देश में सामाजिक परिवर्तन के पितामह के रूप में प्र���िद्ध ’बहुजन समाज’ में अति-पिछड़े वर्ग में जन्मे महात्मा ज्योतिबा फुले को आज उनकी जयंती पर मेरे व बी.एस.पी. की ओर से भी शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा सुमन अर्पित।
ख़ा��कर शिक्षा के माध्यम से स्त्री/नारी शक्ति के प्रणेता के रूप में महात्मा ज्योतिबा फुले व उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले का नाम इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। महात्मा ज्योतिबा फुले के शब्दों में ’’विद्या बिना मति गयी, मति बिना नीति गयी। नीति बिना गति गयी, गति बिना वित्त गया। वित्त बिना शुद्र हताश हेये, और गुलाम बनकर रह गये।’’ अर्थात यह सब कुछ शिक्षा के अभाव में हुआ और इसीलिये आगे चलकर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने इनसे प्रेरित होकर शिक्षा की तरफ विशेष ध्यान दिया।
साथ ही, उन्नीसवीं सदी के मध्य में दलितों व शोषितों की मुक्ति के लिये महात्मा ज्योतिबा फुले के ज़बरदस्त प्रयासों के कारण अकेले पुणे में ही नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र में सामाजिक परिवर्तन की नई अ��ख जगी और विशेषकर नारी मुक्ति व सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कार्य शुरू हुआ, जिस संघर्षों के लिये उनकी जितनी भी सराहना व प्रशंसा की जाये वह कम है।
ऐसे अति-पिछड़े/ओबीसी समाज के महापुरुष की स्मृति व उनके सम्मान में मेरी बी.एस.पी. सरकार द्वारा अनेकों कार्य यहाँ यूपी में किये गये जिनमें अमरोहा को नया ज्योतिबा फुले नगर ज़िला बनाना शामिल है, किन्तु सपा सरकार ने इसे भी अपनी संकीर्ण राजनीति व जातिवादी द्वे��� आदि के कारण इसका नाम भी बदल डाला।
उल्लेखनीय है कि बी.एस.पी की सरकार द्वारा कासगंज को कांशीराम नगर ज़िला बनाने के साथ-साथ कानपुर देहात को रमाबाई नगर, संभल को भीमनगर, शामली को प्रबुद्ध नगर व हापुड़ को भी पंचशील नगर के नाम से नया ज़िला बनाया था, जिसे सपा सरकार ने ज़िला तो बनाये रखा लेकिन इन सभी ज़िलों के नामों को बदल डाला, यह है इनके पीडीए का अति-दुखद चाल, चरित्र व चेहरा।
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में बहुजन समाज पार्टी की बैठ��� चल रही है।
बीएसपी पूरी दमदारी के साथ तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2027 अकेले ही अपने बूते पर लड़ने जा रही है।
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में बहुजन समाज पार्टी की बैठक चल रही है।
बीएसपी पूरी दमदारी के साथ तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2027 अकेले ही अपने बूते पर लड़ने जा रही है।
ओडिशा प्रदेश में उसकी राजधानी भुवनेश्वर में बहुजन समाज पार्टी का एक दिवसीय कैडर कैंप आयोजित किया गया।
बहुजन आंदोलन में कैडर क्लास की प्रासंगिकता को बताते हुए बहुजन समाज बनाने की दिशा में मान्यवर कांशीराम साहब के योगदान को परिभाषित किया गया।
इस कैडर कैंप में ट्रेनर्स के लिए 8 बिंदु निर्धारित किए गए......
