प्रस्ताव में मुख्यतः संयुक्त उपक्रम में बनाई जा रही ओबरा डी और अनपरा ई परियोजना को उत्पादन निगम को दिया जाए, उत्पादन निगम में सैकड़ों की संख्या में अधिशासी अभियंताओं के पद रिक्त होने के बावजूद विगत 04 वर्षों से सहायक अभियंता से अधिशासी अभियंता के पद पर रुकी हुई पदोन्नति तत्काल की जाए, वर्टिकल रीस्ट्रचरिंग के नाम पर निजीकरण करने हेतु अभियंताओं के पदों को समाप्त करने की साजिश तत्काल बंद की जाए, मार्च 2023 की हड़ताल के दौरान की गयी समस्त उत्पीड़नात्म कार्यवाहियां ऊर्जा मंत्री के 19 मार्च 2023 के निर्देश के अनुसार वापस ली जाए, वर्तमान आंदोलन के फलस्वरुप परामर्श व चार्जशीट के नाम पर अन्य कारणों से की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के तहत अभियंताओं की रोकी गयी प्रोन्नति, स्थायीकरण आदेश तत्काल जारी किये जाएं और आंदोलन के फलस्वरुप उत्पीड़न की दृष्टि से अभियंताओं के ट्रांसफर निरस्त किये जाएं, आईटी के नाम पर अभियंताओं के साथ लगातार किया जा रहा भेदभाव व उत्पीड़न बंद किया जाए।
उ.प्र. राज्य अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी की आज लखनऊ में हुई बैठक में उक्त निर्णय लिया गया। बैठक के बाद अभियंता संघ के अध्यक्ष संजय सिंह चौहान और महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि विद्युत अभियंताओं ने निजीकरण के विरोध में आंदोलन के साथ-साथ प्रदेश को बेहतर बिजली आपूर्ति देने का सतत् प्रयास किया है और अभी भी विद्युत अभियंता इस कार्य में लगें हैं किंतु पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन इसके बदले में अभियंताओं का तरह-तरह से उत्पीड़न करने पर आमदा है। जिसके विरोध में केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जबरदस्त आक्रोश व्यक्त किया गया।
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रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर लेसा में 5600 पद समाप्त किए जाने से हर वर्ग के बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा : राजधानी की बिजली व्यवस्था बचाने के लिए बिजली कर्मियों की मुख्यमंत्री से गुहार: निजीकरण के विरोध में प्रांतव्यापी आंदोलन जारी*
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर राजधानी लखनऊ की बिजली व्यवस्था बर्बाद होने से बचाने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। संघर्ष समिति ने कहा कि लखनऊ में बिजली व्यवस्था में लगातार गुणात्मक सुधार हो रहा है किन्तु निजीकरण के लिए मनमाना प्रयोग कर लखनऊ की बिजली व्यवस्था को पटरी से उतारने की कोशिश की जा रही है जिसे तत्काल रोका जाना चाहिए।
संघर्ष समिति ने बताया की नई व्यवस्था में लेसा में सभी वर्गों के मिलाकर कुल 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी सुधार के प्रति हमेशा पॉजिटिव रुख रखते हैं किन्तु बिजली कर्मियों से बिना विचार विमर्श किए केवल निजीकरण की पृष्ठभूमि बनाने हेतु हजारों की तादाद में सभी वर्गों के पदों को समाप्त किया जा रहा है जिससे बिजली कर्मियों में भारी बेचैनी और उबाल है।
आंकड़े देते हुए संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि सबसे बड़ी मार अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों पर पड़ने जा रही है। 15 मई 2017 के एक आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में प्रत्येक विद्युत उपकेंद्र पर 36 कर्मचारी होने चाहिए। यह आदेश आज भी प्रभावी है। वर्तमान में लेसा में 154 विद्युत उपकेंद्र है। प्रति उपकेंद्र पर 36 कर्मचारियों के हिसाब से संविदा के 5544 कर्मचारी होने चाहिए। रिस्ट्रक्चरिंग के आदेश के अनुसार लेसा के चारों क्षेत्र में मिलाकर कुल 616 गैंग होंगे और 391 एस एस ओ होंगे। एक गैंग में तीन कर्मचारी काम करते हैं। इस प्रकार 616 गैंग में 1848 संविदा कर्मी काम करेंगे साथ ही 391 एस एस ओ काम करेंगे। इस नई व्यवस्था के हिसाब से 01 नवंबर से कुल 2239 संविदा कर्मी काम करेंगे जबकि 15 मई 2017 के आदेश के अनुसार 5544 संविदा कर्मियों को होना चाहिए । इस प्रकार 3305 संविदा कर्मी एक झटके में हटाए जा रहे हैं।
संघर्ष समिति ने बताया की इसी प्रकार अधीक्षण अभियंता के चार पद, अधिशासी अभियंता के 17 पद, सहायक अभियंता के 36 पद, जूनियर इंजीनियर के 155 पद और टी जी 2 के 1517 पद समाप्त किए जा रहे हैं। अन्य संवर्गो के पदों में भी कमी की जा रही है।
संघर्ष समिति ने बताया की लेसा में रिस्ट्रक्चरिंग के बाद इस प्रकार 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिसमें 3305 पद संविदा कर्मियों के और 2301 पद नियमित कर्मचारियों के हैं।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली कर्मी उपभोक्ताओं और किसानों के हितों के प्रति जागरूक हैं और इस हेतु सुधार के लिए सदैव तैयार है किंतु कथित सुधार के नाम पर किसी भी स्थिति में बिजली सेक्टर का निजीकरण नहीं होने देंगे। बिजली कर्मियों का संकल्प है कि जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता बिजली कर्मियों का आंदोलन जारी रहेगा।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 334वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में सभी जनपदों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।
