अलीगंज अग्निकांड मामले में नया खुलासा: विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारियों ने शासन को गुमराह कर अपने अधीनस्थ अधिकारियों को लगातार बचाते हुए नजर आ रहे हैं, उनके बयान देखें तो वह कभी कहते हैं कि उपभोक्ता की एनओसी से संबंधित संबंधित हमारे पास कोई अभिलेख नहीं है, कभी कहते हैं कि एनओसी ही फर्जी है, जबकि संबंधित उपभोक्ता द्वारा अपने 20 किलोवाट कमर्शियल संयोजन की विद्युत सुरक्षा से निरीक्षण कराने के लिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय विभाग के मद में भारतीय स्टेट बैंक के चालान के रूप में ट्रेजरी में रुपए 1150 की धनराशि 23 जून 2016 को जमा कराई गई थी, उपरोक्त चालान की राशि जमा होने के उपरांत विद्युत सुरक्षा निदेशालय का दायित्व होता है कि वह परिसर का निरीक्षण कर एनओसी जारी करें अब अगर विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा अगले दिन 24 जून 2016 को निरीक्षण कर एनओसी जारी की गई है तो फिर NOC फर्जी कहां से हुई और अगर NOC फर्जी है तो फिर चालान जमा होने के बाद परिसर का निरीक्षण किस अधिकारी ने किया और उस निरीक्षण के बाद NOC निर्गत क्यों नहीं की गई, जबकि शासन का नियम है कि यदि चालान फीस जमा होने के 7 दिन के अंदर एनओसी प्राप्त नहीं होती है तो ऊर्जा निगम के अभियंता विद्युत संयोजन को ऊर्जीकृत कर सकते हैं।
यदि किसी परिसर में विद्युत सुरक्षा मानकों का अनुपालन नहीं किया गया, विद्युत सुरक्षा ऑडिट नहीं हुआ, संबंधित विभाग द्वारा समय-समय पर निरीक्षण नहीं किया गया, तो इन गंभीर लापरवाही की जिम्मेदारी निर्धारित कर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए थी। लेकिन विद्युत सुरक्षा निदेशालय लगातार अपने लापरवाह अधिकारियों को बचा रहा है, पहले जून 2016 फिर उसके बाद हर 3 साल अर्थात सन 2019, 2022, 2026 में परिसर का विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारी द्वारा विद्युत निरीक्षण करना चाहिए था लेकिन किसी ने निरीक्षण नहीं किया उनकी इस लापरवाही के कारण 15 निर्दोष बच्चों की जान चली गई, जो की अत्यंत दुखद एवं पीड़ादायक है इस दुखद घटना के बाद लगातार विद्युत सुरक्षा निदेशालय अपने 04 लापरवाह अधिकारियों को बचाने में लगा है और अभी तक किसी भी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जबकि दूसरी ओर ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता को आनन-फानन में बिना किसी जांच के रात 12:00 बजे एमडी कार्यालय खुलवाकर निलंबन आदेश जारी किया गया।
अधिशाषी अभियंता के निलंबन आदेश में यह आरोप लगाया गया है कि संबंधित परिसर में स्वीकृत भार (लोड) से अधिक विद्युत भार लगभग तीन माह से संचालित हो रहा था, जिस पर अधिशासी अभियंता द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह आरोप बिल्कुल निराधार एवं तथ्यों से परे है क्यों कि उपभोक्ता के संयोजन की अधिकतम डिमांड माह अप्रैल 2026 में 24.30 किलोवाट, मई में 28.66 किलोवाट तथा अभी इसी माह जून 2026 में 34.18 किलोवाट आई है। नियमानुसार तीन माह अनुबंधित भार से अधिक भार प्रयोग करने की दशा में अगले माह जुलाई 2026 में उपभोक्ता को भार वृद्वि हेतु नोटिस दिया जाना न्यायसंगत था, क्योंकि जून की बढ़ी हुई डिमांड जुलाई के मास्टर डेटा में प्रदर्शित होती है। जुलाई माह में प्राप्त डेटा के अनुसार ही अधिशासी अभियंता द्वारा अपने स्तर से भार वृद्धि की कार्यवाही की जा सकती है। जुलाई माह से पूर्व बढ़ी हुई डिमांड के आधार पर अधिशाषी अभियंता को निलंबित करना सरासर गलत एवं अवैधानिक है।
अतः उपरोक्त बेहद गंभीर मामले में माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से निवेदन है कि विद्युत सुरक्षा निदेशालय की लापरवाही को नजरअंदाज कर ऊर्जा निगम के निर्दोष अधिशाषी अभियंता का किया गया अन्यायपूर्ण निलंबन आदेश को निरस्त किया जाये तथा विद्युत सुरक्षा निदेशालय के लापरवाह अधिकारियों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए।
~इं• जितेंद्र सिंह गुर्जर
महासचिव उ• प्र• राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ
@narendramodi@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat@ChiefSecyUP@spgoyal@UPGovt@UPPCLLKO@chairmanuppcl@yadavakhilesh@RahulGandhi@Mayawati@aajtak@ABPNews@ZeeNews@News18India@ndtv@timesofindia@IndianExpress@TheEconomist@EconomicTimes
@ola_supports@ola_supports@Olacabs Video bhi hai...What's the current status of this ola cab ??? Is it still running on road and harassing more innocent consumers like me or have you black listed this clown?
