@Control_Krishna@Highonchoorma कला के दुश्मन हर दौर में रहे हैं…किसी ने खीर खाकर और किसी ने चूरमा खाकर- अभिव्यक्तियों पर अंकुश लगाया है। विजेता नृत्य कला को नए सोपान पर ले जा रहा है। ऐसे नृत्यकलाप्रेमी का विरोध जायज नहीं है और मैं निश्चिंत हूँ- खाप इन बातों को समझती थी!
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@mukesh1275 सब दिखा दिया...हनुमान को छिपाकर रख लिया...कुछ ख़ास रचा होगा शायद!
तुलना भी तिवारी जी के हनुमान की ही ज्यादा होगी...रामानंद सागर के हनुमान से...संभव है यही वजह हो!
कोई गालियों को कैसे जस्टिफाई कर सकता है...चाहे पुरुष दे या महिला! गाली देना असभ्य तो है ही न! आधुनिक दिखने का ये कैसा पागलपन कि आप गालियों के ही बचाव में उतर आएं...हालाँकि आलोचना करते हुए भी एक दायरा होना चाहिए, जिसको कब का लांघा जा चुका है!
@Ashok_Kashmir सबने जश्न मनाया जंतर-मंतर पर और जश्न में शामिल नहीं किया गया, जुनैद जैसे लोग जिक्र से गायब रहे…मुझे लगता है भाईसाहब कि ये दो अलग बातें/सवाल है!
और मेरा तो सवाल अभी भी पार्टी करने पर नहीं है, मेरा सवाल नींव के पत्थरों को भुला देने पर हैं और कंगूरों की शोभा पर इतराने से है!
धर्मेन्द्र जी का इस्तीफा हो गया...अब CJP वालों को पंजाब का रुख करना चाहिए, वहां भी शिक्षा व्यवस्था में बर्बादी के खिलाफ आवाज़ उठाने पर बहुत लाठियां चलाई गई है!
क्योंकि CJP वालों का कहना था कि अभी लड़ाई प्रधान के खिलाफ है, अब वो इस्तीफा हो गया...अगली लड़ाई भी तो जरूरी है!
जंतर-मंतर पर गोदी मीडिया शब्दावली की आड़ में ग्राउंड रिपोर्टर्स के साथ जो हो रहा है, बेहद शर्मनाक है! आखिर वो सिर्फ अपनी नौकरी कर रहे हैं...मगर, जब चिलगोजे टाइप के नेतृत्व के जरिए ऐसे आन्दोलन किए जाते हैं, तो वो एक क्षमता के बाद दिशाहीन होने लगते हैं! 3D+रांका जैसे लोगों को इसकी जवाबदेही तो लेनी होगी- आज नहीं तो कल!
दास-दिपके-दहिया-रांका ने देश को जगा दिया, सवाल करना सिखा दिया...ये नए गाँधी हैं, भगत सिंह हैं...नहीं नहीं उनसे भी बड़े हैं...अब कल को ये न कह दें कि आजादी १९४७ या २०१४ में नहीं २०२६ में हमने दिलाई है और भाई सरकार के पास तुम गए, झूठ तुमने बोला (मोबाइल वाला)...इस देश के युवाओं के कौशल और बुद्धि का यूँ अपमान मत करो!