आज अपनी नेता @pushpampc13 जी के साथ स्वर्गीय गोपाल खेमका जी के परिजनों से मुलाक़ात किया। आश्चर्य की बात यह है की जहाँ पूरा राजधानी इस घटना से डरा सहमा हुआ है वहीं घटना के रोड की दूसरी तरफ़ भाजपा सरकार बागेश्वर बाबा का कार्यक्रम करने में ज़ोर शोर से लगी हुई है और गृह मंत्रालय के मंत्री माननीय मुख्यमंत्री के कान का जूँ भी नहीं रेंग रहा। बिहार की बदहाली के लिए सिर्फ़ एक ज़िम्मेदार - नीतीश कुमार।
पटना में इतनी बड़ी हत्या हो गई। आज अंतिम संस्कार होना है। और उनके घर के ठीक सामने गांधी मैदान में सनातन के नाम पर धूर्त बाबाओं और संवेदनहीन नेताओं का हाई-वोल्टेज प्रवचन ड्रामा का आयोजन किया गया है। स्थगित करने की भी संवेदनशीलता सरकार नहीं दिखा पाई। यही लोग बिहार के अभिशाप हैं।
गगनं गगनाकारं सागरः सागरोपमः। रामरावणयोर्युद्धं रामरावणयोरिव॥ जैसे आकाश के आकार की तुलना आकाश से और समुद्र की समुद्र से ही की जा सकती है, वैसे ही राम और रावण के युद्ध की तुलना सिर्फ राम और रावण के युद्ध से ही हो सकती है। पर कहानी तो हमेशा “सियाराम” की ही रहेगी। #Ramayana
बिहार में जब तक कारख़ानों के सायरन से फिर से लोगों की नींद नहीं टूटेगी और उनकी चिमनियाँ दूर-दराज के गाँवों को फिर से दिखाई नहीं देंगी - जब तक बिहार के हर ज़िले में औद्योगिक क्रांति नहीं होगी - तब तक बिहार की इकोनॉमी का कोई भविष्य नहीं है। आधा बिहार बाहर ही रहेगा। #ChooseProgress
बिहार के औद्योगीकरण, पलायन, CD Ratio का भ्रम, हिन्दी-अंग्रजी, शिक्षा और जाति-व्यवस्था सहित सभी राजनीतिक मुद्दों पर दप्पा महासचिव अनुपम कुमार सुमन का एक मास्टरक्लास इंटरव्यू। सच्चा ज्ञान भी, कड़वी सच्चाई भी। @sumananupam13
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“अर्थव्यवस्था पर बात करने को क़ाबिलियत चाहिए। जिन्हें बुनियादी ज्ञान नहीं वे CD Ratio जैसी बातें बिना समझे बोल रहे। ये लोग अनपढ़ की तरह अर्थशास्त्र पर ऐसे बोलते हैं कि कार्ल मार्क्स और एडम स्मिथ शरमा जाएँ। बिना औद्योगीकरण कुछ संभव नहीं।”- TPP महासचिव अनुपम सुमन जी @sumananupam13
बिहार के लिए सीता का सम्मान राम से कहीं अधिक है। पर स्वयं भगवान राम ने भी हमारी देवी के साथ अन्याय किया और हम भी उनकी विरासत को बचा नहीं पाए। सिर्फ पुनौरा धाम क्यों मैथिल वीरांगना के हर चिह्न को सँवारना है - मधुबनी से चंपारण और मुंगेर से गयाजी तक। यह मेरी व्यक्तिगत ड्यूटी रहेगी।
पटना के व्यस्त इलाक़े में एक बड़े बिज़नेसमैन की हत्या कर दी गई। नीतीश जी सीएम भी हैं और होम मिनिस्टर भी। लॉ एंड ऑर्डर उन्हें ही देखना है। पर वे बीमार हैं। उनकी बीमारी अब पूरे बिहार के लॉ एंड ऑर्डर के लिए ख़तरा बन चुकी है। मैं फिर से कह रही कि अब उन्हें जाना चाहिए। @NitishKumar
स्वर्गीय गोपाल खेमका जी की धर्मपत्नी जी और सुपुत्र से मुलाक़ात कर निकली हूँ। यह सरकार द्वारा की गई संस्थागत हत्या है। इस सुनियोजित वारदात से पहले उनकी सुरक्षा वापस ली गई। सुरक्षा के बदले भुगतान की माँग की गई। विधायक और मंत्री टैक्सपेयर के पैसे पर अंगरक्षकों का भोंडा प्रदर्शन करें और टैक्स देने वालों की सुरक्षा छीनकर उनकी हत्या हो। यह बिहार का नया गुंडाराज है। इस्तीफ़ा और निलंबन आदि तो अब आपलोगों के शब्दकोश में ही नहीं है। @NitishKumar@narendramodi
मुजफ्फरपुर के जिला सचिव श्री ज्ञानेंद्र जी आज अपने जिला से कुछ लोगों के साथ पटना आए थे। इनकी सरकार से शिकायत है की शिक्षक तबादले की प्रक्रिया में धांधली हो रही है।
