पांडे जी, हमको झाँट भर फर्क नहीं पड़ता तुम्हारे विरोध में चलने वाली ‘विदेशी साजिशों’ से। मेरे नाक से दूध नहीं बहता। माँग सही है, बात खत्म। देश में हर वर्ष पाँच चुनाव होते हैं, तो वक्त तो कभी सही होगा नहीं।
तुम ही लोग तो चूतिए थे न साले कि हर्ष दूबे को स्टूडियो-स्टूडियो घुमा रहे थे?
तुमने सोचा कि राम मंदिर की डकैती के बवासीर को CJP बिठा कर डायवर्ट कर देंगे। वो बवासीर बना तो दूबे को ले आए NEET पर बोलने के लिए कि वो डायवर्ट हो जाए। फिर वो दबा तो तुमने उस विषय पर उससे बुलवाना चालू किया जिसे अचानक से तुम आज ‘सेंसिटिव’ मान रहे हो।
फिर मैं आ गया आउट ऑफ सिलेबस। और मैं, दूबे या दीपके तो हूँ नहीं कि तुम प्रधान को हटा दोगे मैं नाचने लगूँगा क्योंकि मेरी माँग न तो मेरी नेतागीरी के लिए है, न ईगो सेटिस्फैक्शन के लिए।
तुमने ऐसा व्यक्ति देखा ही नहीं है, इसलिए पुरानी से ले कर नई आइटी सेल और मोमो की दुकानों की तरह हर नुक्कड़ पर फोन लिए डीप स्टेट, विदेशी साजिश टाइप करने वाले मीशो के अजय सान्यालों को समझ ही में नहीं आ रहा है कि टैकल कैसे करें।
आज भी मेरी माँ के मरने को ले कर बातें लिखी जा रही हैं। पर भाई, मैंने उसे अपने हाथों से मुखाग्नि दे कर उसकी राख को गंगाजी में बहा दिया है। तुम मुझे ‘इसकी माँ और उसकी माँ’ कह कर अपमानित नहीं कर सकते। हाँ क्रोधित कर सकते हो। और वह अच्छा नहीं होगा, इसकी मैं गारंटी दे सकता हूँ।
खैर, तुम्हें इतना समझ में नहीं आएगा क्योंकि आईटी सेल में निम्न स्तरीय बुद्धि होना एक अपेक्षित मानदंड है। तुम वैसे भी राज्य के आइटी सेल के हो। अतः, तीन वाक्यों में यह समझ लो:
पार्टी के भटकाव की आलोचना देशद्रोह नहीं है। पार्टी के नेता द्वारा समाज को एक्टिवली बाँटने का उपक्रम देशद्रोह और गद्दारी है। गांड में दम है तो उस नेता का नाम कमेंट में लिखो।
अपडेट 🚨
हमारे साथीगण शिवम् सिंह जो आरक्षण हटाओ आंदोलन के संयोजक थे वो अभी भी लापता हैं पुलिस ने उन्हें कहां रखा है कोई पता नहीं है।
शिवम् सिंह ने बांकी सब लोगों की तरह सरेंडर नहीं किया था और न ही झुके थे न ही समझौता किया था इसीलिए उन्हें दिल्ली पुलिस अभी भी हिरासत में लिए है, लेकिन वो कहां हैं किस हाल में कोई जानकारी नहीं है।
हमें आप सबकी शिवम् के लिए मदद चाहिए, यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं है न था जो डर गए जो बिक गए वो मुर्दा लोग हैं जो डटे हैं जो तटस्थ हैं वो अभी मैदान में हैं, सब लोग अपने अपने स्तर से शिवम् सिंह के लिए आवाज बनें।
RHA को ले कर सरकार से कुछ बात और माँगें
सरकार अपने स्तर से हर आंदोलन को फूट, समझौता, बल-प्रयोग, समझदारी, मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन या कायरता दिखा कर कर समाप्त करना चाहती है। और वही उनका कार्य भी है। RHA का नाम ले कर कुछ लोगों ने आंदोलन के लिए जनता को बुलाया और लगभग 7000 की भीड़ जंतर मंतर पर भीतर दिखी, उतने को ही बाहर होल्ड किया गया या लौटा दिया गया।
मैंने केवल दिल्ली पुलिस की बकलोली की अवज्ञा के लिए इसमें भाग लेने की बात की और फिर बहुत लोग मेरे आने पर भी आए। फिर दुबे को पाठक जी ने नेता मान कर एक ऐसे पत्र पर चर्चा के लिए आश्वासन दिया जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं है।
