#बिना_परीक्षा_माननीय_सुप्रीम_कोर्ट_में5_नये_जज_नियुक्त
Law के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री LLB लेकर वकील बनते हैं ।इसी प्रकार स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री बी एड या बीटीसी लेकर शिक्षक बनते हैं ।
simple एलएलबी की डिग्री लेकर बने अधिवक्ता बिना किसी परीक्षा के केवल अनुभव के आधार पर हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस ,फिर चीफ जस्टिस ,सुप्रीम कोर्ट के मा जस्टिस और फिर सुप्रीम कोर्ट के chief justice तक बन सकते हैं।
लेकिन बी एड या बीटीसी की डिग्री या डिप्लोमा लेकर बने शिक्षक को नियुक्ति के 25-30 वर्षों बाद प्रमोशन तो दूर नौकरी में बने रहने के लिए भी नई परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी और सफल न होने पर नौकरी से निकाल दिये जाएँगे ।क्या यह न्याय है?
हम माननीय प्रधानमन्त्री जी से अनुरोध करेंगे कि देश के 25 लाख शिक्षकों के साथ हो रहे इस अन्याय का संज्ञान लें और एनसीटीई द्वारा 23 August 2010 में निर्धारित योग्यता को आरटीई में सम्मिलित करने की कृपा करें ।🙏
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#इति_सिद्धम
वे अपने लिये संसद के बनाये क़ानून को भी नहीं मानेंगे ,क्योंकि उनको न्यायिक स्वतन्त्रता चाहिये ।
बिना किसी परीक्षा में सम्मिलित हुए केवल अनुभव और सिफारिश के आधार पर नियुक्ति और प्रमोशन लेते रहेंगे ।
आप पर वे नियम थोपे जाएँगे जो संसद ने आपके लिए बनाए ही नहीं हैं
2017 के संशोधन सहित आरटीई में कहीं टेट का उल्लेख नहीं है आरटीई के 23(1) के द्वारा प्रदत्त शक्ति से एनसीटीई ने 23 August 2010 को minimum qualification परिभाषित की है जोकि नियुक्ति वर्षों के अनुसार with tet और without tet है लेकिन माननीय जी ने minimum qualification को TET लिख दिया तो लिख दिया ।
आपको नियुक्ति हेतु निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण करने के नियुक्त होने के 20-25 वर्षों बाद भी परीक्षा में बैठायेंगे ।
अनुभव के आधार पर पदोन्नति तो दूर नौकरी (उस नौकरी में जिसमें नियुक्ति की प्रक्रिया में कोई दोष या आपत्ति नहीं है)में भी आप नहीं रहेंगे ।20-25 lakhलाख शिक्षकों की नौकरी जाये तो जाये उन पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
हमने सदैव कहा कि रास्ता संसद से निकलेगा ।इसलिए अब minimum qualification को parliament से define कराने हेतु आगे बढ़ेंगे ।
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#JusticeForTeachers
देश के सभी राज्यों में आरटीई लागू होने के पूर्व राज्यों द्वारा निर्धारित अर्हता रखने वाले अभ्यर्थियों को ही शिक्षक पद पर नियुक्त किया गया है जोकि 25-30 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं ।
परन्तु आरटीई लागू होने के बाद शिक्षक पद पर नियुक्ति हेतु निर्धारित अर्हता उसके पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर थोपना सरासर अन्याय है ।हम भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि संसद द्वारा कानून पारित कराकर इस अन्याय पर रोक लगाकर देश के लाखों शिक्षकों और उनके परिजनों को न्याय दिलाया जाये ।
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अण्डमान निकोबार से दिल्ली चलकर पहुँचे अण्डमान निकोबार शिक्षक संघ के अध्यक्ष श्री प्रेम कुमार साधु एवं महासचिव श्री विकास मंडल से मिलने पर सुप्रीम कोर्ट के टेट के संबंध में आये आदेश के बाद अंडमान निकोबार के शिक्षक साथियों की दुख भरी व्यथा को सुनकर मन बहुत व्यथित हुआ और सोचने पर मजबूर हूँ कि इस प्रकार के आदेश आने के बाद सरकार किस अनहोनी का इंतज़ार कर रही है ।
दोनों शिक्षक नेताओं ने बताया कि 25 मार्च को अण्डमान निकोबार में टेट पास करने की अनिवार्यता के सम्बन्ध में पत्र निर्गत होने के बाद शिक्षक अवसाद से जूझ रहे हैं किसी भी शिक्षक को विश्वास नहीं हो रहा है कि आरटीई से पूर्व में नियुक्त एवं २०-२५ वर्षों से शिक्षण कर रहे शिक्षकों पर इस आदेश को कैसे थोपा जा सकता है ।
