#हो गया है शंखनाद, अब तांडव हमे मचाना हैं,
जात पात में नहीं बटना,
हमें हिन्दूराष्ट्र 🇮🇳 बनना है .💪
हर घर भगवा छाऐगा,🚩
ओवैसी भी जय श्रीराम गाऐगा,
🚩🙏 #मनुस्मृति_सर्वश्रेष्ठ_है 🙏🚩
भाजपा का संकल्प, हर वर्ग का कल्याण,
युवाओं की शक्ति से पूरा होगा हर काम महान।
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अजीत भारती हों, जे साईं दीपक हों, आनंद रंगनाथन हों, इन लोगों ने मोदी को सिंहासन पर नहीं बैठाया। मोदी ने कई दशकों तक ख़ुद को तपाया तब जाकर मुख्यमंत्री बनें। मुख्यमंत्री बनते ही एक बहुत बड़ा भूकंप और एक बहुत बड़े दंगे का सामना किया।
उसके बाद केंद्र सरकार बदल गई, पूरे एक दशक तक कांग्रेस ने प्रयास किया कि मोदी का आर्थिक चारित्रिक हनन किया जाय। मोदी को जेल में भेज दिया जाय। पूरी मीडिया लगाई गई कि मोदी को हत्यारा, आतंकी, दंगाई घोषित किया जाय, लेकिन मोदी ने बिना किसी शिकायत के अपना काम जारी रखा। लगातार चुनाव जीतते रहे। देश को एक आशा देते रहे कि हिंदुओं के लिए अभी एक नेता है।
एक समय ऐसा भी इस देश ने देखा है जब नक्सलियों को सलाहकार परिषद के नाम पर कैबिनेट और सरकार के ऊपर बैठा दिया गया। आतंकियों के लिए कांग्रेस की सबसे बड़ी नेता आंसू बहाती थी। आतंकियों के घर पर करोड़ रुपये लेकर कांग्रेस के नेता पहुँच जाते थे। आतंकी का 24 घंटे चैनल चलता था। लोगों को लाइव टीवी पर मुसलमान बनाया जाता था। आतंकी हमलों से रोज़ ट्रेन, बस, चौराहे लाल होते रहते थे। सैनिकों की गर्दन काट दी जाती थी। आतंकियों को छोड़ने के लिए हिन्दुओं को आतंकवादी घोषित किया जाता था। हिंदू आतंकवाद शब्द को फैलाया जाता था। एक आतंकी के नाम पर महाराष्ट्र में एंबुलेंस सेवा चलाई जाती थी। बिहार में नेता लोग चुनाव प्रचार में ओसामा बिन लादेन का हमशकल लेकर घूमते थे। राम मंदिर के स्थान पर शौचालय बनाने की बातें होती थीं। पाकिस्तान जब मन करे फायरिंग कर देता था। प्रधानमंत्री को पाकिस्तानी पीएम देहाती औरत कह देता था। दंगों में केवल हिंदू दोषी होंगे ऐसा बिल लाया जाता था। ऐसे ही न जाने कितनी अपमानजनक घटनाएँ रोज़ घटती रहती थीं। जो हिंदुओं के लिए रोज़ ज़हर का घूँट पीने के बराबर था।
ऐसे में मोदी जी ने देश को नेतृत्व दिया। आर्थिक विकास किया, स्वच्छता ले आये, सामाजिक बदलाव किया। नक्सलियों का सफ़ाया किया, पाकिस्तान को औक़ात दिखाया, रेडिकल इस्लाम को इस्लामिक आतंकवाद को नियंत्रित किया। कश्मीर का भारत में पूर्ण रूप से एकीकरण किया। राम मंदिर समेत न जाने कितने मंदिरों की दशा दिशा बदली। लोगों के भीतर आत्मविश्वास आया। स्वरोज़गार की दिशा दिखाई। लोगों तक स्वास्थ्य बीमा, खाद्य सुरक्षा, स्वच्छ जल, साफ़ ईंधन पहुँचाया। देश का वह हिस्सा जहां तक कभी विकास की धारा नहीं पहुँची थी, उसे वहाँ तक पहुँचाया।
उन्होंने सिद्ध किया कि राष्ट्रीय विचार के ही लोग इस देश में तीव्र सुधार ला सकते हैं। जिस कारण इस विचार को समाज में, युवाओं में सुनने जानने समझने की ललक जागी।
फिर इस मार्केट में वह तमाम लोग अचानक आये जो कल तक हिंदुत्व के विरोध में, राष्ट्रवाद के विरोध में थे, मंदिर के विरोध में थे, और ख़ुद को स्थापित किया। अच्छी बात है। लेकिन आज ये लोग ख़ुद बेशर्मी से दिन रात लगातार यदि मोदी जी को, भाजपा को, संघ को कोसना शुरू करेंगे तो यह क़तई स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जब दुर्दिन थे, तब आप विरोध में खड़े थे और जब इन लोगों ने मेहनत करके समय बदल दिया तो लाभ में हिस्सा बटाने आ गये। आज दस बीस सीट क्या कम हुई कि फिर से नकारात्मक माहौल बनाने लगे। यह अवसरवादी बर्ताव बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
जब ज़रूरत है कि समाज को और मज़बूती से एक किया जाय, नेतृत्व के प्रति विश्वास पैदा किया जाय, तब ये लोग उसी भगदड़ में शामिल होते दिख रहे हैं जिसको राहुल गांधी एंड गैंग फैलाना चाहता है।
यह अक्षम्य है। न इसे भूला जाएगा, न क्षमा किया जाएगा।