@DFS_India
बारह साल, बारह सवाल
1. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर बेचे क्यों जा रहे हैं?
2. बैंक मजबूत हुए हैं तो ग़रीब जनता के खाते से पैसे क्यों काटे जा रहे हैं?
3. बैंक मजबूत हुए हैं तो बार-बार केवाईसी के नाम पर जनता के पैसे देने से इंकार क्यों किया जा रहा है?
4. बैंक मजबूत हुए हैं तो उन लोगों को पकड़कर देश में लाकर सज़ा क्यों नहीं दी जा रही है, जो बैंको से खरबों का लोन लेकर भाग गये हैं?
5. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर ग्रामीण इलाकों में ब्रांच और ATM बंद करके जनता को कैश के लिए क्यों भटकाया जा रहा है?
6. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर किसानों, छात्रों और छोटे दुकानदारों को बिना बिचौलिये और बिना गारंटर के लोन क्यों नहीं मिल रहा है?
7. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर साइबर ठगी का शिकार हुए गरीब आदमी का पैसा तुरंत वापस क्यों नहीं होता, उसे थाने और बैंक के चक्कर क्यों कटवाए जाते हैं?
8. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर होम लोन और शिक्षा लोन पर ब्याज इतना ज़्यादा क्यों है कि आम आदमी की कमर टूट रही है?
9. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर डिजिटल ट्रांजेक्शन फेल होने पर जनता का पैसा कई-कई दिन तक होल्ड पर क्यों रखा जा रहा है?
10. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर CIBIL स्कोर में छोटी सी चूक पर नौजवानों को डिफॉल्टर बताकर उनका भविष्य क्यों खराब किया जा रहा है?
11. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर बुजुर्गों और अनपढ़ लोगों को UPI और ऑनलाइन फ्रॉड से बचाने के लिए हर ब्रांच में सहायता काउंटर क्यों नहीं है?
12. बैंक मजबूत हुए हैं तो बैंक कर्मियों की जायज़ माँगे क्यों नहीं मानी जा रही हैं और बैंकों में नई भर्ती क्यों नहीं हो रही और मौजूदा कर्मचारियों पर इतना दबाव क्यों है कि ग्राहक सेवा ही चौपट हो रही है?
पत्रकार "रवि राज", IPS प्रशांत चौधरी से पूछता है कि
"पत्रकारों पर लाठी क्यों चल रही है?!"
IPS प्रशांत चौधरी उसको पकड़ लेते हैं।
होनहार पत्रकार "रवि राज" कहता रहता है कि
"मेरे पास PRESS की ID है"
लेकिन IPS प्रशांत चौधरी उसे दुबला पतला समझकर बस में ले जाकर पटक दिए जिसके वजह से रवि के कमर में काफी चोट आई है।
अजमेर के किशनगढ़ में सड़क पर गाड़ी खड़ी करने पर ट्रैफिक सीओ अंजू यादव और वकील बाबूलाल बागरिया के बीच हुए विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर हुआ वायरल. जिसमे ट्रैफिक सीओ वकील को मारा थप्पड मारते दिखाई दे रही है.
मैडम का नाम अंजू यादव।
मैडम एक पुलिस अधिकारी है।
मैडम अजमेर में कही सर्किल ऑफिसर है।
एक व्यक्ति ने गाड़ी सड़क पर खड़ी कर दी तो मैडम ने उसके मुंह पर तमाचा जड़ दिया ,
मैडम ने नियम मनवाने के लिए कौन सा नियम तोड़ा है जो बताएगा उसको एक लॉलीपॉप गिफ्ट करुँगा।
#Ajmer : Kishangarh : महिला पुलिस अधिकारी ने मारा वकील को थप्पड़
अजमेर जिले के किशनगढ़ में सड़क पर गाड़ी खड़ी करने पर ट्रैफिक सीओ अंजू यादव और वकील बाबूलाल बागरिया के बीच विवाद। इस दौरान ट्रैफिक सीओ ने वकील को मारा थप्पड़। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है जिसमें महिला अधिकारी वकील को थप्पड़ मारते हुए साफ़-साफ़ नजर आ रही हैं।
#Rajasthan #viralvideo #BharatRaftarTV
Aaj Sunday tha
Inhe ghar rehna tha
Lekin inhe bahar nikalna pada. Why?
DFS and Banks ki ego thi
Sunday branches open karni hi karni hai
Aur do parivaar ujad gaye.
