रूठ जाते बो अंधेरे ,
जो मुझे गुमराह करते,
रास्ता ना देखने देते,
कहें बो प्यार करते ।
रोशनी से दुश्मनी ,
मंडराए इसके इर्द गिर्द,
जलते हैं तो जलते रहें,
हम रोशनी से प्यार करते।
नारी हुए बिना
नारी को जानना असम्भव है
नारी की #हँसी,उसका #रुदन
उसकी घुटन
यहाँ तक की
उसकी मुखरता को
चाहकर भी
समझ नहीं सकता कोई #पुरुष
उसके मनके कितने ही दरवाजे
आज भी बंद है
सदियों से ज्यों के त्यों
जानते हो
आज भी नारी
उन दरवाजों के उस पार ही है
और #पुरुष तुम इस पार
#सरस#बज़्म
वर्षों साथ रहने के बाद भी ? बहुत सी जगह देखा गया है ।
भाई, बहन, पत्नी, एक मत , एक विचार धारा के क्यों नही बनते ? प्रत्येक व्यक्ति क्यों सबको अपनी शरण मे लेना चाहता है ?स्पष्टता के साथ विश्लेषणात्मक क्यों नही बन सकते ?