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निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों ने किया प्रांतव्यापी विरोध प्रदर्शन: लेसा में निजीकरण हेतु वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर 8000 पद कम किए जाने के विरोध में बिजली कर्मियों ने किया जोरदार विरोध प्रदर्शन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज बिजली कर्मियों ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन किया। बिजली कर्मियों ने कहा कि निजीकरण के हर प्रारूप और हर कोशिश का किया जायेगा पुरजोर विरोध।
राजधानी लखनऊ में लेसा में वर्टिकल प्रणाली लागू कर बिजली कर्मियों के हजारों पदों को समाप्त किए जाने के विरोध में आज बिजली कर्मियों ने दफ्तरों के बाहर आकर जोरदार प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज किया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि लेसा में वर्टिकल प्रणाली लागू कर बिजली कर्मियों के लगभग 8000 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिससे राजधानी की बिजली व्यवस्था लड़खड़ाने की पूरी संभावना है। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि वर्टिकल प्रणाली केवल निजीकरण के लिए लागू की जा रही है और निजी कंपनियों का मार्ग प्रशस्त करने के लिए बिजली कर्मियों के हजारों पद समाप्त किया जा रहे हैं जिससे कर्मचारियों और इंजीनियरों में भारी गुस्सा व्याप्त है। संघर्ष समिति ने कहा कि टीजी 2 के लगभग 1350 पद, जूनियर इंजीनियर्स के 287 पद और अभियंताओं के 45 पद समाप्त किए जाने से लेसा में अफरातफरी का माहौल उत्पन्न हो गया है और त्यौहार के समय हर स्तर के कर्मचारी में लखनऊ से हटाए जाने का भय व्याप्त हो गया है जिसका कार्यप्रणाली पर भारी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के समानांतर पश्चिमांचल और मध्यांचल विद्युत वितरण निगमों के अंतर्गत आने वाले सभी बड़े शहरों में वर्टिकल प्रणाली लागू कर इन शहरों की बिजली व्यवस्था अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के अन्तर्गत देने की तैयारी है। संघर्ष समिति ने कहा कि देश के जिन शहरों में निजी कंपनियां अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के तहत काम कर रही हैं उन शहरों में इसी प्रकार की प्रणाली लागू है जिससे कम कर्मचारियों से अधिक काम लिया जा रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि लेसा में वर्टिकल प्रणाली के नाम पर अत्यधिक अल्प वेतन भोगी लगभग 6000 संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है जिससे बिजली व्यवस्था तो चरमरा जाएगी ही साथ ही इतनी बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों को हटाना अमानवीय कृत्य भी है।
दीपावाली के पर्व के दौरान उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के बाद आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। बिजली कर्मियों ने आज विरोध प्रदर्शन कर संकल्प लिया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में सामूहिक जेल भरो आंदोलन चलाया जाएगा तथा निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।
राजधानी लखनऊ में आज रेजिडेंसी पर विरोध प्रदर्शन किया गया।
आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
राजधानी लखनऊ सहित समस्त जनपदों में सभा के अन्त में वरिष्ठ बिजली मजदूर नेता गिरीश पांडे जी की धर्मपत्नी के निधन पर शोक व्यक्त किया गया और दो मिनट मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
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निजीकरण की प्रक्रिया में बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए निजीकरण का निर्णय निरस्त की मांग: संघर्ष समिति ने उठाए पांच सवाल: राज्य कर्मचारियों के साथ बिजली कर्मियों को भी बोनस दिया जाय
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के मामले में बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से निजीकरण के सारे प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग की है और कहा है कि निजीकरण का निर्णय प्रदेश के व्यापक हित में तत्काल निरस्त किया जाए।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा दीपावाली के पूर्व 15 लाख राज्य कर्मचारियों को बोनस देने की घोषणा का स्वागत करते हुए संघर्ष समिति ने मांग की है कि दीपावली पर रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में लगे बिजली कर्मियों को भी दीपावली के पूर्व बोनस दिया जाय।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण के मामले में प्रारंभ में ही जिस प्रकार अवैध ढंग से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई उससे बड़े घोटाले की आशंका बलवती हो गई थी।
