Primeminister of India, Narendra Modi, would not take my question, I was not expecting him to.
Norway has the number one spot on the World Press Freedom Index, India is at 157th, competing with Palestine, Emirates & Cuba.
It is our job to question the powers we cooperate with.
Receiving loan calls every 15–20 mins from IDFC @IDFCFIRSTBank despite repeated requests to stop. This is harassment. Filed complaint via email (#1149946915). Stop all calls & add my number to DND immediately, as requested. Will escalate if unresolved.
@RBI
In this op-ed, @RattanRC, veteran @BSF_India commandant, writes how decades of #IPS-dominated, personality-driven mismanagement have choked promotions, broken morale, and quietly hollowed out the combat effectiveness of the #CAPFs.
Please have a look!
https://t.co/kuKce4GZG4
What an unfortunate time to be alive. We are watching nearly every conspiracy theory turn out to be true. And at the same time, what a wonderful time to be alive. We are witnessing the unmasking of things once thought unthinkable.
Ok this is literally the most insane, raw, brutal rap song every made
If Drake, Kendrick Lamar, Eminem, Kanye West, Travis Scott, Future, J. Cole, NBA YoungBoy, Playboi Carti, Lil Baby were asked to sing this rap, they would piss their pants
Big G Chris Webby
subs burnt by me
अब जब यह साबित हो चुका है कि सिर्फ बिहार ही नहीं, पूरा भारत ही जात-प्रधान है और जात-संचालित है, नया प्रश्न है कि सबसे ज्यादा गालियाँ कौन खाता है? प्रश्न का उत्तर सरल है- ब्राह्मण। कलकत्ते से मद्रास तक और पटना से दिल्ली तक, इन्हें बिना अपवाद सबसे अधिक गालिया��� दी जाती हैं। इन्हें गरियाने वाले हर विचारधारा, हर दल, हर आंदोलन, हर जाति में उपस्थित हैं। गालियाँ देने वालों के पास संभवत: कोई या कुछ तार्किक कारण हों, मुझे लेकिन दिखायी नहीं देते।
अभी बिहार चुनाव की बहार में जेएनयू छात्रसंघ चुनाव के परिणाम दब गये। इस बार चर्चा से ही गायब हो गया यह चुनाव। वाम और बौद्धिक धड़ा जेएनयू से अधिक न्यूयॉर्क को लेकर उत्साह में रहा। बाकियों को बिहार में पर्याप्त मसा��ा मिल जा रहा है। चुनाव से पहले, जब प्रचार अभियान जोरों पर था, मैंने सोशल मीडिया पर ही एक वीडियो देखा। एक कन्या बड़ी मुखरता से ब्राह्मणों को गरियाये जा रही थी। कन्या के बारे में थोड़ा जानने का प्रयास किये तो नाम मिला- अदिति मिश्रा। मैं ‘‘मिश्रा’’ पर अटक गया। अदिति अब देश के सबसे प्रतिष्ठित छात्रसंघों में एक की अध्यक्ष बन चुकी हैं। उनके नेतृत्व में वाम मोर्चे ने पुन: अपने किले को मजबूत किया है औ��� दक्षिण-मध्य का सूपड़ा साफ कर दिया है। लेकिन वीडियो ने मुझे सोच में डाल दिया। मैं सोचने लगा कि इसका कारण क्या हो सकता है?
