मेरठ में ललिता गौतम को न्याय दिलाने हेतु शांति पूर्वक धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस द्वारा हाथा पाई की गयी लोगों को मारा पीटा गया.संविधान के आर्टिकल 19 के तहत शांति पूर्वक धरना प्रदर्शन एक मौलिक अधिकार है.पुलिस द्वारा इस तरह की कार्यवाही करना कहीं ना कहीं अहंकार को प्रदर्शित करता है.जल्द ही यह अहंकार टूटने वाला है.
प्रखर वक्ता, अंबेडकरवादी, बेबाक लेखक, बहुजन मिशन का हिस्सेदारी निभाने वाले और बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ता जिनसे तर्कशक्ति के तहत हम जैसे युवाओं को बहुत कुछ सीखने को मिलता है चाहे वो सीख मिशन को लेकर हो या राजनीति को लेकर, ऐसे हमारे बड़े भाई साहब @sudhirkumar4785 को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं एवं बधाइयाँ।
प्रकृति आपके स्वास्थ्य को स्वस्थ रखे एवं लंबी दीर्घायु प्रदान करें।
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@Profravikant79 जी एक बात बताइए कांग्रेस द्वारा बनाए गए दलित मुख्यमंत्रियों में किसका कार्यकाल 2 वर्ष से अधिक रहा ? किस दलित को कांग्रेस ने पूरा कार्यकाल दिया ? आखिर कांग्रेस ने किसी दलित को पूर्ण कार्यकाल लायक क्यों नहीं समझा ? क्या सभी को अयोग्य समझा कांग्रेस ने?
देख लो कांग्रेस का यह प्रवक्ता अपने ही सहयोगी दलों पर निशाना साध रहा है । जाति आधारित क्षेत्रीय पार्टियां समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में और बिहार में राजद, वीआईपी हैं । कांग्रेस जिस थाली में खाती है उसी में छेद करती है। कांग्रेस इन्हीं पार्टियों को खत्म करेगी ।
जाति आधारित क्षेत्रीय पार्टियां ही शोषक!जातीय भावना व जुड़ाव लोगों को अंधा बना देती है ।बीजेपी को जब लगा कुछ पिछड़ी जातियों का सीधा वोट नहीं मिल सकता तो उनकी जातियों के पार्टियों को प्रोत्साहित करना शुरू कर दिया । पूरी जाति से न संवाद की जरूरत रही और न कुछ देने की केवल उस जाति के एक नेता - परिवार को साध लिया । जाति के नेता स्वाभिमान के नाम पर ठेकेदार बनें और साझे में सीटें परिवार और रिश्तेदार के लिए पक्का करके बाक़ी को बेच देना या बीजेपी के कैंडिडेट को अपने पार्टी से लड़ा देना। उप्र और बिहार में बीजेपी का यह प्रयोग ख़ूब सफल है । जाति को इस ठगी से बाहर निकालना ना मुमकिन है ।
हैलो @Uppolice@sultanpurpolice , इस व्यक्ति का नाम राहुल यादव है। यह व्यक्ति थाना करौदी-कलां जिला सुल्तानपुर का रहने वाला है। कृपया मामला संज्ञान में लीजिए।
यह व्यक्ति भारतीय संविधान के निर्माता व जनक बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर और एससी वर्ग के सबसे बड़े जाति समुदाय 'जाटव' के ऊपर बेहद ही अशोभनीय,अमर्यादित एवं अपमानजनक टिप्पणी कर रहा है और जातिसूचक गालियाँ भी दे रहा है,जो कि बर्दाश्त योग्य नहीं है।
कृपया इसके विरुद्ध SC-ST एक्ट 1989,BNS 2023 एवं अन्य विधियों की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजिये।
@Mayawati@AnandAkash_BSP@bspindia
फिर नेहरू ने अपने नाम के साथ पंडित क्यों लगाया? आजादी के बाद देश के सभी राज्यों में ब्राह्मण मुख्यमंत्री ही क्यों बनाए ? सारे भारत रत्न ब्राह्मण को ही क्यों दिए ? सारे प्रमुख पदों पर एक जाति क्यों विभूषित की ? करने और कहने में बहुत अंतर होता है । बस चाटुकारिता में चमकता नहीं है ।