खैर, मैं ये सब तकनीक देखता और जानता आया हूँ। मुझे इस विषय पर सरकार को भीड़ दिखाने की आवश्यकता न पहले थी, न आज है, पर जब चाहूँ वह भी कर सकता हूँ। अगली बार बिना अनुमति के भी ऐसा किया जा सकता है यदि प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चाहिए, तो वह भी दिखा देंगे। पर मेरा लक्ष्य वह है ही नहीं।
सरकार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक भीड़ पूरे कनॉट प्लेस को घर कर पत्थरबाजी करते हुए संसद घेर लेगी। सरकार को इसलिए डरना चाहिए कि ऐसी कोई भीड़ ही नहीं है, न ही हम संसद को घेरने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलन की तपन केवल जलती हुई कार की आग और अराजक भीड़ की ही नहीं होती। एक तपन ऐसी भी होती है जब जनमानस को वैचारिक रूप से इतना सक्षम बना दिया जाता है कि वह स्वयं ही अपने लिए वह निर्णय कर ले, जो वो कल तक किसी दूसरे बहकावे में आ कर कर रहा था।
हमारी माँगें:
१. आरक्षण पर श्वेत-पत्र: क्या लाभ हुआ, किन जातियों को अनुपात से अधिक लाभ लगातार मिला, कौन सी जातियाँ पूर्णतः छूट गईं। आरक्षण किस तरह से देश या समाज के उत्थान में सहायक है, उसके लिए आँकड़े क्या कहते हैं आदि आदि! इस से जुड़ी हर वह रिपोर्ट और सर्वेक्षण जो सार्वजनिक नहीं हुई।
२. EWS को हर वह आर्थिक सहायता दी जाए जो SC को मिलती है। निःशुल्क कोचिंग, निःशुल्क फॉर्म, शून्य हॉस्टल और कोर्स फीस। फिर भी लोन यदि लेना पड़े तो उसमें भी सुविधा।
३. तीनों ही आरक्षित वर्ग में ‘कोटा विदिन कोटा’ लागू हो ताकि वास्तविक दलित-पीड़ित-वंचित जातियों तक लाभ पहुँचे। अभी SC और OBC में हजार-हजार जातियाँ ऐसी हैं जिन्हें नगण्य आरक्षण मिला है। और 4-5 जातियाँ ऐसी हैं जो 70-80% आरक्षण खा रही हैं। इसका आधार पारिवारिक आय हो, न कि वैयक्तिक और दुरुपयोग की संभावना न रहे।
४. मेरिट का सम्मान हो। आरक्षित वर्ग का कटऑफ किसी भी हालत में सामान्य वर्ग के कटऑफ के (से नहीं) 10% के रेंज से बाहर न जाए। और यह भी आज की परीक्षा के अधिकतम आयु सीमा वाले बच्चों की आयु के बाद समाप्त किया जाए। न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तो तय होना ही चाहिए।
५. सरकार यह सर्वेक्षण करे कि क्या गरीबी, भेदभाव या पिछड़ेपन से किसी की बौद्धिक क्षमता घट या बढ़ सकती है? इम्पीरिकल एविडेंस सार्वजनिक करें और उसी आधार पर आरक्षण की नीतियाँ बनें।
६. एक व्यक्ति को एक बार आरक्षण मिले। एक परिवार को एक बार आरक्षण मिले।
७. दशकीय समीक्षा हो। समाप्ति के लिए एक ‘सनसेट क्लॉज’ या रोडमैप कि कब तक रहेगा।
८. कॉलेज/यूनिवर्सिटी पुस्तकालयों में पुस्तकों के अलॉटमेंट का आरक्षण तत्काल निरस्त हो। इसका कोई लॉजिक नहीं है। यह आरक्षण से लड़ कर वहाँ पहुँचे बच्चों को सताने की व्यवस्था मात्र है। या आप पुस्तकों की मात्रा दोगुनी कीजिए और वहाँ ‘आरक्षित सेक्शन’ लिख दीजिए।
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अन्य माँगें:
९. यूजीसी नियमावली निरस्त हो या समीक्षा कर के हर जाति समूह को इसमें सम्मिलित किया जाए।
१०. SC/ST Act की तर्ज पर ‘सवर्ण उत्पीड़न (रोकथाम) कानून पास’ हो। दोनों ही कानून में केस झूठा पाए जाने पर, उस केस में होने वाला दंड आरोप लगाने वाले को झेलना पड़े। आर्थिक जुर्माना भी वसूला जाए।
