जब त्रेता में प्रभु श्रीराम प्रकट हुए थे, तो अवध में एक महीने तक सूर्य अस्त नहीं हुआ था। प्रभु को देखकर सूर्यदेव अपनी गति ही भूल बैठे थे।
आज हमारे प्रभु जन्म ले रहे हैं और वही सूर्यदेव उस दिन के पुनः साक्षी बनकर उनका तिलक कर रहे हैं।
जय रघुनंदन “जय श्री राम”
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श्रीराम