यह गांधी-नेहरू परिवार है...!
'संघी गैंग' जिसे सरदार पटेल ने 'कानाफूसी गैंग' कहा था—गांधी परिवार की विश्वसनीयता पर शक पैदा करने के लिए हर जगह झूठ फैला रहा था। उनका दावा था कि सोनिया गांधी एक विदेशी एजेंट थीं, जिन्होंने इंदिरा गांधी को खत्म कर दिया और अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए राजीव को सत्ता में लाईं; फिर भी, जब राजीव ने उनके कहने पर काम करने से इनकार कर दिया, तो उन्होंने उन्हें भी हटवा दिया। अब रास्ता साफ था: हत्या 21 मई, 1991 को हुई, और ठीक एक दिन बाद, 22 मई को कांग्रेस कमेटी ने सर्वसम्मति से उन्हें पार्टी अध्यक्ष घोषित कर दिया। लेकिन फिर, एक हैरानी भरी बात हुई—
उन्होंने यह पद स्वीकार करने से इनकार कर दिया और इसके बजाय राजनीति से संन्यास की घोषणा कर दी। वह अपने पति की मौत से बुरी तरह टूट गई थीं, फिर भी हैरानी होती है कि कोई अपना मकसद इतनी आसानी से कैसे छोड़ सकता है। उस 'विदेशी महिला' को एक भारतीय महिला से सीखना चाहिए था, जिन्होंने अपने पति की चिता की राख ठंडी होने से पहले ही उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। सोनिया के पास सीधे प्रधानमंत्री बनने का मौका था; उनके साथ जनता की सहानुभूति की लहर थी—ऐसा मौका शायद ही कभी मिलता है। अगर वह आगे बढ़तीं, तो भारी जीत और प्रधानमंत्री पद उन्हें मिल जाता। इसके बजाय, वह पूरी तरह से राजनीति से दूर हो गईं; हालांकि कांग्रेस की सरकार बनी, लेकिन गांधी परिवार का कोई भी सदस्य उसमें शामिल नहीं था।
जैसे-जैसे समय बीतता गया, वरिष्ठ नेता दूर होते गए और पार्टी कमजोर होने लगी। दो-तीन साल तक कांग्रेस नेताओं ने उन पर पार्टी की कमान संभालने के लिए भारी दबाव डाला, और आखिरकार, वह मान गईं। लगभग आठ साल बाद, वह पार्टी में लौटीं, उसकी अध्यक्ष बनीं, और—अटल बिहारी को हराने के बाद—प्रधानमंत्री पद की दावेदार के रूप में उभरीं। अब कोई बाधा नहीं बची थी, फिर भी 'संघियों' से प्रभावित लोगों ने उनके विदेशी मूल का मुद्दा उठाया। उन्होंने राष्ट्रपति को ईमेल भेजे और कानूनी अड़चनें पैदा कीं। राष्ट्रपति पर भारी दबाव डाला गया कि वह किसी भी कीमत पर उन्हें पद की शपथ न दिलाएं; हालांकि, राष्ट्रपति कानून से बंधे थे और उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था। नतीजतन, उन्होंने सोनिया गांधी को नियुक्ति पत्र जारी किया, जिसमें कहा गया कि जब भी वह शपथ लेना चाहें, राष्ट्रपति भवन तैयार है।
अब रास्ता पूरी तरह साफ था, कोई अड़चन नहीं बची थी—फिर भी, वह कुर्बानी देने के लिए तैयार थीं। जब डॉ. मनमोहन सिंह का नाम आगे बढ़ाया गया, तो राष्ट्रपति को नियुक्ति का नया पत्र जारी करना पड़ा। राष्ट्रपति के नियुक्ति पत्र का मतलब साफ़ था—कोई कानूनी अड़चन नहीं थी—तो फिर उन्होंने ऐसा क्यों किया? पाँच साल बीत गए; उनके बेटे राहुल गांधी ने युवाओं को एकजुट करने के लिए दिन-रात मेहनत की। चुनाव हुए और एक बार फिर पूरा मौका था; खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "या तो आप या राहुल यह पद संभालें; मेरी ज़िम्मेदारी पूरी हो गई है," फिर भी उन्होंने उन्हें ही दोबारा प्रधानमंत्री बनाया।
अब, 'संघी गैंग' खुद उलझन में है। कोई व्यक्ति—ऐसे देश में जहाँ गाँव के सरपंच के चुनाव पर भी बंदूकें निकल आती हैं—प्रधानमंत्री बनने का साफ़ मौका तीन बार कैसे ठुकरा सकता है? कोई महिला तीन अलग-अलग मौकों पर प्रधानमंत्री का पद कैसे ठुकरा सकती है? जहां तुम स्वार्थी सत्ता के लिए विधायक सांसद नेता खरीदते रह जाते हो।
