गुर्जर नेता न�� दलितों से मांगी माफी।
उत्तराखंड के लंढौरा के गुर्जर राजपरिवार से संबंध रखने वाले चार बार के MLA कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने एक हफ्ता पहले दलितों पर जातिगत टिप्पणी की, धमकी दी और महिलाओं को रेप थ्रेट दिया।
हालांकि जब इन पर SC-ST Act के तहत FIR हुई तो सारी राजशाही निकल गई। पहले तो इन्होंने वायरल वीडियो को फेक बताया, लेकिन जब प्रदेश में आक्रोश फैला तो गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी तो राजा साहब अब दलितों से माफी मांग रहे हैं। वह BJP और कांग्रेस से विधायक रहे हैं।
यह संविधान का युग है, बाबू मोशाय। संविधान ने राजा-राजवाड़ों की राजशाही अकड़ खत्म कर दी है। ऐसे में आप भी समतावादी बन जाइए। सोशल मीडिया अच्छे-अच्छे बादशाहों को नतमस्तक करा देता है। आपने माफी मांगी है, यह अच्छी बात है, लेकिन दलित समाज की गरिमा, उनकी जान और महिलाओं का सम्मान बेमोल नहीं है। कानूनी कार्रवाई तो होगी ही। न्यायिक प्रक्रिया से गुजरिए और अपने अंदर बदलाव लाइए। दलितों को अपनी लड़ाई इसी तरह संवैधानिक रास्ते से लड़नी हैं। जाति का कमंडल अवश्य टूटेगा।
बहन जी AC में क्यों बैठी हैं?
2000 के आसपास की बात है। उस समय मैं अपने गांव के प्राइमरी स्कूल में पढ़ता था। उस समय जब भी कहीं चुनाव होता था, तो साथ पढ़ने वाले यादव बच्चे बहन जी को "चमारिन", काली *&#, जैसी कई जातिसूचक गालियां देते थे।
बहन जी के पोस्टरों पर गंदे-गंदे इशारे किए जाते, उनका नाम मुलायम सिंह के साथ जोड़कर अश्लील और जातिसूचक गालियां दी जातीं। मेरा गांव में कई जाति के लोग रहते हैं। गांव में चाय की दूक��न पर राजनीतिक चर्चा के नाम पर सभी गैर दलित समुदाय के सभ्य से सभ्य लोग ��ाय की चुस्कीयां लेते हुए बहन जी पर अपमानजनक टिप्पणियां करते और खूब ठहाके लगाते। ये वही लोग थे, जिन्हें हम सम्मान से चाचा, बाबा.. कहकर बुलाते थे। देश में PM इंदिरा गांधी सहित कई महिलाएं CM एवं बड़ी नेता रही हैं लेकिन कोई उन्हें गाली नहीं देता था। सिर्फ बहन जी से ही इतनी नफरत क्यों थी? सिर्फ इसलिए क्योंकि वह दलित हैं।
बुरा तो लगता था, लेकिन तब हम छोटे थे। उस समय मुझमें इतना भावबोध नहीं था, लेकिन इतना जरूर पता था कि वह हमारे समाज की नेता हैं। हमारे बाबा एक पुराना नीला झंडा लेकर बसपा की सभी मीटिंगों और रैलियों में जाते थे। गांव के कुछ बड़े लोग मान्यवर साहब और बहन जी के संघर्षों के बारे में बताते थे। बाबा अपने मिट्टी के घर पर बड़े गर्व से बसपा का झंडा लगाते थे। छोटी उम्र से ही हम सब उनका नाम सुनते ही एक खास अपनापन महसूस करते थे। जब गांव में बसपा का कोई नेता आने वाला होता, तो हम सब खुशी से नाचते हुए बहन जी के पोस्टर लगाया करते थे। रास्ते से साइकिल पर जाते हुए इन पोस्टरों को देखकर बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी ठहाके लगाकर मसखरी करते थे।
एक बार यादव समाज के लोगों ने गांव में होली मिलन समारोह रखा था। उसमें तूफानी सरोज भी आए थे। उनके सामने गायक ने मुलायम सिंह और बहन जी का नाम जोड़कर मंच से एक अभद्र गीत गाया, लेकिन तूफानी सरोज सुनकर मुस्कुराते रहे, जबकि वह स्वयं दलित ���ैं। आज उनकी बेटी प्रिया सरोज हमारे लोकसभा क्षेत्र मछलीशहर से सांसद हैं। गांव के दलितों ने जब इसका विरोध किया तो आयोजकों ने माफी मांगी और गायक से माइक बंद करवा दिया।
