राघव चड्डा राज्यसभा सांसद होकर भी मिलने वाले सुविधाओं का विरोध कर रहे है, कि ₹9,000 रुपए महीना एक विधायक को फोन का खर्च मिलता है, जबकि ₹350 रुपए महीने का अनलिमिटेड रिचार्ज हो जाता है, तो ₹8,650 रुपए अधिक क्यों मिलता है? रिचार्ज करने का यह पैसा कम होना चाहिए, आपको क्या लगता, यह बंद होना चाहिए या नहीं
इस विषय पर मेरा विश्लेषण यह है कि यह अतिरिक्त भत्ता निश्चित रूप से बंद या तर्कसंगत (Rationalize) होना चाहिए। इसके पीछे निम्नलिखित ठोस कारण हैं:
तकनीकी बदलाव और वास्तविक खर्चः एक समय था जब एसटीडी (STD), रोमिंग और लैंडलाइन कॉल्स बहुत महंगी होती थीं, तब शायद एक बड़ा टेलीफोन भत्ता जायज था। लेकिन आज के डिजिटल युग में, जब मात्र ₹350 से रसमटीने भर की अनलिमिटेड कॉलिंग और पर्याप्त
मिलने वाले सुविधाओं ...
करदाताओं (Taxpayers) के पैसे की बर्बादी: एक विधायक को हर महीने दिए जा रहे अतिरिक्त ₹8,650 रुपए सुनने में भले ही छोटे लगें, लेकिन जब इसे देश भर के सभी विधायकों और सांसदों की संख्या से गुणा किया जाता है, तो यह रकम करोड़ों-अरबों में पहुँच जाती है। यह सीधे तौर पर जनता के पैसे की बर्बादी है।
संसाधनों का सही आवंटनः भत्तों में कटौती करके बचाए गए इन करोड़ों रुपयों का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने या युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने में किया जा सकता है।
नैतिक जिम्मेदारी (Moral Responsibility):
जनप्रतिनिधियों (Public Representatives) का काम समाज के लिए काम करना है। अगर वे खुद आगे आकर ऐसे अनावश्यक भत्तों का त्याग करते हैं या उन्हें कम करने की वकालत करते हैं, तो इससे राजनीति में पारदर्शिता आती है और जनता का व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होता है।
निष्कर्षः भत्ते पूरी तरह बंद भले ही न हों, लेकिन उन्हें आज के बाजार मूल्य (Market Rate) के हिसाब से तय किया जाना चाहिए। जनप्रतिनिधि को केवल उतना ही भत्ता मिलना चाहिए जितना वास्तव में खर्च होता है।
अगर “रुचि तिवारी” की जगह मुस्लिम लड़की होती तो देश में अब तक आग लग चुकी होती
अगर दलित हिंदू समाज की लड़की होती तो अब तक भारत बंद हो चुका होता
और ट्राइबल हिंदू लड़की होती तो राष्ट्रपति महोदया स्वयं मोर्चा संभालने लगते
अगर BC होती तो प्रधान जी नया क़ानून ही ले आते
मगर अभागी स्वर्ण समाज की महिला है इसलिए लोग मौन है…!!
आत्मा मर चुकी है
कुछ की आत्मा कुर्सी के लिए मर चुकी है
कुछ की आत्मा सत्ता में बने रहने के लिए मर चुकी है
कुछ की आत्मा भविष्य में स्वयं को बड़े राजनेता के रूप में स्थापित करने के स्वप्न तले मर चुकी है
कुछ की आत्मा पद, प्रतिष्ठा एवं पॉवर पाने के चक्कर में मर चुकी है
कुछ की आर्थिक मोह एवं लोभ के चक्कर में मर चुकी है
कुछ की निजी फ़्यादे-नुक़सान की चिंता करने में मर चुकी है
और अब यह सब मरे हुए लोग मिलकर जो थोड़ी बहुत जीवित बची हुई आस है (हिंदू एकता,हिंदू स्वराज) उसे मारने में लगे है।
आज की घटना ने अंदर तक झकझोर दिया।
किसी लड़की को उसकी जाति के नाम पर घेरना, डराना, अपमानित करना — यह विरोध नहीं, सीधा अन्याय है।
विचारों से असहमति हो सकती है, लेकिन किसी की गरिमा पर हमला कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता।
आज अगर हम चुप रहे, तो कल किसी और के साथ यही होगा।
देश को बहस चाहिए, हिंसा नहीं।
न्याय चाहिए, भीड़तंत्र नहीं।
हम हर उस आवाज़ के साथ खड़े हैं जो सम्मान और सुरक्षा की मांग करती है.
#Justice_For_रूचि_तिवारी
दीदी ने सुबह सुबह बॉलीवुड को पेल दिया🚨
शाहरुख़ सलमान आमिर को एक साथ
एक सांस में. जो रगड़ा है सुनके आपके मुँह से
बस इतना ही निकलेगा
वाह्.... वाह्ह्हह्ह्ह्ह... वाह 🔥
India sent #IndianArmy doctors, nurses and relief material to Turkey when it was hit by an earthquake.
Turkey returned the favour by backstabbing India, issuing statements in support of Pak & helping it in the
#IndiaPakistanWar
Once this situation is over and we are done with Pakistan, we should isolate, boycott and expose Turkey.