अजीत जी के साथ समस्त भारत के सनातनी हे और मेरा सुझाव हे कि उनके द्वारा कोई अपराध नहीं किया हे और न ही उनका व्यक्तव्य किसी भी अपराध की श्रेणी में आता हे इसलिए हम सब को मिलकर पुलिस से ही खात्मा लगवाए कृपिया सभी साथ दीजिए 🙏
जो वकील अपने चैंबर में जज बनाने के लिए कुख्यात है, वो भोंसड़ीवाला भी मर्यादा पर ज्ञान चोद रहा है। लाल जंघिए में आर्गुमेंट करने वाले लोग, जिनके इनकम टैक्स के पेपर दीमक चर जाते हैं, वो साले मोरेलिटी का हमें ज्ञान देंगे?
साले सही पैसे दूँ तो रिरियाता हुआ ‘जी सर’ बोल कर तू मुझे डिफेंड करने आ जाएगा।
पुनः कहूँगा, जिन हराम के पिल्लों को लगता है कि मेरी (या किसी भी व्यक्ति की) माँ-बहन किसी अनपढ़-गँवार-जातिवादी कीड़े के डिजिटल भोग की विषयवस्तु है, मैं उनकी पिछवाड़े में बाँस डाल कर खड़ा कर दूँगा।
मेरे लिए मेरे परिजनों का सम्मान सर्वोपरि है, और उस पर कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं। चाहे वो भारत का प्रधानमंत्री हो या अमेरिका का राष्ट्रपति, मुझे झाँट भर फर्क नहीं पड़ता तुम्हारी पहचान क्या है।
मैं अपने प्रत्युत्तर में तीक्ष्ण, तीव्र और डिस्प्रपॉर्शनेट ही रहूँगा।
अयोध्या के श्री निशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय में विद्यार्थियों को आधुनिक कंप्यूटर लैब के माध्यम से तकनीक से जुड़ते देखना सुखद है। उनकी एक छोटी-सी इच्छा पूरी करने में हम सहभागी बन सके, यह हमारे लिए प्रसन्नता की बात है।
हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा को डिजिटल युग से जोड़ने का यह विनम्र प्रयास नई पीढ़ी को अपनी जड़ों के और करीब लाए और उनके लिए सीखने के नए अवसर खोले, यही कामना है।
गुरुकुल के सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।
The SC/ST Act used against Ajeet Bharti is draconian
RT if you support him and if you want amendments in the SC/ST Law
This case should be made an example of how the SC/ST Act is misused
सीने पर शान से जनेऊ सजाकर सूरज ने स्क्वैश में गोल्ड क्या जीता, ब्राह्मणवाद का छाती-पीटू रोना रोने वाले लिब्रांडु गैंग के मुँह में अचानक दही जम गया है।
अब इन सेकुलरों को समझ नहीं आ रहा कि भारत के पहले गोल्ड मेडल पर ताली बजाएँ, या जनेऊ देखकर चुपचाप कोने में बैठकर बरनॉल मलें!
एक चीज़ है ना, जो मुझे बड़ी मज़ेदार लगी। कदम से कदम मिलाकर जो कदमताल करते हुए बाबा रामपाल जी चलते हैं… वो देखकर मुझे सच में अच्छा लगा।
मुझे अच्छा लगता है जब बाबा लोग भी टेक्नोलॉजी से जुड़ रहे हैं। पहले तो मैंने बस उनकी घूमने वाली स्विर्ल चेयर देखी थी। सोचा, चलिए ठीक है। लेकिन यहाँ तो लेवल ही अलग है।
देखिए… बाबा बस उंगली से एक बटन दबाते हैं… और आराम से अपनी पसंदीदा पोज़िशन में आ जाते हैं। आहा! सेट हो गए। पैर पसार दिए, पूरा आराम। फिर भक्तों को आशीर्वाद भी देते चल रहे हैं। यहाँ तक भी देखकर लगा, अच्छी रील है, बढ़िया है। लेकिन असली ट्विस्ट इसके बाद आता है।
पूरा का पूरा बाबा का शोरूम… चलने लगता है! जी हाँ, पूरा सेटअप मोबाइल है। मतलब बाबा ने भक्तों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा है। भक्त इधर-उधर धक्का-मुक्की क्यों करें? जहाँ भक्त, वहीं बाबा। पूरा मंच स्लाइड करता हुआ चला आता है।
देखिए, कितनी बढ़िया इंजीनियरिंग है! No script, no PR, just a candid Baba.