वहीं, 2007 में जब बसपा की सरकार बनी, तो लोगों के बोल बदल गए। प्रेम से नहीं, डर से। अब दलितों में स्वाभिमान आ गया था। गांव में जो लोग हमारे बुजुर्गों को "रे, बे, ते" कहकर और नाम बिगाड़कर बुलाते थे, वही लोग सम्मान से नाम लेने लगे। अब वही यादव समुदाय के लोग बात-बात पर हंसते हुए तंज कसते थे कि, "अरे भाई, अब तो आप लोगों की सरकार है।" हालांकि अब ऐसा सुनकर बहुत गर्व महसूस होता था। यह सिर्फ मेरे बचपन की कुछ बातें हैं जो मुझे याद हैं। छात्रजीवन और आज का अनुभव बताने के लिए पूरी किताब लिखनी होगी।
लेकिन यह सब मैं आपको क्यों बता रहा हूं? इसलिए कि आप समझ सकें कि बहन जी और बसपा ने समाज को दिया क्या है। जिस रीलबाजी और हवाबाजी को आप संघर्ष समझते हैं, अपने बाप-दादाओं का नहीं तो कम से कम अपने बचपन का दौर याद करो और सोचो कि बहन जी ने उस समय कितना संघर्ष किया होगा। नफरत का आलम यह था कि नन्हे-नन्हे बच्चे तक उन्हें जातिगत गालियां देते थे। यह वह दौर था, जब सोशल मीडिया छोड़िए, समाज के अधिकांश घरों में पुराना हैंडसेट भी नहीं था। तुम्हें बहन जी के AC से दिक्कत है, तो जरा ईमान से बताओ, क्या अखिलेश यादव और राहुल गांधी छप्पर और घास-फूस की झोपड़ी में रहते हैं? या फिर अमित शाह ने चंद्रशेखर आजाद के ��ाइप-8 बंगले में AC की जगह फर्राटा पंखा लगवाया है?
ऐसा नहीं है कि बसपा में कमियां नहीं हैं। बसपा में अनेक कमियां हैं। इन कमियों के बारे में हम खुलकर लिखते भी हैं। इसलिए कई बार बसपा समर्थक भी मेरे बारे में बहुत अभद्र भाषा लिखते हैं, लेकिन हम इग्नोर करते हैं। हालांकि मैं बसपा का सदस्य भी नहीं हूं, लेकिन बसपा हमारी पार्टी है। हमारा घर है। अतः इन कमियों को लेकर मैंने कई बार बसपा के कोऑर्डिनेटरों को आ��ाह भी किया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप बहन जी के त्याग को गाली दें और उनका अपमान करें। वह हमारी आदर्श हैं, गुरूर हैं, हिम्मत हैं और स्वाभिमान हैं।
बसपा की गलती बस इतनी है कि उसकी कोई IT सेल नहीं है। पदाधिकारियों का मानो सोशल मीडिया से छत्तीस का आंकड़ा है। बसपा आज AI के युग में भी 90 के दशक में जी रही है। जिस दिन पार्टी और उसके पदाधिकारी सोशल मीडिया का महत्व समझ जाएंगे और युवाओं से डायरेक्ट संप��्क बना लेंगे, उस दिन सारा पासा पलट जाएगा। उम्मीद है कि बहन जी एक दिन इस पर संज्ञान अवश्य लेंगी। बाकी बहन जी पर अनर्गल टिप्पणी करने वाले लोग या तो अबोध हैं या फिर मूर्ख। जिस दिन कभी शांति से बैठकर आत्मचिंतन करेंगे, उनका सारा भ्रम दूर हो जाएगा।
- सूरज कुमार बौद्ध
समाजवादी पार्टी के ���्रमुख एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान में सपा सांसद श्री अखिलेश यादव जी को आज उनके जन्मदिन पर उन्हें व उनके परिवार वालों को हार्दिक बधाई एवं उनके अच्छे जीवन व लम्बी उम्र की शुभकामनायें।
अयोध्या में श्रीराम मन्दिर से चढ़ावे की हुई चोरी, ग़बन व हेराफेरी आदि करने की मीडिया में आएदिन क़िस्म-क़िस्म की आ रही ख़बरें अति-गम्भीर व चिन्तनीय। ऐसे लोग क़तई भी बख़्शे नहीं जाने चाहिये, लेकिन इस मामले का राजनीतिकरण करना भी ठीक नहीं।
साथ ही, अब यहाँ मन्दिर में श्रद्धा के चढ़ावे आदि में आगे कोई भी शिकायत ना आये, इसके लिए देश के दूसरे विख्यात व प्रसिद्ध मन्दिरों में चढ़ावे आदि के हिसाब-किताब के लिए जो वहाँ व्यवस्था है तो उनका यहाँ अयोध्या में भी अनुशरण करके इस प्रकरण को जल्दी ही सुलझाना चाहिये तो यह उचित होगा।
इतना ही नहीं बल्कि देश में राजनीति का अपराधीकरण व अपराध का राजनीतिकरण तथा धर्म का राजनीतिकरण एवं राजनीति का अंध धर्मीकरण ना किया जाये तो यह सही व संवैधानिक होगा, ऐसी बी.एस.पी. की राजनीतिक पार्टियों को देश व जनहित में सलाह और साथ ही देशवासियों से भी यह अपील।
