@BhajanlalBjp@madanrrathore राजस्थान में आगामी स्थानीय निकाय एवं पंचायती राज चुनावों को देखते हुए संभाग सह-प्रभारियों व जिला प्रभारी-सहप्रभारियों की नियुक्ति के साथ मोर्चा जिलाध्यक्षों की घोषणा भी जल्द होनी चाहिए।
मोर्चों को सक्रिय नेतृत्व मिलने से संगठन मजबूत होगा और चुनावी तैयारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
@BJP4Rajasthan@NitinNabin राजस्थान में आगामी स्थानीय निकाय एवं पंचायती राज चुनावों को देखते हुए संभाग सह-प्रभारियों व जिला प्रभारी-सहप्रभारियों की नियुक्ति के साथ मोर्चा जिलाध्यक्षों की घोषणा भी जल्द होनी चाहिए।
मोर्चों को सक्रिय नेतृत्व मिलने से संगठन मजबूत होगा और चुनावी तैयारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
@BJP4Rajasthan@madanrrathore राजस्थान में आगामी स्थानीय निकाय एवं पंचायती राज चुनावों को देखते हुए संभाग सह-प्रभारियों व जिला प्रभारी-सहप्रभारियों की नियुक्ति के साथ मोर्चा जिलाध्यक्षों की घोषणा भी जल्द होनी चाहिए।
मोर्चों को सक्रिय नेतृत्व मिलने से संगठन मजबूत होगा और चुनावी तैयारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
@madanrrathore@NitinNabin राजस्थान में आगामी स्थानीय निकाय एवं पंचायती राज चुनावों को देखते हुए संभाग सह-प्रभारियों व जिला प्रभारी-सहप्रभारियों की नियुक्ति के साथ मोर्चा जिलाध्यक्षों की घोषणा भी जल्द होनी चाहिए।
मोर्चों को सक्रिय नेतृत्व मिलने से संगठन मजबूत होगा और चुनावी तैयारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
@BhajanlalBjp@NitinNabin राजस्थान में आगामी स्थानीय निकाय एवं पंचायती राज चुनावों को देखते हुए संभाग सह-प्रभारियों व जिला प्रभारी-सहप्रभारियों की नियुक्ति के साथ मोर्चा जिलाध्यक्षों की घोषणा भी जल्द होनी चाहिए।
मोर्चों को सक्रिय नेतृत्व मिलने से संगठन मजबूत होगा और चुनावी तैयारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
@ajaeybjp@BJP4Rajasthan राजस्थान में आगामी स्थानीय निकाय एवं पंचायती राज चुनावों को देखते हुए संभाग सह-प्रभारियों व जिला प्रभारी-सहप्रभारियों की नियुक्ति के साथ मोर्चा जिलाध्यक्षों की घोषणा भी जल्द होनी चाहिए।
मोर्चों को सक्रिय नेतृत्व मिलने से संगठन मजबूत होगा और चुनावी तैयारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
@ajaeybjp@BJP4Rajasthan राजस्थान में आगामी स्थानीय निकाय एवं पंचायती राज चुनावों को देखते हुए संभाग सह-प्रभारियों व जिला प्रभारी-सहप्रभारियों की नियुक्ति के साथ मोर्चा जिलाध्यक्षों की घोषणा भी जल्द होनी चाहिए।
मोर्चों को सक्रिय नेतृत्व मिलने से संगठन मजबूत होगा और चुनावी तैयारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
मोर्चा जिलाध्यक्षों की नियुक्ति अब चुनावों के बाद?
लगभग 6 वर्षों से पद पर जमे कई पदाधिकारियों के बावजूद सक्रिय कार्यकर्ताओं को अवसर नहीं मिल पा रहा।
जब बदलाव जरूरी है, तो चुनाव के बाद क्यों?
संगठन को नए और सक्रिय चेहरों की जरूरत चुनाव से पहले है, बाद में नहीं।
सरकार विरोधी लहर से अधिक, भाजपा कार्यकर्ताओं के काम नहीं होने से उपजी निराशा निकाय एवं पंचायतीराज चुनावों में कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हो सकती है।
कोई इसे स्वीकार करे या न करे, लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं में नेतृत्व और सरकार के प्रति जो उत्साह, ऊर्जा और जोश सामान्यतः दिखाई देता था, वह अब काफी हद तक कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। उसके स्थान पर निराशा और नीरसता का भाव हावी होता दिखाई दे रहा है।
कई सामान्य कार्यकर्ताओं का दबी जुबान में कहना है कि, “ठीक है, औपचारिकता निभानी है; बाकी चुनावों में अब खास कुछ बचा नहीं है।”
यह मनोस्थिति और बढ़ती निराशा भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं मानी जा सकती।
राजस्थान भाजपा में मोर्चा जिलाध्यक्षों की घोषणा यदि पंचायती राज एवं नगर निकाय चुनावों के बाद होती है, तो इसका सीधा असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है
अधिकांश वर्तमान मोर्चा जिलाध्यक्ष पिछले लगभग 6 वर्षों से पद पर हैं। इनमें से बड़ी संख्या अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा पा रही है।
ट्रांसफर के आवेदन में जितने लोग लिख रहे हैं कि वृद्ध माता पिता की सेवा के लिए ट्रांसफर जरूरी है, अगर उसमें से आधे भी माँ बाप की सेवा वास्तव में कर लें तो समाज का बहुत भला हो जाएगा
वृद्धाश्रमो का बोझ भी हल्का होगा