जंगल में आग लगी थी, एक चिड़िया चोंच में पानी लाकर बुझाने की कोशिश कर रही थी
ये सब देख किसी ने पूछा क्या तेरे एक चोंच से आग बुझ जायेगी?
चिड़िया - मेरी गिनती आग बुझाने वालों में होगीl
मेरी भी एक छोटी सी कोशिश चिड़िया की तरह।
@INCIndia@kharge@ajaymaken@RahulGandhi@priyankagandhi
ये पिंकी चौधरी फिर आ गया
कह रहा है कि “हिन्दू का पैसा - अगर किसी हिन्दू ने ले भी लिया तो तुम्हें क्यों मिर्ची लग रही है ?
हिन्दुओं के पैसे से जो मदरसे और चर्च बन रहे हैं उन पर सवाल क्यों नहीं उठाते ?”
‘धर्म-द्रोही’ संघी, प्रभु राम के साथ किए घोटाले का समर्थन कर रहे हैं..ये न कभी राम-भक्त थे, ना हैं, न होंगे !
आज विदेश मंत्रालय ने औपचारिक रूप से स्वीकार लिया कि कुछ लोगों ने “निजी तौर “ पर पाकिस्तान डेलीगेशन से मुलाक़ात की। इसे सरकारी प्रयास नहीं माना जाए। जिन लोगों ने मुलाक़ात की उनमें बीजेपी नेता भी शामिल थे। बाक़ी बीजेपी के करीबी लोग इसमें थे। कोई ग़लत नहीं या। सामान्य प्रकिया है। होना भी चाहिए।
बस अब यहाँ सवाल है कि अगर कोई निजी तौर पर पाकिस्तानी डेलीगेशन से मिल रहा है,पार्टी कर रहा है तो इसका कहीं गुस्सा टीवी चैनल पर दिखा?
अब यही सोच कर देखिए कि किसी विपक्षी नेता के मित्र के ससुर का समधी का मामा भी ऐसे बातचीत/पार्टी में दिख जाता तो पूरी विपक्ष को पाकिस्तानी बुलाकर अंतहीन टीवी डिबेट हो रहे होते। तमाम न्यूज़ एजेंसी के कैमरा उन सभी लोगों के घर के हर छेद में लग गए होते जो ऐसी मीटिंग में शामिल हुए होते।
चाहे धर्म के नाम पर करोड़ों के चढ़ावा घोटाला हो या राष्ट्रवाद के नाम पर पाकिस्तान के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाना,यह कुछ “खास” लोगों के लिए मानो आरक्षित कर दिया गया है!
बीजेपी नेता राम माधव कोलंबो में पाकिस्तानियों से ‘प्राइवेट मीटिंग’ कर आएं तो कोई बात नहीं…
…हंगामा तभी मचता जब पाकिस्तान हाई कमीशन में मणिशंकर अय्यर जैसे नेता पब्लिक फ़ंक्शन में चले जाएं!
मैडम जी
चंदा देश के लगभग सभी ने दिया है
धर्म पार्टी से उठकर
यहां तक कि अल्पसंख्यकों ने भी दिया है
कार सेवकों पर जिन्होंने गोली चलाई थी
वो खुद मंदिर ट्रस्ट में है
नाम तो आप जानती होगी
मंदिर ट्रस्ट ने जो कार सेवक अपने प्राण गवाए थे उनकी आर्थिक मदद क्यों नहीं कि
उनके परिवार के रोजगार शिक्षा का खर्च क्यों नहीं वहन किया
राम जी मर्यादा पुरुषोत्तम हैं
क्या भाजपा ने मर्यादा रखी थी उद्घाटन में
सनातन धर्म के सर्वोच्च पद पर बैठे
चारों शंकराचार्य क्यों नहीं आए उद्घाटन में
मैडम जी मंदिर का उद्घाटन होता
तो सभी आते यह तो भाजपा का उद्घाटन था
प्रधानमंत्री ने उद्घाटन किया
प्रधानमंत्री ने ही ट्रस्ट बनाया
प्रधानमंत्री ने ही न्यौता दिया
जिसको मन किया बुलाया
जिसको मन नहीं किया नहीं बुलाया
और एक बात
जब बुलावा आएगा तब जाएंगे
चंदा तो सभी का शामिल है
भूलिएगा नहीं
अब कौन रामभक्त है कौन नहीं है ये सर्टिफिकेट बीजेपी के साथ-साथ चित्रा त्रिपाठी भी बांट रही हैं...इनकी नजर में जिसने चंदा नहीं दिया जिसने राम मंदिर के दर्शन नहीं किए वो रामभक्त नहीं हैं
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में झूठ बोला!
