राजस्थान शिक्षा सेवा प्राध्यापक संघ (रेसला) के प्रदेश अध्यक्ष गिरधारी गोदारा और प्रदेश मुख्य महामंत्री डॉ अशोक जाट ने आज शिक्षा निदेशक और शिक्षा सचिव से मिलकर व्याख्याताओं की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर मुलाकात की।
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आज व्याख्याता पद पर पदोन्नति उपरांत भी काउंसलिंग कार्यक्रम बार बार स्थगित करने के कारण शिक्षा मंत्री @madandilawar जी के आवास पर शिक्षकों के प्रतिनिधिमण्डल के साथ मुलाकात कर काउंसलिंग कार्यक्रम जारी करने, सभी जिलों में रिक्त पद खोलने, भूगोल विषय में भी अन्य जिलों के पद खोलने सहित शीघ्र पदस्थापन की मांग रखी।
तत्पश्चात् शिक्षा निदेशक श्रीमान @AshishModiIAS जी से मिलकर भी सभी बिंदुओं पर चर्चा की। उम्मीद है 20 तारीख तक काउंसलिंग कार्यक्रम पुनः जारी हो जायेगा और बोर्ड परीक्षाओं से पहले नवीन पदस्थापन हो जायेगा।
विभाग में विभिन्न संवर्गो का यथास्थान पदस्थापन इस समय 21,000 से अधिक आंकडा पहुँच गया है, अतः विभाग को सभी काउंसलिंग कार्यक्रम जारी कर नवीन पदस्थापन शीघ्र करने होंगे, अन्यथा शिक्षकों में आक्रोश है। विद्यालयों में पद रिक्त है।
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शिक्षक संघों की हालत ए बयां..
MGGS पदस्थापन नही?
व्याख्याता काउंसलिंग नही?
प्रधानाचार्य काउंसलिंग नही?
DEO काउंसलिंग नही?
ट्रांसफर नही?
पदोन्नति समय पर नही?
आखिर शिक्षक संघों का काम क्या है जो इनके साथ शिक्षक जुड़े ?
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माननीय शिक्षा मंत्री @madandilawar जी से निवेदन है कि व्याख्याता के 10030 पदों पर डीपीसी के बाद काउंसलिंग पदस्थापन की प्रक्रिया में देरी उचित नहीं।
श्रीमान निदेशक महोदय @AshishModiIAS जी व्याख्याता काउंसलिंग शीघ्र करवाकर अनुगृहीत करें।
@PRESIDENTBKN2@madandilawar@AshishModiIAS कल आपकी प्रिंसिपल डीपीसी काउंसिलिंग पर निदेशक महोदय जी से बात हुई थी। तो लगे हाथ व्याख्याता डीपीसी काउंसिलिंग की भी बात कर लेते। जो काम पहले हुआ उसकी काउंसिलिंग पहले क्यों नहीं हुई।
@PRESIDENTBKN2 गिरधारी जी गोदारा आप रेसला प्रदेशाध्यक्ष होकर भी आज कल व्याख्याता हितों के बात नहीं कर पा रहे है हमेशा प्रधानाचार्य ,उपप्रधानाचार्य डीपीसी की ही बात करते है 10500 डीपीसी से बने नए व्याख्याताओं की बात नहीं करना , रेसला के लिए ठीक नहीं लग रहा।
नए व्याख्याता रेसला से नहीं जुड़ेगे
संघों द्वारा शिक्षकों की वाजिब मांगों को भी पूरा नहीं करवाया जाता है फलस्वरूप शिक्षकों में संघों के प्रति असंतोष उत्पन्न होता है अंततः नए संघ की मांग उठने लगती है।
स्वघोषित मठाधीश संघों को विचार करना चाहिए
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