Back to back two incidents in Delhi...Now driver or rude driver drove, verified trip and just stopped and said get out, midway of catching a flight, traumatic experience worst service and quality CRN attached @Olacabs@ola_supports
@khan_448@nykaafashion@MyNykaa@ConsumrConxion This is a scam in broad daylight by @nykaafashion How dare you do not want to refund consumers money using wrong business practices. We can sue you anytime and you have to pay for all of this. DM not allowed on ur handle! Jagriti portal will do it and then legal means.
Accurate Delivery ? @MyNykaa@nykaafashion Thugging consumers and not responding properly will only lead you to consumer court ? Is this how you deliver wrong items which are not even in my order list, and say we delivered accurately and that's it ? @ConsumrConxion
@ola_supports Pointing out @Olacabs one more thing,that pl clearly indicate if parking charges shown at the time of booking included or not as they still charge it outside upfront and also included in final bill which creates a loss for passenger.
@Olacabs#olacab@jagograhakjago Such a pathetic and horrific experience back to back drivers cancelled the trip and wasted 30 mins at midnight. NCR mai to achche driver rakh lo...
Accurate Delivery ? @MyNykaa@nykaafashion Thugging consumers and not responding properly will only lead you to consumer court ? Is this how you deliver wrong items which are not even in my order list, and say we delivered accurately and that's it ? @ConsumrConxion
निजीकरण की प्रक्रिया में बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए निजीकरण का निर्णय निरस्त की मांग: संघर्ष समिति ने उठाए पांच सवाल: राज्य कर्मचारियों के साथ बिजली कर्मियों को भी बोनस दिया जाय
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के मामले में बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से निजीकरण के सारे प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग की है और कहा है कि निजीकरण का निर्णय प्रदेश के व्यापक हित में तत्काल निरस्त किया जाए।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा दीपावाली के पूर्व 15 लाख राज्य कर्मचारियों को बोनस देने की घोषणा का स्वागत करते हुए संघर्ष समिति ने मांग की है कि दीपावली पर रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में लगे बिजली कर्मियों को भी दीपावली के पूर्व बोनस दिया जाय।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण के मामले में प्रारंभ में ही जिस प्रकार अवैध ढंग से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई उससे बड़े घोटाले की आशंका बलवती हो गई थी।
संघर्ष समिति ने आज ऐसे पांच बिंदुओं को सार्वजनिक करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को देखते हुए निजीकरण के सारे मामले की तत्काल सीबीआई जांच कराई जाए और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त की जाय ।
संघर्ष समिति ने कहा कि पहला बिंदु विगत वर्ष नवंबर में लखनऊ में विद्युत वितरण निगमों की डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2024 का आयोजन है जिसमें निजी घरानों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की थी और कार्यक्रम को स्पॉन्सर भी किया था। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की पृष्ठभूमि इसी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में तैयार की गई थी।