मोदी सरकार ने 14 महीनों तक ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों के नाम देश से छिपाए रखे!
कांग्रेस ने लगातार शहीदों को सम्मान दिलाने के लिए आवाज़ उठाई, देशभर में 'जय हिंद सभाएँ' आयोजित कीं, प्रेस कॉन्फ्रेंस कीं और उनके बलिदान, शौर्य एवं पराक्रम को नमन किया।
सेना ने भी शहीद होने की पुष्टि की थी। कांग्रेस पार्टी के पूर्व सैनिक विभाग ने 10 शहीदों की सूची जारी की थी और शहीद सैनिकों के परिवारों को न्याय दिलाने के लिए लगातार संघर्ष किया। अन्ततः रक्षामंत्री का झूठ पकड़ा गया।
सेना के सम्मान में, कांग्रेस सदा मैदान में 🇮🇳
30 जुलाई 2025 (सदाकत आश्रम, पटना)👇🏾
मौत के अगले दिन इनमे से एक शहीद सैनिक के भाई ने ट्विटर डीएम में सम्पर्क किया था।
नाम, लाश की कॉफिन में फ़ोटो और छोड़ने आये फौजी दल की तस्वीरे दी। उस वक्त देश के रक्षा मंत्री संसद में बयान दे रहे थे कि ऑपरेशन सिंदूर में कोई भारतीय सैनिक नही मरा।
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शहीद के भाई चाहते थे कि इस पर पोस्ट लिखूं, सबको बताऊं। मगर जब देश युद्ध मे हो, तो वह वक्त फौज और नेतृत्व से, डिस्प्यूट करने का नही होता।
तो यदि वे इस मौत को छुपाना चाहते हैं,
तो यही सही।
मैंने वह पोस्ट नही लिखी। मगर हृदय में बोझ रहा। आज सरकार ने एक नही, 6 मौते कबूल ली हैं। देर सवेर गिरे विमानों की सँख्या भी पब्लिक डोमेन में आ जायेगी।
पर आर्मी सर्कल्स में तो पहले पता होगा सबको। क्या बीती होगी फौजियों के दिलों पर। हम मरें, और शहादत की कृतज्ञता तक यह देश नही दिखाता।
जब यह सरकार जाएगी तो उनके मेमोयर्स भी आएंगे। जाने क्या क्या खुलासे हों। जो भी होगा, शॉकिंग होगा। शर्मनाक होगा।
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मगर जनता के लिए इसके फौरी तौर पर अर्थ समझिए। पहलगाम अटैक, पुलवामा अटैक के बाद हुआ। दोनों ही मामलों में इसके कलप्रिट पकड़े नही जा सके। हां, पाकिस्तान पर चटपट हमला कर दिया गया।
पहली बार, बालाकोट स्ट्राइक एक सरप्राइज थी। क्योंकि क्रॉस बॉर्डर एरियल अटैक के उदाहरण पहले नही थे। सिन्दूर के समय यह सरप्राइज खत्म हो चुका था।
अबकी बार दुश्मन तैयार था।
चीनी के दिये सेटेलाइट सपोर्ट और मिसाइलों के साथ... (जो आगे भी रहेगा)
हमारे लोग मरे, विमान खोए। कुछ हासिल किए बिना युद्ध विराम कर लिया। शहादते बेकार हो गयी। उनके नाम छुपाए।
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आतंकी खत्म हो गए हैं, या उनकी हिम्मत टूट गयी,ऐसा कहना बचपना होगा। ये लोग, आतंकी हमले रोक पाते नही, कलप्रिट्स को पकड़ पाते नही। यह हुआ इंटेलिजेंस का, इन्वेस्टिगेशन का फेलियर..
अब भविष्य में आतंकी हमला हुआ, तो एडे बेड़े कराची पे हमला करने की हिम्मत भी ये नही कर सकेंगे। याने सैन्य विकल्प खत्म..
वैश्विक कूटनीति के स्तर पर मामला पहले खत्म है।सिन्दूर के बाद थरूर सहित तमाम दल देश दुनिया घूमें। और नतीजा सिफर रहा। ईरान युद्ध के बाद पाकिस्तान ऊंचे लेवल पर बैठा है। । तो कूटनीति भी नहीं जीरो।
क्या बचा??
