आरक्षण से ‘मेरिट’ खतरे में बताने वालों, इधर भी थोड़ा ज्ञान दीजिए!
यूपी में मंत्री-विधायकों के रिश्तेदारों को नौकरियाँ बाँटने का मामला सामने आया था। भास्कर की पड़ताल के मुताबिक इनमें 55% ठाकुर बताए गए थे। यहां तक कि जांच करने आए अफसर के भतीजे को भी नौकरी मिलने की बात सामने आई थी।
आरक्षण से नौकरी पाने वाला दलित-पिछड़ा आपको तुरंत दिख जाता है, उसकी योग्यता पर सवाल भी उठ जाता है। लेकिन सत्ता, रसूख और रिश्तेदारी के सहारे नौकरी मिले तो ‘मेरिट’ के सारे ठेकेदार अचानक मौन क्यों हो जाते हैं?
सवाल आरक्षण का नहीं, अवसरों पर कब्ज़े और मेरिट के इस दोहरे पैमाने का है।
ये फैक्ट चेक: शुक्ला का दावा फेक नहीं। 7 अगस्त 2026 को प्रयागराज (नेवादा समोगर) में निहाल शुक्ला (उर्फ जीतू, ~32, पुत्र मथुरा प्रसाद) और उनके चाचा रजत शुक्ला (~35, पुत्र विनोद) की मौत हुई। दोनों बेंदो गांव के शटरिंग मजदूर थे। निर्माणाधीन सेप्टिक टैंक (15 दिन बंद) में शटरिंग हटाने उतरे, मीथेन गैस से दम घुटा। कई समाचार व पुलिस पुष्टि। मैनुअल स्कैवेंजिंग नहीं, निर्माण हादसा।
बेटा @grok ये बता मेरा दोस्त प्रेम चोपड़ा जो
आज कल कथित सनातनी पत्रकार बना घूम रहा है,
क्या उसकी प्लेट में आमलेट है,
क्या वो सावन के सोमवार को आमलेट खा रहा है,
"Galgotias University" पर किए गए ट्वीट को @ABPNews की ईमानदार और निष्पक्ष पत्रकार चित्रा त्रिपाठी @chitraaum ने डिलीट कर दिया है ।
ऐसी क्या मजबूरी थी कि डिलीट करना पड़ा?
अकाउंट में पैसे आ गए थे या पहले डिलीट करना था?
-40 नंबर तो खूब चिल्ला रही थी अभी दुनिया भर में बेइज्जती हो गई तो एक भी ट्वीट नहीं।
Deleting tweets doesn’t change reality @AshwiniVaishnaw - you have made India a laughing stock. Quit the chair if you can’t do your job. Maybe join Galgotia as Professor of Spin?
गलगोटिया यूनिवर्सिटी तो एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी है न? यहाँ संवैधानिक आरक्षण भी लागू नहीं होता। सब ‘मेरिट’ से ही आए होंगे। फिर ऐसा कैसे हो गया? या केवल दलितों और पिछड़ों का हक़ मारने को ही ‘मेरिट’ कहा जाता है?
इस अकाउंट को सर्वेश सिंह नाम का एक मोदी भक्त चलाता है
इसके पहले इस अकाउंट का नाम "मोदी भक्त" था फिर इसने नाम बदलकर "योगी का चेला" रखा
एक समय इस अकाउंट का नाम Bhimata Ka Bap था
PDA एकता को तोड़ने के लिए इसने अब अपने अकाउंट का नाम "BSP" रख लिया
PDA एकता को तोड़ने वाले ऐसे संघीयों से सावधान रहो
रविंद्र जडेजा का ODI में प्रदर्शन!
- इण्डिया में पिछली फिफ्टी - 2013 में
- विदेश में पिछली फिफ्टी - 2020 में
- पिछले 6 वन डे में विकेट - 02
पहले पति के दम पर पत्नी राजनीति में जमी, अब पत्नी के दम पर पति टीम में जमा हुआ है!
संविधान राज्य को शक्ति देता है, आस्था को नहीं. देश संविधान से चलता है, मठ के कानून से नही.