आज दिल्ली प्रदेश की समस्त जिला और विधानसभा प्रदेश की समीक्षा बैठक और कैडर कैम्प.दिल्ली में BSP के सारे पदाधिकारी मेहनत से लगे हैं पार्टी को पुनः खड़ा करने में. जय भीम जय भारत
@yadavakhilesh बताइए। बहनजी द्वारा उनके नाम पर विश्वविद्यालय बनाये गए शाहूजी महराज मेडिकल विश्वविद्यालय को पुनः किंग जार्ज में बदलने वालो तक को बधाई देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
आज छत्रपति राजर्षि शाहू जी महाराज की जयंती है, एक ऐसे महापुरुष क�� याद करने का दिन, जिन्होंने अपने समय से बहुत आगे की सोच रखी।
1902 में, जब देश का बड़ा हिस्सा जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता से जूझ रहा था, तब शाहू जी महाराज ने पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू कर यह साबित किया कि सत्ता का असली उद्देश्य समाज के आख़िरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी न्याय दिलाना होता है, न कि केवल कुछ लोगों के हितों की रक्षा करना।
मैं मानता हूँ कि हर पीढ़ी को बराबरी की लड़ाई अपने त���ीक़े से लड़नी होती है। शाहू जी महाराज ने अपन�� पीढ़ी की लड़ाई पूरी ईमानदारी से लड़ी। आज जब संविधान, आरक्षण और समान अवसर जैसे सवालों पर बहसें फिर से तेज़ हैं तो उनका जीवन हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र की ताक़त उसके सबसे ऊँचे पदों से नहीं, उसके सबसे आख़िरी नागरिक के साथ हुए व्यवहार से मापी जाती है।
आज सिर्फ़ श्रद्धांजलि देना काफ़ी नहीं है। उनके अधूरे काम को आगे बढ़ाना हर वंचित और पिछड़े व्यक्ति तक शिक्षा, सम्मान और बराबर अवसर पहुँचाना ह��� शाहू जी महाराज के लिए हमारी असली श्रद्धांजलि होगी।
छत्रपति राजर्षि शाहू जी महाराज को मेरा कोटि कोटि नमन।
उदयपुर। बहुजन समाज पार्टी जिला उदयपुर के तत्वावधान में जिला,विधानसभा स्तरीय संगठन समीक्षा एवं कैडर कैंप का आयोजन रामदेव मंदिर परिसर, रैगर मोहल्ला, सूरजपोल, उदयपुर में सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष, परम आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी (पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश एवं पूर्व सांसद) के निर्देशानुसार राजस्थान प्रदेश में संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने हेतु आवश्यक निर्देश दिए गए
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बहुजन समाज पार्टी राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष श्री सुमरत सिंह, अति विशिष्ट अतिथि के रूप में एडवोकेट जगदीश चंद्र पाल (लोकसभा जोन प्रभारी) एवं सी.पी. खटीक (प्रदेश सचिव) उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष श्री शिव कुमार गौतम ने की।
इस अवसर पर जगदीश बाबरिया, शंभू मौर्य, हामिनूर पठान, हजारीलाल रैगर, दिलीप रैगर, हरीश बारोलिया, प्रकाश वैष्णव, दलपत गरासिया, चंपाराम गरासिया, खेमराज कटारा, दुर्गाशंकर गमेती, कृष्ण कुमार गौतम, परसराम वैष्णव, होशियार सिंह, मांगीलाल सेन, निंबालाल भील, गणेश जी, किशनलाल रैगर, मांगीबाई, धापूब���ई एवं तारा बाई रैगर सहित अनेक कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मंच संचालन श्री सुरेश मेघवाल ने किया।
सामाजिक न्याय, शिक्षा और समानता के महान अग्रदूत, आरक्षण व्यवस्था के प्रणेता एवं बहुजन समाज के प्रेरणास्रोत परम पूज्य छत्रपति शाहूजी महाराज जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन!
लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में कई मासूम बच्चों के निधन तथा अनेक बच्चों के घायल होने की खबर अत्यंत दुःखद, हृदयविदारक एवं चिंताजनक है। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।
मेरी सरकार से मांग है कि मृतक बच्चों के परिजनों को उचित आर्थिक सहायता एवं घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही इस घटना की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु सभी शिक्षण संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
कुदरत शोक संतप्त परिवारों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें तथा ��ायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें।
#लखनऊ #Lucknow
बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा आमचुनाव की तैयारियों क��� मद्देनज़र जब से अपरकास्ट समाज और उसमें से ख़ासकर ब्राह्मण समाज को, उनके बी.एस.पी. में जुड़ने को ध्यान में रखकर, पार्टी का उम्मीदवार बनाना शुरू कर दिया है, तब से सभी विरोधी पार्टियों में व ख़ासकर समाजवादी पार्टी में उनकी नींद उड़ा देने वाली बेचैनी देखने को मिल रही है, जो कि सन् 2007 की तरह ब्राह्मण समाज के योगदान से बी.एस.पी को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जैसा ही इस बार के आगामी चुनाव परिणाम के रिपी��� होने की संभावना के तहत् स्वाभाविक ही प्रतीत होता है।
वैसे भी यह सर्वविदित है कि यूपी जैसे विशाल आबादी वाले प्रदेश में अपरकास्ट में से ख़ासकर ’ब्राह्मण समाज का हित बी.एस.पी. में ही सुरक्षित है’, जिस अपनी इस ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धान्त, नीयत व नीति को बहुजन समाज पार्टी ने पहले पार्टी स्तर पर अमल करके और फिर सरकार बनने पर भी उन्हें भरपूर आदर-सम्मान के साथ-साथ उन्हें हर स्तर पर पूरी-पूरी भा��ीदारी देकर यह साबित भी कर दिया है, जबकि दूसरी पार्टियों की सरकारों में इस वर्ग के लोग पिछले काफी समय से अपने आपको काफी उपेक्षित, असुरक्षित व ठगा हुआ भी महसूस कर रहे हैं।
इतना ही नहीं बल्कि ’ब्राह्मण समाज द्वारा सामाजिक भाईचारा के आधार पर बी.एस.पी. से जुड़ने की इनकी तैयारियों को ध्यान में रखकर इन्हें पार्टी उम्मीदवार बनाने की प्रक्रिया जारी है तथा इन्हें बी.एस.पी. की आयरन लेडी नेतृत्व पर पूरा यह यक़ीन भी है कि बी.एस.पी. की सरकार बनने पर उन्हें पहले की तरह ही हर स्तर पर भरपूर आदर-सम्मान ज़रूर ��िया जायेगा, जो कि इनकी वास्तविक चिन्ता व दूसरी पार्टियों से मुँह मोड़ने का कारण है।
इसके साथ ही, अपरकास्ट में से क्षत्रिय, वैश्य आदि व अन्य समाज के लोगों को भी उनकी बी.एस.पी. से जुड़ने की तैयारी अर्थात् ’जिसकी जितनी तैयारी उसकी उतनी भागीदारी’ के आधार पर चुनाव में उम्मीदवार भी ज़रूर बनाया जायेगा, जिसकी तैयारी हर स्तर पर लगातार जारी है।
