समाजवादी पार्टी (सपा) के एक प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारा अभी हाल ही में ब्राह्मण समाज को लेकर की गयी अभद्र, अशोभनीय एवं आपत्तिजनक टिप्पणी व बयानबाज़ी आदि को लेकर हर तरफ उपजा भारी आक्रोश व उसकी तीव्र निन्दा स्वाभाविक ही है तथा इस विवाद के फलस्वरूप पुलिस द्वारा मुक़दमा दर्ज किये जाने के बाद भी यह मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। किन्तु संकीर्ण जातिवादी राजनीति करने वाली सपा के नेतृत्व की इस मामले को लेकर ख़ामोशी से भी मामला और अधिक गंभीर होकर काफी तूल पकड़ता जा रहा है। स्थिति भी तनावपूर्ण होती जा रही है।
वैसे भी सपा प्रवक्ता के ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बयान से ब्राह्मण समाज के आदर-सम्मान व स्वाभिमान को जो ठेस पहुँची है तो उसको गंभीरता से लेते हुये सपा मुखिया को इसका तत्काल संज्ञान लेकर ब्राह्मण समाज से छमा याचना व पश्चाताप कर लेना चाहिये तो यह संभवतः उचित होगा।
इसके अलावा, इस ताज़ा प्रकरण से लोगों की नज़र में यह भी साबित है कि सपा का ख़ासकर दलितों, अति-पिछड़ों व मुस्लिम समाज आदि की तरह ब्राह्मण समाज-विरोधी भी इनका जातिवादी चाल व चरित्र बदला नहीं है बल्कि और ज़्यादा गहरा ही हुआ है तथा इसके साथ ही, ब्राह्मण समाज के प्रति वर्तमान सरकार के रवैयों को लेकर भी जो ज़बरदस्त नाराज़गी इस समाज में देखने को मिल रही है वह भी किसी से छिपा हुआ नहीं है,
जबकि यह सर्वविदित है कि बी.एस.पी. द्वारा सर्वसमाज की तरह ब्राह्मण समाज को भी पार्टी व सरकार में भी भरपूर आदर-सम्मान देने के साथ-साथ हर स्तर पर उन्हें उचित भागीदारी भी दी गयी है अर्थात् बी.एस.पी. में यूज़ एण्ड थ्रो नहीं है बल्कि सर्वसमाज का हित हमेशा सुरक्षित रहा है।
बहुजन समाज के फायर ब्रांड नेता आकाश आनंद मोदी की अपील की हवा निकाल दी।
आकाश आनंद ने मोदी को ललकारते हुए पूछा
" फ्री की रेवड़ी बांट कर जनता को बलि का बकरा क्यों बना रहे हो,
रुपया डॉलर के मुकाबले ₹95 पर पहुंच चुका है
विदेशी मुद्रा भंडार 38 अरब डॉलर घट चुका है
कोरोना में सब कुछ हार बैठे कर दाता के सर
जिम्मेदारी की अपील थोपी जा रही है
सरकार अपनी क्या जिम्मेदारी निभा रही है
ऐसे समय में करदाताओं को राहत देनी चाहिए
ताकि उसकी जेब में कुछ पैसा बचे
आकाश ने मोदी से जवाबदेही तय करते हुए कैसे सरकार आर्थिक संतुलन बना रही है यह पूछा।
आज आकाश एक अर्थशास्त्री की तरह सरकार की नीतियों की पोल खोलते नजर आए
माननीय प्रधानमंत्री जी की हालिया अपील ऐसे समय आई है जब देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है। पिछले तीन महीनों में हमारा विदेशी मुद्रा भंडार लगभग $38 अरब घटकर मात्र $690 अरब रह गया है। रुपया डॉलर के मुक़ाबले ₹95 पार कर चुका है, और व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है। ये केवल आँकड़े नहीं हैं, ये करोड़ों परिवारों की रोज़मर्रा की चिंता हैं।
मैं मानता हूँ कि मौजूदा हालात में अर्थव्यवस्था चलाना आसान काम नहीं है, और दुनिया भी एक कठिन दौर से गुज़र रही है।
ऐसे समय में सरकार का ध्यान मांग बढ़ाने पर होना चाहिए, मांग घटाने पर नहीं। दुनिया का आर्थिक इतिहास हमें एक सीधी बात सिखाता है कि जब आर्थिक गति धीमी हो, तब लोगों से कम खर्च करने को कहना समाधान नहीं होता, समाधान यह है कि टैक्स में राहत देकर, छोटे व्यापारियों को सहारा देकर, मध्यम वर्ग पर बोझ कम कर आम परिवारों के हाथ में थोड़ा ज़्यादा पैसा छोड़ा जाए।