जहाँ भी @pluralsbharat की महायान यात्रा गई है वहाँ पर यह समस्या सुनने में आई है की तबादले के किए आवेदन तो लिया गया है लेकिन उसपर किसी प्रकार की करवायी नहीं की जा रही सिर्फ काग़ज़ पर शहर या जिला के अंदर अंदर में तबादले कर दिए जा रहे हैं और जिनकी पोस्टिंग गृह जिला से बाहर है उनके आवेदन पर सरकार बैठी हुई है। माननीय मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को चिट्ठी लिख समस्या से अवगत कराया और उनसे निवेदन किया की इसका जायज़ा लेते हुए समस्या का कुछ निधान जल्द निकालें। 🙏🏾
हमारी पार्टी के प्रेस सचिव रहे और जर्नलिज्म के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ मुकेश कुमार जी ने अपनी शोध-पुस्तक “लोकल इज़ ग्लोबल” भेंट की। भारत के स्थानीय अख़बारों पर यह अपनी तरह का एकमात्र रिसर्च है। मैं उम्मीद करती हूँ कि आप छात्र-छात्राओं को गंभीर पत्रकारिता सिखाते रहेंगे। @mukesh_phd
2020 के चुनाव के बाद बहुतों ने कहा “अब ये भी बाकी नेताओं की तरह गायब हो जाएँगी।” लेकिन सच ये है कि पुष्पम प्रिया चौधरी सत्ता की कुर्सी या किसी बड़े पद की राजनीति नहीं करतीं। उनकी प्राथमिकता हमेशा बिहार के आम लोगों के संघर्ष और समस्याओं को समझना रही है।
यह तस्वीर 2020 चुनाव के बाद की है, जब बिहार के कई जिले बाढ़ की विभीषिका झेल रहे थे। कुशेश्वर स्थान प्रखंड के इन बाढ़ प्रभावित गाँवों में कोई बड़ा नेता नहीं पहुँचा। न कोई सरकारी राहत पूरी तरह मिली, न कोई अख़बार की सुर्खी बनी।
तब भी पुष्पम जी ने बिना किसी शोर-शराबे, बिना मीडिया कैमरों की भीड़ के, सादगी के साथ गाँव-गाँव जाकर लोगों की तकलीफ़ें सुनीं।
सत्ता में न होकर भी लोगों के दुख-दर्द में साथ खड़ा रहना, यही असली राजनीति की परिभाषा है। आज जब कोई पूछता है “2020 के चुनाव के बाद कहाँ थीं?” तो इस वीडियो और इन तस्वीरों में साफ़ दिखाई देता है कि वे जनता के बीच थीं, संकट में फँसे गाँवों में थीं, और उन लोगों के साथ थीं जिन्हें सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी।
पुष्पम प्रिया चौधरी जी की राजनीति मंच और भाषणों की राजनीति नहीं, बल्कि जमीन पर चलकर भरोसा जगाने की राजनीति है। जहाँ सत्ता में बैठे लोग प्रचार और कैमरे में अपनी छवि चमकाने में लगे रहे, वहीं उन्होंने चुपचाप हर गाँव के घर में दस्तक दी।
अगर कोई पूछे कि चुनाव हारने के बाद कौन नेता जनता का साथ निभाता है, तो जवाब है पुष्पम प्रिया चौधरी। @pluralsbharat@pushpampc13
“हिन्दी कमजोर भाषा बना दी गई है। अंग्रेज़ी स्टेटस सिम्बल है। यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में भी हिन्दी माध्यम में कम मार्क्स मिलते हैं। मैं स्वयं हिन्दी माध्यम का टॉपर था पर बिहार में आज छोटे भाई-बहनों को आगे बढ़ना है तो अंग्रेज़ी सीखना होगा क्योंकि यह एक स्किल है।” @sumananupam13
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की नवमी को आज शाम दरभंगा के माँ श्यामा मंदिर में हुए हवन-कर्म में शामिल हुई। दरभंगा मेरी जन्मभूमि है और श्यामा माई हमारी संरक्षक देवी। हवन पर मिथिला की महान देवियों सीता, भारती, गार्गी, मैत्रेयी को साक्षी मान कर अपनी मातृभूमि की महानता वापसी का संकल्प लिया।
