@Khalbaali सर! वोट चोरी का एक स्वरूप ये भी है।"मैं नहीं तो कांग्रेस नहीं" —
यही सोच संगठन को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचाती है,जब व्यक्ति पार्टी से बड़ा हो जाए।
राजस्थान हो या पूरा देश, भाजपा की सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं —
शुद्धिकरण और छुआछूत जैसी घटनाओं से दलित और वंचित वर्गों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। पेपरलीक और सिस्टम की विफलताओं से युवाओं के सपनों पर असर पड़ रहा है, किसान परेशान है, कमरतोड़ महंगाई से जनता बेहाल है।
हर मोर्चे पर भाजपा की जवाबदेही तय करने का वक्त आ चुका है।
सत्ता पर काबिज होने के बाद भाजपा ने सिर्फ मनमानी की है। लोकतंत्र में असहमति को दबाया नहीं जा सकता। आज सरकार के दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच एक बड़ा अंतर साफ दिखाई दे रहा है।
जनता अब हिसाब मांग रही है और सरकार को जवाब देना भारी पड़ रहा है।
कोई भी व्यक्ति परफेक्ट नहीं होता। किसी योग्य व्यक्ति का हक अगर कहीं छूट जाता है, तो स्वाभाविक है कि उसे नाराज़गी होगी ही, लेकिन हमारा धर्म और फर्ज़ बनता है कि उनकी नाराजगी को दूर करें।
राजस्थान की 309 निकायों में कांग्रेस ने पूरी पारदर्शिता के साथ करीब साढ़े 11 हजार सिंबल बांटे हैं। प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ है जब कांग्रेस पार्टी ने इतने सिंबल दिए हों। 50 प्रतिशत से ज्यादा युवाओं को टिकट देने का काम किया है।
दूसरी तरफ ओसियां में दोपहर 3:30 बजे बाद बीजेपी विधायक द्वारा पुलिस के पहरे में सिंबल जमा करवाना लोकतंत्र पर धब्बा है। भाजपा ने सत्ता के दुरुपयोग से कई जगहों पर शर्मनाक काम किया है, पीछे से चोरी करना इनकी आदत बन गई है।
क्योंकि ये लोग जानते हैं कि बीजेपी के पास जनता को बताने के लिए न विकास है, न इंफ्रास्ट्रक्चर और ना कोई ठोस नीति। ढाई साल में इस सरकार ने सिर्फ कोरी बातें और झूठे दावे किए हैं। जनता सब देख रही है, और आने वाले समय में इसका जवाब देगी।
कमाल है सीजेपी को कोस भी रहे है और उनकी मुकदमे वापस लेने की मांग भी मान रहे हो... क्या अजीब हालात हो गए है हुकूमत के... सास-बहू ड्रामे जैसा फील हो रहा है....
पूर्व जिलाध्यक्ष गफूर अहमद जी एवं अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की सचिव एवं पूर्व प्रधान @ShamaBanoINC जी के द्वारा किए गए आत्मीय स्वागत के लिए हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
राजस्थान के पश्चिमी इलाके यहाँ कि गंगा-जमुनी संस्कृति और सामाजिक सौहार्द की विरासत को संजोय हुए हैं। इस क्षेत्र के विकास और जनहित की आवाज़ को बुलंद करना हमारा संकल्प है।
@Hemaram_INC@UmmedaRamBaytu@Barmer_Harish@LaxmanGodaraINC
@kkjourno देश आर्थिक रूप से कंगाल नहीं है, लेकिन वैश्विक युद्ध और तेल की महंगाई के डर से सरकार लाचार है।
वह अपनी इसी लाचारी और आर्थिक नीतियों के अंतर्विरोधों को छिपाने के लिए जनता के सामने 'स्वदेशी' का कार्ड खेल रही है
@Kapil_Jyani_ देश की Gen-Z के असंतोष, बेरोजगारी और व्यवस्था के खिलाफ गुस्से को भुना रहे हैं और अपनी स्वतंत्र राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे हैं।
लोकतंत्र में ऐसे स्वतंत्र प्रेशर ग्रुप्स का होना जरूरी है जो किसी एक विचारधारा के गुलाम न होकर सीधे युवाओं के हक की बात करें।
@Mamta010619 ATM का मतलब Automated Teller Machine है...
बाकी जो इसे "आएगा तो मोदी" बता रहे हैं, वो WhatsApp University के गोल्ड मेडलिस्ट, PhD इन फ़ॉरवर्डोलॉजी और बिना एडमिशन के टॉपर हैं। 🤣
@Kapil_Jyani_@DivyaMaderna
चुनाव बाद कार्यकर्ताओं व आम जनता के लिए सुलभ न होना।
ओसियां क्षेत्र में पानी और सड़कों की बुनियादी समस्याओं की उपेक्षा।
अधिकारियों से लगातार विवाद के कारण विकास कार्यों का अटकना।
अपनी ही पार्टी के नेताओं से टकराव, जिससे संगठन में बिखराव हुआ।
@khuchrep आम जनता से सोना न खरीदने और विदेश यात्रा टालने की अपील तो ठीक है, पर क्या यह नियम वीआईपी संस्कृति पर लागू नहीं होता?