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बन्द मुट्ठी लाख की होती है।
उसका भय होता है।
हर कवच विदीर्ण है। सारी मुट्ठियाँ खोल दी गई, अब वे खाक की हैं। पाकिस्तान पहले से ज्यादा निर्भय है। और भारत-
तथ्य और सत्य छुपाने वाला निर्बल देश।
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इन बहादुरों की शहादत छुपाकर रखने वाले लोगो को लानत देना बेकार है।
उन्हें चुनने वालो को जरूर लानत दें। जिन गालीबाज बड़बोलों के हाथों इस देश, सेना और भारत की अस्मिता मलिन हो चुकी है।
अभी तो हमे और जलील होना है।
फिलहाल आइये, इन शहीदों के लिए 2 मिनट का मौन रखें। इनके परिवारों को हमारी (विलम्बित) सांत्वना पहुँचे।
देश के इन शहीदों को कोटि कोटि प्रणाम।
🙏
हर जज रंजन गोगोई या चंद्रचूड़ नहीं होता.
कुछ जज लोया की तरह ईमानदार भी होते हैँ.
पहली तस्वीर मे दिख रहे इस जज का नाम
Nicholas G Garaufis है , जिसने अडानी की दुनिया अमेरिका मे हिला दी है.
US जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा गौतम अडानी के खिलाफ सभी आरोपों को खारिज किये जाने के आदेश को रद्द करते हुए 13 जुलाई तक इसकी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
निकोलस ने साफ किया कि मुझे ये कारण जानना है कि किसके दबाव मे अडानी के केस को कमजोर किया गया है??
भारत मे होते निकोलस तो उनके मॉर्निंग वॉक का टाइम पता किया जा सकता था.
राज्यसभा ऑफर की जा सकती थीं.
पर करोड़ों रूपये ट्रम्प के लिए फूंक कर, ट्रेड डील के लिए पूरे देश के लिए बातें सुनकर भी साहब अपने दोस्त को बचा नहीं पा रहे.
ईमानदार जज को अमेरिका नहीं खरीद सकेगा
जल्दी ही अमेरिका दौरा होगा, देख लेना.
मोदी सरकार ने वीरों की शहादत पर देश को अब तक अंधेरे में रखा.. शर्मनाक!
ऑपरेशन सिंदूर में देश के 6 वीर सपूतों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि देश को सच क्यों नहीं बताया गया? संसद में सच्चाई छिपाकर झूठ क्यों बोला गया? शहादत पर पर्दा डालने की ज़रूरत क्यों की गई?
उन 6 शहीदों में से एक झुंझुनूं के वीर सपूत सार्जेंट सुरेंद्र कुमार जी मोगा भी थे। उनकी मां का दर्द पूरे देश ने देखा व सुना। एक मां अपने बेटे की शहादत का सम्मान मांगती रही, लेकिन मोदी सरकार से उसे जवाब 'नहीं' मिला। परिवार आंसुओं में डूबा रहा, और देश की संसद शहादत से इनकार कर ग़लत जानकारी देती रही।
रक्षा मंत्री @rajnathsingh जी, शहादत किसी सरकार की छवि बचाने का माध्यम नहीं हो सकती। सैनिक का बलिदान आपकी सियासत से कहीं ऊपर है। सरकार ने तथ्य छिपाकर और संसद में गलत जानकारी देकर, केवल 6 परिवारों का नहीं, बल्कि पूरे देश की भावनाओं का अपमान किया है।
मोदी सरकार जवाब दें..
- आखिर, ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों की पूरी सच्चाई देश से क्यों छिपाई गई?
- संसद में सही जानकारी क्यों नहीं दी गई?
- वीर जवानों और उनके परिवारों को समय पर सम्मान और सत्य क्यों नहीं मिला?
प्रधानमंत्री जी.. शहादत छिपाई नहीं, सलाम की जाती है। देश अपने शहीदों का सम्मान चाहता है, सियासत नहीं।
>हमसे तब झूठ क्यूँ बोला गया?
>हमें हमारे शहीदों के बारे में पहले क्यूँ नहीं बताया गया?
>उनको नम आखों से श्रद्धांजलि देने का अधिकार हमसे क्यूँ छीना गया?
>क्या कारण था कि हमें तब नहीं बताया गया?