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सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।
हर्ष दुबे इस आंदोलन का नेता नहीं , ये आंदोलन समस्त सवर्ण समाज के लोग कर रहे हैं , भाजपा इस आंदोलन को नष्ट करना चाहती है , ब्रजेश पाठक कभी ब्राह्मणों के समर्थन में खड़े नहीं होते ।
ब्रजेश पाठक एक बार बोल दें की जातिगत आरक्षण , एससी एसटी एक्ट और यूजीसी एक्ट ग़लत है मैं मान लूंगा की वो हमारे शुभ चिंतक हैं ।
जो व्यक्ति एक शब्द बोल नहीं सकता वो कैसे हमारी बात मोदी तक पहुँचा सकता है , हर्ष को फ्लाइट से लखनऊ बुला कर और बिना सबकी सहमति लिए इस तरह से प्रेस करना पीठ में छुरा मारने जैसा है अब हम इसको भूलेंगे नहीं ।
#यूजीसी_रोलबैक
#एससी_एसटी_एक्ट_रोलबैक
#जातिगत_आरक्षण_वापस_लो
आंदोलन का अपडेट !
सुव्यवस्थित आंदोलन कीजिए ये लंबा चलने वाला आंदोलन है , इस आग में ख़ुद कूदना पड़ेगा और कोई साथ नहीं देगा ।
जहाँ हैं वहीं से आंदोलन कीजिए , ये आग बुझने मत दीजिए लेकिन क़ानून को भी हाथ में ना लीजिए ।
#ugc_rollback#scstact_rollback#arakshn_rollback
All GC people.
Request all of you to post about antireservation-UGC protest at Jantar Mantar on your respective timelines.
Share all videos, across all social media platforms!
Media has blacked us out.
But you make sure our voice reaches everyone.
#21AugReservationHataoAndolan
The mainstream media is भांड. Thousands have gathered in Delhi, but the mainstream media is completely missing. They are absent because the protesters here are not abusing anyone's mother, insulting the police, or shouting anti-national slogans. Instead, the general category protesters are expressing their anger with dignity. However, the government must understand that this is the silence before the storm.
@narendramodi #ReservationHatao ..!
@ndtv@ZeeNews@ABPNews@aajtak@WIONews@republic@timesofindia@TimesNow@htTweets
अगर आप जंतर मंतर नहीं पहुंच पा रहे है तो कम से कम सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे और UGC रोलबैक और Reservation हटाओ मूवमेंट को आगे बढ़ाइए,
लगातार लिखते रहिए -
#ReservationReformSatyagarh
Modi may try to suppress the GC Jantar Mantar protest, even ordering force, record everything, as internet shutdowns are possible, use proxy apps available on GitHub
there's no going back now, enough of appeasement politics by mahamaanav
Jai Bajrangbali ☀️
This Reservation Reform movement is NOT ending here. 🔥
We are standing firm and we won’t leave until the government listens to our demands and takes action.
No backing down. No compromise. We stand till the end.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी से मुलाकात की और जापानी व भारतीय छात्रों से बातचीत की। इस दौरान जापानी बच्चों ने मुख्यमंत्री के साथ तस्वीरें खिंचवाईं, जो भारत और जापान के बीच लोगों के आपसी संबंधों के बढ़ने को दर्शाता है।