तो सुनो, 'शाखा गैंग' के कानाफूसी करने वालों: यह एक त्याग है—गांधी परिवार का इस देश के लिए किया गया त्याग—जिसे आप कभी नहीं समझ पाएंगे। आप सत्ता की कुर्सी के लिए लड़ते रहिए, लेकिन मेरी बात याद रखिएगा: एक दिन वह कुर्सी खुद-ब-खुद उनके पास आएगी, और तब भी वे कुर्सी से ज़्यादा देश को प्राथमिकता देंगे।
#Gandhi #Nehru
@RahulGandhi@priyankagandhi@INCIndia
बेहयाई, आत्मसमर्पण और देश के स्वाभिमान को अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प के चरणों में गिरवी रखनेवाले मोदी जी सिर्फ खी खी करके अपनी शर्मिंदगी छुपा सकते है पर जनता अब समझ रही है कि देश ग़लत हाथों में है
नरेंद्र मोदी अपनी विदेश यात्रा में ट्रंप से मिलने वाले हैं।
जब वे ट्रंप से मिलेंगे तो उनके बीच की केमिस्ट्री बताई जाएगी, My Friend Trump कहा जाएगा, लेकिन मेरे मन में एक सवाल आता है कि क्या नरेंद्र मोदी, ट्रंप से हाथ मिलाएंगे?
ऐसा इसलिए क्योंकि जब पहलगाम का नरसंहार हुआ था, तब भारत-पाक के मैच को जस्टिफाई करने के लिए भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया था।
उस समय पाकिस्तान हत्यारा था- आज अमेरिका हत्यारा है।
ट्रंप की सेना ने हमारे लोगों की हत्या कर दी, लेकिन मोदी सरकार ने क्या किया?
⦿ क्या हमने किसी भी इंटरनेशनल फोरम में कहा कि इस मामले की जांच हो
⦿ क्या हमने सार्वजनिक रूप से कड़े शब्दों में कहा है कि अमेरिका ने गलत किया है
⦿ क्या हमने ये कहा कि अमेरिका ने नियमों का उल्लंघन किया है
⦿ क्या हमारे देश के लोगों को ये आश्वासन दिया गया है कि ऐसी हत्याएं दोबारा नहीं होंगी
नरेंद्र मोदी की सरकार ऐसा कुछ भी नहीं कर पाई। बड़ी ही दबी जुबान में किंतु-परंतु करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 13 जून को अमेरिकी Chargé d'Affaires को तलब किया, जो एक रूटीन Diplomatic Exercise है।
इसके बाद जयशंकर जी ने मीडिया के सामने बयान दिया कि हमने अमेरिका के सामने आपत्ति जताई है और कहा है कि ये हत्याएं जायज नहीं हैं।
लेकिन कुछ ही देर बाद अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो का बयान आता है, जिसने नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की बखिया उधेड़ दी और देश को शर्मसार किया।
अपने बयान में अमेरिका ने माफी या शोक व्यक्त करने के बदले हमें ही धमका दिया और हत्याओं को जायज ठहराया। साथ ही कहा कि अगली बार अगर हमारा आदेश नहीं माना तो फिर ऐसा होगा।
अब एस. जयशंकर और मार्को रुबियो में कोई एक ही व्यक्ति सच बोल रहा है, जिसमें लगता है कि मार्को रुबियो की बात सच है, क्योंकि अभी तक मोदी सरकार ने उसकी बात का खंडन नहीं किया है।
अमेरिका हमारे लोगों को मार देता है और नरेंद्र मोदी कुछ भी नहीं बोलते- जाने मोदी सरकार को अमेरिका से डर क्यों लगता है?
: AICC-सोशल मीडिया व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चेयरपर्सन @SupriyaShrinate जी
📍 दिल्ली
गुजरात मॉडल का सच 👇
दाहोद के खरवाणी में 4,000 लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। गांव वाले जिस गड्ढे से पानी भरते हैं, उसी में जानवर भी पानी पीते हैं।
मोदी 'हर घर नल से जल' का नारा देते हैं, लेकिन जिस गुजरात में 31 साल से BJP की सरकार है, वहां लोग पानी को तरस रहे हैं।
शर्मनाक!
आप कितनी भी बड़ी तोप क्यों न हों, लोग सवाल तो पूछेंगे!
Chief justice of India Suryakant was in London.
This is what happened yesterday at Birkbeck University of London.
