@AmitShahOffice@AmitShah मैंने जो बात ट्वीट के माध्यम से 2020 में ही कह दी थीं वो अब मूलरूप से उभर कर आपके सामने हैं। अभी भी वक्त हैं संभलने का बाकी आप लोगो की मर्जी 🙏🏻
साब देशवासियो ने आपको बहुमत देकर सत्ता की चाबी आपको सौंपी हैं। हालत ज्यादा ख़राब होये उससे पहले ही सभी राज्यों से अपनी टीम से गंदगी साफ करो और फिर देश सेवा के पुण्य कार्य में वापस लग जाओ। आपका मूल वोटर अब खिसकने वाला हैं। दिवाली तक संभाल लो नहीं तों राम संभालेंगे🙏🏻
@narendramodi
@narendramodi परम् आदरणीय मोदी जी आप और आपके केंद्रीय नेतृत्व में जो टीम हैं वो देश को नई ऊर्जा और दिशा देने में सक्षम हैं, किन्तु राजस्थान की भाजपा टीम और प्रदेश सरकार की टीम ने मिलकर पुरे प्रदेश को निराश किया हैं। इस और अवश्य ध्यान देना हैं आपको 🙏🏻
@alokrajRSSB अब तों सभी भर्तियां जाँच दायरे में हैं। क्यूंकि ज़ब हमें पता चले की रसोई में बिल्ली थीं हम वहाँ खुली हुई हर चीज को बाहर फेंक देते हैं क्यूंकि क्या पता कहां कहाँ मुँह मारा हो?
@alokrajRSSB सीधा सा जवाब इनको देना हो तो अपनी परम्परा को बदलो पहले सबके मार्क्स अपलोड करो फिर कट ऑफ। इससे 100 फीसदी पारदर्शिता रहती हैं। पहले कट ऑफ देंगे फिर उसमें किन किन को इन करना हैं उनके नंबर जोड़ेंगे ऐसी सम्भावना हो सकती हैं। ये सिर्फ अंदेशा मात्र भी हो सकता हैं। लेकिन सुधार अवश्य हो
•••• RSSB बोर्ड के कर्मचारियों पर शक ••••
राजस्थान वनपाल भर्ती परीक्षा–2022 का पेपर लीक मामला एक बार फिर से सुर्खियों में है।
मुख्य आरोपी और ₹50,000 का इनामी जयनारायण बिश्नोई आखिरकार गुजरात से गिरफ्तार कर लिया गया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती—
असली कहानी तो अब शुरू हुई है।
📌 जयनारायण ने खुलासा किया:
उसने प्रिंटिंग प्रेस से पेपर ₹25 लाख में खरीदा,
और फिर ₹1.5 करोड़ में बेच दिया।
यानी पेपर लीक अब कोई “गली मोहल्ले का जुर्म” नहीं,यह तो पूरी की पूरी हाई-प्रोफाइल सप्लाई चेन बन चुकी है।
📌 सबसे बड़ा सवाल: प्रिंटिंग प्रेस तक पहुंचा कैसे?
पेपर तक सीधी पहुंच…
प्रिंटिंग प्रेस तक सीधी एंट्री…
क्या कोई आम आदमी ऐसे ही अंदर घुस जाता है।
📌 SOG की जांच में खुलासा
दो गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि पूरे रैकेट का सरगना जयनारायण ही था,जो उदयपुर के होटल गीतांजलि में डील फाइनल कर पेपर गुजरात के पालनपुर और फिर अहमदाबाद लीक करवाने में लगा हुआ था।और इसमे RSSB कर्मचारियों पर भी SOG ने शक पैदा किया है।
जांच में यह भी उभरा है कि बाड़मेर का सरकारी शिक्षक हरीश सारण भी इस खेल में शामिल था,
और लीक हुए प्रश्नपत्र को आगे पहुँचाने का काम उसी ने किया।
वनपाल पेपर लीक में मास्टरमाइंड तक पकड़ लिया गया,डील कहाँ हुई, किस होटल में हुई,
कौन–कौन सरकारी कर्मचारी शामिल थे—सब सामने आ गया।
लेकिन आश्चर्य की बात देखिए…
RSSB बोर्ड अध्यक्ष महोदय,
आपके ऑफिस में बैठे हुए पेपर लीक के “सूत्र”
आज भी इतनी सफाई से काम कर रहे हैं
जैसे किसी ने उन्हें सरकारी संरक्षण दे रखा हो।
महोदय,दोषी तो पकड़े जा रहे हैं,
पर जिनके साए में ये दोषी पनपे,
जिनकी “आँखों के सामने” करोड़ों में पेपर बिकते रहे और वे आज भी आपकी कुर्सी के चारों तरफ आराम से घूम रहे हैं।
आपके बोर्ड में तो हालत ये है कि पेपर बाहर जाने की रफ्तार परिणाम के आने से भी तेज़ है।
और ऊपर से हर बार वही आदर्श पंक्ति:
“हमारी पारदर्शिता पर सवाल न उठाएं।”
हम नहीं अब तो SOG भी आपकी पारदर्शिता पर सवाल उठा रही है।
महोदय,अगर “पारदर्शिता” ऐसी होती है कि
पेपर प्रिंटिंग प्रेस से करोड़ों में बिक जाए,
डील होटल में फाइनल हो जाए,
आपके बोर्ड के कर्मचारियों पर शक हो
और डमी अभ्यर्थी सेंटर पर पहुंच जाएं—
तो फिर देश की सबसे पारदर्शी संस्था
कथित रूप से RSSB ही बन जाती है।
#RSSB
#RPSC
#4thgrade
@alokrajRSSB@Kapil_Jyani_@Birbalgodara07@HansrajGurjarR
@BhavnaJJoshi हम ZEN B हैं अर्थात भारत के जन। नस्ले तबाह कर देंगे अगर भारत को किसी ने नेपाल और बांग्लादेश बनाने की हिम्मत की तो खोटे सिक्के को चलाने के लिए क्या अब जनता की गिरेबान पकड़ोगे।
@SupriyaShrinate यही हम कह रहे हैं नेहरू का वारिश गाँधी बन गया और राजनीति का ज्ञान कुछ नहीं फिर भी राजनीति में हैं।सब पैसो के दम पर ही तो हो रहा हैं। जाँच होनी चाहिए?