1987 से सार्वजनिक जीवन में हूं। 87 से 95 तक वेतनभोगी पत्रकार रहा। 2000 से सक्रिय राजनीति में हूं। कई सौ प्रेस कांफ्रेंस पत्रकार के तौर पर अटेंड कीं। और कई सौ राजनीतिक कार्यकर्ता के तौर पर आयोजित कीं। कभी नहीं सुना कि प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले पुलिस की परमिशन लेनी पड़ती है ।
संघी कहां ले जाकर छोड़ेंगे देश को ?
भरी मात्र में वनस्पति का बरामद होना और गोरखपुर की हवा ज़हरीली होना दोनों एक ही है।
चिलम का धुंआ बहुत जहरीला होता है, कुछ समय के लिए ही अच्छा होता है बस।
सुल्तानपुर में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर कुछ वर्चस्वादियों ने जिस तरह जन्माष्टमी के आयोजन में बाधा-अड़चन डालकर पूजा-अर्चना का खंडन किया है वो सिर्फ़ किसी समुदाय की आस्था पर प्रहार ही नहीं पाप भी है और अपराध भी।
इस मामले की उच्च स्तरीय जाँच हो और दोषी प्रभुत्ववादियों को ऐसी सज़ा मिले कि फिर कभी किसी का घमंड ��ामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का दुस्साहस न कर सके।
इन जैसी घटनाओं के पीछे उच्चता की दुर्भावना काम करती हैं और ऐसा करने के पीछे ‘सत्ता सजातीय होने का अहंकार’ मूल कारण होता है।
सब जानते हैं कि धर्म-कर्म में बाधा उत्पन्न करनेवालों को क्या कहते हैं।
घोर निंदनीय!