🇮🇳 स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
आओ आज यह संकल्प लें
मेहनत, ईमानदारी और एकता के बल पर
हम भारत को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएँगे ❤️ देश तभी बदलता है, जब हम खुद बदलते हैं!
आओ मिलकर एक सशक्त, समृद्ध और स्वाभिमानी भारत बनाएं।
जय हिंद! वंदे मातरम��! 🇮🇳
#HappyIndependenceDay2025
अयोध्या, उज्जैन तो झांकी है।
काशी मथुरा बाकी है।
ED वालों, सोकर उठ गए हो तो मोहन प्यारे के भी घर चले जाओ, पूछ लो महाकाल के धाम में डाका क्यों डाला। वैसे देश जानता है तुम्हारी आवाज़ नहीं निकलेगी।
असली सवर्ण छात्र तो लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहे हैं..
UGC का विरोध करने वाले लोग, देश के दुश्मनों से मिल कर देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं..
मोदी जी आप इन अराजक तत्वों पे लट्ठ बजवाओ हम आप के साथ हैं !!
#We_support_UGC_Act
UGC मुद्दे पर पूरा मीडिया एक आवाज़ में बोल रहा है।
UGC मुद्दे पर सभी YouTubers एक आवाज़ में बोल रहे हैं।
UGC मुद्दे पर सभी क्रांतिकारी पत्रकार एक आवाज़ में बोल रहे हैं।
इसकी वजह यह है कि
ऊपर दी गई तीनों जगह 90 फ़ीसदी सवर्ण लोग बैठे हुए हैं। बहुजन आब���दी अपने ही आगे बढ़ने वाले लोगों को टार्गेट करने लगती है जबकि
सवर्ण आबादी अपने आगे बढ़ने वाले लोगों का सम्मान करती है जिससे की जब बात समाज और वर्ग के हितों की आ��ी है तो सब एक साथ खड़े हो जाते हैं।
चोरी के ख़िलाफ़ क़ानून बनने से किसे दिक्कत होगी? जो चोर होगा! अत्याचार के ख़िलाफ़ नियम बनने से कौन तिलमिलायेगा? जो अत्याचारी होगा! ��ेदभाव रोकने वाले क़ानूनों का विरोध कौन करेगा? जो भेदभाव करता होगा!
अगर कोई कानून किसी वर्ग या समूह के सम्मान को बचाने के लिए बनाया गया है तो इसमें दिक्कत क्या है? जातिगत भेदभाव और पक्षपात हमारे समाज की पुरानी बीमारी है, और पुरानी बीमारियों का इलाज कड़वी दवाइयों से ही होता है.
SC-ST एक्ट ऐसी ही कड़वी दवाई थी जिसका भरपूर विरोध किया गया था. आरक्षण भी ऐसी ही एक कड़वी दवा है, जिसका खूब विरोध होता है��लेकिन मेरा यकीन कीजिए, इन कड़वी दवाइयों ने समाज की सेहत में सुधार ही किया है.
कहीं कुछ लोग इस वजह से तो नाराज नहीं हैं कि वो अब दूसरों को अपमानित नहीं कर पायेंगे? कहीं उन्हें ये तो नहीं लग रहा कि उनका ये अवैध विशेषाधिकार छिनने वाला है?
देश का संविधान समानता के बुनियादी सिद्धांत पर टिका है, लेकिन क्या देश का हर नागरिक बराबर सम्मान पाता है? दरअसल नहीं!
बीते तमाम सालों में ले-देकर एक काम तो ढंग का हुआ है, और कुछ लोग इसका भी विरोध करने लग गए! और विरोध कर भी कौन रहा है! वही लोग जो अखंड भारत के नाम पर स्वास्थ्य, शिक्षा, रोज़गार जैसी बुनियादी चीजों से समझौता करने को तैयार थे…
…वही लोग जो राष्ट्रवाद के नाम पर अपने ही देश के नागरिकों की लिंचिंग तक को सही बताते थे और सरकार से चार कायदे के सवाल पूछने वालों को देशद्रोही कहते थे…आज वही लोग एक ढंग का क़ानून आने पर बिलबिला रहे हैं…क्यों भाई! अब मज़ा नहीं आ रहा क्या?
देश का हर नागरिक जब तक गौरवान्वित, सम्मानित और कॉंफिडेंट महसूस नहीं करेगा, तब तक ये देश मजबूत नहीं होगा…देशवासियों के आत्मसम्मान को बढ़ाने वाला ये क़ानून देशहित में है, और इस क़ानून ��े ख़िलाफ़ बोलने वाले लोग देशहित के ख़िलाफ़ बोल रहे हैं. उन्हें ये काम नहीं करना चाहिए.
जातिगत स्वार्थों के लिए देशहित से समझौता मत कीजिए भाई! देश को मजबूत बनाने वाले क़ानून का समर्थन कीजिए. सबसे पहले देश है…जाति-बिरादरी बहुत बाद में आती है.
ये कोई मामूली क़ानून नहीं है…18-18 घंटे मेहनत करने के बाद ये क़ानून बनाया गया है…आपको इसका सम्मान करना चाहिए.
(वीडियो में पक्षपात के शिकार स्वर्गीय रोह��त वेमुला जी की मूर्ति के साथ उनकी माताजी हैं)
हमारा पढ़ा-लिखा भी EWS आरक्षण पर चुप था और उनका अनपढ़ भी UGC का विरोध कर रहा है!
बस यही अंतर है समाज के अगड़े और पिछड़े वर्ग में।
जागो बहुजन जागो!
#We_Support_UGC#We_support_UGC_Act