क्यों राजनाथ जी @rajnathsingh आपके बच्चे,विधायक बनें, मंत्री बने और इस देश के बच्चे इस देश के सैनिक यूंही?
बिना किसी मिलावट के कहना चाहिए कि इस देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह झूठे हैं। आप संसद में खड़े होकर झूठ कैसे बोल सकते हैं?
यह वक्त की जरूरत है कि राजनाथ सिंह के खिलाफ विपक्ष तत्काल विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाए और इसे बड़े झूठ को लेकर उनको एक्सपोज करे।
आश्चर्य होता है पूर्व सेनाध्यक्ष द्विवेदी पर, जो मंदिर मंदिर घूमकर टीका लगाकर भगवा अलख जगाते रहे लेकिन एक बार भी सार्वजनिक तौर पर नहीं कहा कि हमारे 6 सैनिक मरे या फिर सरकार से इस मामले में नाराजगी जाहिर की।
अमर शहीदों को इस देश की तरफ से विनम्र श्रद्धांजलि
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए भाषण का वो ऑपरेटिव पार्ट जिसमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय विमान गिराए जाने के सवाल को उन्होंने न सिर्फ़ शब्दों की बाज़ीगरी से टाला था बल्कि भारतीय सैनिकों को नुकसान तक की बात से साफ़ मना किया था।
संसद टीवी, 28/07/2025
बेशर्मी और निर्लज्जता की पराकाष्ठा देखिए। ये हैं रक्षा मंत्री जो संसद में खड़े होकर बयान दे रहे थे कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी भी जवान को कोई क्षति नहीं पहुंची।
कल ही नरेंद्र मोदी ने उन 6 जवानों के नाम सार्वजनिक किए हैं जिन्होंने भारत माता की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। जिन्होंने हमारे लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी, उन्हें वो सम्मान भी नहीं मिला जिसके वो हकदार थे।
पहले आप ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए 6 भारतीय सैनिकों के नाम पढ़िए जो हाल ही में सरकार ने सार्वजनिक किए हैं...🪖
सूबेदार मेजर पवन कुमार
राइफलमैन सुनील कुमार
लांस नायक दिनेश कुमार
एविएशन टेक्नीशियन मुरलीनायक
हवलदार सुनील कुमार सिंह
सार्जेंट सुरेंद्र कुमार
अब आप पिछले साल का रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का संसद में दिया बयान सुनिए और आसपास बैठे हंसते हुए चेहरों को देखिए जो मेज पीट रहे हैं...
और फिर सोचिए कि जब रक्षामंत्री संसद में ये झूठ बोल रहे होंगे तो इन 6 सैनिकों के परिवार पर क्या बीत रही होगी❓
बांग्लादेश ने अपने मोंगला पोर्ट को लेकर चीन से समझौता कर लिया है. अब चीन मोंगला पोर्ट के पास 110 एकड़ में स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) विकसित करेगा.
पहले ये जमीन भारत को दी गई थी. 2015 में इसका समझौता हुआ था, लेकिन अब इसे चीन को दे दिया गया.
भारत को क्या नुकसान 👇
मोंगला पोर्ट कोलकाता के करीब है और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (असम, त्रिपुरा आदि) के लिए वैकल्पिक समुद्री मार्ग प्रदान करता था.
इस समझौते से भारतीय कंपनियां/कार्गो के लिए आसान कनेक्टिविटी और ट्रांसशिपमेंट का फायदा कम हो सकता है.
इससे चिकन नेक (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) क्षेत्र में चीन की निगरानी बढ़ने का खतरा भी है.
बंगाल की खाड़ी में चीन का फुटप्रिंट बढ़ रहा है - चटगांव, ग्वादर, हम्बनटोटा पर पहले ही चीन का दखल है.
मोंगला पर अधिक नियंत्रण से चीन को व्यावसायिक और सैन्य लॉजिस्टिक्स लाभ मिल सकता है, जो भारत की समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित करता है.
मतलब यह भारत के लिए रणनीतिक झटका है, खासकर बंगाल की खाड़ी में चीन की बढ़ती मौजूदगी के संदर्भ में.
कुल मिलाकर - मोदी सरकार ने पहले अमेरिका के दबाव में ईरान का चाबहार पोर्ट छोड़ दिया और अब बांग्लादेश ने अपना पोर्ट छीनकर चीन को दे दिया.
ये विदेश नीति की विफलता है, लेकिन कोई एंकर आपको ये बताएगा नहीं.