बी.एस.पी., दूसरी पार्टियों की तरह कुछ लोगों को ’लॉलीपाप’ थ���ाने की संकीर्ण व स्वार्थ की राजनीति नहीं करती है बल्कि पूरे समाज के हित व कल्याण की चिन्ता करना अपना संवैधानिक कर्तव्य समझती है और इसीलिये बी.एस.पी. की नीति व कार्यक्रम जनहित व जनकल्याण तथा अपराध नियंत्रण व क़ानून व्यवस्था के मामले में भी देश व जनहित में बेहतरीन होते हैं।
यूपी की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेन्टर में आज दोपहर बाद हुई अग्निकाण्ड में अनेक लोगों की मौत तथा और भी कई लोगों के घायल हो जाने की घटना अति-दुखद। इस प्रकार की जानलेवा घटनायें दिल को दहलाने वाली होती हैं तथा कितने ही परिवार की उम्मीदों को बिखेर देती हैं। ऐसी दु���द घटनाओं की रोकथाम के लिये सबको मिलकर सही से काम करने की ज़रूरत है। सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप से काम नहीं चलेगा।
सभी साथियों से अपील: विरोधियों के किसी भी भ्रामक प्रचार या प्रायोजित षड्यंत्र का शिकार न हों। हमारा लक्ष्य साफ है—यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना और सर्वसमाज को न्याय दिलाना।
पूरी ताकत से अप��े मिशन में जुट जाइए। जीत हमारी ही होगी
जय भीम
बसपा चुनाव लड़ेगी ही। चुनाव के लिए पैसा चाहिए। उधोगपति सपा-आरजेडी-ममता-केजरीवाल-वामदल को दे देते है। बसपा कँहा से लाएगी? आसमान से टपकेंगे?
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सपा नेता लक्ष्मण यादव की एक क्लिप काफी मुझे भेजकर बता रहे है की बहनजी से मिलने के लिए 5 लाख रुपया व टिकट के लिए इतना देना पड़ेगा। सुबह से इसपर जवाब देने के लिए कई मैसेज व कॉल आ चुकी है।
मुझे इस क्लिप का सुबह पता लग गया। बार बार मित्रो की कॉल आ रही थी लेकिन में सुबह से Pay back to Society के अंतर्गत ऐसी एक छात्रा की फीस भरवाने में लगा हूँ जिसके पिता मान्यवर के साथ 1980 से जुड़े हुए है।। कुछ मदद एक बसपा नेता से ही करवाई थी, काफी रह गए। उंसके लिए आज सुबह से प्रयास कर रहा था क्योंकि उसके पिता अम्बेडकरवाद को फैलाने में उन्होंने पूरा जीवन दे दिया। 2018 में केस तक भी उनपर दर्ज हुआ व 2021 में उनका निधन हो गया। उनकी एक लड़की का अंतिम सेमेस्टर था। कई बार आग्रह किया। इसलिए उसमे ज्यादा इंटरेस्ट ले रहा हूँ।
अब मुद्दे पर आते है।
1.तो जनाब;
प्रश्न : पार्टी खड़ी करके चलाने के लिए सबसे ज्यादा क्या जरूरी है?
उत्तर : अगर वोट कह रहे है तो गलत है। सबसे ज्यादा जरूरी है "पैसा"
मेने देखा कि एक मामूली से पार्षद के चुनाव में 10 से 15 लाख रुपये खर्च होते है। इंहा तक कि पैसा इतना जरूरी है कि;
"केजरीवाल ने शुरू में ऑफर दिया कि वो उन लोगो के साथ लंच करेंगे जो उन्हें चन्दा देगा"
2.देश के 17% व उत्तर प्रदेश के 22% अनुसुचित जाति वर्ग को अपनी यह हैसियत देख लेनी चाहिए कि भारत के बड़े से बड़े या छोटे से छोटे उधोगपति ने भाजपा कोंग्रेस, से अलग सपा , आरजेडी, आम आदमी पार्टी, ममता तक को चन्दा दिया। इंहा तक कि वाम दलों तक को बांड के जरिये चन्दा दिया। लेकिन बसपा ही नही अन्य किसी दलित पार्टी को एक रुपया चन्दा नही दिया।
प्रश्न : क्यो?