संघर्ष समिति ने आज ऐसे पांच बिंदुओं को सार्वजनिक करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को देखते हुए निजीकरण के सारे मामले की तत्काल सीबीआई जांच कराई जाए और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त की जाय ।
संघर्ष समिति ने कहा कि पहला बिंदु विगत वर्ष नवंबर में लखनऊ में विद्युत वितरण निगमों की डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2024 का आयोजन है जिसमें निजी घरानों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की थी और कार्यक्रम को स्पॉन्सर भी किया था। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की पृष्ठभूमि इसी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में तैयार की गई थी।
इस मीटिंग में देश के इतिहास में पहली बार शीर्ष प्रबंधन द्वारा आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन बनाई गई। उप्र में निजीकरण को अंजाम देने के दृष्टिकोण से उप्र पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल को इसी मीटिंग में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया और उप्र में ग्रेटर नोएडा में काम कर रही निजी कम्पनी एन पी सी एल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी आर कुमार की डिस्कॉम एसोशिएशन का ट्रेजरार बनाया गया।
दूसरा बिन्दु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में हितों के टकराव को शिथिलता देना है। इसके साथ ही झूठा शपथ पत्र देने और अमेरिका में पेनल्टी लगने की बात स्वीकार कर लेने के बाद भी ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन को नहीं हटाया गया और इसी कंसल्टेंट से निजीकरण के डॉक्यूमेंट तैयार कराए गए।
तीसरी बात बिडिंग हेतु तैयार किए गए आर एफ पी डॉक्यूमेंट के लिए ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आधार माना गया जो डॉक्यूमेंट आज तक पब्लिक डोमेन में ही नहीं है। इसके पूर्व सितंबर 2020 में ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी किया गया था जिस पर ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन सहित कई संस्थानों की आपत्ति आई थी। इन आपत्तियों का आज तक निस्तारण नहीं किया गया है और गुपचुप ढंग से उत्तर प्रदेश में निजीकरण के पहले ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 जारी कर दिया गया। ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को न पब्लिक डोमेन में रखा गया है न इस पर किसी की आपत्ती मांग की गई है। उत्तर प्रदेश में निजीकरण करने के लिए यह सब मिली भगत का बड़ा खेल है।
चौथा बिंदु यह है कि निजीकरण के सारे प्रकरण में कॉर्पोरेट घरानों को विश्वास में लेकर पूरी कार्यवाही की जा रहा है। टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा ने कई बार बयान देकर इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट उनसे चर्चा करके बनाया गए हैं। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि उप्र में बिजली के निजीकरण को लेकर कार्पोरेट घरानों के बीच 'कार्टेल' बन गया है जो बहुत गम्भीर बात है।
पांचवा बिंदु यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को कौड़ियों के मोल निजी घरानों को बेचने के लिए इक्विटी को आधार मानकर बेचने की कोशिश की जा रही है। इक्विटी को लॉन्ग टर्म लोन में कन्वर्ट किए जाने के बाद 42 जनपदों की बिजली व्यवस्था मनचाहे कॉर्पोरेट घरानों को कौड़ियों के दाम मिल जाएगी।
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विद्युत कम्पनियों के बढ़ते घाटे व संभावित निजीकरण पर उपभोक्ता परिषद की गहरी चिंता कहां घाटे के लिए केंद्र व राज्य सरकार की कुछ चुनिंदा नीतियां व योजनाएं है जिम्मेदार निजीकरण से जनता का नुकसान होगा और उद्योगपतियों का फायदा।
वित्त मंत्री एवं ऊर्जा मंत्री के साथ हुये समझौते का सम्मान करते हुये निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की मांग : निजीकरण के विरोध में प्रान्त व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी
प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री श्री सुरेश खन्ना और तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा के साथ ठीक पांच वर्ष पूर्व आज के ही दिन हुये लिखित समझौते का उल्लेख करते हुये बिजली कर्मियों ने आज सभी जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर मांग की कि प्रदेश सरकार के शीर्ष मंत्रियों के साथ हुये समझौते का सम्मान करते हुये पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त किया जाय।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि आज की ही तारीख को 06 अक्टूबर, 2020 को वित्त मंत्री एवं पूर्व ऊर्जा मंत्री से वार्ता के बाद विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के साथ लिखित समझौता हुआ था। समझौते के पहले बिन्दु में ही लिखा गया है -"विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही सुधार हेतु कर्मचारियों और अभियंताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्यवाही की जायेगी। कर्मचारियों और अभियंताओं को विश्वास में लिये बिना उत्तर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जायेगा।"