संघ के महासचिव श्री विकास मंडल जोकि आरएसएस के विभाग बौद्धिक प्रमुख भी हैं उनका कहना कि पोर्ट ब्लेयर में इस आदेश के बाद शिक्षकों में भारी तनाव व्याप्त है उन्होंने बताया कि बहाँ पर एक मात्र सांसद को छोड़कर कोई भी अन्य जनप्रतिनिधि नहीं है ।बहाँ का शासन पूर्णतया नौकरशाह चला रहे है ऐसे बिना किसी जनप्रतिनिधि के अपनी बात नौकर शाह को समझाना मुश्किल है
दूसरी ओर उन्होंने बताया कि दिल्ली आकर न्याय की गुहार लगाना भी बहुत मंहगा है
पोर्ट ब्लेयर से दिल्ली हवाई जहाज से आने पर एक तरफ़ से दोनों साथियों का टिकट 61000 रुपये का मिला है और यदि हवाई जहाज़ से न आकर दूसरा रास्ता अपनाये ,तो पानी के जहाज़ से कलकत्ता या चेन्नई तक पहुँचने में 3-4 दिन लगते हैं तथा किराया 18 हज़ार उसके बाद ट्रेन से दिल्ली तक का किराया एवं दो दिन का सफ़र ।इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट में बहुत महंगी पैरवी एवं राज्य में चुने हुए विधायक या एमएलसी न होने पर जब इस प्रकार का पत्र आया तो शिक्षक अवसाद में आ गये ।
उन्होंने बताया कि बहुत कठिन परिस्थिति में अंडमान निकोबार द्वीप समूह में शिक्षा का अलख जगा रहे हैं उन्होंने बताया कि पोर्ट ब्लेयर के पास अन्य द्वीप पर विद्यालय संचालित है बहाँ आने जाने का एक मात्र साधन छोटी नाव है कई बार ऐसा होता है विद्यालय पहुँचने के बाद मौसम ख़राब होता है तो लौटने हेतु नाव नहीं मिल पाती है और दो तीन दिन विद्यालय वाले द्वीप पर ही रहना पड़ता है ।
उनका कहना है कि नौकरी जाने पर बहाँ कोई फैक्टरी या उद्योग भी नहीं है जहाँ प्राइवेट नौकरी की जा सके ।
अंडमान निकोबार में शिक्षक साथियों ने 4 अप्रैल को रामलीला मैदान की रैली के फोटो और वीडियो देखे तो उन्हें आशा की किरण दिखाई दी और उन्होंने टीएफआई से संपर्क का मन बनाया ।
17 अप्रैल को दोनों शिक्षक नेता अपने क्षेत्र के भाजपा सांसद श्री विष्णु पद रे के दिल्ली आवास पर पहुँचें और उनके साथ मा सांसद श्री जगदंबिका पाल जी से मुलाक़ात की ।मा पाल साहब ने हमें इन साथियों से मुलाकात करवाई ।
दोनों साथी पूरे दिन हमारे एवं श्री राधे रमण त्रिपाठी जी के साथ रहे और हमने आश्वस्त किया कि आप अकेले नहीं हैं टीएफआई आपके साथ है
अब टीएफआई का नारा “कश्मीर से कन्याकुमारी तक “न होकर
“कश्मीर से अंडमान निकोबार द्वीप समूह तक “होगा ।
दोनों साथियों को आश्वस्त किया कि शीघ्र ही अगली बैठक पोर्ट ब्लेयर में होगी ।
विद्यालय की साफ़ सफ़ाई के सम्बन्ध में @DmSambhal के स्पष्ट एवं सराहनीय निर्देश ।शिक्षकों के साथ यह कार्य हम सबने विद्यार्थी जीवन में किया है जोकि शिक्षा का ही एक हिस्सा है परंतु वर्तमान में छात्रों द्वारा अपने स्वयं के भोजन किए वर्तन धोने या अपने कक्षा कक्ष में कोई सफाई करने जैसी खबरों पर अनेक शिक्षकों पर कार्रवाई की गई है ।अब इससे राहत मिलेगी ।जिलाधिकारी महोदय को धन्यवाद 🙏
#NoTetBeforRteAct
महाराष्ट्र के दो दो शिक्षक संघ भी आये @TFI4India के साथ
श्री श्रीकांत देशपांडे जी पूर्व एमएलसी एवं संस्थापक अध्यक्ष शिक्षक अघाड़ी विदर्भ प्रदेश
तथा
श्री दत्तात्रेय सावंत पूर्व एमएलसी एवं महासचिव महाराष्ट्र शाला क्रुती समिति महाराष्ट्र से कल दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन में टेट की अनिवार्यता को समाप्त करने के आंदोलन पर विस्तार से चर्चा हुई,दोनों ही नेताओं ने टीएफआई के प्रयास की सराहना की एवं टीएफआई से संबद्ध होने की इच्छा व्यक्त की ।महाराष्ट्र के दोनों संगठन शीघ्र ही टीएफआई के सदस्य होंगे ।
20 लाख सरकारी शिक्षकों की नौकरी पर खतरा
सुप्रीम कोर्ट के TET अनिवार्य करने के आदेश के खिलाफ देशभर के शिक्षक आज दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. पूरे भारत में करीब 20 लाख ऐसे टीचर हैं जो 2011 से पहले भर्ती हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने अब इन शिक्षकों को TET पास करने को कहा है. पास न होने पर इनकी नौकरी पर खतरा पैदा हो जाएगा.