उत्तर : क्योंकि वो नही चाहते कि जो कल तक खाट के पास खड़े होने की औकात नही रखते रहे वो राजनीति में अपने आप को बनाकर रखे। उधोगपति कौन है? एससी या एसटी समाज से नही बल्कि उन्ही प्रिविलेज क्लास से है जिन्होंने शोषण किया है। फिर वो चन्दा क्यो देंगे?
3.अब मान्यवर कांशीराम साहब ने एक वोट एक नोट का आह्वान किया। उन्हें पता था कि हमे कोई उधोगपति चन्दा नही देगा। इसलिए मान्यवर ने ग्ररीब जनता से चन्दा लेना शुरू किया। उंसके लिए कूपन जांरी किये गए।
4.मेरा भाई सुरेंद्र सिद्धार्थ 1982 से मान्यवर कांशीराम से जुड़े हुए थे। मेरे घर भी मान्यवर व बहनजी का एक बार आगमन हुआ। मेरा भाई नई दिल्ली के करोलबाग में जूते से जुड़े मैटीरियल लेने हर हफ्ते जाते थे। कई दुकान से खरीदकर मान्यवर के ऑफिस में इकट्ठा करते ओर फिर वापस सहरानपुर आ जाते। इस दौरान मान्यवर से बात होती तो सबसे पहला प्रश्न मान्यवर का होता कि गरीब समाज के लोगो स कितना चन्दा इकट्ठा हुआ। क्योंकि सन्गठन के लिए चन्दा जरूरी है। कई साल तक मेरा भाई मान्यवर से करोलबाग में मिलते रहे।
5.मान्यवर ने कूपन देने शुरू किए। पदाधिकारियो की जिम्मेदारी थी कि मान्यवर से जब भी मिले सबसे पहले कूपन से कितना इकट्ठा हुए उसका विवरण दे। फिर पदाधिकारी ��िसी नए व्यक्ति को लेकर आते और बताते की मान्यवर साहब इसे हमने जिम्मेदारी दी थी और इन्होंने पार्टी मूवमेंट के लिए इतना पैसा इकट्ठा किया।
6.अब जो क्लिप वायरल हो रही है उसमे प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल व लखनउ के एक कॉर्डिनेटर थोडा इस प्रकार कहते कि;
"पहले पार्टी के लिए चन्दा इकट्ठा करो। 5 लाख इकट्ठा करो। फिर बहनजी से मिलवाता हूँ व टिकट के लिए इतना आपको कूपन से इकट्ठा करना पड़ेगा, जिसके बाद ही पा��्टी आपको टिकट देगी"
तो ज्यादा सही रहता। लेकिन यह इतना बड़ा issue नही है। जिन्हें लग रहा है वो बताये की;..
"केजरीवाल ने मिलने के लिए डिनर डिप्लोमेसी क्यो करी। उसपर कितना ज्ञान दिया? बहनजी पार्टी के चुनाव लड़���े के लिए कँहा से पैसा लाएगी? केजरीवाल ने भी चुनाव लड़ने के लिए इसे करा, वो गलत नही लगा।"
7.इसलिए बिना पैसा चुनाव नही लड़ा जाता। सपा ने जया बच्चन को क्यो टिकट दिया? अम्बानी से सम्बन्ध क्यो अच्छे है? उत्तर है चुनाव के खर्च के लिए।
लेकिन लक्ष्मण यादव इसे नही बताएगा। वो नही बताएगा कि सपा व आरजेडी को उधोगपति क्यो चन्दा दे रहे है। वो एससी को बताएगा कि बहनजी पैसा मांग रही है।
8.बाकि;
"सुबह से 20 व्यक्त��ओ को कॉल मैसेज कर चुका हूँ। जिसमे 2 ने छात्रा की थोड़ी मदद करी। लेकिन 25 अनुसूचित जाति के व्यक्ति मुझसे कॉल मैसेज करके पूछ रहे है कि क्लिप वायरल हो रही है। इन 25 मे 22 ऐसे है जिन्होंने कभी भी कई बार कहने पर "Pay back to सोसाइटी" नही करी जबकिं अधिकारी तक है।"
विकास कुमार जाटव
@Mayawati
@AnandAkash_BSP
