@ShrawanBarmer__@elonmusk Elon रिमोट इलाकों की बात कर रहा है जहां फाइबर या मोबाइल कवरेज नहीं है। Jio अभी सस्ता और शहरी क्षेत्रों में बेहतर है, Starlink उन जगहों के लिए विकल्प हो सकता है जहां नेटवर्क नहीं पहुंचता। कीमतें अभी फाइनल नहीं।
मौलाना की बात कुछ हद तक सही है। अध्ययनों में वृद्धाश्रमों में ज्यादातर हिंदू पाए जाते हैं। मुख्य कारण सांस्कृतिक हैं। मुस्लिम समुदाय में माता-पिता की सेवा धार्मिक कर्तव्य माना जाता है, परिवार बड़े होते हैं और संयुक्त परंपरा मजबूत है। हिंदुओं में न्यूक्लियर फैमिली व बच्चों का शहर-विदेश जाना ज्यादा आम है। मुस्लिम आबादी में बुजुर्गों का अनुपात भी कम है।
एक दिन ऑफिस में बैठा हुआ था तो अचानक मोदी जी का फोन आया। बोले, ‘अनिल, तुमसे कुछ अर्जेंट बात करनी है। जैसे बैठे हुए हो वैसे ही चले आओ।’
मैं पहुंच गया। देखा, PM बहुत परेशान हैं।
मैंने पूछा, “सर, क्या हुआ?”
बोले, “अनिल, बेरोजगारी की समस्या समझ नहीं आ रही। लाखों युवाओं का सवाल है।”
मैंने कहा, “सर, पहले आंकड़े देखिए।”
उन्होंने बताया, “लगभग 80 लाख नौकरियों की जरूरत है।”
मैंने कहा, “सर, 80 लाख? आप चिंता मत कीजिए।”
उन्होंने पूछा, “कैसे?”
मैंने 17 मिनट में पूरा समाधान समझा दिया—skill mapping, apprenticeship, industry linkage, monitoring mechanism, अदरक, धनिया, लहसुन, हरी मिर्च, हींग और स्वादानुसार काला नमक।
PM गंभीरता से नोट्स लेते रहे।
फिर बोले, “अनिल, तुमने यह सब सोचा कैसे?”
मैंने कहा, “सर, 38 साल का अनुभव है बक बक करने का।”
वह मुस्कुराए, “अच्छा। और यह योजना लागू हो जाए तो कितने लोगों को फायदा होगा?”
मैंने कहा, “सर कम से कम 1.63 करोड़ को।”
PM चौंके, “अभी तो 80 लाख की बात कर रहे थे!”
मैंने कहा, “सर, वो सरकारी आंकड़ा था। मेरा आंकड़ा थोड़ा बड़ा है।”
कुछ सेकंड चुप्पी रही।
फिर PM ने कहा, “अनिल, समस्या बेरोजगारी की है आंकड़ों की या धनिये, पुदीने और मसालों की?”
मैंने कहा, “सर, सभी का समाधान मैं कर सकता हूँ।”
पी एम ने चप्पल उठा कर फेंकी और बोले "भक्क #@$&"।
मैंने चप्पल उठाई और बाहर आ गया। उस दिन मुझे एक बात समझ में आई कि देश में समस्या बेरोजगारी की नहीं बल्कि नीयत की है। यदि PM 100-50 जोड़ी चप्पल रोज मेरे भाई बंदों में मारते तो कितनी नई चप्पलों की डिमांड बनती और उन्हें बनाने के लिए कितने लोगों को रोजगार मिल जाता !
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• रोड रेज से बचिए।
• सड़क पर अजनबियों को Civic Sense सिखाने की कोशिश मत कीजिए।
• जहाँ संभव हो, भीड़भाड़ से बचिए।
• सार्वजनिक जगह पर राजनीति की बहस से दूर रहिए।
• गलती हो जाए तो हाथ जोड़कर “सॉरी” बोलिए और आगे बढ़ जाइए।
लोग बेहद बेचैन, चिड़चिड़े और हिंसक होते जा रहे हैं।
रील्स, स्मार्टफोन, व्हाट्सऐप स्टेटस, फेसबुक, OTT हर वक्त मिलने वाला मनोरंजन और सस्ता डोपामिन भारतीयों का मानसिक संतुलन बिगाड़ रहा है।
न ढंग के पब्लिक पार्क,
न साफ़ नदियाँ, न झीलें,
न सुकून की कोई जगह।
नतीजा? पूरा भारत फोन में घुसा हुआ है।
यह दिमाग़ और ज़िंदगी की महामारी है...
