छत्तीसगढ़ में जांजगीर-चांपा के पोड़ी राछा में जो हुआ, वह कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि डीएड अभ्यर्थी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद भी नियुक्ति की मांग कर रहे हैं, तो उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें हिरासत में लेने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या लोकतंत्र में अपनी मांग का पोस्टर दिखाना भी अपराध है? यदि राजनीतिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों को मुख्यमंत्री तक पहुंचने की छूट थी, तो बेरोजगार युवाओं के लिए अलग नियम क्यों?
जिन युवाओं ने वर्षों पढ़ाई की कानूनी लड़ाई लड़ी और न्यायालय से राहत हासिल की उन्हें नौकरी के बजाय थाने का रास्ता क्यों दिखाया गया? क्या प्रशासन का काम संवाद स्थापित करना है या असहमति को दबाना? और यदि अभ्यर्थियों ने कोई अपराध नहीं किया था तो उनसे शपथ पत्र लिखवाने की आवश्यकता क्या थी? सरकार और प्रशासन को इन सवालों का जवाब देना चाहिए, क्योंकि यह मामला केवल 2300 पदों का नहीं, बल्कि युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों और व्यवस्था पर उनके भरोसे का भी है।
@satyarajput321@SanjayKuma38469@CGDedBedSangh@CPDBS2 Ded walon ko sirf bhatka re h sabhi mantri log court se nyay milne k bad v sarkar adesh ka palan nahi kr rahi h 2300 pad rikt h fir v niyukti nahi d rahi h 2300 pariwar ka bhavishya khatre m h es nikammi sarkar ki wajah s
D.Ed Abhyarthi Protest : D.Ed अभ्यर्थी मन के अनसन जारी हे | अनसन म एक अउ अभ्यर्थी के बिगड़िस तबीयत
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राजधानी @RaipurDistrict के तूता धरना स्थल पर डीएड अभ्यर्थियों का आमरण अनशन 166 दिनों से जारी है। भीषण गर्मी, आर्थिक संकट और भविष्य की चिंता के बीच युवा अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे में राज्यसभा सांसद @SanjayAzadSln धरना स्थल पहुंचकर समर्थन देते हैं और संसद में मुद्दा उठाने का आश्वासन देते हैं। लेकिन इससे एक बड़ा सवाल खड़ा होता है। छत्तीसगढ़ के सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बड़े नेता आखिर कहां हैं? चुनाव के दौरान युवाओं के घर-घर जाकर समर्थन मांगने वाले नेता क्या 166 दिनों से चल रहे इस आंदोलन से अनजान हैं?
यह सवाल केवल डीएड अभ्यर्थियों का नहीं, बल्कि प्रदेश के उन हजारों युवाओं का है जो रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। क्या नेताओं के लिए युवाओं का महत्व सिर्फ वोट देने तक सीमित है, या फिर उनकी समस्याओं का समाधान भी राजनीति की प्राथमिकता बनेगा? जनता जवाब चाहती है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा शीतकालीन सत्र में शिक्षामंत्री ने 1300 पद खाली की जानकारी दी थी
लेकिन अब वे बोल रहे है कि इन पदों की भर्ती प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है, तो सवाल यह है कि ढाई महीने में ही 1300 पोस्ट कहा गया उसे जमीन निगल गई या आसमान खा गया?
-छत्तीसगढ़ की डीएड अभ्यर्थी।
#ded अभ्यर्थी मन पिछले 24 दिसंबर से आमरण अनशन म बैठे हे वो अधिकार बर जेन ल पाए बार सुप्रीम कोर्ट ऑ हाइकोर्ट ले जीत के आदेश के बाद ये तथा कथित भाजपा के सुशासन के सरकार न्युक्ति नहीं दे pawat हे। @satyarajput321@ChhattisgarhCMO@BJP4CGState@aajtak@PMOIndia
VIDEO | Chhattisgarh: D.Ed candidates, on the 57th day of their indefinite strike, attempted to walk on hot coals as part of their protest in Raipur.
Police personnel intervened and used fire brigade vehicles and fire extinguishers to disperse the demonstrators. Visuals show protesters gathered at the site as the police brought the situation under control.
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/bIyFWTfmBd)