"आधी रोटी खाएँगे,
स्कूल को बचाएँगे!"
ये नारे लगा रहे स्कूली बच्चे ही इस देश का असली स्वर्णिम भविष्य हैं।
जो बच्चे आज अपने स्कूल बचाने के लिए सड़क पर उतर रहे हैं, वही कल इस देश का भविष्य बचाएँगे।
अब चुप रहने का समय बीत चुका है। अपने गाँव, कस्बे और शहर के स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों को बचाने के लिए संगठित होकर आवाज़ उठाइए। शिक्षा पर हर हमला पूरे समाज पर हमला है।
देश भर में शिक्षा बचाओ आंदोलन की नई लहर उठ चुकी है। जो भी शिक्षा, विद्यार्थियों और बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष कर रहा है, उसके साथ खड़े होइए। क्योंकि अगर आज स्कूल नहीं बचेंगे, तो कल सपने भी नहीं बचेंगे।
RSS द्वारा देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों पर क़ब्ज़े की कहानी : भाग 2
आजकल शिक्षा जगत पर RSS के बढ़ते प्रभाव और विश्वविद्यालयों के भगवाकरण को लेकर देशभर में गंभीर चर्चा चल रही है। ऐसे समय में मैं आपके लिए कुछ ऐसे सबूत साझा करने की यह श्रृंखला लेकर आया हूँ, जिन्हें हमने पिछले कई वर्षों से लगातार आपके सामने रखा था, ताकि समय रहते आपको आगाह किया जा सके। आज वही सवाल राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुके हैं।
यह वीडियो भी कुछ महीने पुराना है, जिसे मैंने अपने सोशल मीडिया संग्रहालय से आपके लिए निकाला है। इस वीडियो को स्वतंत्र पत्रकार @harshdelhise ने बनाया था। आज इसे दोबारा साझा करने का उद्देश्य केवल इतना है कि लोग देखें—जो बातें तब कही जा रही थीं, वे आज किस तरह वास्तविकता के रूप में हमारे सामने खड़ी हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में "युवा कुंभ" जैसे आयोजनों के नाम पर RSS से जुड़े कार्यक्रम खुलेआम आयोजित किए जा रहे थे। कई जगह कॉलेज प्रशासन अलग-अलग नामों से अनुमति देकर इन कार्यक्रमों का हिस्सा बनता दिखाई दिया। ऐसे आयोजनों को लेकर छात्र संगठनों और शिक्षकों के एक वर्ग ने विश्वविद्यालय की संस्थागत निष्पक्षता पर सवाल उठाए और विरोध भी दर्ज कराया।
विश्वविद्यालय विचार, बहस, शोध और आलोचनात्मक चिंतन के केंद्र होने चाहिए। लेकिन जब सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थानों का उपयोग किसी एक वैचारिक एजेंडे के प्रचार के लिए होने लगे, तो यह केवल एक कार्यक्रम का सवाल नहीं रह जाता, बल्कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक चरित्र का प्रश्न बन जाता है।
छात्र विरोध में उतर चुके हैं, जनता सवाल पूछ रही है और कैंपस का माहौल बिगाड़ने की यह कोशिश अब सबके सामने है। सरकारी संस्थानों को किसी भी वैचारिक या राजनीतिक प्रभाव का माध्यम बनाने की प्रवृत्ति पर गंभीर बहस और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं।
यह श्रृंखला आगे भी जारी रहेगी। दस्तावेज़ों, वीडियो और तथ्यों के साथ हम उन घटनाओं को सामने लाते रहेंगे, जिन्हें उस समय नज़रअंदाज़ किया गया, लेकिन जिनके परिणाम आज पूरे देश के सामने दिखाई दे रहे हैं।
"मनुस्मृति में लिखा है: जो शूद्र वेद सुने उसके कानों में शीशा डाल देना चाहिए, वेद का उच्चारण करने पर जीभ काट दी जाए, तथा वेद मंत्र धारण करने पर उसका शरीर काट देना चाहिए.."
खड़गे जी ने घृणित किताब का जिक्र जैसे ही किया सारे भाजपाई बिलबिलाने लगे! खड़गे जी मनुस्मृति का पोस्टमार्टम कर रहे है।
EWS आर्थिक नहीं बल्कि जातिगत आरक्षण बन चुका है !!
यह गरीब आर्थिक कमजोर सामान्य वर्ग के लिए बनाया गया था,पर सबसे ज्यादा उपयोग अमीर कर रहे है !!
जो फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर जिसमे कम आय दिखाकर गरीबों का हक खा रहे है !!