शायद उससे भी ख़तरनाक।
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#औ_का
मेरे राम को गाली देने वालों के साथ खड़ा होने वाला ‘हनुमान’ कतई नहीं हो सकता है।
जिस तरह रावण ने भेष बदल कर सीता जी का हरण किया था वैसे ही यह एक पाखण्डी है जो सिर्फ सत्ता में बने रहने के लिए ढोंग कर रहा है।
ऐसे बहुरूपियों से सावधान रहें!
जय श्री राम।
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SBI सालाना एटीएम चार्जेज लेती है - 236 Rs
PNB सालाना एटीएम चार्जेज लेती है - 295 Rs
BOB सालाना एटीएम चार्जेज लेती है - 236 Rs
HDFC सालाना एटीएम चार्जेज लेती है -295 Rs
ICICI सालाना एटीएम चार्जेज लेती है - 295 Rs
AXIS सालाना एटीएम चार्जेज लेती है - 354 Rs
भारत में 90 करोड़ डेबिट कार्ड यूजरस हैँ
तो सालाना लगभग 23000 करोड़ रूपये एटीएम चार्जेज के रूप में वसूले जाते हैँ
UPI के लिए ATM चाहिए, तो UPI पर चार्जेज ना लगाकर Indirect ऐसे वसूला जाता है.
अब भी बोलोगे UPI फ्री है? ये डिजिटल इंडिया की काली सच्चाई है जिसपे कोई ध्यान नहीं देता.
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#औ_का
किसकी रक्षा कर पाया है आज तक संविधान? रोज मर्डर होते है लूट होती है डकैती होती है अनगिनत अपराध होते है! अपहरण होते है! रक्षा हमेसा पिता भाई या व्यक्ति स्वयं करता है अपनी और परिवार ही करता है संविधान तो केवल कोर्ट के चक्कर लगवाता है! जो ताकतवर है वह सुरक्षित है जो कमजोर है वह कोर्ट के चक्कर लगा रहा है!
मैं श्री राहुल गांधी को खुली चुनौती देता हूँ हमारी साइट द्वारा उठाए गए तथ्यों को गलत साबित करके दिखाइए अगर आपकी रैलियों में कही गई बातें सही हैं तो तथ्यों और प्रमाणों के साथ उनका जवाब दीजिए सिर्फ हमें गोदी मीडिया कहकर खारिज करने से सवाल खत्म नहीं हो जाते।
यह भारत के Gen Z है
This will be our official profile picture. Rahul Gandhi’s PR is reporting our account for impersonation, so we’re making this our official profile picture
Our founder who created the Jhooth ki goonj website has been continuously threatened by Rahul Gandhi’s PR team.
She is just 20 years old. Let this tweet spread and tell everyone what kind of person Rahul Gandhi is.
सावन के महीने में मांस भक्षण कर रहे हैं नितिन नबीन। साथ में उनके और भी बीजेपी नेता हैं। खाएं, ख़ूब खाएं, मगर जब कोई दूसरा खाता है शोर क्यों मचाने लगते हैं कि देखो हिंदू होकर क्या कर रहा है। तेजस्वी यादव वाला प्रकरण याद है न जी।
ये भयंकर वीडियो है, BJP को इसे देखना चाहिए, कई-कई बार देखना चाहिए और समझना चाहिए कि इसका क्या मतलब है और इसका क्या असर होगा?
कैसे बीजेपी से लड़ने के लिए अब राहुल गांधी ने इस्तेमाल किया है एक नया हथियार, ऐसा हथियार जो राजनीति में दिखाई ही नहीं देता है?
ये एक ऐसी रणनीति है जिसकी काट BJP के पास अभी तक है ही नहीं?
इसके लिए बीजेपी को अपना मौजूदा चाल-चरित्र-चेहरा बदलना होगा लेकिन बड़ा सवाल है कि क्या वो ऐसा कर पायेगी?
