व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं की सीमा जानता है और संतोष का मूल्य समझता है, वही भीतर से सबसे अधिक समृद्ध होता है। इसके विपरीत, जो व्यक्ति हर समय “और” की दौड़ में लगा रहता है, वह उपलब्धियों के बाद भी संतुष्ट नहीं हो पाता। इच्छाओं की कोई अंतिम सीमा नहीं होती ।
आज की सबसे बड़ी सीख यही है कि किसी भी महाशक्ति की वास्तविक ताकत केवल उसकी सैन्य क्षमता में नहीं, बल्कि उसकी आर्थिक स्थिरता, लोकतांत्रिक संस्थाओं, न्याय व्यवस्था, कूटनीतिक विश्वसनीयता और जनता के विश्वास में निहित होती है।
सुपर कंप्यूटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और आधुनिक तकनीक अभूतपूर्व गति से विकसित हो रही हैं, लेकिन मानव मस्तिष्क की संपूर्ण क्षमता आज भी एक रहस्य बनी हुई है। शायद ज्ञान की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि प्रत्येक उत्तर के साथ नए प्रश्न जन्म लेते हैं।
लोकतंत्र परिभाषा पर सबसे बड़ा अभिशाप शोषक और शोषित की गैर-बराबरी वाली व्यवस्था है। जब सत्ता,संसाधन निर्णय लेने की शक्ति सीमित वर्ग के हाथों में सिमट जाती है तब लोकतंत्र का वास्तविक उद्देश्य कमजोर पड़ जाता है।ऐसी स्थिति में समान अवसर,न्याय और जनभागीदारी केवल सिद्धांत बनकर रह जाते
Each individual should engage in introspection, identify their negative tendencies, and strive to control them. Only by embracing positive thinking, ethical values, and human virtues can one make their life balanced and meaningful.
@ajitanjum इन चारों के रात-दिन खुलासे हो रहे हैं । सरकार के कान पर जूं ना रैगंना का मतलब है कि स्वयं सरकार
चोरों को संरक्षण दे रही है। अपराधिकरण को संरक्षण दे रही है ।
भारत की शिक्षा नीति में बौद्धिक स्वतंत्र निर्णायक सोच को विकसित न होने देने में पिछली सरकारों ने अपने निजी स्वार्थ को पोषित/ विकसित नहीं होने दिया । मगर अमेरिका की जनता द्वारा नकारात्मक सोच के व्यक्ति डोनाल्ड ट्रम्प का देश का राष्ट्रपति चुनना अमेरिका की शिक्षा की पोल खोलता है ।
@nidhiambedkar हां मैं भी Thanks कहना चाहता हूं। क्योंकि लगभग 65 सालो में भी बहुजनों को कांग्रेस सरकार ने गुलामों को गुलाम का अहसास तो जरूर करवाया मगर इतना नहीं करवा कि वह अपनी गुलामी की ज़ंजीरों को तोड़ने के लिए इतना उत्सुक हो जाएं। आज़ 40 फीसदी बहुजन बाबा साहेब के बनाएं संविधान की चर्चा करने