1. यूपीआई डिजिटल लेनदेन को पहले ख़ूब बढ़ावा देने के बाद अब सरकार द्वारा उस लेनदेन पर शुल्क वसूलने की नई व्यवस्था लोगों की नज़र में प्रथमदृष्टया मुनाफाख़ोरी के पूंजीवादी रवैये के तहत जनता से दोनों हाथों से टैक्स वसूली है, जिससे जनता में बेचैनी व आक्रोश स्वाभाविक है।
2. वैसे तो जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की इस व्यवस्था को ’कर’ मानने को तैयार नहीं है, किन्तु दिनांक 15 अक्तूबर से लागू हाने वाली इस व्यवस्था को चाहे जो भी नाम दिया जाये जेब तो अन्ततः आमजनता की ही कटेगी, उसका ही ख़र्च बढ़ेगा।
3. साथ ही, यह भी सर्वविदित है कि देश की बहुसंख्यक जनता अपार ग़रीबी व ज़बरदस्त महंगाई आदि की मार से त्रस्त है व उनके बच्चे अशिक्षा, बेरोज़गारी व अव्यवस्था आदि से पीड़ित हैं, ऐसे में सरकार की नीति व कार्ययोजना लाभ कमाने वाली व्यावसायिक कम व कल्याणकारी ज़्यादा हो तो यह उचित होगा। जनता की तंगी, दुख-तकलीफ की अगर सरकार चिन्ता नहीं करेगी तो फिर कौन करेगा?
4. इसके साथ ही, यूपी सरकार द्वारा करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश के कीरब 14,500 स्कूलों को ’स्मार्ट स्कूल’ बनाने की घोषणा अच्छी बात है, लेकिन बच्चों को कथित ’स्मार्ट पढ़ाई’ से पहले उन्हें बुनियादी शिक्षा आदि की ज़रूरतें अर्थात स्कूली बच्चों के सर पर छत, उनके लिये बेंच, कुर्सी, किताब, शौचालय, मैदान, साफ-सफाई आदि की सही व्यवस्था पूरी की जायें और यह सब प्रति स्कूल क़रीब दो लाख रुपये में क्या संभव हो पायेगा, इस पर भी सरकार सहानुभूतिपूर्वक ज़रूर विचार करे।
1. राजस्थान में हुये निकाय चुनाव में बी.एस.पी. ने भी इस बार 19 सीटों पर अपने पार्षद जिताकर भेजे हैं और काफी उम्मीदवार सरकारी मशीनरी की गड़बड़ी की वजह से दोबारा गिनती में ज़बरदस्ती थोड़े-थोड़े वोटों के अन्तर से हरा दिये गये हैं, वरना पार्टी का यहाँ और भी अच्छा रिज़ल्ट आ सकता था। इसके लिए पार्टी ने बी.एस.पी. के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें दी हैं।
2. हालाँकि इससे पहले पंजाब सहित देश के कुछ और राज्यों में भी जो स्थानीय निकाय के चुनाव हुये हैं, तो वहाँ भी पार्टी का पहले से अच्छा नतीजा आया है और वे भी बधाई के पात्र हैं।
3. उम्मीद है कि अब वहाँ आगे होने वाले विधानसभा आमचनाव में व देश में लोकसभा आमचुनाव में भी वे सभी लोग अपनी पार्टी का बेहतर रिज़ल्ट ज़रूर लायेंगे।
ओड़िशा प्रदेश का ख़ासकर पश्चिम और दक्षिण ओड़िशा क्षेत्र के गणपर्व ‘‘नूआ खाइ तिहार‘‘ के अवसर पर मैं सभी जनसाधारण का प्रकृति से सुख, समृद्धि कामना करने के साथ-साथ सभी को नूआ जुहार करती हूँ।
बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आदरणीय श्री सतीश चन्द्र मिश्रा जी को वकालत के क्षेत्र में 50 वर्ष पूर्ण करने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
कोर्ट से लेकर संसद तक दलित, शोषित और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए उनका निरंतर कार्य, विशेषकर दृष्टिबाधित एवं दिव्यांगजनों की शिक्षा और अधिकारों के लिए उनका योगदान, हम सभी के लिए महत्वपूर्ण है।
एक युवा कार्यकर्ता के रूप में उनके लंबे अनुभव और सार्वजनिक जीवन से बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