यह बात आगे बढ़ायें, उससे पहले कुछ समझने वाली बात कर लेते हैं। ब्राह्मण और ब्राह्मणवाद की बात। ब्राह्मण का मतलब हमारे मगह में पंडीजी। देश के बाकी हिस्से में ब्राह्मणों को बाभन भी कहा जाता है, लेकिन बिहार में बाभन का मतलब भूमिहार होता है। यहाँ ब्राह्मण मने पंडीजी या पंडितज��। बाकी जगहों पर बाभन के अतिरिक्त पुरोहित भी पर्याय है। ब्राह्मणवाद का मतलब हुआ श्रेष्ठतावाद। करीब एक दशक पहले मैंने इसे कुछ इस तरह पारिभाषित किया था- महानता या वर्चस्व की स्वघोषणा ब्राह्मणवाद है। हजार-दस हजार साल पहले यदि ऐसा कुछ रहा हो तो नहीं कह सकते, लेकिन इधर के पचास-सौ साल में तो ऐसा करता ब्राह्मण दिखायी नहीं देता। जबकि चाहता तो बड़े आराम से कर सकता था। अभी भी कर सकता है। लेकिन वह नहीं क��ता। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में नेतृत्व सबसे अधिक ब्राह्मणों ने किया। तिलक से नेहरू तक। सभी दलों और विचारधाराओं का नेतृत्व ब्राह्मणों के पास रहा। कांग्रेस में नेहरू का नाम ले ही चुके हैं। दक्खिन में भाजपा और संघ को खड़ा किया ब्राह्मणों ने। वाम में नंबूदरिपाद से सोमनाथ चटर्जी तक सबसे बड़े नेता ब्राह्मण ही मिलते हैं। ये चाहते तो वास्तव में ब्राह्मणवाद की स्थिति बना सकते थे। लेकिन ऐसा न तो दक्खिन वालों ने किया, न मध्य वालों ने और न ही वाम वालों ने। न तो इन्होंने अपनी महानता की स्वघोषणा की, न ही नेतृत्व को अपनी जात के लिए आरक्षित।
इसका कारण अबूझ नहीं है। पूरे देश के किसी भी हिस्से में आप जायें, सबसे कम जातिवाद आपको इसी समाज में मिलेगा। एकदम ताजा उदाहरण बिहार की राजनीति से ले सकते हैं। इस चुनाव में एक नया विकल्प सामने आया। विकल्प लेकर आये प्रशांत किशोर। हालाँकि विकल्प कहे जाने लायक विकल्प वह बना नहीं पाये। गिनी-चुनी सीटों पर उनकी पार्टी और उनके प्रत्याशी मतदाताओं के लिए शीर्ष दो विकल्पों में पहुँच पाये। बिहार में हाल ही में जाति समीक्षा हुई। उसके हिसाब से बिहार में ब्राह्मणों की आबादी सवर्णों (लालूजी के हिसाब से भूराबाल) में सबसे अधिक है। पासवान और मुसहर जैसी जातियों की आबादी लगभग ब्राह्मणों के बराबर ही है। 19-20 का ही अंतर है। लेकिन प्रशांत किशोर चुनावों में जीत-ह���र प्रभावित करने वाले नेताओं में चिराग पासवान या जीतनराम मांझी से पीछे रह जाते हैं। चिराग सभी पासवानों के लगभग अधिकृत नेता हैं और मांझीजी सभी मुसहरों के, लेकिन प्रशांत किशोर कभी भी ब्राह्मणों के सर्वमान्य नेता नहीं बन सकते हैं। उनके साथ जो वोट जुड़े हैं, उनमें ब्राह्मण नगण्य हैं। अभी पटना के गाँधी मैदान में शक्तिप्रदर्शन की अहर्ता रख दी जाये तो मुकेश सहनी भी प्रशांत किशोर से अधिक भीड़ जुट��कर ज्यादा बड़े नेता साबित हो सकते हैं। इसका भी कारण है। ब्राह्मण सदा से बुद्धि वाला वर्ग रहा है। वेदों की वर्ग व्यवस्था में ब्राह्मण होने की अहर्ता ही बुद्धि रखी गयी थी। कालांतर में जब वर्ग व्यवस्था ने वर्ण व्यवस्था का रूप ले लिया, तब भी इस समाज ने बुद्धि का अभ्यास बंद नहीं किया। सदा सबसे अधिक अभ्यास करते रहा, इसी कारण प्रतिभा आधारित हर परिवर्तन में सबसे अधिक लाभान्वित हुआ।
The phrase "Hindi-Chini Bhai Bhai" (Indians and Chinese are brothers) was championed by India's first Prime Minister, Jawaharlal Nehru, in the 1950s as part of a diplomatic effort to strengthen ties with China. However, this sentiment was shattered by the Sino-Indian War of 1962, during which China launched a military offensive against India, seizing territory in Aksai Chin and betraying the spirit of peaceful coexistence outlined in the Panchsheel Agreement.
The Indian leader was Jawaharlal Nehru, who promoted "Hindi-Chini Bhai Bhai" (Indians and Chinese are brothers) in the 1950s to foster friendship with China. The betrayal refers to the 1962 Sino-Indian War, when China attacked India over border disputes, shattering the earlier trust and diplomatic efforts like the 1954 Panchsheel Agreement.
Summary: Nehru advocated "Hindi-Chini Bhai Bhai" but was betrayed by China in the 1962 war. https://t.co/pqlzSn8SPf
The US indictment against Adani for alleged bribery is likely to snowball.
According to the five-count indictment, the alleged bribery involved Indian state electricity distribution companies that entered into power supply agreements with Adani through the state-owned Solar Energy Corporation of India (SECI).
#Adani #Bribery #Indictment
इतनी बैचैनी यूँ है भाई !
#TheBottomLine
The September quarter of FY25 marked the second consecutive three-month period of single-digit net profit growth for Nifty 50 companies says MOFSL report.
Consumption has been a weak point, and some segments of BFSI face asset-quality challenges.
Additionally, reduced government spending has contributed to lower earnings.
@AmarUjalaNews