1. History of Bahujan Samaj
(बहुजन समाज का इतिहास)
2. Life & Struggles of Our Bahujan Icons
(बहुजन समाज में जन्मे संतों, गुरुओं व महापुरुषों का जीवन एवं संघर्ष)
3. Culture And Religion of Bahujan Samaj
( बहुजन समाज में धर्म और संस्कृति)
4. Cast System And Its Behaviour
( जाति व्यवस्था और उसका व्यवहार)
5. History And Relevance of Reservation
( आरक्षण का इतिहास और उसकी प्रासंगिकता)
6. History of BAMCEF And D.S-4
( BAMSEF एवं DR.S-4 का इतिहास)
7. Leadership of Bahujan Samaj
(बहुजन स��ाज में नेतृत्व)
8. Struggles of Bahujan Samaj Party
( बहुजन समाज पार्टी और उसका कठिन संघर्ष)
उपरोक्त इन 8 विषयों पर प्रशिक्षण देने के लिए ट्रेनर्स तैयार करने पर विशेष वार्ता हुई। इन विषयों के लिए डेटा कलेक्शन और उपशिर्षक निर्धारित करने के लिए गाइडलाइन दिया गया।
वर्तमान भारत के राजनैतिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए बहुजन समाज पार्टी की ��ाष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय बहन कुमारी मायावती जी ने 2024 लोकसभा चुनाव के बाद कैडर कैंप के लिए 7 बिंदु निर्धारित किए थे, उन 7 बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया।
होली पर्व की सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें। सभी लोग परम्परागत तौर पर शान्ति व सद्भाव के साथ इस त्योहार को उमंग के साथ मनायें और आपस में मिलजुल कर होली की ख़ुशियाँ बाँटें, यही इस पर्व की सच्ची भावना। अन्त में एकबार फिर सभी को हैप्पी होली।
जैसाकि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी (सपा) का चाल, चरित्र और चेहरा हमेशा से ही दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं बी.एस.प���.-विरोधी तथा ’बहुजन समाज’ में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के आदर-सम्मान का नहीं बल्कि जग-ज़ाहिर तौर पर इनके अनादर, अपमान व तिरस्कार का ही रहा है, इस बारे में मीडिया सहित इनका पीडीए (PDA) भी अच्छी तरह से जानता है।
साथ ही, ’बी.एस.पी. के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी की जयंती पर सपा पीडीए दिवस मनायेगी’, जो कि यह सपा की समय-समय पर की जाने वाली विशुद्ध राजनीतिक नाटकबाज़ी के स���वाय कुछ भी नहीं है अर्थात् सपा का इस प्रकार का व्यवहार शुद्ध रूप से इन उपेक्षित वर्गों के वोटों का स्वार्थ हेतु केवल छलावा व दिखावा है, जैसाकि अन्य विरोधी पार्टियाँ भी इन वर्गों के वोटों के स्वार्थ की ख़ातिर अक्सर कई मौकों पर ऐसे ही दिखावा व छलावा आदि करती हुईं नज़र आती हैं।
वास्तव में दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग व बी.एस.पी.-विरोधी रवैये के साथ-साथ बहुजन समाज में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के अनादर, अपमान व तिरस्कारी रवैये तथा इन वर्गों के शोषण, अत्याचार व जुल्म-ज़्यादती आदि का लम्बा इतिहास है, जिसे कभी भी भुलाया जाना मुश्किल ही नहीं बल्कि असंभव लगता है।
वैसे सपा के इस जातिवादी इतिहास की शुरूआत ख़ासकर सन 1993 में सपा व बी.एस.पी. की गठबंधन से होती है जब गठबंधन सरकार तथा दलित एवं अन्य कमजोर वर्गों के लोगों पर अन्याय-अत्याचार रोकने की पहली शर्त के बावजूद तत्कालीन सीएम श्री मुलायम सिंह यादव ने अपना ��वैया नहीं बदला और जिसके फलस्वरूप अन्ततः बी.एस.पी. को दिनांक 1 जून सन 1995 को सपा सरकार से अपना समर्थन वापस लेना पड़ा था और फिर उसके बाद दिनांक 2 जून सन् 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस काण्ड कराकर मेरे ऊपर जो जानलेवा हमला कराया गया वह सब काली क्रूरता सरकारी रिकार्ड के साथ-साथ इतिहास के पन्नों में भी दर्ज है।
इसी प्रकार, बहुजन समाज में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के अनादर, अपमान व तिरस्कारी रवैये की भी काफी लम्बी श्रंखला है, जिसमें सपा को सत्ता में बैठाने वाले ख़ासकर मान्यवर श्री कांशीराम जी के आदर-सम्मान से जुड़े मामले में उनके नाम पर नया ज़िला बनाने को सपा सरकार द्वारा बदल दिया गया था।
और जब बी.एस.पी. की सरकार ने कासगंज को ज़िला मुख्यालय का दर्जा व सम्मान देते हुये कांशीराम नगर नाम से नया ज़िला बनाया, तो यह वर्तमान सपा मुखिया श्री अखिलेश यादव के भी गले के नीचे से नहीं उतरा जिसे फिर सपा ने अपनी सरकार बनते ही अपनी घोर जातिवादी व द्वेषपूर्ण न��ति एवं दलित विरोधी रवैया अपनाते हुये अन्य ज़िलों व संस्थानों आदि के नामों की तरह इसका नाम भी बदल दिया, जो कि बहुजन समाज के साथ विश��वासघात नहीं तो और क्या है?