इस मीटिंग में देश के इतिहास में पहली बार शीर्ष प्रबंधन द्वारा आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन बनाई गई। उप्र में निजीकरण को अंजाम देने के दृष्टिकोण से उप्र पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल को इसी मीटिंग में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया और उप्र में ग्रेटर नोएडा में काम कर रही निजी कम्पनी एन पी सी एल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी आर कुमार की डिस्कॉम एसोशिएशन का ट्रेजरार बनाया गया।
दूसरा बिन्दु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में हितों के टकराव को शिथिलता देना है। इसके साथ ही झूठा शपथ पत्र देने और अमेरिका में पेनल्टी लगने की बात स्वीकार कर लेने के बाद भी ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन को नहीं हटाया गया और इसी कंसल्टेंट से निजीकरण के डॉक्यूमेंट तैयार कराए गए।
तीसरी बात बिडिंग हेतु तैयार किए गए आर एफ पी डॉक्यूमेंट के लिए ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आधार माना गया जो डॉक्यूमेंट आज तक पब्लिक डोमेन में ही नहीं है। इसके पूर्व सितंबर 2020 में ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी किया गया था जिस पर ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन सहित कई संस्थानों की आपत्ति आई थी। इन आपत्तियों का आज तक निस्तारण नहीं किया गया है और गुपचुप ढंग से उत्तर प्रदेश में निजीकरण के पहले ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 जारी कर दिया गया। ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को न पब्लिक डोमेन में रखा गया है न इस पर किसी की आपत्ती मांग की गई है। उत्तर प्रदेश में निजीकरण करने के लिए यह सब मिली भगत का बड़ा खेल है।
चौथा बिंदु यह है कि निजीकरण के सारे प्रकरण में कॉर्पोरेट घरानों को विश्वास में लेकर पूरी कार्यवाही की जा रहा है। टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा ने कई बार बयान देकर इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट उनसे चर्चा करके बनाया गए हैं। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि उप्र में बिजली के निजीकरण को लेकर कार्पोरेट घरानों के बीच 'कार्टेल' बन गया है जो बहुत गम्भीर बात है।
पांचवा बिंदु यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को कौड़ियों के मोल निजी घरानों को बेचने के लिए इक्विटी को आधार मानकर बेचने की कोशिश की जा रही है। इक्विटी को लॉन्ग टर्म लोन में कन्वर्ट किए जाने के बाद 42 जनपदों की बिजली व्यवस्था मनचाहे कॉर्पोरेट घरानों को कौड़ियों के दाम मिल जाएगी।
@narendramodi@myogiadityanath@aksharmaBharat@mlkhattar
मेरठ में हुए चिन्तन मंथन शिविर में निजीकरण का विकल्प खारिज करने का संकल्प : पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के साथ कई बड़े शहरों के फ्रेंचाइजी के समाचार से बिजली कर्मियों का गुस्सा फूटा
उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के तत्वावधान में मेरठ में आयोजित "चिन्तन मंथन शिविर - संदर्भ निजीकरण" में अभियंताओं ने पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिए गए निजीकरण के विकल्प को एक स्वर में खारिज कर दिया और संकल्प लिया कि निजीकरण के विरोध में आन्दोलन और तेज किया जायेगा तथा निजीकरण के विरोध में संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।
चिन्तन मंथन शिविर में मुख्य वक्ता आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल द्वारा पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बाद दिए जाने वाले विकल्पों का विस्तार से विश्लेषण कर उसे खारिज कर दिया । उन्होंने विकल्प के तीनों बिन्दुओं निजी कंपनी की नौकरी ज्वॉइन कर लें, अन्य निगमों में वापस आ जाएं और स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले लें, का विश्लेषण करते हुए यह बताया कि तीनों ही विकल्प बिजली कर्मियों के भविष्य को बर्बाद कर देंगे अतः निजीकरण किसी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