और सच कहूँ, बाबा स्थिर नहीं हैं… चलायमान हैं। सिर्फ बाबा ही नहीं, AC भी साथ-साथ चलता है। आपने वो वीडियो देखा होगा, बाबा जहाँ जाएँ, ठंडी हवा भी वहीं पहुँचे। पूरा गोल्डन फ्रेम, शीशे वाला सेटअप… चलता-फिरता दरबार।
लोग हाथ जोड़ रहे हैं, प्रणाम कर रहे हैं। कुछ लोग तो शीशे को ही चूम रहे थे। श्रद्धा का अपना-अपना तरीका होता है।
वैसे मुझे ऐसे बाबा अच्छे लगते हैं जो टेक्नोलॉजी अपनाते हैं। एक हमारे मोदी जी हैं, रील्स में पूरा सॉफ्टवेयर अपडेट। कैमरे के सामने एंट्री, ट्रांज़िशन, सब ऑन पॉइंट।
और दूसरे हैं रामपाल बाबा, ये हार्डवेयर अपडेट लेकर आए हैं। पूरा मूविंग प्लेटफ़ॉर्म, मोटर, कंट्रोल सिस्टम… सब फिट।
हाँ, हार्डवेयर की बात चली है तो याद आया… एक बार पुलिस वाले प्रकरण में भी इनके “हार्डवेयर” की चर्चा हुई थी। इसलिए हार्डवेयर का अनुभव पुराना है।
बाकी बाबा का जलवा तो देखिए। जेल में हों, तब भी ट्रेंड। बाहर हों, तब भी ट्रेंड। सोशल मीडिया पर इनके भक्त अलग ही लेवल का इकोसिस्टम चलाते हैं। कुल मिलाकर, बाबा अब सिर्फ प्रवचन नहीं देते… मूवेबल टेक्नोलॉजी का भी डेमो दे रहे हैं।
RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने CJP समेत तीन मामलों में दर्ज कराई शिकायत
सूरत, गुजरात में RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने दावा किया है कि उन्होंने तीन अलग-अलग मामलों में संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है।
तिवारी के मुताबिक, उन्होंने CJP के खिलाफ भारत निर्वाचन आयोग में शिकायत की है। उनका आरोप है कि यदि कोई गैर-पंजीकृत संगठन राजनीतिक दल की तरह गतिविधियां करता है और चंदा स्वीकार करता है, तो उसे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकरण कराना चाहिए।
उन्होंने कपिल सिब्बल की ओर से कथित रूप से दिए गए एक करोड़ रुपये के फंड को लेकर केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड से भी शिकायत की है। तिवारी ने इस राशि पर 18 प्रतिशत GST लगाए जाने की मांग की है।
इसके अलावा, उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से भगवानराव दिपके की संपत्तियों और आय की जांच कराने की मांग की है। तिवारी का दावा है कि दिपके MIDC में जूनियर इंजीनियर थे और उन्हें करीब 60 से 65 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता था। ऐसे में उनके बच्चों की अमेरिका में पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया गया, इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आय से अधिक संपत्ति का मामला पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए।
अमित तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि NEET को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनकी दिवंगत मां और विदेशी नेताओं के साथ उनके संबंधों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। उन्होंने कहा कि इन सभी मामलों की शिकायत दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की गई है।
(नोट: ये सभी आरोप अमित तिवारी के बयान पर आधारित हैं। संबंधित पक्षों और अधिकारियों की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।)
वाह @AmanChopra_ जी
पूरा Expose कर दिया
जब हर चीज जूठ के बिनाह पर बनी हो तो सवाल पूछने पर गुस्सा तो आएगा ही
जिस व्यक्ति ने हमला किया उस पर FIR होनी चाहिए
भारत को रोकने के लिए अनेक षड्यंत्र होंगे,
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फेक अकाउंट बनाकर, क्षेत्र, भाषा व जाति के आधार पर फिर से विभाजन की स्थिति पैदा करने के प्रयास होंगे...
