Stone inscriptions don't rewrite history—they preserve it.
An 11th–12th century inscription refers to Girnar as the holy place of Bhagwan Neminath, reflecting its enduring place in Jain tradition.
#ProtectGirnarfromEncroachment
गिरनार की सबसे बड़ी विडंबना जैन परंपरा के अनुसार भगवान नेमिनाथ के मोक्ष-स्थल पर स्थित चरण को तो दत्तात्रेय जी का बताया गया ओर वहां मौजूद जैन प्रतिमा जी को आज लोग शंकराचार्य मानकर पूजते हैं। हसी आती हे ये देख के इतिहास को जानना भी उतना ही आवश्यक है जितना आस्था रखना।
#ProtectGirnarfromEncroachment
@prasadvedpathak@deeprajdeeplife I would love to see the actual stats , how are you minority in mahastra???? White paint is not a religious symbol of any religion?? Why are yoh creating nuisance?? Stop. Please act like a responsible citizen.. 🙏 be responsible and show proof of ur claims.
@deeprajdeeplife@prasadvedpathak Yes you are right. Now try to be a decent human being, stop hurting microminority, try to be responsible citizen ( stop creating nuisance). Have some manners...
Total mismanagement at Girnar Hill Top.. जणू काही जैन धर्मीय भाविक अतिरेकी असावे अशी तपासणी सुरू होती... प्रचंड वेळ लागत होता. हे सगळ मुद्दाम सुरू असावे जेणे करून श्रद्धाळू दर्शन न घेताच वैतागून मागे जातील..... बाकी मला शक्य वाटत नव्हते इतके पायऱ्या मी चढू शकेन.. जवळपास ६५०० पायऱ्या चढल्या आणि तेवढ्याच उतरल्या... तुफान पाऊस , जोरदार हवा आणि प्रचंड गारवा..तरीही जवळपास पन्नास हजार भाविक ��ज दर्शनासाठी आलेय. पर्वत चढतांना आणि उतरतांना खूप खूप ओळखीचे अनोळखी लोक भेटलीत.. देशभरातील जैन धर्माचे इतके अनुयायी मला ओळखतात हे बघून खूप उत्साह वाटला.. एक ऊर्जा मिळाली
#Girnar #नेमिनाथ #Neminath #गिरनार
हाल ही में गिरनार की 4थी टोंक पे मौजूद जैन प्रतिमा को औघड़ की प्रतिमा बोल के रंग पोत दिया गया पुलिस और @ASIGoI कुछ नहीं कर रही हे पूरे गिरनार पे ऐसी कई जैन प्रतिमाएं बनी हुई हे जिनको ये लोग कनवर्ट करना चाहते हे ताकि जैन इतिहास पूरी तरह मिटा सके गिरनार से
अहिंसक समाज के साथ अमानवीय व्यवहार क्यों? https://t.co/HDu1jbbxTf via @Channel Mahalaxmi
आगामी 20 जुलाई(आषाढ़ शुक्ल सप्तमी) का दिन जैन समाज के लिए एक अत्यंत पवित्र और श्रद्धापूर्ण अवसर है। यही वह पावन दिन है जब जैन समाज के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ जी का मोक्ष कल्या��क मना रहा है इस बार। इस पावन अवसर पर देश-दुनिया से हजारों जैन श्रद्धालु दर्शन करने और श्रद्धा-सुमन के रूप में‘निर्वाण लाडू’ चढ़ाने के लिए गिरनार महातीर्थ की पांचवीं टोंक पर पहुँचते हैं। लेकिन, वर्षों से चली आ रही आस्था की इस राह में आज जैन समाज खुद को प्रताड़ित, उपेक्षित और असहाय महसूस कर रहा है। यह एक विचारणीय और गंभीर प्रश्न है कि जिस देश के संविधान ने हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता दी है, ���हाँ एक परम अहिंसक समाज को अपने ही तीर्थंकर के मोक्ष कल्याणक पर अमानवीय व्यवहार का सामना क्यों करना पड़ता है?