पूर्व दिल्ली विद्युत बोर्ड के इ सत्यपाल और इ यशपाल शर्मा जो ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के संरक्षक और सेक्रेटरी (मुख्यालय) है, ने निजीकरण के बाद दिल्ली में बिजली कर्मियों और अभियंताओं की हो रही दुर्दशा के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि निजीकरण बहुत ही भयावह है अतः पूरी शक्ति से संघर्ष की तैयारी करिये।
मेरठ में शिविर के दौरान ही यह जानकारी मिलने से कि, पश्चिमांचल के बड़े शहरों में अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी होने जा रहा है, अभियंताओं में गुस्सा फूट पड़ा। शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि यह पुख्ता जानकारी मिली है कि जिन जिन शहरों में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है उन सभी शहरों के अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी का टेंडर भी पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के टेंडर के साथ ही जारी किया जाएगा।
उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने कहा कि चिन्तन मंथन शिविर का मुख्य उद्देश्य अभियंताओं को निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष के लिये प्रशिक्षित करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे पांच शिविर डिस्कॉम स्तर पर आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अभियन्ता संकल्प लेकर सामने आएं तो उप्र में पॉवर सेक्टर में निजी घरानों को रोकना कोई कठिन काम नहीं है। उन्होंने कहा कि निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष किया जाएगा।
अभियन्ता संघ के उपाध्यक्ष कृष्णा सारस्वत, उपाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह, संयुक्त सचिव आलोक श्रीवास्तव, संगठन सचिव जगदीश पटेल, सहायक सचिव निखिल कुमार, संघर्ष समिति पश्चिमांचल के संघर्ष समिति के संयोजक सी पी सिंह ने शिविर को संबोधित किया।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat@ChiefSecyUP@spgoyal@UPGovt@UPPCLLKO@chairmanuppcl@yadavakhilesh@RahulGandhi@Mayawati@aajtak@ABPNews@ZeeNews@News18India@ndtv@timesofindia@IndianExpress@TheEconomist@EconomicTimes
आज जनपद बिजनौर के थाना नहटौर के अंतर्गत बिजली चोरी में पकड़े गए दबंगों द्वारा दिनदहाड़े उपखंड अधिकारी (विद्युत) के कार्यालय में घुसकर मारपीट की तथा तमंचा लगाकर एसडीओ का अपहरण करने का प्रयास किया। जब सरकारी अधिकारी अपने कार्यालय में ही सुरक्षित नहीं है तो आम जनता की सुरक्षा का क्या हाल होगा, यह जिला प्रशासन के लिए चिंता का विषय होना चाहिए, यह घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
विद्युत अभियंताओं पर उनके कार्यालय में घुसकर मारपीट की घटनाये लगातार बढ़ती ही जा रही है, ऊर्जा विभाग और उत्तर प्रदेश शासन को बिजली अभियंताओं की सुरक्षा के लिए कठोर कदम उठाये जाने की तत्काल आवश्कता है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि उपरोक्त प्रकरण में हमलावरों पर कठोर कार्रवाई कराये जाने की कृपा करें, जिससे विद्युत अभियंता प्रदेश की जनता को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में अपना पूर्ण योगदान देते रहें।
@narendramodi@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat@ChiefSecyUP@spgoyal@dgpup@bijnorpolice@UPGovt@UPPCLLKO@chairmanuppcl
बिजली के निजीकरण में किस प्रकार से घोटाला किया जाता है इसकी छोटी सी झलक है इसको गौर से समझने का प्रयास करिए....
एक बड़े घोटाले के तहत सन 2010 में आगरा शहर की बिजली व्यवस्था टोरेंट पावर कंपनी को हैंडोवर की गई थी, उसके पश्चात जब 2015 में सी ए जी की जांच हुई और जांच के पश्चात CAG ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि "आगरा फ्रेंचाइजी की बिडिंग हेतु बनाए गए आर एफ पी में दर्शाए गए आंकड़े और परामर्शदाता द्वारा आंकलित आरक्षित दरें भ्रामक थी और गलत अवधारणाओं पर आधारित थी तो बिडिंग की संपूर्ण प्रक्रिया को ही निरस्त किया जाना चाहिए था और सही किए गए आंकड़ों के आधार पर एक नई निविदा को आमंत्रित करने की शुरुआत करनी चाहिए थी"।
