आदरणीय मुख्यमंत्री जी @myogiadityanath विद्युत विभाग के CE,SE, EE द्वारा शासन के आदेश , UPPCL के निदेशकों के आदेशों की अवहेलना लिखित में कर रहे हैं जोकि कर्मचारी नियमावली 1956 के अंतर्गत कदाचार और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। ऐसे अधिकारियों पर तत्काल कार्यवाही होनी चाहिए
श्रीमान जी @MdPvvnl फेसिअल अटेंडेंस को ERP से जोड़ने के बाद वेतन इसी आधार पर निर्गत किया जा रहा है। रविवार और अवकाश के दिन कुछ नंबर बनाने वाले अधिकारी काम करने के आदेश दे रहे है। डबल रेट का ओवर टाइम क्या इनके वेतन से काटा जाएगा? अब आदेश और सबूत भी है।
@aksharmaBharat@UPPCLLKO
श्रीमान जी @ChairmanUppcl CE बुलंदशहर द्वारा 12.3.26 को एक बैठक बुलाई गई जिसमें SE, EE, AE,SDO और JE शामिल हुए। जिनका 10-25 वर्ष का अनुभव विद्युत क्षेत्र में है। बैठक के मंथन में कई महत्वपूर्ण तथ्य उजागर हुए
80% ट्रांसफार्मर चलाने योग्य नहीं है ज्यादा कोर लॉस @aksharmaBharat
श्रीमान जी @ChairmanUppcl jan 24 के आदेश में 100 केवीए से 250 केवीए तक का मुख्य उत्तरदायित्व जेई का था ।आज के आदेश में 10 केवीए से 1000 केवीए तक का मुख्य उत्तरदायित्व जेई का है। अगले साल 27 में 10 केवीए से 10000 केवीए तक जेई ही जिम्मेदार होगा बाकी सब क्या बारात में आये हैं।
श्री राम जन्मभूमि मंदिर में प्रभु श्री रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ पर सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!
श्री अयोध्या धाम में राम मंदिर के निर्माण से न केवल एक ऐतिहासिक परिवर्तन हुआ है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को सशक्त बनाने का भी मार्ग प्रशस्त कर रहा है।
जय श्री राम!
बिजली बिल राहत योजना के माध्यम से हमलोग दशकों पुराने बिजली के बिल से सम्मानित उपभोक्ताओं को मुक्ति देने का काम कर रहे हैं।
कल तक इस योजना में 14 लाख 22 हजार उपभोक्ताओं ने नामांकन करा लिया।
विभाग को राजस्व के रूप में 1,197 करोड़ रू. प्राप्त हुआ। योजनानुसार हमारे विद्युत उपभोक्ताओं को 2,714 करोड़ रू. की राहत दी गई।
सभी को बधाई!
@narendramodi@myogiadityanath@AmitShah@JPNadda@mppchaudhary@Satishmahanaup@idharampalsingh@UPPCLLKO@EMofficeUP
#NayeBharatKaNayaUP
#GoodGovernance
#HumaraUP #VikasExpress #BijliBillRahatYojna
#बिजली_बिल_राहत_योजना
निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को समाप्त कराने हेतु विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों और समस्त जनपदों और परियोजनाओं के संयोजकों/ सह संयोजकों की लखनऊ में 07 दिसम्बर, 2025 को हुई बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय -
निजीकरण के विरोध में पूर्ववत आंदोलन जारी रहेगा। निजीकरण का एकतरफा टेंडर होते ही सामूहिक जेल भरो आदांलन प्रारंभ कर दिया जाएगा।
निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में जनपदों और परियोजनाओं पर मोबिलाईजेशन हेतु व्यापक दौरे के कार्यक्रम बनाएं जाएंगे।
01 जनवरी 2026 को आंदोलन के 400 दिन पूरे होने पर सभी बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधेगें और कार्यालय समय के उपरांत विरोध प्रदर्शन करेंगे।
01 जनवरी, 2026 से 08 जनवरी, 2026 तक सभी बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधेगें और कार्यालय समय के उपरांत सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।
