DELED कोर्स बेंचने वालों ने न सिर्फ कोर्स बेंचा बल्कि ये सपना भी बेंचा कि इसमें नौकरी पक्की होती है. लाखों युवाओं को DELED का कोर्स बेंच कर करोड़ों कमाने वाले लोग ऐश कर रहे हैं जबकि DELED युवा आत्महत्या कर रहे हैं. सरकार ने प्राइवेट कालेजों को भी खूब मौका दिया लूटने का अब आलम यह है कि कोर्स करने के लिए अभ्यर्थी ही नहीं मिल रहे हैं---◾
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8 साल से छात्रों का भविष्य फाइलों में सड़ रहा है,
डिग्री हाथ में है लेकिन नौकरी हाथ से बाहर।
और शिक्षा मंत्री जी?
₹57,500 की Louis Vuitton शॉल ओढ़कर
विकास का फैशन शो कर रहे हैं।
यह शॉल सिर्फ़ महंगी नहीं है - यह हर बेरोज़गार युवा के सपनों की कीमत है।
प्रधानमंत्री के बाद शायद यही नेता हैं जिनके लिए-
शिक्षा = भाषण
छात्र = आंकड़े
और विकास = ब्रांडेड कपड़े।
जहाँ क्लासरूम ठंडे पड़े हैं, वहाँ नेताओं का लाइफ़स्टाइल गरम है।
👉 सवाल शौक़ का नहीं,
>> सवाल ये है कि जिसने बच्चों का भविष्य रोका,उसे इतना ऐश किसने दिया?
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की राष्ट्रीय शासी निकाय की बैठक में अध्यक्ष, मौलाना महमूद मदनी ने कहा- "देश के मौजूदा हालात बहुत संवेदनशील और चिंताजनक हैं. दुख की बात है कि एक खास समुदाय को जबरदस्ती निशाना बनाया जा रहा है, दूसरे समुदाय कानूनी तौर पर बेबस, सामाजिक रूप से अलग-थलग और आर्थिक रूप से बेइज्जत किए जाते हैं. बुलडोज़र एक्शन, मॉब लिंचिंग, वक्फ संपत्ति पर कब्ज़ा और धार्मिक मदरसों और सुधारों के खिलाफ नेगेटिव कैंपेन चलाए जा रहे हैं, ताकि उनके धर्म, पहचान और वजूद को कमज़ोर किया जा सके...इससे मुसलमान सड़कों पर चलते हुए भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं..."
#MehmoodMadani #MadhyaPradesh #BulldozerAction #ABPNews
6.4% → 7.4% → 7.8% → 8.2%
यह सिर्फ एक टाइम-सीरीज़ डेटा नहीं, बल्कि पिछले चार क्वार्टर में भारत की GDP ग्रोथ की कहानी है।
मोदीनॉमिक्स अपना असर दिखा रही है।
#ModiNomics
Dear Congress and Dhruv Rathee supporters I do not want to disappoint you, I will give you money🔥🚨
I know you all are poor, so be patient, the fruit of patience is sweet
I have already given about 6 crore rupees to people. Now I have 1.5 crore left. Due to too many messages, I am not able to reply to everyone
But wait, you will get the money and a reply, everything
आज मैं क़सम खाता हूँ की मुस्लिम डॉ का नाम सुनते ही उसका विरोध करूँगा की इससे इलाज नहीं कराना हैं .
आज मैं कसम खाता हूँ की मुल्ले से कभी दाढ़ी बाल नहीं बनवाऊँगा .
आज मैं कसम खाता हूँ की कभी किसी मुल्ले से सब्ज़ी, फल कपड़ा आदि नहीं ख़रीदूँगा ..
आज मैं क़सम खाता हूँ किसी मुल्ले की गाड़ी से यात्रा नहीं करूँगा ..
मैं इनका आर्थिक बहिष्कार करता हूँ / मैं मेरा पैसा मेरे देश की बर्बादी के लिए इनको नहीं दूँगा ।
आर्थिक बहिष्कार ।।
ये है यूट्यूब प्रदीप ढाका , जो व्यू बढ़ाने के लिए पेट्रोल पंप पर खुद अपनी गाड़ी में तेल कम डाल रहे हैं बाहर ज्यादा गिरा रहे हैं , अगर कोई जनहानि हो जाए तो?? #viralvideo#PradeepDhaka#Instagram
Air pollution is NOT a Delhi issue
Kejriwal couldn’t solve it, neither can Rekha Gupta because area wise, Delhi is less than 2% of North India.
- Stubble burning is happening in Punjab, Haryana, Uttar Pradesh, Madhya Pradesh
- Coal power plants are operating, violating international standards in all these states
- Industries in all these states, all around Delhi are causing air pollution because Central Govt failed to enforce rules.
- Construction sites are violating norms everywhere.
- Vehicular pollution is coming from cars and old trucks which don’t follow the latest standards.
The only solution is to implement solutions at a central level. The prime minister and the environment minister need to meet with all CMs of these states and take action on all these points.
But what are they doing? Nothing.
They are absolutely silent.
The anger of the people should be directed at Narendra Modi, he is the biggest culprit here.
भारतीय रेल के हर छोटे स्टेशन पर एक खतरनाक और अनदेखी लापरवाही चल रही है।
हर दिन ट्रेनें चलती हैं और उनके साथ अनगिनत अनधिकृत फूड वेंडर भी चढ़ जाते हैं —
किसी के हाथ में बाल्टी में चना-मटर , किसी के पास समोसा-भुजिया ,
कोई ब्रेड-खीरा बेच रहा होता है तो कोई लोकल पानी बोतल।
ये लोग बिना किसी जांच या अनुमति के जनरल से लेकर स्लीपर कोच तक में घुस जाते हैं।
ट्रेन कई बार नॉन-स्टॉप स्टेशनों पर भी स्लो की जाती है ताकि ये वेंडर चढ़-उतर सकें।
किसी को कुछ नहीं पता कि ये खाना कहाँ बना, पानी कहाँ से भरा गया।
कोई FSSAI लाइसेंस नहीं, कोई सफाई मानक नहीं।
नतीजा —>>
यात्रियों का पेट खराब होना, फूड पॉइजनिंग, नकली पानी से बीमार पड़ना,
यहाँ तक कि चोरी और झगड़े की घटनाएँ भी इन्हीं से जुड़ी होती हैं।
TTE और रेलवे स्टाफ सब देखते हैं लेकिन कोई रोकता नहीं, क्योंकि सबकी नजर धंधे पर है।
रेलवे मंत्रालय और IRCTC यात्रियों की सुविधा का ढोल पीटते हैं ,
लेकिन असल में यात्रियों के स्वास्थ्य की परवाह किसी को नहीं।
रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में फूड सेफ्टी ऑडिट होना चाहिए ,
हर वेंडर को FSSAI सर्टिफिकेट दिखाना अनिवार्य हो ,
और बिना आईडी वाले किसी को ट्रेन में प्रवेश न मिले।
साफ-सुथरा, प्रमाणित खाना और सुरक्षित पानी हर यात्री का हक है।
ट्रेनें चलें , लेकिन यात्रियों की सेहत के साथ खिलवाड़ नहीं।