श्री सतीश मिश्रा जी को स्वस्थ एवं सक्रिय जीवन की शुभकामनाएं।
80वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं ढेरों शुभकामनाएं।
आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम केवल आज़ादी का उत्सव न मनाएँ, बल्कि एक मजबूत संकल्प भी लें, संविधान को मजबूत करेंगे, हर गरीब, शोषित, वंचित एवं कमजोर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करेंगे और लोकतंत्र को दो दलों की जागीर नहीं बनने देंगे।
भारत का भविष्य हमारे युवाओं के हाथों में है। इसलिए हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए, कि हर युवा को शिक्षा, समान अवसर, कौशल और अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने का अधिकार मिले।
जय भीम, जय भारत
@Mayawati bsp apne lakshya se bhatak gyi hai ab iska last downfall
Iske bsp ka history m hi padhne ko milega wo bhi ek line m finish bsp by mayawati ji
@Neeraj_Bhawanii Behan ji bhujan samaj k umiido ki what lga diya ab bsp ko khatm krne m Behan ji hi jemedar hai bhujan samaj jisko devi manta tha ab usko vilaain manne lga hai jai bhim jai bharat
1. दक्षिण दिल्ली के पाँच मंज़िला पीजी हास्टल के ढहने से 5 लोगों की हुई मौत तथा मध्य प्रदेश के सागर ज़िला में भी ज़हरीली शराब पीने से 18 लोगों की कल हुई मौत व लगभग 190 बीमार लोगों के अस्पताल में इलाज के लिये दाख़िल होने की घटना एवं यूपी व बिहार आदि राज्यों में बाढ़ के कारण जान-माल की तबाही की ख़बरें अति-दुखद व चिन्तनीय।
2. इन घटनाओं से यह साबित होता है कि शासन-प्रशासन अपनी ज़िम्मेदारियों को सही से नहीं निभा रहा है, जिस कारण जनहित व जनकल्याण के सम्बंध में सरकारों को चुस्त-दुरुस्त होने की सख़्त ज़रूरत है। इस प्रकार से अधिकारियों की घातक होती जा रही लापरवाही, उदासीनता व भ्रष्टाचार आदि पर भी सरकारों को सख़्ती से लगाम लगाने की ज़रूरत।
1. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर अर्थात जीडीपी ग्रोथ के सरकारी दावे को लेकर ज़बरदस्त बहस छिड़ी हुई है, और देश में ख़ासकर अति-महंगाई, अपार ग़रीबी, बेरोज़गारी आदि की मार से पीड़ित आमजनता अचंभित भी है कि वह किस पर भरोसा करे और किस पर ना करे।
2. वैसे इसके सम्बंध में सरकार के आसमान छूते दावे को प्रथम दृष्टया मान लिया जाये तो यह अच्छी बात होगी, किन्तु अगर यह जुगाड़ के आँकड़े हैं तो यह चिन्ता की बात ज़रूर है। इसीलिये जनता में उम्मीद जगाने हेतु सरकार को विश्वसनीय ढंग से यह ज़रूर बताना चाहिये कि इस उच्च विकास दर का क्या लाभ देश की करोड़ों ग़रीब मेहनतकश जनता को मिला है और आगे में इसका क्या लाभ होगा।
3. इतना ही नहीं बल्कि यह मुद्दा आमजनहित से जुड़ा होने के कारण विकास के आँकड़े व दावे दोधारी तलवार की तरह हैं। इसीलिये उन्हें ज़मीनी हक़ीक़त से भी ज़्यादातर आँका जाता है अर्थात् विकास वही सही व उपयोगी जो जनता को भाये यानी जनता के जीवन में समतामूलक परिवर्तन लाये और लोग ख़ुश व खुशहाल बनें।
4. अतः जीडीपी ग्रोथ के आँकड़े व दावे आदि अपनी जगह है, लेकिन विकास की असल हक़दार देश की करोड़ों मेहनतकश जनता को भी इसका लाभ मिलना और उसे इसका महसूस होना भी देश व जनहित में ज़रूरी है, वरना यहाँ के लगभग 140 करोड़ लोग ’धनवान सरकार की ग़रीब जनता’ होने का बोझ लगातार ढोती रहेगी। देश का विकास तभी ’अच्छे दिन’ वाला होगा जब यहाँ की करोड़ों बहुजन मेहनतकश जनता ग़रीबी, बेरोज़गारी व भ्रष्टाचार आदि से मुक्त आत्म-सम्मान का थोड़ा सुखी जीवन जीने योग्य बनेगी।
5. इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों का दोगुना तक मानदेय बढ़ाने तथा 20 लाख लागों को सुरक्षा कवर आदि यूपी आउटसोर्स सेवा निगम की स्थापना के माध्यम से देने के फैसले से कहीं बेहतर होता लोगों को सीधे तौर पर सरकारी नौकरी देना, ताकि यह व्यवस्था अफसरशाही की मनमानी, भ्रष्टाचार एवं शोषण आदि की जंजाल से मुक्त हो।
1. ज़िला सहारनपुर की मस्जिद सहित पूरे उत्तर प्रदेश में आएदिन मस्जिदों को काफी आपाधापी में अवैध बताकर उनको ध्वस्त करने का जो सरकारी अभियान चल रहा है वह ठीक नहीं है तथा सरकार को ऐसे निगेटिव हालात से बचने के लिये इस पर तुरन्त रोक लगाकर इसके समाधान के अन्य उपाय ज़रूर करने चाहिये।
2. वैसे भी एक संवैधानिक सेक्युलर सरकार द्वारा सभी धर्मों के मानने वालों एवं उनके धार्मिक स्थलों आदि का एक समान आदर-सम्मान व उनकी सुरक्षा करने का उत्तरदायित्व बनता है। इस्लाम मज़हब में मस्जिदें हर दिन इबादत बल्कि दिन में कई बार जमात के साथ नमाज़ पढ़ने का मुख्य व अभिन्न अंग हैं, जिसको ध्यान में रखकर व भारतीय परम्परा के अनुसार सम्मान देना देश व व्यापक जनहित में ज़रूरी है।
3. इसके साथ ही, बिना नियम-क़ानून का समुचित अनुपालन किये हुये किसी भी अभियुक्त का मकान ध्वस्त करके उसके पूरे परिवार को सामूहिक तौर पर सज़ा देकर बेघर बार कर देने की कार्रवाईयों से भी लोग काफी विचलित हैं। ऐसे में बी.एस.पी सरकार की तरह का ’क़ानून द्वारा क़ानून का राज’ का व्यवहार ज़रूरी है।
4. अतः केवल सरकार ही नहीं बल्कि माननीय न्यायालय भी इस ओर समुचित ध्यान दें तो यह उचित होगा। लेकिन ऐसे हालात में सभी लोग सौहार्दपूर्ण वातावरण भी ज़रूर बना कर रखें, पार्टी की यह भी अपील है।
1. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अगले छह महीने में (अर्थात विधानसभा आमचुनाव तक) एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा हालाँकि विलम्ब से उठाया गया सही किन्तु चुनावी क़दम ज़्यादा लगता है, फिर भी वे नियुक्तियाँ पेपरलीक व भ्रष्टाचार आदि के अभिशाप से मुक्त समय से पूरा हो जायें तो यह सही होगा ताकि यह चुनावी छलावा ना साबित हों, जबकि इसके साथ ही एससी, एसटी व ओबीसी समाज के आरक्षित पदों के बैकलाग पर भर्तियों के बारे में भी सरकारी घोषणा की लोगों को उत्सुकता से प्रतीक्षा है।
2. इतना ही नहीं बल्कि यहाँ 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण के नियमों को लेकर इन वर्गों के 6,800 अभ्यार्थी अपनी नियुक्ति के लिये भूखे-प्यासे लगातार आन्दोलनरत हैं, उनके बारे में भी सरकार को पूरी सहानुभूतिपूर्वक ज़रूर सोचना चाहिये, क्योंकि उन्हें वास्तविक राहत सरकार ही दे सकती है।
3. इसके साथ ही, बी.एस.पी. यूपी सहित पूरे देश भर में स्कूली शिक्षा की बदहाल व्यवस्था को समुचित तौर पर बेहतर बनाने की माँग लगातार करती रहती है, किन्तु संभवतः ’जेन-जी’ व ’जेन-अल्फा’ के दबाव में जो थोड़ी अनचाही हलचल सरकारी स्तर पर देखने को मिल रही है वह मामूली ही सही परन्तु स्कूली शिक्षा में सुधार करने की सही नीयत से हो तो यह उचित होगा और इस क्रम में यहाँ लगभग 30 हज़ार जो सरकारी स्कूल बंद कर दिये गये हैं उन्हें दोबारा अच्छे तरीके से सक्रिय करने की व्यवस्था सरकार अविलम्ब करे तो यह भी जनहित में होगा।