08 जनवरी को समस्त परियोजनाओं और डिस्कॉम मुख्यालयों पर बड़े विरोध प्रदर्शन किये जाएंगे जिसमें संबंधित डिस्कॉम के अंतर्गत आने वाले सभी जनपदों के वितरण और ट्रांसमिशन के बिजली कर्मी और परियोजनाओं पर संबंधित परियोजनाओं के बिजली कर्मी सम्मिलित होंगे ।
08 जनवरी, 2026 से 21 जनवरी, 2026 तक समस्त बिजली कर्मी कार्यालय अवधि के उपरांत विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के अतिरिक्त कोई अन्य कार्य नहीं करेंगे।
21 जनवरी, 2026 को लखनऊ में प्रांतव्यापी विशाल रैली होगी जिसमें आंदोलन के अगले कार्यक्रम घोषित किये जाएंगे।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat@mlkhattar@ChiefSecyUP@spgoyal@UPGovt@UPPCLLKO@chairmanuppcl@yadavakhilesh@RahulGandhi@Mayawati@aajtak@ABPNews@ZeeNews@News18India@ndtv@timesofindia@IndianExpress@TheEconomist@EconomicTimes
आज से ठीक 3 साल पहले 3 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी व माननीय मुख्यमंत्री जी के मुख्य सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी जी की अध्यक्षता में बिजली कर्मचारियों के साथ एक लिखित समझौता हुआ था, उस समझौते में बिजली क्षेत्र में निजीकरण नहीं किया जाएगा यह भी लिखा था तथा अन्य मांगे भी थी जिन पर सहमति बनी थी।
लेकिन दुर्भाग्य का विषय है कि आज 3 साल पूरे होने के बाद भी वह समझौता लागू नहीं किया जा रहा है और मनमाने तरीके से पूंजीपतियों के हित में बिजली के निजीकरण का प्रयास किया जा रहा है।
अब माननीय मंत्री जी ही समझौते का पालन नहीं कराएगे, तो फिर जनता का लोकतंत्र से ही विश्वास उठ जाएगा।
माननीय ऊर्जा मंत्री श्री @aksharmaBharat जी से पुनः अनुरोध है कि आपके द्वारा 3 दिसंबर 2022 को बिजली कर्मचारियों के साथ किए गए समझौते का पालन कराये जाने की कृपा करें, जिससे कर्मचारियों व जनता का विश्वास आप पर बना रहे।
#stop_privatization_of_uppcl
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🌿 है या नहीं ग़ज़ब…? 😁
आधार कार्ड - पैन कार्ड से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - राशन कार्ड से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - बैंक अकाउंट से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - स्कूल की परीक्षा से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - गैस सिलेंडर से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - मोबाइल नंबर से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - नौकरी की हाजिरी से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अनिवार्य किया गया।
लेकिन आधार कार्ड मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) से नहीं जोड़ा गया…
क्यों????
क्योंकि…. राजनेता… 👑
आधार से लिंक करने पर एक ही व्यक्ति के डबल / ट्रिपल वोट बंद हो जाएंगे…
एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग नामों से किए गए वोट रद्द हो जाएंगे…
फर्जी नामों से मिलने वाले वोट खत्म हो जाएंगे।
जिस तरह राशन कार्ड से फर्जी नाम हट गए,
उसी तरह मतदाता सूची से भी फर्जी नाम हट जाएंगे।
सरकार पैन कार्ड को आधार से न जोड़ने पर ₹10,000 का जुर्माना लगा रही है,
मतलब आपको हर जगह आधार कार्ड चाहिए —
लाडली बहना योजना हो या कोई अन्य सरकारी योजना,
लेकिन सिर्फ मतदान के लिए आधार कार्ड नहीं चाहिए?
लॉकडाउन के समय जब हमने सभी ने वैक्सीन लगवाई थी,
तब सरकार ने आधार कार्ड को वैक्सीन से भी जोड़ा था।
वह काम तो बहुत तेज़ी से हुआ था।
तो फिर चुनाव आयोग की गति कहाँ रुक जाती है…?
यही है क्या “स्वच्छ भारत”?