हमारे मुल्क में जाति भेद है। अलग-अलग जातियां हैं। कोई अपने को ऊंचा समझता है, कोई जाति नीची समझी जाती है। इस चीज ने हमारे देश में काफी दीवारें पैदा की हैं, फूट पैदा की है, हमें बदनाम और कमजोर किया है, इस चीज का हमें मुकाबला करना है। जोरों से मुकाबला करना है, पूरे तौर से करना है, जब तक कि हम इसका पूरे हिंदुस्तान से पूरा खात्मा नहीं कर देते, हमें इसके साथ कोई रहम नहीं करना है।
- जवाहरलाल नेहरू, लाल किले से, 1954
मैंने तीन दिन लगातार कांशीराम स्मारक स्थल से रमाबाई मैदान तक रिपोर्टिंग की है...सुबह से रात तक। पिछले कई साल से बसपा की बीट को देख रहा हूं..तो एक क्यूरियोसिटी भी थी। पार्टी में नेशनल कोर्डिनेटर से लेकर सेक्टर प्रभारी तक के संपर्क में रहता हूं। कई बामसेफ के लोग हैं, जिनसे अच्छी बातचीत है।
प्रो. रविकांत जैसा एक भी राजनीतिक विश्लेषक और पत्रकार मुझे फील्ड पर नहीं भेंटाया और बता रहे हैं जैसे सबकुछ जानते हैं। दरअसल इनको कुछ नहीं पता। ना रैली के बारे में..न बसपा के बारे में...। रविकांत दावा कर रहे हैं कि ज्यादातर बसें सवर्ण और ओबीसी लाए थे। मैं कह रहा हूं कि ये सिर्फ इतना बता दें कि मायावती का मंच किस तरफ बना था...मैं मान जाऊंगा। एक पत्रकार के तौर पर मैंने जो देखा..जो समझा उससे इतना कह सकता हूं। कि रैली में भीड़ मोदी की दो रैलियों के बराबर थी। अगर ये मोमेंटम बसपा जारी रखती है तो यकीन मानिये बड़ा नुकसान न सिर्फ सपा-कांग्रेस को बल्कि भाजपा को भी होगा। समझना चाहते हैं तो कुछ कुछ वीडियो मेरी टाइम लाइन पर देख आइये। रही बात भीड़ की तो जो मैंने देखा उससे ये कह सकता हूं कि जितनी भीड़ मैदान में थी लगभग उतनी ही मैदान के बाहर थी। बहुत से लोग समय से रैली स्थल पर ही पहुंच नहीं पाए।
बाकी आप रविकांत जैसे फर्जी विश्लेषकों को तो देख सुन ही रहे हैं।
सही में तो कारागार आवासीय पार्टी का गठन कर उसका राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना चाहिए । वहीं स्थाई ठिकाना है । बसपा में तो ऐसे लोगों को गेट पर भी नहीं खड़े होने दिया जाता ।
बसपा वाले सोच रहे है आजम खान जी मृत पड़ी बसपा पार्टी को जीवित करें
ये तभी हो सकता है जब आज़म खान साहब को बसपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया जाय
बोलो तैयार हो B टीम वालों 😂
यूपी के चार मेडिकल कॉलेजों में SC/ST का स्पेशल आरक्षण समाप्त करने के हाईकोर्ट के फ़ैसले के खिलाफ हमारी टीम ने सुप्रीम कोर्ट में मुक़दमा दायर कर दिया है।
नेहरू के पैर छूकर तुम्हारे दादाश्री गौरवान्वित हो रहे थे । आज राहुल गांधी के चरणों में गिरकर तुम गौरवान्वित हो रहे हो । कम से कम अपना आत्मसम्मान तो बचा लिया होता । जो आदमी पैतृक रूप से आत्मसम्मान गिरवी रख रहा है वो संविधान बचाने की बात कर रहा है, इससे बड़ा मजाक क्या हो सकता है?
खतरे में संविधान हो तो आप संविधान बचाएंगे या डूबती हुई कोई पार्टी?
मेरी जिम्मेदारी बाबासाहब के संविधान, विचार और सपनों को बचाने की है। किसी पार्टी को बचाने की ठेकेदारी मेरी अन्य अंबेडकरवादियों की नहीं है।
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