तो फिर उत्तर प्रदेश में कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को पुलिस की Guard of Honour किस आधार पर दिया ?
यह सामान्य प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है.
Guard of Honour किसी धार्मिक पहचान के लिए नहीं, यह सम्मान संविधान, राष्ट्र और शहीदों के लिए होता है.
आज हालात ऐसे बनाए जा रहे हैं कि
आस्था को प्राथमिकता और क़ानून को पीछे धकेला जा रहा है.
यह घटना दिखाती है कि यूपी का प्रशासन अब संविधान से ज़्यादा धार्मिक प्रभावों के प्रति जवाबदेह होता जा रहा है. जो लोकतंत्र के लिए ख़तरनाक संकेत है.
सवाल है, कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी कौन है. किस नियम के तहत पुलिस ने Guard of Honour दिया. परेड में सलामी दी गयी ?
UPSSSC लेखपाल नई भर्ती के विज्ञापन में OBC वर्ग के आरक्षण में हुई त्रुटि का माननीय मुख्यमंत्री जी ने संज्ञान लिया है। उम्मीद है कि UPSSSC जल्द ही विज्ञापन में सुधार करेगी। इस समस्या को प्रमुखता से उठाने के लिए @I_Gaurav_Pandey जी की बहुत बहुत आभार। https://t.co/zPOHtlSWBv
बीजेपी समर्थित व शासन सत्ता में भागीदार ओबीसी नेताओं केशव प्रसाद मौर्या, ओम प्रकाश राजभर, अनुप्रिया पटेल, संजय निषाद और जयंत चौधरी ने भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में बनाए रखने में निश्चित ही अहम भूमिका निभाई है राजनीतिक तौर पर उनकी ताकत और समुदाय में उनकी पकड़ नजरअंदाज नहीं की जा सकती लेकिन सवाल यह उठता है कि जब अपने समाज के हक अधिकार के जायज़ मुद्दों की बात आती है, तो ये नेता चुप्पी क्यों साध लेते हैं?
चाहे 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण का घोटाला हो या उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्तियों में संविधान प्रदत्त ओबीसी आरक्षण का उलंघन किया जा रहा है, हकीकत यह है कि प्रदेश की सभी भर्तीयों में आरएसएस संचालित इस सरकार में OBC, SC, ST आरक्षण का चोरी व घोटाला किया जा रहा है। संविधान द्वारा मिला यह आरक्षण लगातार ख़त्म किया जा रहा हैं और सरकार में ओबीसी समाज के इन बड़े नेताओं की चुप्पी अब समाज को चुभ रही है ये नेता सिर्फ समाज के लिए सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गये है। योगी आदित्यनाथ की सरकार लेखपाल भर्ती विज्ञापन में 27% ओबीसी आरक्षण की जगह केवल 18% आरक्षण दे रही है। नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण होने तक यह भी मिलेगा की नहीं यह भी स्पष्ट नहीं है कि वास्तविक आरक्षण कितना मिलेगा।
जहाँ-जहाँ बीजेपी की सरकार है, वहाँ SC, ST और OBC आरक्षण चोरी और घोटाले का खेल आम है इसके जिम्मेदार कौन हैं क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं है, यह शासन-सत्ता द्वारा संगठित योजनाबद्ध प्लान है कैसे द्विज जातियों को लाभ पहुंचाया जा सके?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि समाज के इन ओबीसी नेताओं की आवाज़ समाज के हक और अधिकार के नाम पर नहीं खुलती है, जो समाज के नाम पर सत्ता की मलाई का आनंद ले रहे हैं। आरक्षण घोटाले और चोरी के दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती, लेकिन इन्हें समाज के अधिकारों के लिए बोलने पर आरएसएस द्वारा रोक लगाया जाता है या इनकी हिम्मत ही नहीं होती की ये समाज की जायज मांग पर भी चुप्पी तोड़ सके? यही कारण है कि ओबीसी समाज लगातार अपने मूल हक से वंचित होता जा रहा है, और राजनीति केवल सत्ता और स्वार्थ का खेल बनकर रह गई है।
#आरक्षण_चोरी #आरक्षण_घोटाला
#OBC_आरक्षण_बचाओ