Shame on you @UnionBankTweets
बैंक कर्मचारी भी किसी के बेटे-बेटी हैं, किसी के पति-पत्नी हैं, किसी के माता-पिता हैं।
वे काम से भागना नहीं चाहते।
वे बस इतना चाहते हैं कि नौकरी करते-करते उनकी जिंदगी खत्म न हो जाए।
लगातार बढ़ता काम , स्टाफ की कमी , टारगेट का दबाव, लंबे working hours और ट्रांसफर का तनाव इन सबका असर सिर्फ कर्मचारी पर नहीं, उसके पूरे परिवार पर पड़ता है।
इसलिए बैंक कर्मचारियों की मांगें बिल्कुल साफ हैं 👇
• 8 घंटे की शिफ्ट और तय working hours लागू हों।
• ऑफिस के बाद अनावश्यक कॉल, WhatsApp और काम का दबाव बंद हो।
• स्टाफ की पर्याप्त भर्ती हो, ताकि मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
• टारगेट तय करते समय मानवीय और व्यावहारिक मानक अपनाए जाएं।
• टारगेट पूरा न होने पर अपमान, धमकी या अनावश्यक मानसिक दबाव की व्यवस्था खत्म हो।
• ट्रांसफर नीति पारदर्शी हो और परिवार/स्वास्थ्य जैसी परिस्थितियों का ध्यान रखा जाए।
• कर्मचारियों को उनकी छुट्टियां और साप्ताहिक अवकाश वास्तव में मिलें।
• मेंटल हेल्थ काउंसलिंग और confidential support system हर बैंक में उपलब्ध हो।
• लगातार ओवरटाइम को सामान्य व्यवस्था बनाने के बजाय उसका उचित रिकॉर्ड और नियमन हो।
• कर्मचारियों की शिकायतों के लिए स्वतंत्र grievance mechanism हो, जहां बिना डर शिकायत की जा सके।
और समाज से भी एक छोटी-सी अपील है कि
बैंक कर्मचारी सिर्फ आपकी पासबुक , लोन, कैश या UPI की समस्या हल करने वाला व्यक्ति नहीं है।
वह भी एक इंसान है।
उसे भी थकान होती है।
उसे भी तनाव होता है।
उसे भी अपने परिवार के साथ समय बिताना है।
इसलिए अगली बार किसी बैंक कर्मचारी को चाय पीते या लंच करते देखकर मज़ाक बनाने से पहले एक बार सोचिए ....
हो सकता है उस 15 मिनट के ब्रेक के पीछे 10 घंटे की थकान छिपी हो।
बैंक कर्मचारियों को सहानुभूति नहीं,
सम्मानजनक काम का माहौल और लागू होने वाली ठोस व्यवस्था चाहिए। 🙏
इंश्योरेंस पॉलिसी बेचने से लेकर सरकारी योजनाएं ग्राहक को टिकाने तक,
आज की डेट में बैंक कर्मचारियों पर इतना काम लादा हुआ है कि उनपर हुए सर्वे में ज्यादातर “हाई स्ट्रेस” में होने की बात बता रहे हैं।
जिन्हें काम देने में दो मिनट नहीं लगता उन्हें दो छुट्टी देने में धरती फट जा रही है
देश के बड़े बड़े स्टैंडअप कॉमेडियनों से लेकर व्हाट्सएप मैसेजेस और फेसबुक पोस्टों पर बैंक कर्मियों की कार्यशैली का खूब मजाक बना ,लोगों ने ठहाके लगाए,
लेकिन आज जब वहीं बैंक कर्मी जब काम के बोझ के तले दबकर डिप्रेशन का शिकार हो रहा और सुसाइड कर रहा तो लोगों ने मुंह में फेवी क्विक डाल रखी है।
Thank you @News18India for presenting the bankers’ voice with a positive & balanced perspective, justifying our demand & our position.
We have waited for more than 1k days and are still waiting.
Strike is not our choice-it is our compulsion.
#5DaysWeekandFairPLI@nilesh_pawar15
बैंक मुनाफे में चल रहे हैं लेकिन बैंक कर्मचारियों को 2दिन की छुट्टी देने में इनको मौत आने लगती है।
जबकि आप ख़ुद देखिए बैंक कर्मचारियों पर काम का कितना प्रेशर है।
अब वो हड़ताल नहीं करें तो क्या करें
Don’t mistake our commitment to public service for weakness.
During COVID, when many stayed home, bankers stood at the counters, handled cash, processed salaries, pensions, loans and essential banking services—putting ourselves and our families at risk.
We stood with the public then.
We stand with them now.
Respect bankers. Respect dialogue. Respect democracy.
We won’t be bullied. We won’t be silenced. We will stand together.
#Bankers #BankingSector #PublicSectorBanks #UnitedWeStand
@rupamsmail@Vitthalraj_mane@nsitharaman
सुनो @RailwaySeva और @RailMinIndia ये बताओ इस RPF वाले को गरीब आदमी को मारने के परमिशन किसने दी ?
ये भी बताओ कि कौन सी ट्रेन का मामला है और क्या कार्यवाही हुई इस खाकी वाले गुंडे पर??
बंदरबाँट में लगी भाजपा सरकार को बंदरों की समस्या से क्या लेना-देना।
बंदरों के कारण यदि देश के सबसे बड़े पर्यटन स्थल पर विदेशियों ने आना छोड़ दिया तो उप्र की 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी कैसे बनेगी?
भाजपा सरकार न तो बाहर के बंदरों को संभाल पा रही है, न… बाक़ी जनता समझदार है।
#Monkey_Menace_Tajmahal