यही है क्या “पारदर्शी सरकार”? 😡
जागो मतदाता! ✊✌️🤝
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*बिजली कर्मियों के विरोध को देखते हुए मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, विद्युत राज्य मंत्री श्री यशोपद नायक और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस नहीं पहुंचे : डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट के मेजबान महा वितरण के सीएमडी और ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी नहीं आए : विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल के एजेंडा पर गम्भीर मतभेद के चलते कोई चर्चा नहीं: संघर्ष समिति ने कहा फ्लॉप रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट*
मुंबई में 04 एवं 05 नवंबर को हुई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के विरोध में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स द्वारा केंद्रीय विद्युत मंत्री को भेजे गए विरोध पत्र और विरोध प्रदर्शन की नोटिस का प्रभाव यह रहा कि बिजली कर्मियों के गुस्से को देखते हुए डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री यशोपद नायक और यहां तक कि मेजबान प्रदेश महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी नहीं आए।
निजीकरण के पीपीपी मॉडल पर गम्भीर मतभेद के चलते महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण निगम महावितरण के सी एम डी लोकेश चन्द्र आई ए एस जो आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी है, ने भी इस मीट से दूरी बनाई और मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में नहीं आए। महाराष्ट्र की प्रमुख सचिव ऊर्जा श्रीमती आभा शुक्ला आई ए एस भी मीट में नहीं आई। यह चर्चा रही कि निजीकरण के मुद्दे पर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेश चंद्र आई ए एस और महामंत्री यूपीपीसीएल के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल आई ए एस के बीच मतभेद उभर कर सामने आ गए हैं जिसका परिणाम यह रहा कि बहु चर्चित मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि सुधार के नाम पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण पर देशभर के विद्युत वितरण निगमों से मुहर लगवाने की मंशा से मुम्बई में आयोजित की गई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही है। मीट में मुख्य एजेंडा विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल लागू करना था जिस पर बात ही नहीं हुई।
संघर्ष समिति ने बताया की नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की ओर से केंद्रीय विद्युत मंत्री को एक माह पूर्व ही सूचित कर दिया गया था कि यदि निजीकरण के एजेंडा पर डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट की जा रही है तो बिजली कर्मी इसे स्वीकार नहीं करते। बिजली कर्मियों से पहले चर्चा की जाए और यदि केन्द्रीय विद्युत मंत्री नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी के पदाधिकारियों से मीट के पहले वार्ता नहीं करते और मीटिंग से निजीकरण का एजेंडा नहीं हटाया जाता तो बिजली कर्मी विद्युत मंत्री के समक्ष विरोध प्रदर्शन करेंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों के विरोध का परिणाम यह रहा कि केंद्रीय विद्युत मंत्री, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और महाराष्ट्र विद्युत वितरण निगम के सी एम डी, इनमें से कोई भी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में नहीं आया।
संघर्ष समिति ने बताया कि मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 की सबसे चौंकाने वाली बात कह रही कि महाराष्ट्र के महावितरण के सी एम डी श्री लोकेश चंद्र आईएएस जो इस मीट के मेजबान भी थे और आयोजक भी वे मीट में नहीं आए। संघर्ष समिति ने कहा की महाराष्ट्र के विद्युत वितरण निगम के बड़े अधिकारियों ने बताया कि निजीकरण को लेकर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष श्री लोकेश चंद्र और महामंत्री श्री आशीष गोयल जो उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन है के बीच में गहरे मतभेद हो गए हैं। इसी के चलते मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरफ फ्लॉप हो गई। उसमें केंद्रीय मंत्री से लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक आए और न ही अधिकांश प्रांतों के चेयरमैन और एम डी आए।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष ने एक साल पहले निजीकरण का निर्णय घोषित कर बिजली कर्मियों का गुस्सा बढ़ा दिया है। लगातार आंदोलन चल रहा है और कार्य का वातावरण पूरी तरह बिगड़ चुका है। समय की आवश्यकता यह है की पावर कारपोरेशन के प्रबंधन को निजीकरण का निर्णय निरस्त कर वास्तविक सुधार कार्यक्रम पर बिजली कर्मियों से वार्ता करनी चाहिए। बिजली कर्मी सुधार हेतु लगातार प्रयत्नशील है और उसके अच्छे परिणाम भी आ रहे हैं।
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