इतना ही नहीं बल्कि सर्वसमाज में से ख़ासकर ग़रीबों, दलितों, अन्य पिछड़े वर्गों एवं धार्मिक अल्पसंख्यकों आदि को साथ मिलाकर इन्हें सत्ता की मास्टर चाबी दिलाकर इन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने के मिशन के लिये अपना पूरा जीवन इसी संघर्ष में लगा देने वाले मान्यवर श्री कांशीराम जी की दिली ख़्वाहिश के मुताबिक बी.एस.पी. की सरकार ने जब पूर्वांचल में वाराणसी के पास भदोही में म��ान संतगुरु के नाम पर संत रविदास नगर नाम से नया ज़िला बनाया, तो उसे भी सपा सरकार ने अपनी जातिवादी व बी.एस.पी. विरोधी रवैया अपनाते हुये बदल दिया था।
साथ ही, मुस्लिम समाज को दिये गये वादे के मुताबिक मान्यवर श्री कांशीराम जी के नाम से नया उर्दू-फारसी अरबी यूनिवर्सिटी लखनऊ में आईआईएम के पास बनाया गया, जिसका भी नाम सपा सरकार ने बदल डाला और अब जिसे भाजपा सरकार ’लैंगवेज यूनिवर्सिटी’ के रूप में प्रचार��त करती है।
सहारनपुर में भी मान्यवर श्री कांशीराम जी के नाम पर बनाये गये सरकारी अस्पताल का नाम भी सपा सरकार ने बदल दिया। क्या यही सब है सपा का मान्यवर श्री कांशीराम जी के प्रति आदर व सम्मान?
इसके अलावा, अपने इस ��लित, अन्य पिछड़ा वर्ग व बहुजन समाज विरोधी कृत्यों के साथ-साथ सपा का रवैया मुस्लिम विरोधी भी रहा है। कांग्रेस पार्टी की तरह ही सपा की सरकारों में भी काफी घातक साम्प्रदायिक दंगों में भारी जान-माल की हानि के साथ-साथ लाखों परिवार प्रभावित हुये हैं।
हक़ीक़त में सपा के भड़काऊ आचरण आदि के कारण बीजेपी को राजनीतिक रोटी सेंकने का भरपूर मौक़ा मिलता रहा और इस प्रकार सपा व भाजपा दोनों एक-दूसरे की ज़रूर��� बनकर यहाँ जातिवादी व साम्प्रदायिक राजनीति करते रहे और जिसका परिणाम है यूपी में भाजपा का राज और उससे पीड़ित मुस्लिम व बहुजन समाज तथा साथ ही हर प्रकार से त्रस्त प्रदेश की करोड़ों आमजनता है।
कुल मिलाकर, सपा का दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग, मुस्लिम व बहुजन समाज विरोधी जो जातिवादी व साम्प्रदायिक रवैया शुरू से अभी तक भी रहा है तो यह किसी से छिपा नहीं है।
इसके साथ ही सपा, लोगों को इस बात का भी जवाब दे कि ���हुजन नायक मान्यवर श्री कांशीराम जी को उनके जीते-जी आदर-सम्मान देना तथा बहुजन एकता के लिये उनके योगदान की सराहना करना तो बहुत दूर, बल्कि उनके देहान्त के बाद एक दि�� का भी राजकीय शोक घोषित करके उन्हें श्रद्धांजलि आदि क्यों नहीं अर्पित की गयी थी? सपा बहुजन समाज को जवाब दे।
अतः सपा के इन सब दलित विरोधी व जातिवादी कृत्यों को ध्यान में रखकर बहुजन समाज के लोगों को हमेशा सावधान रहना चाहिये, यही बी.एस.पी. की अपील है। धन्यवाद। जय भीम, जय भारत।
आज दिनांक 01-03-2026 को आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी के निर्देशानुसार लखनऊ मंडल के सभी जनपदों के जिम्मेदार पदाधिकारियों के साथ एक अति-महत्वपूर्ण बैठक में सम्मिलित हुआ।
बैठक में 15 मार्च को मान्यवर कांशीराम जी की जयंती के अवसर पर मान्यवर कांशीराम स्मारक स्थल, लखनऊ में आयोजित होने वाले कार्यक्रम की तैयारियों को लेक��� विस्तृत चर्चा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
#जयभीम
#अबकी_बार_बसपा_सरकार
#मिशन_2027
बीएसपी यूपी प्रदेश अध्यक्ष श्री विश्वनाथ पाल ने सपा के तोते उड़ा दिये:
"अगर श्री अखिलेश यादव ,मान्यवर श्री कांशीराम जी का सम्मान करना सीख गए होते,तो उन्हें आज नाटक करन��� की ज़रूरत नहीं पड़ती।"