4. इसके अलावा, बुजुर्ग महिलाओं को बसों में निशुल्क यात्रा आदि की व्यवस्था से कहीं अधिक महिलाओं को हर क्षेत्र में शोषण, अत्याचार, उत्पीड़न आदि से बचाने के साथ ही महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान व आत्मनिर्भरता के बारे में भी सरकारों को सही नीयत व नीति से कार्य करने की ज़रूरत है।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने मानवतावादी, कल्याणकारी व सभी जाति-धर्मों के मानने वालों को एक-समान समतामूलक अधिकार देने वाला सेक्युलर संविधान देकर पूरे देश को एक कड़ी में जोड़ कर सशक्त भारत बनाने की गारण्टी सुनिश्चित की है और इसके तहत् सभी धर्म के ग्रंथों व उनके धार्मिक रीति-रिवाज व मान्यताओं के आधार पर शान्त एवं सुखी जीवन जीने का अधिकार है, जिसकी अनदेखी करने व उसमें दख़ल देने के बजाय सभी को उसकी पवित्रता का सम्मान करना चाहिये।
2. इस क्रम में महिलाओं की अस्मिता, सम्मान व पर्दा आदि के ज़रिये अपने आत्म-सम्मान व स्वाभिमान की रक्षा जैसे मामलों को उसकी उसी संवेदनशीलता से देखना चाहिये और जहाँ तक स्कूलों में यूनीफार्म, पर्दा, चादर, हिजाब आदि पहन्ने का मामला है, तो इन मामलों को ज़्यादा तूल देकर कोर्ट-कचहरी में विवाद का क़ानूनी मुद्दा बनाने के बजाय, उन्हें स्थानीय स्तर पर स्कूल प्रबंधन व शासन-प्रशासन की आपसी समझ व सूझबूझ से सुलझा लेना चाहिये ताकि किसी को भी इसकी आड़ में संकीर्ण राजनीति करने का मौक़ा ना मिल पाये।
3. जबकि बी.एस.पी. सर्वसमाज के सम्मान व उनके जान-माल व मज़हब की सुरक्षा की गारण्टी वाली अम्बेडकरवादी पार्टी है और यही मानना है कि किसी भी धर्म, धार्मिक ग्रंथ व धार्मिक प्रचलन/मान्यताओं के संवेदनशील मामलों पर सभी लोग टीका-टिप्पणी करने से बचें तो यह देश व जनहित में होगा।
4. इसके साथ ही, यूपी के ज़िला बदायूँ में भारतरत्न परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर जारी विवाद व तनाव की स्थिति को शासन-प्रशासन तुरन्त इसका शान्तिपूर्ण व उचित समाधान निकाले तो यह उचित होगा।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख द्वारा अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल व उस पार्टी के नेता केन्द्रीय मंत्री के बारे में यह सार्वजनिक बयान देना कि ’हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है’, यह कहना पूर्णतः अमर्यादित, अशोभनीय व अति-शर्मनाक है तथा इस प्रकार की अहंकारी व अलोकतांत्रिक बयानबाज़ी के लिये उन्हें उस पार्टी से व उनके नेता से ही नहीं बल्कि स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी के परिवार का अपमान करने हेतु पूरे जाट समाज से भी अविलम्ब माफी माँगनी चाहिये तो यह उचित होगा।
2. वैसे देश की राजनीति में सपा का चाल, चरित्र व चेहरा अपने विरोधी पार्टियों के लिये ही नहीं बल्कि अपने सहयोगियों के लिये भी हमेशा से राजनीतिक संकीर्णता व जातिवादी द्वेष आदि से ग्रसित ज़्यादातर अप्रिय और अविश्वसनीय ही रहा है, जिस कारण इसका राजनीतिक एवं चुनावी लाभ भी अक्सर मौक़ों पर भाजपा ही उठाती रही है और सेक्युलर ताक़तें कमज़ोर होती रहीं हैं।