नेताओं के बड़े काफिले और सरकारी फिजूलखर्ची पर भी रोक लगनी चाहिए।
संकट के समय आर्थिक सादगी और त्याग की शुरुआत सबसे पहले देश के मंत्रियों से होनी चाहिए।
@AnaArchana@MediaHarshVT खुद को सात्विक बताकर सार्वजनिक स्थानों पर जातिगत भेदभाव या छुआछूत को जायज ठहराना घोर निंदनीय और सामाजिक अपराध है।
सात्विकता मन और आचरण की शुद्धता से आती है, दूसरों को नीचा दिखाने से नहीं। जो लोग परंपरा के नाम पर नफ़रत फैलाते हैं, वे समाज के सबसे बड़े दुश्मन हैं।
कोटा निकाय चुनाव का घमासान केवल टिकटों की लड़ाई नहीं, बल्कि केंद्रीय अनुशासन की ढील और स्थानीय क्षत्रपों के बढ़ते वर्चस्व का नतीजा है।
दिल्ली की ढीली पकड़ और प्रदेश के दिग्गजों की आपसी होड़ ही कांग्रेस में इस अंतर्कलह के लिए ज़िम्मेदार है।
@AadeshRawal दलित व शोषित वर्ग का सम्मान आज राजनीति के केंद्र में है। जहाँ राहुल गांधी इसे सामाजिक न्याय व अधिकारों की लड़ाई बताते हैं, वहीं पीएम मोदी इसे सरकारी योजनाओं व प्रतिनिधित्व से जोड़ने का प्रयास करते हैं। उद्देश्य एक है, पर रास्ते और नीतियां अलग हैं।
@ManrajM7 ईमानदारी की कमाई से सोना खरीदना या विदेश घूमना हर नागरिक की व्यक्तिगत इच्छा और अधिकार है, जिसका सम्मान होना चाहिए।
वर्तमान वैश्विक संकट में देश की आर्थिक स्थिरता और डॉलर बचाने के लिए की गई स्वैच्छिक अपील को समझना भी ज़रूरी है। इच्छा और कर्तव्य का संतुलन ही देश को मजबूत बनाएगा।
लोकतंत्र में सवाल उठाना और असहमत होना हर नागरिक का अधिकार है, यही अभिव्यक्ति की आज़ादी है।
परंतु विरोध हमेशा तथ्यों और तर्क पर आधारित होना चाहिए, न कि केवल अंध-अविश्वास और अफवाहों पर। आज़ादी का मतलब ज़िम्मेदारी भी है, ताकि समाज में भ्रम की जगह सच की जीत हो।
हाँ मंत्री जी,
जो सरकार से- चन्दा चोरी, इथेनॉल, चीनी, प्याज, बेरोजगारी, छुआछूत, धार्मिक उमावद ,सरकारी नौकरी , एग्जाम पेपर लीक जैसे ज्वलंत प्रश्न पूछे वो सब दिमाकी नक्सली है।
अब आप हम सब नक्सलियों को पाकिस्तानी भी घोषित कर दीजिए
ओर हां हैं तो हम हिंदू आप मुस्लिम घोषित कर दीजिए 🙏
@AadeshRawal धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब नितिन गडकरी, जुआल ओराम व अन्य मंत्रियों से इस्तीफे मांगे जाने की अटकलें हैं।
मंत्रियों का कड़ा रुख और 'नकारात्मक प्रचार' के आरोपों ने शीर्ष नेतृत्व के लिए इस फेरबदल को और जटिल बना दिया है।
@Kapil_Jyani_ सच तो यह है कि SC/ST बजट के नाम पर दिखाई जाने वाली भारी राशि का केवल 4-5% ही सीधे वंचित वर्ग के बच्चों की छात्रवृत्ति या कल्याण योजनाओं तक पहुँचता है। बाकी पैसा सामान्य विकास कार्यों में लग जाता है।
@Kapil_Jyani_ सोशल मीडिया पर बजट के गलत आंकड़े फैलाना बंद करें। बजट 2026 में देश की सुरक्षा के लिए सर्वाधिक ₹7.85 लाख करोड़ का रक्षा बजट दिया गया है।
जबकि केंद्र का कुल SC/ST बजट ₹3.37 लाख करोड़ है, जो रक्षा बजट के आधे से भी कम है।
मंत्री बी. नागेंद्र का इस्तीफा देना दिखाता है कि केवल भ्रष्टाचार पर भाषण देने से सच नहीं बदलता।
सिर्फ इस्तीफा देना काफी नहीं, शोषित वर्ग के डूबे पैसे की पूरी वसूली और दोषियों को कड़ी सजा ही असली न्याय है।
उधर राहुल गांधी भ्रष्टाचार पर बड़ी-बड़ी बात करता रह गया और उसके कर्नाटक के मंत्री को भ्रष्टाचार का मामला साबित होने पर इस्तीफा देना पड़ गया
कर्नाटक के मंत्री ने वाल्मीकि समुदाय के बच्चों के स्कॉलरशिप के पैसे को अपने निजी इस्तेमाल में लगा दिया और आरोप साबित होने पर इस्तीफा देना पड़ा