मुझे दुख इस बात का है कि हर बार किफ़ायत की ज़िम्मेदारी उसी ईमानदार करदाता पर आ जाती है जिसने कोविड के समय भी सबसे ज़्यादा सहा। उसने उस वक़्त भी पूरे भरोसे से अपनी भूमिका निभाई थी, तब भी उसके लिए राहत सीमित थी, और आज फिर उसी को बलि का बकरा बनाया जा रहा है और वो भी बिना ये बताए कि सरकार अपनी ओर से उसके लिए क्या करने जा रही है।
केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को रेवडियां बांटने वाली नीतियों पर तुरंत रोक लगानी होगी ताकि सरकारी खजाने पर बोझ कम हो सके। अगर सरकारें fiscal dicipline और productive capital creation पर ध्यान नहीं देंगी, तो थोड़े समय का राजनीतिक लाभ देश को लंबी आर्थिक कीमत चुकाने पर मजबूर करेगा।
देश को अपील नहीं, एक स्पष्ट रास्ता चाहिए। लोग जानना चाहते हैं विकास कैसे लौटेगा, नौकरियाँ कैसे बढ़ेंगी, और किसानों, छोटे व्यापारियों व मध्यम वर्ग को असली राहत कब मिलेगी।
सिर्फ़ नागरिकों से त्याग माँगना शासन नहीं होता। जवाबदेही, दूरदृष्टि और आर्थिक संतुलन यही असली राष्ट्रहित है।
बहन जी ने हमेशा साफ संदेश दिया था कि अपराध और भ्रष्टाचार पर कोई समझौता नहीं होगा। यही वजह थी कि प्रशासन में अनुशासन और जवाबदेही दोनों दिखाई देती थीं। #बहनजी_आ_रही_हैं
यूपी के ज़िला सहारनपुर के गाँव लालवाला में एक भूमि में फोटो/तस्वीर रखने को लेकर लोगों के बीच हुये विवाद और फिर संघर्ष में दलित वर्ग के अनेक लोगों के भी घायल होने से वहाँ स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है। पुलिस व प्रशासन को वहाँ हालात को काबू में रखने के लिये तत्काल निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिये। साथ ही, दोनों वर्गों के लोगों से भी अपील है कि वे शान्ति-व्यवस्था व आपसी सद्भाव बनाये रखें और मामले को ताक़त से नहीं बल्कि क़ानूनी तरीके़ से ही सुलझायें।
3. साथ ही, देश के कई राज्यों में जिस प्रकार से दुर्भावना व द्वेषपूर्ण रवैया अपनाकर प्रवासियों व मेहनतकश समाज के लोगों को अतिक्रमण के नाम पर भय व आतंक का शिकार बनाकर, उनकी रोजी-रोटी छीनी जा रही है, वह अनेकों सवाल खड़े करता है जो अति-चिन्तनीय भी है। 3/3
अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध जारी युद्ध समाप्ति की अनिश्चितता के कारण ख़ासकर ऊर्जा संकट व विदेशी मुद्रा भण्डार की चिन्ताओं के मद्देनज़र मा. प्रधानमंत्री द्वारा देश के लोगों से ’संयम’ बरतने की गयी अपीलों से यह साबित है कि भारत के समक्ष संकट केवल पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस आदि पेट्रोलियम पदार्थों को लेकर ही नहीं बल्कि आर्थिक संकट भी गहरायेगा, जिससे करोड़ों भारतवासियों का जीवन प्रभावित हो रहा है तथा जिसके जारी रहने की भी गंभीर आशंका है।
अर्थात् ऐसे समय में जबकि कोरोनाकाल की ज़बरदस्त मार के बाद रोज़ी-रोटी तक के संकट का जीवन झेल रही देश की लगभग सौ करोड़ जनता के पास और अधिक संयमित होने व खोने को कुछ ख़ास नहीं बचा है, तो ऐसी स्थिति में केन्द्र एवं राज्य सरकारें उन ग़रीब व मेहनतकश परिवारों को थोड़ी राहत देकर उनका सहारा बनने के लिये ख़ुद ही कुछ बेहतर करने का उपाय ज़रूर करें तो यह जन व देशहित में उचित होगा, ऐसी आम जन भावना।
बसपा के फायर ब्रांड नेता आकाश आनंद ने NEET पेपर लीक पर मोदी सरकार की बिना डिटर्जेंट के धुलाई कर दी
आकाश ने कहा" बार बार पेपर लीक होना छात्रों के भरोसे के साथ धोखा है,
सरकार और एजेंसियों को जवाब देना होगा कि आखिर हर बार युवाओं का भविष्य क्यों दांव पर लगाया जाता है?
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