जूझने का मेरा इरादा न था, मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था, रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई, यूं लगा जिंदगी से बड़ी हो गई। मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,
जिंदगी सिलसिला, आज कल की नहीं। मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं?..RIP
@Nishuazad11 Kaisa baap hai re tu....apni beti ko kamane ka jariya bana rakha hai....tere se badhiya toh wo kothe ke dalal hote hai kum se kum apni beti ko ka kamai nahi khate