जैसाकि सर्वविदित है कि बी.एस.पी. देश में ’बहुजन समाज’ व अपरकास्ट समाज के ग़रीब शोषित-पीड़ित व उपेक्षितों द्वारा, उनके संवैधानिक हक़ व न्याय आदि के लिये परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के बताये रास्तों पर चलने वाली ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुख���य’ की सच्ची व ईमानदार अम्बेडकरवादी पार्टी है, जो दूसरी पार्टियों की तरह बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों के सहारे और उनके इशारे पर नहीं चलती है बल्कि अपने लोगों के ही तन, मन और धन के बलबूते पर चलती है, जो स्वाभाविक तौर पर संकीर्ण, जातिवादी, साम्प्रदायिक व पूंजीवादी ताक़तों को यह फुटी कौड़ी नहीं सुहाता है और इसी लिये वे समय-समय पर और ख़ासकर चुनाव के नज़दीक आने पर क़िस्म-क़िस्म के हथकण्डे इस��तेमाल करके बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट को तथा उसके आयरनलेडी नेतृत्व को भी बदनाम करने में लगे रहते हैं।
इसी क्रम में मीडिया के एक वर्ग द्वारा दूसरी पार्टियों की चुनावी जुगाड़ आदि पर से लोगों का ध्यान बाँटने तथा उन पर पर्दा डालने के लिये बी.एस.पी. पार्टी उम्मीदवार के चयन को लेकर सवालिया निशान खड़े करते रहते हैं, जबकि बी.एस.पी. को जो भी आर्थिक सहयोग हासिल होता है वह पार्टी उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने पर ही क़ानूनी तौर से ज़्यादातर ख़र्च कर दिया जाता है, जो किसी से भी छिपा हुआ नहीं है। फिर भी उसको लेकर षडयंत्र के तहत् गुमराह करने वाली तरह-तरह की ग़लत बातें व अफवाहें आदि फैलाना मीडिया को शोभा नहीं देता है।
इसके साथ ही यहाँ यह भी सर्वविदित है कि केवल बी.एस.पी. यूपी स्टेट यूनिट के अध्यक्ष श्री विश्वनाथ पाल ही नहीं बल्कि पार्टी के अन्य सभी छोटे-बड़े पदाधिकारी व कार्यकर्तागण भी इस समय प��र्टी संगठन की मज़बूती तथा पार्टी के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने के साथ-साथ आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव हेतु पार्टी उम्मीदवारों की संभावित सूची बनाने तथा उनकी ठोस स्क्रीनिग करने आदि में लगे हुये हैं और पार्टी की उम्मीदवारी को लेकर उनसे मिलने वालों से अन्य बातों के अलावा उनकी सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हैसियत के साथ ही उनके पार्टी के प्रति वफादारी व टिकाऊपन आदि को भाँपने के लिये, कोर्ट म���ं जिरह की तरह, उनसे तरह-तरह के सवाल-जवाब भी करते रहते हैं, जिसकी गहराई में गये बिना ही उसे उसके पूरे फेस वैल्यू पर अन्यथा लेना उचित नहीं है, यह मीडिया से भी अनुरोध है तथा पार्टी के लोगों से भी अपील है कि वे विरेाधी पार्टियों के ऐसे प्रायोजित किसी भी षडयंत्र का शिकार होकर गुमराह ना हों बल्कि अपने मिशन 2027 के लक्ष्य में पूरे जी-जान से लगे रहें, जिस बी.एस.पी ज़िन्दाबाद की आपकी जबरदस्त तैयारी को देखकर ��ी विरोधियों की नींद काफी उड़ी हुई है। जय भीम जय भारत।
बहुजन समाज पार्टी के तत्वाधान में आज पंजाब के जालंधर में समीक्षा बैठक की गयी. जिसमें जिले भर से आए सैकड़ों पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।बैठक के दौरान जिलों के पदाधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की संगठनात्मक गतिविधियों, जनसंपर्क अभियानो की समीक्षा भी कराई.जय भीम
आज दिनांक 10-06-2026 को आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी के निर्देशानुसार बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश कार्यालय,12 मॉल एवेन्यू लखनऊ में पिछड़ा वर्ग भाईचारा कमेटी की मासिक समीक्षा बैठक संपन्न हुई जिसमें शामिल हुआ।
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