कैग की रिपोर्ट में घोटाले के कई बिंदु उजागर किए गए हैं जिन्हें दबा दिया गया है।
सी ए जी द्वारा उठाया गया एक और सबसे प्रमुख बिंदु यह है कि दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम ने टी एंड डी हानियां 28.22% और संग्रहण क्षमता 82.34 प्रतिशत के आर एफ पी में दिए गए मूल आंकड़ों के स्थान पर टी एंड डी हानियां 44.85% और संग्रहण क्षमता 74.77% को अभिसूचित किया जिसका न तो कोई आधार था न कोई तर्कसंगतता। टी एंड डी हानियां 28.2% के स्थान पर 44.85% बता देने से टोरेंट पावर को बहुत सस्ती दरों पर पॉवर कॉरपोरेशन बिजली दे रहा है और आज तक अरबों रुपए प्रतिवर्ष का घाटा हो रहा है।
सी ए जी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बीड मूल्यांकन प्रक्रिया में भारी अनियमितता होने के कारण अनुबंध के 18 वर्षों में पावर कारपोरेशन को 4601 करोड़ रुपए की हानि होगी। संघर्ष समिति ने कहा कि टोरेंट पावर कंपनी को लागत से कम मूल्य पर बिजली देने में पावर कारपोरेशन को 14 वर्षों में 3432 करोड रुपए की हानि हो चुकी है। इससे स्पष्ट होता है कि कैग ने अपनी रिपोर्ट में गलत अनुबंध के करण घाटे का सही मूल्यांकन किया था।
वर्तमान में पावर कॉरपोरेशन ₹5.55 प्रति यूनिट बिजली खरीद कर टोरेंट पावर को मात्र ₹4.36 प्रति यूनिट के हिसाब से दे रहा है जिससे पावर कारपोरेशन के राजस्व को अरबों का घाटा हो रहा है और टोरेंट पावर कंपनी का मुनाफा बढ़ रहा है।
सी ए जी ने आगरा की बिजली व्यवस्था टोरेंट पावर को देने की बिडिंग की संपूर्ण प्रक्रिया को ही दस साल पहले गलत करार देते हुए इसे निरस्त किए जाने की अनुशंसा की थी किंतु कैग की रिपोर्ट को दबा दिया गया जिसका दुष्परिणाम यह है कि गलत करार से पावर कारपोरेशन को प्रतिवर्ष अरबों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि आगरा फ्रेंचाइजी की बिडिंग में किए गए घोटाले और कैग की अनुशंसा दबा देने के मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और घोटाला करने वालों पर कड़ी कार्यवाही की जाय।
उपरोक्त घोटाले को देखते हुए पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त करने की कृपा करें।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat@ChiefSecyUP@spgoyal@UPGovt@UPPCLLKO@chairmanuppcl@yadavakhilesh@RahulGandhi@Mayawati@aajtak@ABPNews@ZeeNews@News18India@ndtv@timesofindia@IndianExpress@TheEconomist@EconomicTimes
मध्य प्रदेश में अमरकंटक की तरह उप्र में भी ओबरा और अनपरा में ज्वाइंट वेंचर समाप्त कर उत्पादन निगम को परियोजनायें देने की मांग : राज्य के उत्पादन निगम को देने से 35-40 पैसे प्रति यूनिट तक सस्ती मिलेगी बिजली
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री मा० @myogiadityanath जी से मांग की है कि ओबरा और अनपरा में लग रही नई बिजली इकाइयों को ज्वाइंट वेंचर के स्थान पर प्रदेश के व्यापक हित में राज्य विद्युत उत्पादन निगम को दिया जाय।
संघर्ष समिति ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा विगत सप्ताह लिए गए कैबिनेट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा है कि मध्य प्रदेश सरकार ने अमरकंटक बिजली घर में जॉइंट वेंचर समाप्त कर नई बनने वाली इकाई मध्य प्रदेश के उत्पादन निगम को देने का निर्णय लिया है।
संघर्ष समिति ने कहा है कि मध्य प्रदेश की कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय तकनीकी दृष्टि से सर्वथा उपयुक्त और उचित है। उत्तर प्रदेश में भी जॉइंट वेंचर समाप्त कर राज्य के उत्पादन निगम को ओबरा डी और अनपरा ई परियोजनाओं को सौंपा जाये तो बिजली की उत्पादन लागत 35 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक कम हो जाएगी।
संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने 28 मार्च 2023 को यह निर्णय लिया था कि अमरकंटक ताप बिजली घर में 660 मेगावाट की नई बिजली इकाई ज्वाइंट वेंचर में एस ई सी एल (कोल इंडिया लिमिटेड) के साथ लगाई जाएगी।