#JobCrisis | #TETExam | @ravishranjanshu
टी फ़ आई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दिनेश चंद शर्मा जी के निर्देश के अनुसार जनपद बरेली के सभी शिक्षक साथियों से निवेदन अधिक से अधिक संख्या में पहुंच कर इतिहास का गवाह बने हम अपने आने वाली पीढ़ी आप के संघर्ष को याद कर सके ।
शिक्षक एकता जिंदाबाद✊
बोलो सब मिलकर भाई
टी०एफ०आई०, टी०एफ०आई०
पूरे देश ने आवाज लगाई,
टी०एफ०आई०- टी०एफ०आई०
सेवा को बचाने की लड़ाई
दिल्ली मे लड़ेगा टी०एफ०आई०
शिक्षिकाएं आओ-आओ शिक्षक भाई
रामलीला मैदान में करो चढ़ाई।✊
4अप्रैल आर या पार की लड़ाई
पूरा देश बोले-टी०एफ०आई०, टी०एफ०आई०
#04_April_MarchToDelhi#NoTetBeforeRteAct
आगामी 04 अप्रैल को रामलीला मैदान में होने वाली महा रैली की तैयारियों को दृष्टिगत रखते उत्तर प्रदेश के संगठन उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की बैठक संपन्न हुई जिसमें उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के सभी जिला अध्यक्ष और मंत्रियों ने भाग लिया ।सभी ने अन्याय के विरुद्ध एकजुट होकर आंदोलन में शामिल होने का संकल्प लिया ।
#04_अप्रैल_दिल्ली_चलो#NoTetBeforeRteAct
हम सभी 4 अप्रैल 2026 को रामलीला मैदान दिल्ली पहुँचकर RTE Act से पहले नियुक्त शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता थोपने का विरोध करेंगे।
TFI ज़िंदाबाद
#04_अप्रैल_दिल्ली_चलो#NoTetBeforeRteAct
सम्मानित साथियों हमारी भारत सरकार से माँग है कि आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टेट की अनिवार्यता को समाप्त करने हेतु क़ानून बनाया जाये ।इस संबंध में टीएफआई के प्रतिनिधि मंडल ने 19 दिसंबर को केंद्रीय शिक्षा मंत्री जी से वार्ता करके ज्ञापन सौंपा था और हमें आशा थी कि बज़ट सत्र में सरकार इस विषय पर विधेयक लाएगी परन्तु अभी तक ऐसा नहीं हुआ जिससे शिक्षकों में असंतोष व्याप्त है ।अभी तक आप दो दो बार आपने जिलाधिकारी के माध्यम से मा प्रधानमन्त्री जी को ज्ञापन प्रेषित किया गया साथ ही मा सांसदों को ज्ञापन सौंपा गया ।अनेक सांसदों द्वारा संसद में विषय को उठाया गया गया लेकिन भारत सरकार का शिक्षा मंत्रालय देश के 20 lakhलाख शिक्षक व उनके परिवार के प्रति संवेदनशील नहीं है ।
इसलिए आप सभी से अनुरोध है कि 4 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान पहुंचकर अपनी सेवा को सुरक्षित करें ।