बाहर की हर दौड़ को छोड़ें , मन को भीतर मोड़ चलें,
साँसों के इस पावन रथ से, जग का नाता तोड़ चलें।
इंद्री-बोध समेट हृदय में, ध्यान-दीप वो जल जाए,
परम शून्य की महा-समाधि, सत्य-रूप से जोड़ चलें॥
#मुँहजोर
थकी आँखें, मगर बच्चों के सब ख़्वाबों को बुनता है,
वो अपनी प्यास पीकर घर की हर इक प्यास सुनता है।
पुराने जूतों में अपने, वो मीलों तक चला होगा,
तभी तो आज बच्चों को सफ़र आराम लगता है।
कभी रोया नहीं खुलकर, कभी बोला नहीं दुख को,
वो हँसते-हँसते दुनिया के, सभी तूफ़ान सहता है।
#मुँहजोर
@jpsin1 यहाँ कुछ और कहते हैं, वहाँ कुछ और करते हैं,
बदलते रंग पल-पल में, न वो जनता से डरते हैं।
ज़बाँ पर एक सूबे में है 'मर्ज़ी आम जनता की',
मगर दूजे में लाठी के भरोसे राज करते हैं।
#मुँहजोर
@Monaguha2 ये करम है आपका जो हर ग़ज़ल को ज़िंदगी बख़्शी,
वरना लफ़्ज़ों में कहाँ ताक़त कि दिल के पार कर जाएँ।
आपके दम से सजी रहती है महफ़िल वरना ऐ साहिब,
अब कहाँ अपनी बिसात इतनी जो शब गुलज़ार कर जाएँ।
#मुँहजोर
इस नाचीज़ की ग़ज़लों को इस क़दर नवाज़ने के लिए आपका तह-ए-दिल से शुक्रिया।
था कभी जो इस ज़मीं का, आज वो मेहमान है,
#कोहिनूर अपनी कहानी, से बहुत हैरान है।
ख़ाक से निकला था लेकिन, ताज़ की ज़ीनत बना,
उसकी क़िस्मत में लिखा, क्यूँ आज ये ज़िन्दान है।
लौट कर आएगा अपनी, सरज़मीं पर एक दिन,
आस में #मुँहजोर बैठा, साथ हिन्दुस्तान है।
@Selvakumar_IN Sometimes he walks barefoot, or rides the public bus,
A staged and simple masquerade, to gain the win from us.
With millions hidden in his vault, watch how the chameleon shifts,
He wears the rags of poverty to steal through social rifts.
#Munhjor
@ArvindKejriwal अदालत हो या शासन हो, इसे बस शुबहा रहता है,
वतन की हर व्यवस्था पर, इसे बस शिकवा रहता है।
यही तो सोचकर सारा, जगत हैरान है इससे,
कि शंका हीन सदमे में, ख़फ़ा सुबह से रहता है॥
हमारे सारे दिन माता पिता के हैं, किन्तु रीति बन गई है, कि विशेष दिवस तय हो, तो मेरी भी कोशिश।
अँधेरी रात में घर का, उजाला माँ ही होती है,
थपेड़े वक्त के जब हों, सफ़ीना माँ ही होती है।
जहाँ इंसानियत गुम हो, जहाँ #मुँहजोर नफ़रत हो,
वहाँ पर प्यार का पावन, सलीका #माँ ही होती है।
@JethmalaniM Slandering the bench! He has no shame.
With hollow logic, he plays the victim game.
A culprit doubting the judge's intent.
A blatant display of a double-standard frame.
#Munhjor
@ArvindKejriwal अरे! चीटिंग!
जब सत्ता में थे तो गाँधी की तस्वीर अपने दफ्तरों से हटा दी थी।
आज माथा टेकने आ गए।
सत्याग्रह की राह में अपनी वर्तमान नौटंकी पर अपने ही वचन सुन लें।
https://t.co/NblwKas2AH
2015 का वीडियो है जिसमें केजरीवाल लंबी लंबी फेंक रहा है। बताओ इस हिसाब से उसे जाँच में सहयोग करना चाहिए या ED से भागते रहना चाहिए?
https://t.co/h36LrIiV5T
@msisodia संविधान से ऊपर हैं, बतलाते हैं
कचहरी को अपनी राह नचाते हैं
आरोपी कर सत्याग्रह की नौटंकी
न्याय की कुर्सी पर कीचड़ फैलाते हैं
जज पर लांछन! शर्म नहीं निर्लज्जों को
झूठे तर्क से विक्टिम खुद बन जाते हो
मुजरिम जज की नीयत पर करता है शक
मापदंड भी दोहरा खूब दिखाते हो
#मुँहजोर
@awesh29 इसका अनुमान लगाना अत्यंत कठिन है कि अब्दुल घनी खान चौधरी के समय से चली आ रही घुसपैठ कहाँ तक घर कर चुकी है।
यदि और पीछे चलें तो बंगाल का पहला विभाजन (1905 फिर रद्द) और दूसरा (1947) धर्म के आधार पर हुआ था तो उसके बाद पश्चिम बंगाल में धार्मिक औसत अप्रत्याशित रूप से कैसे बदल गया!
@GaonPrahari बेहद रोचक जानकारी। कृपया करके यह ज्ञान और बाँच दीजिए कि कलकत्ता में केवल पुलिसकर्मियों के लिए वो कैसी उमस है जो घुटने से ज़मीन तक दक्षिण ध्रुव जैसी ठंड में बदल जाती है, कि घुटने तक चमड़े के बूट पहनने पड़ते हैं।
प्रैक्टिकली दिलचस्प!
@DrNimoYadav He who fears reality, hunts for a clever lie,
To mask his own defeat beneath a hollow, empty sky.
The one who chants, "If I don't win, I shall not play at all,"
Is but a gambler quitting the game, as his stakes pass him by.
#Munhjor