गरीब सामान्य वर्ग के लोगों को इस पर चर्चा करनी चाहिए और अपना हक लेना चाहिए !!
नोट:- गरीब सामान्य वर्ग का व्यक्ति जातिगत भेदभाव से दूर रहता है वह SC/ST और ओबीसी के साथ मिल जुलकर रहता है बस दिक्कत इन्हें होती जिनके पास 50 बीघा जमीन है !!
"जिन पुलिसकर्मियों ने मर्यादाएं लांघी, उनको कोर्ट तक लेकर जाएंगे"
◆ CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा
#AshutoshRanka | Ashutosh Ranka | @AshutoshRanka
| @maqusood_khan | CJP
“मेरे बहनोई से क़मीज़ उतरवा ली, यह कहते हुए कि हमने ऐसी क़मीज़ नहीं पहनी। तुमने पहनना कब से शुरू कर दिया?”
सोचिए, जब हर दलित परिवार जातिवाद से तंग आकर आज के समय में गाँव छोड़ने को मजबूर हो जाए, उस वक़्त यह कहना कि “आरक्षण ख़त्म करो”, कैसी हैवानियत है।
जो आरक्षण-विरोधी है, वह संविधान विरोधी है।
सीधे-सीधे देश-विरोधी।
Reservation Bachao Aandolan 👊
देश के ओबीसी, दलित, आदिवासी, समाज के हितों की रक्षा के लिए समर्पित।
हम बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियों से हमारे आरक्षण की रक्षा की मांग करतें हैं।
रेस्टोरेंट के अंदर गैस की पाइप में आग लग गई, और उसे तुरंत समझ आ गया कि क्या करना है !
ऐसे वक़्त, बिना घबराये, सही समझदारी और सही तरीका अपनाना ज़रूरी है !
3 लड़के एक लड़के को गाड़ी से उतरते ही मारने लग जाते है सफेद टी शर्ट के साथ नीली टीशर्ट वाला बॉडी बिल्डर था , एक ओर पहचान का बाडी बिल्डर लड़का भी उस सफेद टीशर्ट वाले का दोस्त था लेकिन वो दोनों उसे मार खाते देखते रहे तमाशा खत्म हो गया और फिर उसे उठाने आ गए ।
दोस्त कम बनाओ लेकिन व्यवस्थित बनाओ
आज 'हिंदू एकता' का राग अलापने वाले सारे हिंदू संगठन गूंगे-बहरे क्यों बन गए हैं? हिंदू समाज की स्थिति इतनी दयनीय है कि दलित समुदाय के लोग सुकून से अपनी खुशियां भी नहीं मना सकते। क्या योगी सरकार का यही सजातीय न्याय है?
ये आंदोलन कोई गोदी मीडिया नहीं दिखाएगा ।
RT करो और देश को दिखाओ...
NTA दफ़्तर के बाहर 48°C की भीषण गर्मी में, कांग्रेस के जाँबाज़ कार्यकर्ता भारत के भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
मथुरा में दलित समाज की बेटियों की शादी में जिस तरह बारातियों को पीटा गया, वह सिर्फ गुंडागर्दी नहीं, व्यवस्था की जातिवादी मानसिकता है।
योगी सरकार में आज भी दलित-पिछड़ों को बराबरी नहीं, अपमान मिलता है।
सवाल यह है - क्या यही ‘रामराज्य’ है? क्या यही सामाजिक न्याय है?
मिलिए IFS आकाश शर्मा (2020 बैच) से! 🔥🔥🔥
◆ पिता: डॉ. बी.बी. शर्मा (रिटायर्ड प्रोफेसर)
◆ माँ: रिटायर्ड लेक्चरर
◆ परिवार पृष्ठभूमि: पूरा परिवार उच्च शिक्षित, आर्थिक रूप से मजबूत।
★ ये कैसे IFS बने? मेरिट पर नजर डालिए तो
◆ ST का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर...
◆ रैंक: 524
◆ चयन: ST कोटे से सीधे भारतीय विदेश सेवा (IFS) में घुस गए!
★ ब्राह्मण परिवार ने आदिवासियों का हक मार लिया!
ST का हक खाकर ये लोग मेरिट की दुहाई देते हैं। गोटाले करने में इनको महारत हासिल है – आरक्षण को लूटने का पूरा खेल सेट कर रखा है।
असली ST आज संघर्ष कर रहा है, और ये उसके हक को डकार कर विदेश मंत्रालय में बैठकर मज़े कर रहे हैं। शर्मनाक ! 🤬