सौहार्द की तस्वीर यूपी की है।
यूपी: ये हैं इश्हाक साहब। इनके दोस्त का नाम है मुरलीधर तिवारी। मुरलीधर किसी काम से बाजार के लिए निकले थे, रास्ते में 86 साल के मुरलीधर को चोट लग गई। मुरलीधर हिम्मत करके कुछ दूर आगे बढ़े और फिर सड़क पर गिर पड़े और अचेत हो गए।
लोग तमाशबीन बने थे, तभी ख़बर इश्हाक तक पहुंची। इश्हाक मौके पर पहुंचे और मुरलीधर तिवारी को अस्पताल ले आये और इलाज करवाया।
अस्पताल से वापस लौटे तो इश्हाक साहब ने मुरलीधर के पैरों में अपने हाथों से चप्पल पहनाए।
हिन्दू मुस्लिम एकता की इस तस्वीर को जिसने भी देखा कह उठा यही है असली हिंदुस्तान और हिंदुस्तान की संस्कृति। ये ख़बर महोबा ज़िले की है।
💔🇵🇸 गाजा का एक अनाथ बच्चा खंडहरों के बीच नंगे पैर चल रहा है।
🇮🇱अगर कोई आईडीएफ सैनिक उसे देख लेता, तो वह उसे गोली मार देता।
क्या इसे 10000 बार रीपोस्ट कर सकता है गाजा की आवाज़ बुलंद करें.!💔🖐️
कांग्रेस के लिए लड़ रहे मजबूत सिपाही पवन खेड़ा के लिए इस हैशटैग पर सभी लोग पोस्ट जरूर करें।
कांग्रेस का सिपाही , पवन खेड़ा भाई 🔥🔥🔥
अगर पोस्ट नहीं कर सकते तो आरटी करके इसे आगे बढ़ायें।
#SachKaSathiPawanKheda
जितनी नेतन्याहू के खिलाफ मेरे मन में नफरत बढ़ती जाती है उतना ही मैं पवन खेड़ा जी @Pawankhera के इस वीडियो को सुनता हूं। पहले दो बार सुनता था आज सुबह से 7 बार सुन चुका हूं।
यकीनन मोदी को फादरलैंड नहीं कहना था उस हत्यारे देश को। पूरी दुनिया में थू थू हो रही है। जापान ने द्वितीय विश्वयुद्ध में हिटलर का साथ दिया था लेकिन उसे फादरलैंड तो नहीं कहा था।
पवन खेड़ा जी के शब्दों को सुनिए, बिल्कुल यही जज्बात, यही गुस्सा आज हर एक हिंदुस्तानी के मन में है।
ईरान ने असल में एक अमेरिकी पत्रकार को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से रिपोर्ट करने की इजाज़त दी, क्योंकि
अमेरिका को इस बात पर यकीन नहीं था कि ईरान SoH पर हावी है।
उसने जो देखा, वह चौंकाने वाला था 🚨
"ईरान 🇮🇷 ने एक नई वैश्विक आर्थिक व्यवस्था स्थापित की है। वे उन जहाज़ों को रोक रहे हैं जो अमेरिकी डॉलर में तेल का लेन-देन कर रहे हैं।" 🔥
इस घिनौनी जन विरोधी सरकार की चूले हिलाना ज़रूरी है।यह सरकार और इसका मुखिया सत्ता के मद में इतना चूर है कि विवेकशून्य हो चुका है।इनको सबक एक बड़े जनआंदोलन से ही सिखाया जा सकता है।आगे बढ़िए राहुलजी देश के युवा किसान ग़रीब दलित पिछड़े अल्पसंख्यक आशा भरी निगाह से आपकी राह देख रहे है।
मोदी जी, आप शर्म की बात करते हो? शर्म की बात मैं आपको बताता हूं।
Epstein files में आपका, आपके मंत्री और आपके मित्र का साथ में नाम आना, ऐसे घिनौने अपराधी के साथ आपका नाम जुड़ा होना - ये शर्म की बात है।
आपने अमेरिका के साथ जो Trade deal की है, जिसमें आपने देश को बेच दिया - ये शर्म की बात है।
हमारे देश का डेटा दे दिया।
किसानों को खत्म कर दिया।
टेक्सटाइल इंडस्ट्री बर्बाद कर दिया - ये शर्म की बात है।
पूरा देश जानता है, अडानी पर अमेरिका में चल रहे केस ने आपकी रातों की नींद उड़ा रखी है - क्योंकि वो BJP और आपके फाइनेंशियल आर्किटेक्चर पर केस है। 14 महीनों से उसपर कोई कार्रवाई नहीं हुई - ये शर्म की बात है।
मोदी जी, आप अपने मित्रों अनिल अंबानी, अडानी और अपने लिए जो उचित समझें, वो कीजिए।
मैं और कांग्रेस पार्टी के बब्बर शेर देश की रक्षा करते रहेंगे - एक इंच पीछे नहीं हटेंगे।