उत्तर प्रदेश विधानसभा में आज पेश किया गया सन् 2026-27 का बजट लोक लुभावना ज्यादा तथा जनता के वास्तविक उत्थान एवं प्रदेश में सर्वसमाज व सभी क्षेत्र के विकास का कम प्रतीत होता है। फिर भी जो घोषणायें व आश्वासन आदि जनता को देने का प्रयास किया गया है उसकी सही से समयबद्ध तरीके से ���मल जरूर हो ताकि ये केवल कागजी न रह जायें।
साथ ही, पिछले वर्ष के बजट का ज़मीनी क्रियान्वयनों का सही डाटा देकर बजट भाषण की परम्परा को वाकई में ठोस व विश्वसनीय बनाया जाता तो यह उचित होता, जबकि वर्तमान बजट भी अख़बारों की सुर्ख़ी बटोरने वाला ज्यादा प्रतीत होता है, जिससे एक बार फिर लोगों को अपने ’अच्छे दिन’ की उम्मीदों पर पानी फिर गया लगता है। वैसे भी उत्तर प्रदेश के लोगों को स्थाई आमद��ी वाली रोज़गार व्यवस्था का इंतज़ार बना हुआ है, जिसको लेकर गंभीरता एवं सक्रियता आवश्यक।
इस सम्बंध में एससी, एसटी व ओबीसी आरक्षण पर भी सरकार का समुचित ध्यान देना ज़रूरी है। बैकलाग की भर्ती की भी जितनी जल्दी पूर्ति हो उतना बेहतर होगा।
वैसे भाजपा सरकार अगर बी.एस.पी. की चारों सरकार की तरह ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की संवैधानिक दायित्व को निष्ठा व ईमानदारी से निभाने का प्रयास करे तो यह देश व ���नहित में उचित होगा। बजट भी इस दिशा में ही होना चाहिए अर्थात् बजट वर्ग व क्षेत्र विशेष का हितकारी तथा ख़ासकर करोड़ों ग़रीब एवं किसान-विरोधी ना होकर उनके जीवन सुधार का माध्यम हो तो यह सही होगा।
राजस्थान प्रदेश सहित तीन राज्यों की बैठक
इसके साथ ही, अखिल भारतीय स्तर पर पार्टी द्वारा गतिविधियों को अनवरत जारी रखने की प्रक्रिया में आज राजस्थान प्रदेश सहित तीन राज्यों के वरिष्ठ पदाधिकारियों की ���ैठक में उन तीनों राज्यों की अलग-अलग से हुई बैठक में वहाँ के राजनीतिक हालात के मद्देनज़र पार्टी संगठन की तैयारी तथा सर्वसमाज में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के लिये दिल्ली में हुई पिछली बैठक में दिये गये दिशा-निर्देशों के प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा की गयी तथा उन राज्यों के लोगों से अपने अच्छे दिन लाने के लिये यूपी की तरह पार्टी संगठन को मज़बूत बनाकर सत्ता प्राप्ति की ललक पैदा करने का आह्वान किया गया ताकि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा जबरदस्त मेहनत एवं संघर्ष के बाद ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के लोगों को आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के साथ जीने हेतु आरक्षण सहित जो अनेकों संवैधानिक अधिकार मिले हैं उनका सही से लाभ उन्हें मिल सके, जैसाकि यूपी में बी.एस.पी. की रही चारों सरकारों में उन्हें पहली बार मिलने की सुखद अनुभूति हुई।
उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र आज माननीया राज्यपाल द्वारा विधानमण्डल के संयुक्त अधिवेशन को सम्बोधन की संसदीय परम्परा से शुरू हुआ, किन्तु उनका यह भाषण परम्परा से हटकर प्रदेश के विकास व सर्वसमाज के उत्थान सहित व्यापक जनहित में वास्तविक व थोड़ा उत्साही होता तो यह बेहतर होता।