मैं मोदी को राजनीति नहीं सिखा रहा, क्योंकि मैं एक पत्रकार हूँ। मोदी को राजनीति परिस्थितियाँ सिखा रही हैं, वह भी सीधे चेहरे पर तमाचा मार कर और थूक को चटवा कर।
मेरे शब्द कठोर नहीं हैं, सत्ता की चर्बी संघ और भाजपा के हर नेता और चाटुकार समर्थकों की आँखों पर चढ़ी हुई है। उसका निराकरण इस तरह के लुच्चों द्वारा झुकवा कर होते देखना प्रसन्न भी करता है कि तुम यही डिज़र्व करते हो, और दुखी भी कि क्या इस देश में नल्ले, अनपढ़ लोग शिक्षा मंत्री का त्यागपत्र लिवा लेंगे!
IT सेलिए बहुत अच्छे चुटकुले लिख रहे हैं। एक को देख कर लगा कि वही चुटिया सलाहकार होगा जो ऐसे निर्णय लिवाता है। एक को तो IB, CBI, CID और CIA घर में रिपोर्ट करती है।
मुझे यह समझ में नहीं आ रहा कि यदि प्रधान से त्यागपत्र लेना ही था, तो मोदी को रील वाली बकलोली क्यों करवायी?
कब तक इसके पीछे छुपोगे कि 'देशहित में लिया निर्णय'? देशहित के निर्णय पुलिस का मनोबल तोड़ कर नहीं लिया जाता। देशहित के निर्णय में लाल क़िले पर खालिस्तानी झंडा नहीं होता। देशहित में सत्ता का ईगो आड़े नहीं आता। सत्ताधीश के ईगो और राजनीति से प्रेरित अनुपस्थित कार्रवाइयों ने इस राष्ट्र की बहुत क्षति कर दी है।
'वो' लोग आएंगे, फिर से 'कालरात्रि' की ओर आपको ले जाने का प्रयास करेंगे।
पहचान का संकट खड़ा करेंगे, जाति के नाम पर बांटेंगे, क्षेत्र के नाम पर बांटेंगे,
ये समाज और देश के दुश्मन हैं...
उत्तराखंड पुलिस के कांस्टेबल शेर सिंह वर्दी पहनकर पहुंचे और छात्र आंदोलन के समर्थन में अपना फर्जी इस्तीफा देने का बड़ा ड्रामा रचा। यह व्यक्ति 2025 से ही निलंबित था। हरिद्वार में जमीन हड़पने, धमकाने और आपराधिक मामलों के आरोप में निलंबित होकर जेल की हवा भी खा चुका है।
सारे के सारे तिलचट्टे बहुत बड़े फेलियर और जोकर ही हैं!
सरकार के पास तुम्हारा फिंगरप्रिंट है, पता है, बाप का नाम है, उसके कारण तुम्हारे पूरे परिवार का हर फोन नंबर है, उसकी कॉल डीटेल्स है।
पुलिस के पास कंधा/गाड़ी/बिल्डिंग माउंटेड उपकरण है जो एक दिशा में बीम करेगा और सारे एक्टिव नंबर रीयल टाइम में उसके पास होंगे। AI से चेहरा पहचाना जाता है। ये सब पुरानी टेक है, जो सरकार के पास है।
ये तुम्हें केवल हॉलीवुड की फिल्मों में दिखता है, तो लगता है भारत के पास नहीं होगा। सत्य यह है कि भारत सरकार उसे निर्दयता से प्रयोग नहीं करती। वह युवाओं के भविष्य को बर्बाद करना नहीं चाहती। कॉलेज में हुई लड़ाइयों पर FIR नहीं होते।
जब इनका अजेंडा नहीं चलेगा तो ये पेट्रोल बम फेंकेंगे, सीपी को जलाएँगे और कहेंगे वो तो संघी और भाजपाई थे।