3. इस पार्टी के इसी प्रकार के अति-अहंकारी स्वाभाव के कारण पहले सन् 1993 में, यू.पी. में श्री मुलायम सिंह यादव के साथ सपा व बसपा का बना गठबन्धन जल्दी ही टूट गया, जिसके फलस्वरूप दिनांक 2 जून 1995 को मेरी हत्या करने के षडयन्त्र के तहत् मेरे विरुद्ध कुख्यात लखनऊ स्टेट गेस्ट हाऊस काण्ड हुआ।
और फिर आगे चलकर इनके बेटे श्री अखिलेश यादव द्वारा, इनके पिता की तरह पुरानी ग़लतियों को फिर से ना दोहराने का आश्वासन देते हुये, लोकसभा का चुनावी गठबन्धन हुआ जो चुनाव का नतीजा इनके अनुरुप ना आने की वजह से कुछ समय के बाद ही बी.एस.पी. के प्रति इनके अहंकारी व स्वार्थी आदि रवैये के कारण फिर यह गठबन्धन भी टूट गया, क्योंकि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के कारवाँ वाली पार्टी बी.एस.पी. व उसकी नेतृत्व ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सर्वसमाज हितैषी अम्बेडकरवादी नीतियों व सिद्धान्तों से कदापि विमुख नहीं हो सकती है।
4. अब संक्षेप में यही कहना है कि यह पार्टी (सपा) गठबन्धन के मामले में केवल अपना काम निकालना जानती है और अपना काम निकलते ही फिर यह पार्टी गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेती है तथा दूसरी पार्टी के बारे में अनाप-शनाप भाषा का भी ख़ूब इस्तेमाल करती रहती है, जो कि यह सपा का पुराना रवैया है। ऐसे में सर्वसमाज के लोग सपा की संकीर्ण व जातिवादी राजनीति से ज़रूर सावधान रहें।
5. इसके साथ ही, यह बात भी जग-ज़ाहिर है कि सपा मुखिया श्री अखिलेश यादव अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए अपने PDA में से P को कभी पिछड़ा वर्ग, तो कभी P को पण्डितों का हितकारी बता देते हैं, जबकि इनके बारे में सच्चाई तो यह है कि वे पिछड़े वर्गों में अपनी ख़ुद की जाति के अलावा बाकी पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों तथा अपरकास्ट समाज में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज के भी क़तई हितैषी नहीं रहे हैं।
6. इतना ही नहीं बल्कि इस पार्टी (सपा) की सभी रही सरकारों में दलितों, पिछड़ों, अक़लियतों, अपरकास्ट समाज में से विशेषकर ब्राह्मण समाज का भी काफी शोषण व उत्पीड़न आदि किया गया है तथा ना ही इनके हितों में कोई भी सकारात्मक क़दम उठाये गये हैं, बल्कि इनकी सरकार में वास्तव में केवल गुण्डों, बदमाशों, माफियाओं व अन्य अराजक तत्वों का ही भला हुआ है और साथ ही इनकी सरकार में दिन-छिपने के बाद हमारी बहिन-बेटियाँ भी घर से बाहर नहीं निकल सकती थीं। ऐसे में सर्वसमाज के लोग यू.पी. आगामी विधानसभा आमचुनाव में इस पार्टी (सपा) को सत्ता में क़तई भी ना आन दें, जो यह उनके हित में होगा।
@jalkal_lko 5/753 vikash khand -5 gomtinagar lko m ganda Pani pichle do mahine se aa rha hai nagar nigam office pani k tanki k pass ka koi bhi karmchari sangyan lene ko taiyar nhi hai kya kiya jaye samshya ka samadhan kaise hogo
वीडियो में दलित समाज की महिलाएं बता रही है कि कोई सिंह सेना के गुंडे है जो दलित बस्तियों में जाकर रैली कर रहे है और उनके साथ अभद्रता कर रहे है ।
@sp_siwan संज्ञान लीजिए और इन अराजकता फैलाने वालों पर कार्यवाही कीजिए और साथ ही साथ उन प्रशासन के लोगो पर भी कार्यवाही कीजिए जो दलित बस्ती में रैली के दौरान उन गुंडो के साथ थे ।