वास्तव में पूर�� उत्तर प्रदेश में सर्वसमाज के करोड़ों लोग सरकार की ग़लत नीतियों व कार्यकलापों आदि से दुखी व त्रस्त हैं तथा उन्हें ग़रीबी व बेरोज़गारी आदि के कारण अनेकों प्रकार की कठिन पारिवारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, किन्तु इन सबसे ज़्यादा उन्हें अपने जान, माल व मज़हब की ज़्यादा चिन्ता सता रही है, जिसके प्रति मा. राज्यपाल को सरकार का ध्यान आकर्षित कराना चाहिए था ताकि प्रदेश की जनता के साथ-साथ ��िपक्ष को भी थोड़ा आश्वासन मिलता, संभवतः जिसके अभाव के कारण ही मा. राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष की नारेबाज़ी होती रही तथा हंगामा भी होता रहा।
साथ ही, मा. राज्यपाल के सम्बोधन में ��ाजपा की सरकार द्वारा जनहित व जनकल्याण सम्बंधी बड़े-बड़े दावों, आश्वासनों, घोषणाओं व वादों आदि को पूरा करने सम्बंधी विवरणों का अभाव भी लोगों की चिन्ता का कारण रहा, जिसका आगामी बजट भाषण में समायोजन करना उचित।
1. देश में बीएसपी बहुजन हित की एकमात्र अम्बेडकरवादी पार्टी है तथा पार्टी हित में लोगों पर कार्रवाई करने व पश्चताप करने पर उन्हें वापस लेने की परम्परा है। इसी क्रम में श्री आकाश आनन्द के उतार-चढ़ाव व उन्हें मुख्य नेशनल कोआर्डिनेटर बनाने से बहुत से लोगों में बेचैनी स्वाभाविक।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी द्वारा देश के सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों मे जातिवादी घटनाओं को रोकने के लिए जो नये नियम लागू किये गये है, जिससे सामाजिक तनाव का वातावरण पैदा हो गया है। ऐसे वर्तमान हालात के मद्देनजर रखते हुये माननीय सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नये नियम पर रोक लगाने का आज का फैसला उचित
जबकि देश में, इस मामले में सामाजिक तनाव आदि का वातावरण पैदा ही नहीं होता अगर यूजीसी नये नियम को लागू करने से पहले सभी पक्ष को विश्वास में ले लेती और जाॅच कमेटी आदि में भी अपरकास्ट समाज को नेचुरल जस्टिस के अन्तर्गत उचित प्रतिनिधित्व दे देती।
देश में संसद व राज्य विधानमण्डलों के सत्र के घटते समय के साथ-साथ हर बार इनके भारी हंगामेदार एवं स्थगन आदि से इनकी जन उपयोगिता का घटता प्रभाव अक्सर गंभीर चिन्ता का विषय रहा है और इसीलिये उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दिनों चल रहे 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के तीन-दिवसीय सम्मेलन के दौरान विधानमण्डलों की कार्यवाही के लगातार घटते समय पर चिन्ता व्यक्त किया जा���ा उचित, सामयिक व सराहनीय, जिसपर सरकार और विपक्ष दोनों को अति-गंभीर होकर इस पर अमल भी ज़रूर करना चाहिये।
भारतीय संसद व राज्यों के विधानमण्डल यहाँ देश की संवैधानिक व लोकतांत्रिक व्यवस्था के अहम स्तंभ हैं तथा सरकार/कार्यपालिका को देश व जनहित के प्रति उत्तरदायित्व बनाये रखने का एक सशक्त माध्यम है। संसद व विधानमण्डलों की कार्यवाही साल में कम-से-कम 100 दिन के कैलेण्डर तथा सही नियमों के हिसाब से श���न्ति-व्यवस्था के साथ चले, यह बहुत ज़रूरी है।
इसके अलावा, ’सरकारी मान्यता नहीं होना मदरसा को बंद करने का आधार नहीं’ सम्बंधी माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ ��ेंच द्वारा दिया गया फैसला अति-महत्वपूर्ण व सामयिक है तथा इस आधार पर श्रावस्ती में मदरसे पर लगी सील 24 घण्टे में हटाने के निर्देश का भी स्वागत।
वैसे भी संभवतः यहाँ कोई भी सरकार नीतिगत तौर पर प्राइवेट मदरसों के विरुद्ध नहीं, बल्कि ज़िला स्तर पर अधिकारियों की मनमानी का ही शायद यह परिणाम है कि इस प्रकार की अप्रिय घटनाओं की ख़बरें आती रहती हैं, जिसपर सरकार को उचित संज्ञान लेकर ऐसी प्रवृति को सख़्���ी से ज़रूर रोकना चाहिये।