संघर्ष समिति ने मध्य प्रदेश सरकार के आदेश की प्रति जारी करते हुए बताया कि मध्य प्रदेश के बिजली कर्मचारियों की संघर्ष समिति ने इसका विरोध किया था और अंततः ढाई साल के बाद मध्य प्रदेश की कैबिनेट ने अपने ही निर्णय को संशोधित करते हुए अब यह निर्णय लिया है कि अमरकंटक ताप बिजली घर की नई इकाई ज्वाइंट वेंचर में नहीं लगाई जाएगी और इसे मध्य प्रदेश का विद्युत उत्पादन निगम लगाएगा।
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश की तरह उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने 27 जुलाई 2023 को यह निर्णय लिया था कि 2×800 ओबरा डी और 2×800 अनपरा ई ताप बिजली परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर में एनटीपीसी के साथ लगाया जाएगा। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में एक बात समान थी कि राज्य के उत्पादन गृह में पहले से चल रही इकाइयों के साथ ज्वाइंट वेंचर को अनुमति दी गई थी जो विवाद का मुख्य कारण है। राज्य के उत्पादन निगम की चल रही इकाइयों के साथ ज्वाइंट वेंचर में नई परियोजना लगाने का निर्णय पूरे देश में और कहीं नहीं लिया गया है।
संघर्ष समिति ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्यतः 6 बिंदुओं को आधार मानते हुए जॉइंट वेंचर का अपना दो साल से अधिक पुराना निर्णय संशोधित कर नई इकाई जॉइंट वेंचर की जगह राज्य के उत्पादन निगम को देने का निर्णय लिया है।
समिति ने बताया कि छह बिंदुओं में सबसे बड़ा बिंदु यह है कि राज्य का उत्पादन निगम यदि एक्सटेंशन प्रोजेक्ट बनाएगा तो परियोजना की कई कामन फैसेलिटीज को देखते हुए बिजली की उत्पादन लागत ज्वाइंट वेंचर की तुलना में 35 से 40 पैसे प्रति यूनिट कम हो जाएगी।
इसके अतिरिक्त एक ही परिसर में उत्पादन निगम और ज्वाइंट वेंचर की परियोजनाएं रहने से कई प्रकार की परिचालकीय दिक्कतें उत्पन्न होने की संभावना व्यक्ति की गई थी। एक ही परिसर में दो स्वामित्व की परियोजनाएं रहने से भविष्य में अनेक प्रकार के कानूनी विवाद खड़े होने की स्थित आ सकती है।
ऑपरेशनल डिफिकल्टीज में सबसे बड़ी समस्या रेलवे से कोल् ट्रांसपोर्टेशन की और ऐश डिस्पोजल की सामने आने वाली है। एक ही रेलवे ट्रैक होने से कई बार ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है कि परियोजना के लिए कोयला अनलोड करने में अनावश्यक विलंब होगा।
संघर्ष समिति ने कहा कि ओबरा डी और अनपरा ई परियोजनाओं के लिए कोयला खदान के मुहाने से (coal pit head ) कोयला लिंकेज नहीं मिल पाया है और 500 से 700 किलोमीटर दूर से कोयला लाने के कारण ज्वाइंट वेंचर में बिजली की उत्पादन लागत बहुत अधिक बढ़ने की संभावना है।
राख का डिस्पोजल एक बड़ी समस्या होने जा रही है। सामान्यत: एक ही ऐश पौंड होने से बहुत ही दुरूह स्थिति उत्पन्न होने की संभावना व्यक्त की गई है।
संघर्ष समिति ने बताया कि इन मुख्य बातों को संज्ञान में लेते हुए मध्य प्रदेश की कैबिनेट ने जॉइंट वेंचर का प्रस्ताव निरस्त कर दिया है और परियोजना राज्य के उत्पादन निगम को दे दी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने जिन बातों की आशंका व्यक्त करते हुए ज्वाइंट वेंचर को निरस्त करने का निर्णय ढाई साल के बाद लिया लगभग वही परिस्थितियां उत्तर प्रदेश में भी ओबरा और अनपरा में है
@narendramodi
त्योहारों को देखते हुए अगले दो माह आंदोलन के साथ उपभोक्ता सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता:निजीकरण के विरोध में प्रांतव्यापी प्रदर्शन जारी: निजीकरण को लेकर संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से पूछे पांच सवाल