5/753 vikash khand -5 gwari gaon m two months se ganda Pani continue a rha nagar nigam ko bar bar complain krne k baad bhi samshya ka samadhan nhi hua abhi ganda cever ka pani water supply through aa rha roz call kiya jata h lekin samshya vaisi hi hai
@UPGovt
1. जेन-अल्फा अर्थात् सन् 2013 के बाद जन्मे बच्चे-बच्चियों में भी ख़ासकर अपने थोड़े ’अच्छे दिन’ की उम्मीद लगाये स्कूली छात्र-छात्रायें व उनके माता-पिता भी सुखी भविष्य हेतु अच्छी शिक्षा को लेकर हमेशा चिन्तित ही नहीं बल्कि उसके लिये लगातार काफी जद्दोजहद भी करते रहे हैं, किन्तु देश भर में व विशेषकर यूपी एवं उत्तर भारत के राज्यों के स्कूलों के बदतर हालत की कड़वी ज़मीनी हक़ीक़त के कारण वे लोग अति-मुखर होे गये हैं।
2. वे लोग जेन-जी अर्थात् कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के देशव्यापी ’स्कूल ठीक करो’ अभियान में काफी बढ़चढ़ कर व पूरे उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं।
3. किन्तु यह बड़े दुख और चिन्ता की बात है कि जिन मासूम बच्चे-बच्चियों के हंसने-खेलने व पढ़ने-लिखने के दिन हैं, उन्हें अपनी प्रारम्भिक स्कूली शिक्षा हेतु बुनियादी सुविधाओं के लिये भी सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
4. वैसे परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के ’शिक्षित बनो’ आह्वान के कारण शिक्षा में भी ख़ासकर स्कूली शिक्षा ’बहुजन समाज’ के लोगों के लिये हमेशा विशेष चिन्ता की बात रही है, और इसी के तहत् हमारी पार्टी बी.एस.पी. ने इन दबे-कुचले व शोषित-पीड़ित समाज के लोगों की, जिनकी केन्द्र व राज्य में रही सरकारें लगातार उपेक्षा करती रहीं हैं, उनके हित व कल्याण एवं शिक्षा आदि के लिये यूपी में मेरे नेतृत्व में बी.एस.पी. की सभी चारों रही सरकारों में पूरा-पूरा ध्यान दिया गया, ताकि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा निर्मित मानवतावादी एवं कल्याणकारी भारतीय संविधान के हिसाब से उन सभी परिवार वालों को रोटी-रोजी व शिक्षा-युक्त आत्म-सम्मान का समतामूलक जीवन नसीब हो सके।
5. किन्तु यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि सरकारी स्कूल की व्यवस्था को बेहतर बनाने की तरफ समुचित ध्यान देने के बजाय सभी सरकारों ने ज़्यादातर इसकी घोर अनदेखी ही की है तथा इस पूरी शिक्षा व्यवस्था को एक प्रकार से, इन वर्गों के आरक्षण की तरह ही, काफी हद तक निष्क्रिय बनाने का कुचक्र चलाया हुआ है और इस प्रक्रिया में हज़ारों सरकारी स्कूल बंद भी किये जा रहे हैं, जिसका भी विरोध बी.एस.पी. ने लगातार किया है और अब स्कूलों के भवन, शिक्षक, पेयजल, शौचालय व साफ-सफाई आदि जैसी बुनियादी ज़रूरतों की अत्यन्त कमी को लेकर नन्हें जेन-अल्फा स्वंय अति-मुखर होने के साथ-साथ अब आन्दोलित भी हैं।
6. अतः यूपी सहित अन्य राज्यों की भी सभी सरकारें जेन-अल्फा के मासूम बच्चे-बच्चियों की बेहतर शिक्षा व्यवस्था सम्बंधी उनकी ज़रूरतों/माँगों पर पूरी सहानुभूति के साथ सही नीयत व नीति से तत्काल ध्यान देना प्रारंभ करें और उनके विरुद्ध कोई भी सरकार बल का प्रयोग करने से पूरी तरह से बचें तो यह उचित होगा।