बिहार के एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के प्रश्न का पार्टी के मुख्य प्रवक्ता द्वारा जवाब अपनी पार्टी के लाखों समर्थकों और वोटरों के लिए - “यह तो भगवान भी नहीं जानता। पर कुछ चीजें तो साधारण टुच्चा इंसान भी बता सकता है। और अगर आप ईमानदार हैं, आपमें साहस है और आप बाकी नक़ली नेताओं और दलाल पत्रकारों की तरह बेईमान नहीं हो तो एक साधारण प्रश्न ही पूछ लो पूरे भारत के राजनीतिक दलों से कि वे कब 50 प्रतिशत टिकट महिलाओं को देंगे? जितनी संख्या उतनी भागीदारी? हमारी पार्टी ने 2020 में 148 में 42 महिलाओं को टिकट दिया था जो बिहार के इतिहास में रिकॉर्ड है। आप अगर पाखंडी नहीं हो तो पूछो बिहार के ही राजनीतिक दलों से कि वे 2025 में कितने टिकट महिलाओं को देंगे। हम 122 देंगे। बराबरी कर के दिखा दें।
हम क्या चोर, डकैत, ठेकेदार लोगों को टिकट दे के 2020 में कुछ सीट जीत नहीं सकते थे? क्या हमारे नेता अपनी आत्मा बेच के गठबंधन नहीं कर सकते या वही पुराने भ्रष्ट-लुटेरे लोगों को शामिल करने का “मास्टरस्ट्रोक” नहीं लगा सकते? पर क्या हो जाएगा ऐसी जीत से? आपलोगों को सच में लगता है कि हमारी पार्टी के नेता अपना शानदार स्थापित जीवन छोड़ के इसलिए संघर्ष कर रहे हैं या क्षुद्र-असफल लोगों का व्यंग्य सह रहे हैं ताकि ऐसी ही चोरी-चकारी और धूर्तता करके “पावर” प्राप्त कर लें? क्या हो जाएगा वैसी ही राजनीति करके जिसने बिहार को पूरे देश से 100 साल पीछे कर दिया है? बस गांधी, अंबेडकर, जेपी, लोहिया और कर्पूरी ठाकुर का फ़ोटो लगा लें और उनके सिद्धांतों को दिन-रात बेचकर बिहार बदलने की बात करें। जैसे बदलाव कोई होली काउ है कि उसके लिए कोई भी कुकृत्य सही हो या कि इन ठगों में सच में बिहार बदलने की क्षमता है?
हमने 2020 से बिहार की राजनीति का चरित्र बदला है।पाखंडी नहीं हो, सेक्सिस्ट नहीं हो या दलाल पत्रकारों की तरह बिके नहीं हो तो फैक्ट चेक करो कि 2020 से किसने उद्योग-धंधों, पिछड़ी खेती, शिक्षा, स्वास्थ्य, नौकरी और प्रवासी मज़दूरों की समस्या को राजनीतिक चुनावी मुद्दा बनाया है। किसने बिना मीडिया को भत्ता देकर बिना पीछे-पीछे दौड़ाए सबसे ज़्यादा गाँवों की यात्रा की है, सबसे ज़्यादा पीड़ित क्षेत्रों और लोगों तक पहुँचे हैं? किसका मेनिफेस्टो सबसे अच्छा रहा है? हम आप जैसों को चुनौती देते हैं कि आज जो पुराने और नये लोग बोल रहे हैं उनमें कोई ऐसी बात खोज कर ला दो जो प्लुरल्स पार्टी ने 2020 के बाद से पहले न कही हो।
हम नैरेटिव बनाते-बदलते रहेंगे और इस जवाब को सेव करके रखें कि जीतेंगे भी। इस बार लाखों वोट भी आएँगे और सदन में भी जाएँगे। पर हम न सिद्धांतों से समझौता करेंगे और न ही लीचड़, खुद हारे हुए, ‘शून्य’ उपलब्धि वाले और असफल जीवन जी रहे ट्रोलों से प्रभावित होंगे। बिहार को 28वें से 27वें नंबर पर भी कोई ला सकता है तो वो एक ही नेता है, चाहे आज रो के मानो या कल गा के। हम मनवा भी देंगे। ज़्यादा समय नहीं लगेगा।” @Bihar_se_hai
कोई कितने पे आए
हम २०२० में भी सबसे ज़्यादा सीटों पर लड़ने वाली पार्टी थे और २०२५ में ना सिर्फ़ सबसे ज़्यादा सीटों पे लड़ने वाले बल्कि सबसे ज़्यादा सीटों पर जीतने वाली पार्टी रहेंगे।
20 साल में नीतीश जी मैथिली सीता के मंदिर का अत्यंत साधारण डिज़ाइन ही बनवा पाये। अगर वो सीएम बने रहते तो मंदिर बनाने में 20 साल और लगते। शुक्र है वो जा रहे हैं। माँ सीता अपना मंदिर राम के मंदिर से 1000 गुना बेहतर बनवाएँगी। तब जब बिहार में रेंगने वाला नहीं, उड़ने वाला विकास होगा।