आख़िरकार हौसले की जीत हुई! सलाम है बहन कुलसुम बानो को। 🫡
जब सिर्फ़ बुर्क़े और दुपट्टे की वजह से NEET परीक्षा केंद्र पर उन्हें रोकने की कोशिश की गई, तब उन्होंने चुपचाप लौटने के बजाय अपने अधिकार और सम्मान के लिए आवाज़ उठाई। न डरीं, न झुकीं, न पीछे हटीं।
पूरी जांच और नियमों के पालन के बाद उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति मिली। यह उन लोगों के लिए भी जवाब है जो हर बार मुस्लिम पहचान को शक की नज़र से देखते हैं।
कुलसुम बानो की जीत सिर्फ़ एक छात्रा की जीत नहीं, बल्कि अपने हक़, अपनी पहचान और अपने आत्मसम्मान के लिए डटकर खड़े होने की जीत है।
सलाम है इस हौसले को। 🫡🔥
RT रुकने नहीं चहिये इससे दूसरी बेटी को himmat milegi
Bihar has emerged as a leading example in rural sanitation. Sustaining these achievements & ensuring long-term impact is the next big challenge. Mission Director @SBMGramin/#LSBA Mr. Himanshu Sharma shares his vision for a cleaner, healthier & more sustainable Bihar.
#SwachhBihar
दुनिया मुसलसल युद्ध की विभीषिका से जूझ रही है, इंसानों के बीच नफ़रतें उरूज पर हैं और घृणाओं का कारोबार फुल स्विंग में है. ऐसे तकलीफ़देह दौर में इम्तियाज़ अली कुछ लेकर आए हैं. बहुत अरसे बाद सिनेमाघर की सीट पर बैठकर रोया गया. बहुत अरसे बाद कुछ ऐसा देखा, जिसके बाद रिव्यू करने का मन नहीं कर रहा. लग रहा है कि ऐसा कुछ लिखा ही नहीं जा सकता, जो इम्तियाज़ के इस तोहफ़े के साथ न्याय कर सके. ये सूचनार्थ लिखा हुआ भी महज़ इसलिए है कि आप मिस न कर जाएँ इस - क्लियरली - मूवी ऑफ दी ईयर को. ‘प्रेम ही इकलौता सार्वभौमिक इमोशन है’ इस बात में भरोसा मज़बूत कराने वाली इस फ़िल्म को फ़र्ज़ कीजिए ख़ुद पर.
मैं अंडमान और निकोबार के विनाश के खिलाफ़ पूरी शक्ति के साथ खड़ा हूँ।
अंडमान और निकोबार भारत की सबसे अनमोल प्राकृतिक धरोहर हैं। वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए उनकी रक्षा करना मेरा कर्तव्य है।
मेरे साथ जुड़िए - याचिका पर हस्ताक्षर कीजिए और इस अमूल्य संपत्ति को बचाने की लड़ाई का हिस्सा बनिए।
#GreenOverGreed
How Does Iran Treat Its Minorities?
Around 30,000 Jews live in Iran.
More than 350,000 Christians also live there.
Why is there a train station named after Mother Mary in the Islamic Republic of Iran?
Our Ground Report.
तमिलनाडु के नवेले मुख्यमंत्री विजय और संभावित विपक्षी नेता उदयनिधि की पुरानी तस्वीरें चर्चा में हैं. दोनों सिनेमा में हैं और पॉलिटिक्स में भी.
इन तस्वीरों को देखकर एम करुणानिधि और एमजी रामचंद्रन तथा चंद्रबाबू नायडू और राजशेखर रेड्डी की दोस्ती याद आई. लालू जी और नीतीश जी की दोस्ती भी रही है.
एमजीआर और करुणानिधि पर तीस साल पहले की फ़िल्म है इरुवर.
चंद्रबाबू नायडू और राजशेखर रेड्डी पर मायासभा नामक वेबसीरीज़ है.