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के बिजली कर्मियों से अपील की है कि वे त्योहारों के मद्देनजर अगले दो माह तक बिजली आपूर्ति और उपभोक्ताओं सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता पर अटेंड करें। संघर्ष समिति ने कहा है कि निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन में हम शुरू से ही किसानों और उपभोक्ताओं को साथ लेकर चल रहे हैं अतः त्योहारों में उन्हें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। ध्यान रहे अगले दो माह पितृ पक्ष, नवरात्र, रामलीला, दशहरा, दीपावली और छठ जैसे अति महत्वपूर्ण पर्व हैं।
इस बीच विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले आज लगातार 283 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
संघर्ष समिति ने आज सप्ताहांत में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से निजीकरण पर पांच प्रश्न पूछे हैं।
संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से आज पांच प्रश्न पूछे जो निम्नवत है।
पहला प्रश्न है कि ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी ने यूपी ट्रांस्को को स्टेट ट्रांसमिशन कंपनी ऑफ द ईयर का पुरस्कार मिलने पर इसे प्रदेश का गौरव बताया है जो उचित ही है । तो सवाल यह है कि जब सरकारी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की ट्रांसमिशन बिजली व्यवस्था देश में श्रेष्ठतम हो गई है तब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में लगातार हो रहे सुधार के बाद भी इनका निजीकरण क्यों किया जा रहा है ? ट्रांसमिशन की तरह वितरण कंपनियां भी लगातार सुधार कर रही हैं ऐसे में इनका निजीकरण क्यों ?
दूसरा प्रश्न है कि यदि घाटे के नाम पर निजीकरण किया जा रहा है तो चंडीगढ़ और दादरा नगर हवेली दमन एवं दीव जहां ए टी एंड सी हानियां क्रमशः तीन प्रतिशत और 8% थी, और इन दोनों स्थानों पर विद्युत विभाग मुनाफे में था तो दादरा नगर हवेली दमन एवं दीव और चंडीगढ़ का बिजली का निजीकरण क्यों किया गया ?
तीसरा प्रश्न है कि दिल्ली में निजीकरण के 23 साल बाद भी दिल्ली विद्युत बोर्ड के कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए उपभोक्ताओं के बिजली बिल में निजी कंपनियां 07% की दर से पेंशन का सरचार्ज वसूलती है तो सवाल है कि निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में पेंशन देने के एवज में निजी कंपनियां उपभोक्ताओं से कितने प्रतिशत सरचार्ज वसूलेंगी ?
चौथा प्रश्न है कि निजीकरण के बाद बिजली कनेक्शन देने के लिए क्या निजी कंपनियों को उपभोक्ताओं से मनमाना बिल वसूलने का अधिकार मिल जाएगा ? उदाहरण के तौर पर 12 फरवरी 2025 को आगरा में टोरेंट पावर के एक बिल की कॉपी संलग्न की जा रही है जिसमें 02 किलो वाट का कनेक्शन देने के लिए उपभोक्ता से 09 लख रुपए वसूल गया है । उपभोक्ता द्वारा 09 लाख रुपए के भुगतान की रसीद भी संलग्न है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं। क्या निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल की गरीब जनता के साथ यही होने जा रहा है ?
और पांचवा प्रश्न यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण होने के बाद गरीब किसानों, बुनकरों और गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले उपभोक्ताओं को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाएगी या नहीं ? उदाहरण के तौर पर ग्रेटर नोएडा में निजीकरण के 32 साल बाद भी किसानों को सब्सिडी नहीं मिलती जबकि पूरे प्रदेश में किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के बाद उपभोक्ताओं और कर्मचारियों को होने वाली दिक्कतों के बारे में प्रत्येक सप्ताहांत संघर्ष समिति पांच - पांच प्रश्न पूछेगी।
राज्य विद्युत परिषद प्राविधिक कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष डी के मिश्रा जी के आकस्मिक निधन पर आज सभी जनपदों में बिजली कर्मचारियों ने सभा में 2 मिनट का मौन रखकर स्वर्गीय डी के मिश्रा जी के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat@ChiefSecyUP@spgoyal@UPGovt@UPPCLLKO@yadavakhilesh@RahulGandhi@Mayawati@aajtak@ABPNews@ZeeNews@News18India@ndtv@timesofindia@IndianExpress@TheEconomist@EconomicTimes