राजस्थान की बेटी @Ritubarala के साथ पुलिस की बर्बरता पर सबकी ज़बान खामोश क्यों है?
जब बेटी की इज़्ज़त और सुरक्षा का सवाल आता है, तो पावर देखकर मीडिया की आवाज़ क्यों बदल जाती है?
चुप्पी क्यों? क्या वह देश की बेटी नहीं है?
मैंने उपरोक्त ऑनलाइन भुगतान ₹203 सिकन्द्राबाद डिपो की बस सं. UP - 78LN 1531 में अलीगढ़ से दिल्ली जा रही बस में टिकट के लिए किया था, लेकिन टिकट नहीं निकला और ₹ भी एकाउंट से डेबिट हो गए। कृपया उपरोक्त भुगतान वापिस करें। धन्यवाद
@UPSRTCHQ
मैंने उपरोक्त ऑनलाइन भुगतान ₹203 सिकन्द्राबाद डिपो की बस सं. UP - 78LN 1531 में अलीगढ़ से दिल्ली जा रही बस में टिकट के लिए किया था, लेकिन टिकट नहीं निकला और ₹ भी एकाउंट से डेबिट हो गए। कृपया उपरोक्त भुगतान वापिस करें। धन्यवाद
@UPSRTC
मैंने उपरोक्त ऑनलाइन भुगतान ₹203 सिकन्द्राबाद डिपो की बस सं. UP - 78LN 1531 में अलीगढ़ से दिल्ली जा रही बस में टिकट के लिए किया था, लेकिन टिकट नहीं निकला और ₹ भी एकाउंट से डेबिट हो गए। कृपया उपरोक्त भुगतान वापिस करें। धन्यवाद
@UPSRTC
महिला सशक्तिकरण का ढिंढोरा पीटने वाले प्रधानमंत्री मोदी की अपनी ही चार इंजन सरकार की मुख्यमंत्री क्या कर रही हैं?
एक महिला पत्रकार को गृह मंत्री अमित शाह के अधीन आने वाली पुलिस ने सिर्फ इसलिए बुरी तरह पीट दिया, क्योंकि वह मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछ रही थीं।
ऐसे में सवाल तो जायज़ है,
क्या मोदी सरकार में बेटियों की आवाज़ को इसी तरह हमेशा कुचला जाएगा?
मेरठ मे किसान नेतृत्व के नाम पर ‘पीडीए’ पर प्रहार किया गया है। जिस प्रकार चुन-चुनकर दलित और गुर्जर समाज को निशाना बनाया गया है, उससे पता चलता है कि भाजपा में इन समाजों के प्रति कितना अधिक विद्वेष भरा हुआ है। भाजपा समझ गई है कि अब न तो दलित समाज उनके साथ है और न ही गुर्जर व पीडीए के अन्य समाज, इसीलिए उन्हें डरा-धमकाकर अपनी तरफ़ लाने की कोशिश की जा रही है।
पीडीए एकजुट है और रहेगा!
किसान का अपमान, देश का अपमान है!
भाजपा ने किसान के मुँह पर लात मरवाकर पूरे देश के किसानों को धमकाने का जो कुकृत्य किया है वो अक्षम्य है।
उप्र की भाजपा सरकार द्वारा किसान नेताओं पर थाने में थर्ड डिग्री की मार-पीट करके प्रताड़ना देना दर्शाता है कि हार के डर से वो कितनी बौखलाई है। जिन्हें भाजपा किसानों के आगे ढाल बनाकर साथ में खड़ा करना चाहती थी वो ढाल भी निम्नलिखित कारणों से, किसानों के आक्रोश की आग के कारण मोम की ढाल ही साबित हुई है।
जो भाजपा सरकार :
- कुछ लोगों के हाथ में खेती-किसानी, भंडारण, विदेशी बीज-खाद- पैदावार का व्यापार-विपणन देने के लिए विदेशियों से डील करती है।
- एमएसपी के लिए तैयार नहीं होती है।
- ख़रीद के लिए मुकर जाती है।
- खाद की अंतहीन लाइन में किसानों को लगाती है।
- भूमि अधिग्रहण व तीन काले क़ानून लाकर, किसानों का सब कुछ हड़प लेना चाहती है।
- किसान आंदोलन में 700 से भी अधिक किसानों की शहादत पर चुप रहती है।
- किसानों की आत्महत्याओं पर शोक तक प्रकट नहीं करती है।
- किसानों पर गाड़ी चढ़ाकर मारनेवाले अपने लोगों का क्लीन चिट देती है…
उस भाजपा सरकार से इससे अधिक उम्मीद क्या की जा सकती है कि वो किसानों के हित के नाम पर उनके तथाकथित हितैषियों से समझौता करके अपनी स्वार्थ सिद्धी में लगी रहकर ‘किसान नेताओं’ को थर्ड डिग्री देगी और कुछ नहीं।
देश भर के किसान देख लें कि भाजपा और उसके सहयोगी किस तरह सत्ता सुख में लीन रहकर किसानों पर अत्याचार कर रहे हैं।
इस मामले की गहरी जाँच हो और हर दोषी के ख़िलाफ़ सख़्त दंडात्मक कार्रवाई हो और बर्खास्तगी भी।
घोर निंदनीय!
किसान कहे आज का , नहीं चाहिए भाजपा!
इस तरह का बर्बतरता पूर्वक व्यवहार सहन करके रूह कांप जाती है। आखिर मानवता नाम की कोई चीज बची है या नही। यह एक लोकतान्त्रिक व्यवस्था का हिस्सा नही हो सकता। भाजपा सरकार जिम्मेदार व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार करा रही है तो आम व्यक्ति तो इनका किस प्रकार से शिकार हो रहा होगा।
@yadavakhilesh