ऐतिहासिक सत्य और 17 फरवरी2005 का ऐतिहासिक अदालती आदेश
सन् 2016 तक 5वीं टोंक पर जैन समाज के लोग बिना किसी भय और रुकावट के दर्शन, विधिवत पूजा-अर्चना और निर्वाण लाडू सम��्पित कर पाते थे। उधर चरणों के पास दत्तात्रेय मूर्ति स्थापित करने के बाद यह मामला कानून की चौखट पर पहुँचा। गुजरात उच्च न्यायालय (माननीय न्यायमूर्ति जयंत पटेल जी की अदालत) द्वारा 17 फरवरी2005 को ‘बंडीलालजी दिगंबर जैन कारखाना बनाम गुजरात राज्य’ (रस्रीू्रं’ उ्र५्र’ अस्रस्र’्रूं३्रङ्मल्ल ठङ्म. 6428 ङ्मा2004) के मामले में एक स्पष्ट अंतरिम आदेश जारी किया गया था। अदालत ने अपने अंतिम आदेश के क्रमांक8, 9, 10, ��र 11 में स्पष्ट रूप से कानून और व्यवस्था बनाए रखने तथा सभी को समान अधिकार देने की बात कही थी।
आदेश क्रमांक8 व 9 (समान अधिकार और सुरक्षा): अदालत ने स्पष्ट किया कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। यहाँ किसी भी नागरिक या श्रद्धालु को(चाहे वह भगवान दत्तात्रेय का अनुयायी हो या तीर्थंकर नेमिनाथ का) दर्शन और पूजा करने से रोका नहीं जा सकता।
राज्य सरकार और प्रशासन का यह परम कर्तव्य है कि वह हर श्रद्धालु और पर्यटक को एक सुरक्षित, सहज और आरामदायक माहौल प्रदान करे। मारपीट या प्रताड़ना की शिकायतों को देखते हुए अदालत ने आवाजाही को नियमित करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चेक-पोस्ट और पास की व्यवस्था करने की बात कही थी।
आदेश क्रमांक10 (यथास्थिति और सौहार्द): अदालत ने माना कि दोनों पक्षों की आस्था जुड़ी ��ोने के कारण ऐसी व्यवस्था बनी रहनी चाहिए, जिससे दोनों धर्मों(हिंदू और जैन) के अनुयायियों की आस्था का सम्मान हो और कोई विवाद न उपजे।
आदेश क्रमांक11 (प्रशासनिक निर्देश): अदालत ने जिला कलेक्टर/ जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए थे कि वे चौथी और पांचवीं टोंक के बीच पर्याप्त पुलिस बल तैनात करें। साथ ही, किसी भी अप्रिय घटना या शिकायत पर 12 घंटे के भीतर पुलिस अधीक्षक(रढ) को रिपोर्ट कर कानूनी कार्रवाई करने और एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का आदेश दिया था।
विडंबना: प्रशासन का मौन और श्रद्धालुओं के साथ अमानवीय व्यवहार
अदालत के इतने स्पष्ट आदेशों के बावजूद, आज धरातल पर सच्चाई इसके ठीक उलट और बेहद दर्दनाक है।5वीं टोंक पर तैनात पंडे और असामाजिक तत्व जैन समाज के श्रद्धालुओं के साथ घोर दुर्व्यवहार करते हैं।
जैन बंधुओं को वहाँ न तो जयकारा लगाने दिया जाता है और ना ही पवित्र णमोकार म���त्र का जाप करने दिया जाता है।
श्रद्धालुओं को अर्घ्य चढ़ाने और निर्वाण लाडू चढ़ाने में बलपूर्वक रोका जाता है।
इतना ही नहीं, आस्था के साथ आने वाले इन मासूम श्रद्धालुओं को गालियाँ दी जाती हैं, उनके साथ मारपीट की जाती है, और उन्हें डराने के लिए डंडे व चिमटे तक उठाए जाते हैं।
सबसे बड़ा अफसोस और विडंबना यह है कि वहाँ सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस बल मूकदर्शक बनकर यह सब देखता रहता है। वे अपराधियों क�� रोकने के बजाय, उल्टे जैन श्रद्धालुओं को ��ी वहाँ से तुरंत भाग जाने या निकल जाने को कहते हैं।
यह स्थिति तब और भी ज्यादा आहत करने वाली हो जाती है, जब इतिहास के पन्ने हमें याद दिलाते हैं कि वर्ष2009 में जब जैन समाज के आचार्य मेरु भूषण महाराज जी ने गिरनार तीर्थ की सुरक्षा को लेकर आमरण अनशन किया था, तब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी जी ने गृहमंत्री अमित शाह को विशेष दूत बनाकर भेजा था और जैन समाज को यह ठोस आश्वासन दिया थ��� कि‘गिरनार पर जैनियों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और उन्हें पूजा-पाठ में कोई तकलीफ नहीं होगी।’ लेकिन आज भी प्रशासनिक मौन के कारण वह आश्वासन जमीन पर उतरता नहीं दिख रहा है।
एक विनम्र और भ्रातृपूर्ण अनुरोध
हम पूरे जैन समाज की ओर से प्रशासन, सरकार और वहाँ के स्थानीय पुरोहितों व पंडे समाज से अत्यंत विनय और हाथ जोड़कर अनुरोध करते हैं कि जैन धर्म भी इसी पावन सनातन परंपरा का एक अ��िन्न अंग है। सदियों से जैनों और हिंदुओं के बीच रोटी-बेटी और सांस्कृतिक रूप से भाई-चारे का संबंध रहा है।
जैन समाज को पराया या शत्रु न समझें, बल्कि उन्हें अपना सगा भाई समझकर गले लगाएँ। अदालत के आदेशों का सम्मान करते हुए और भारतीय संस्कृति की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को जीवित रखते हुए, इस20 जुलाई को जैन श्रद्धालुओं को उनकी प्राचीन परंपरा के अनुसार शांतिपूर्वक दर्शन, पूजा-अर्चना और निर्वाण लाडू चढ़ाने का अधिकार व सहयोग दें।
आइए, इस मोक्ष कल्याणक पर गिरनार महातीर्थ की पवित्रता और आपसी सौहार्द की एक नई मिसाल पेश करें।
गिरनार पर्वत जूनागढ़ की तीर्थ वंदना जा रहे यात्री यहां के भी दर्शन अवश्य करें.
शाश्वत तीर्थ श्री गिरनार पर्वत पर पहली टोंक पर स्थित दिगंबर जैन मंदिर एवं मंदिर के निकट से ही कुछ सीढ़ियां उतर कर स्थित है श्री राजुल गुफा जिसकी चाबियां कार्यालय से प्राप्त करके दर्शन
#jain#girnar
Respected @Vishnu_Jain1 ji
The Jain community has not forgotten your assurance regarding the Girnar issue. We respectfully ask: Has the time not yet come to act?
Girnar's heritage cannot wait indefinitely. Thousands of devotees continue to look towards you with hope. We request you to honour your commitment and help bring this matter forward and spread communal harmony.
History remembers those who act when heritage calls.
#ProtectGirnarfromEncroachment