मैंने एक से एक हेट स्पीच देखी हैं। हेट के सबसे बड़े अवतार हमारे बीच में तो हमारे प्रधानमंत्री जी हैं। बाक़ी सब तो उनके चेले हैं : प्रो. मनोज कुमार झा (आरजेडी सांसद)
एबीएपी के अध्यक्ष, के. श्रीनिवास मूर्ति, दिल्ली में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला 'आउटरीच' के उद्घाटन दिवस पर संगठन के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए. (सौजन्य: एबीएपी)
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में संघ के कई सपने साकार हुए हैं, चाहे वह बाबरी मस्जिद की जगह पर राम मंदिर बनाने का सपना हो या अनुच्छेद 370 को ख़त्म कर जम्मू और कश्मीर को हासिल विशेष दर्जा छीनने का. संघ की उपरोक्त जीतों में न्यायपालिका की भूमिका भी अहम रही है. इसीलिए एबीएपी को समझना बहुत ज़रूरी हो जाता है.
अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद (एबीएपी) की स्थापना 1992 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वकीलों की शाखा के रूप में की गई थी. आज एबीएपी भारत में वकीलों का शायद सबसे बड़ा संगठन है. अध्ययन मंडलियों, रणनीतिक मुकदमेबाज़ी और निजी रिश्तों के लगातार बढ़ते नेटवर्क के ज़रिए, समाज के बढ़े हिस्से के साथ-साथ देश भर के हज़ारों जिला और ट्रायल कोर्टों में एबीएपी फैल चुका है.
एबीएपी आज एक ऐसे संगठन के रूप में उपस्थित है जो इस देश की ज़्यादातर अदालतों को प्रभावित करने की ताक़त रखता है. इसके के सदस्य बार एसोसिएशनों का नेतृत्व करते हैं, इसके संरक्षक बेंचों पर बैठते हैं और उनके बच्चे सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही की अगुआई करते हैं, और यहां तक कि हमारे वक़्त के न्यायिक मामलों पर टिप्पणी करते हैं.
इसके सदस्य अब संसद और यहां तक कि केंद्रीय मंत्रिमंडल तक पहुंच चुके हैं. इनमें महेश जेठमलानी, सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज आदर्श कुमार गोयल, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और बीजेपी और विपक्ष शासित राज्यों के महाधिवक्ता शामिल हैं. इस रिपोर्टिंग के दो सालों में, मैं अलग-अलग तरह के वकीलों से मिला. इनमें से कुछ पैसे से और कुछ सत्ता से लेकिन अमूमन सभी कानून की विकृत कल्पना से आकर्षित हैं जो अति-राष्ट्रवादी से प्रेरित है. वे निचली अदालतों में युवा वकीलों और भारत के विधि विद्यालयों में युवा छात्रों के आदर्शों और महत्वाकांक्षाओं को आकार देते हैं. वे न केवल हमारे समय की हिंदू कट्टरपंथी वास्तविकता का मसौदा तैयार कर रहे हैं, दलील दे रहे हैं और बहस कर रहे हैं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों को चुनौती देने के लिए एक गहरे आंदोलन की ज़मीन तैयार कर रहे हैं.
पढ़ें जनवरी 2025 में छपा एबीएपी पर सुशोवन पटनायक का यह लेख: https://t.co/DXkKLQG27r
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सोवियत पतन के बाद इतिहास के अंत और लिबरल डेमोक्रेसी की स्थायी जीत की घोषणा करने वाले फ़्रांसीस फ़ुकुयामा कह रहे हैं कि पश्चिमी उदारवादी लोकतंत्र असफल और चीन का मॉडल सफल साबित हुआ है.
At Kranti, India’s first residential school for the daughters of sex workers, 80% go on to higher education. This year Mahek has got into Columbia University!
In Mind the Gap, do read: Not rescue but revolution: Inside Kranti’s radical classroom
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