राहुल गाँधी क्यों बोले मोदी रात को सो नहीं पाते, इनको हम पागल कर देंगे, मोदी जब तक इस्तीफा नहीं देंगे सो नहीं पाएंगे, मोदी-राजनाथ की हवा निकल गई है ?
उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया कि जरूरत पड़ने पर वो RSS की भी रक्षा करेंगे?
#DibangOfficial @YouTube https://t.co/8MbZSStMgy
AMU दीक्षांत समारोह में कुरान की आयतें पढ़ी जाएं
तो वह सुंदर 'धर्मनिरपेक्षता' (Secularism) है!
IIT दिल्ली के दीक्षांत समारोह में शिक्षा पर आधारित 'तैत्तिरीय उपनिषद' की शिक्षावल्ली के श्लोक पढ़े जाएं
तो वह 'सांप्रदायिक' और लोकतंत्र के लिए खतरा बन जाता है!
"एएमयू में जो 'सेक्युलर' है,
वही आईआईटी में 'सांप्रदायिक' कैसे हो गया?"
इस दोहरे रवैये का पर्दाफाश करने के लिए रीपोस्ट (RT) करें!
कैसी पत्रकारिता है ये? पहली बात, झारखंड में जो छात्र आंदोलन कर रहे हैं, उनमें ज़्यादातर ग्रेजुएट हैं। उन्हें अच्छी तरह पता है कि अगर ज़रा-सी भी बात बिगड़ी, FIR हो गई, तो सरकारी नौकरी का सपना हमेशा के लिए खत्म हो सकता है। इसलिए उनका संयम उनकी समझदारी भी है और उनकी मजबूरी भी।
दूसरी बात, आप लोग बार-बार जंतर-मंतर और झारखंड की तुलना में ही क्यों उलझे हुए हैं? मान लीजिए जंतर-मंतर का आंदोलन आपको बिल्कुल पसंद नहीं था, बहुत खराब था... उससे क्या बदल जाएगा? असली सवाल तो यह है कि उसका नतीजा क्या निकला- शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा हो गया। उस आंदोलन के बाद संसद में चर्चा हुई, कानून आया, सरकार को जवाब देना पड़ा।
और अगर झारखंड का आंदोलन आपको इतना ही अच्छा लग रहा है, तो स्टूडियो में बैठकर तारीफ करने से क्या होगा? जाइए, सरकार और छात्रों के बीच संवाद कराइए। यही तो पत्रकारिता का काम है- समाधान तक पहुँचने की कोशिश करना।
- जवाहरलाल नेहरू ने अपने कार्यकाल में 33 सरकारी कंपनियों की स्थापना की थी,
- लाल बहादुर शास्त्री ने अपने छोटे से कार्यकाल में 5 सरकारी कंपनियाँ बनाईं,
- इंदिरा गांधी ने तो सरकारी कंपनियाँ बनाने में अपने पिता को भी पीछे छोड़ दिया, उनके कार्यकाल में कुल 66 सरकारी कंपनियाँ बनाई गईं...
- मोरारजी देसाई ने 9 और राजीव गांधी ने 16 सरकारी कंपनियाँ बनाईं,
- वीपी सिंह ने 2, और पीवी नरसिम्हा राव ने 14 कंपनियाँ बनाईं,
- एच डी देवी गौड़ा और आई के गुजराल ने 3-3 कंपनियाँ बनाईं,
- अटल बिहारी वाजपेयी ने 17 कंपनियाँ बनाईं, लेकिन उन्होंने 7 बड़ी कंपनियों का निजीकरण भी किया...
- मनमोहन सिंह ने अपने 10 साल के कार्यकाल में 23 सरकारी कंपनियाँ बनाईं और 3 को बेचा,
- भारत के इतिहास में नरेंद्र मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने एक भी नई सरकारी कंपनी नहीं बनाई, बल्कि 23 सरकारी कंपनियों को बेचा..
- अब आप तय करें.. कि देश हित और देश को मजबूत करने का काम किसने किया और देश की संपत्तियों को अपने मित्रों को औने-पौने दामों में बेचकर देश को खोखला करने का काम कौन कर रहा है।