संघर्ष समिति ने कहा कि इतने वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों के साथ किए गये लिखित समझौते का खुला उल्लंघन कर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन द्वारा ऐलान किए जाने का दुष्परिणाम यह है कि प्रदेश के ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मी विगत 314 दिनों से सड़क पर उतरकर आंदोलन करने हेतु विवश हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि कि बिजली कर्मी सदा ही संघर्ष से पहले सुधार को महत्व देते हैं किंतु बड़े अफसोस की बात है कि 06 अक्टूबर 2020 को हुए समझौते के अनुरूप पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने सुधार पर आज तक विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र से कोई वार्ता नहीं की। उल्लेखनीय है कि संघर्ष समिति ने समझौते के एक महीने के अंदर ही पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन को सुधार का प्रस्ताव दे दिया था।
संघर्ष समिति ने कहा कि इतने वरिष्ठ मंत्रियों के साथ हुए समझौते का सम्मान न करने से बिजली कर्मियों में अनावश्यक रूप से अविश्वास का वातावरण बन रहा है जो सरकार और प्रबन्धन दोनों के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
समझौते के ठीक पांच साल पूरा होने पर आज बिजली कर्मियों ने सभी जनपदों में समझौते की प्रतियां लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। बिजली कर्मियों ने नारे लगाये - " समझौते का सम्मान करो, निजीकरण वापस लो।"
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निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख संघर्ष समिति ने नियामक आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर वार्ता हेतु समय देने की मांग की : संघर्ष समिति का पक्ष सुने बिना आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर निर्णय लिया गया तो नियामक आयोग मुख्यालय पर मौन विरोध प्रदर्शन होगा
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार को आज एक पत्र भेजकर मांग की है कि वह पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिये गए आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों पर पावर कॉरपोरेशन का जवाब सुनने के पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश को अपना पक्ष रखने के लिए समय दें।
संघर्ष समिति ने पत्र में चेतावनी दी है कि यदि विद्युत नियामक आयोग से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद भी संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल को समय न दिया तो विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के आह्वान पर सैकड़ों बिजली कर्मी विद्युत नियामक आयोग के मुख्यालय पर मौन प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी नियामक आयोग के अध्यक्ष की होगी।
पत्र में कहा गया है कि समाचार पत्रों के माध्यम से यह विदित हुआ है कि विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष ने माननीय ऊर्जा मंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम केआरएफपी डॉक्यूमेंट पर नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों के संबंध में अलग से चर्चा की है। चर्चा यह भी है कि इस बैठक में यह तय हो गया है कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा आपत्तियों पर दिए जाने वाले जवाब पर विद्युत नियामक आयोग ने अपनी सहमति दे दी है जिसके बाद निजीकरण का रास्ता प्रशस्त हो जाएगा।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि यदि यह सही है तो यह बहुत ही गंभीर बात है कि सरकार, प्रबंधन और विद्युत नियामक आयोग के बीच निजीकरण को लेकर मिलीभगत हो गई है। एक लाख करोड रुपए से अधिक की पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के दाम पूर्व निर्धारित निजी घरानों के हाथ बेचने की साजिश है यह ।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली के क्षेत्र में सबसे बड़े स्टेकहोल्डर बिजली के उपभोक्ता और बिजली के कर्मचारी हैं। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से लगभग 60000 संविदा कर्मियों और साढ़े सोलह हजार नियमित कर्मचारियों की नौकरी समाप्त होने जा रही है। हजारों की संख्या में बिजली कर्मियों की पदावनती होने जा रही है। निजीकरण के दुष्प्रभाव से बिजली कर्मचारियों में भारी चिंता और गुस्सा व्याप्त है।
बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज लगातार 315वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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