बिल्कुल
1. बॉर्डर स्कीम (Border Scheme)
10-15 साल की सेवा के बाद कर्मियों को उनके घर के पास या सीमावर्ती जिलों में तैनाती मिलनी चाहिए ताकि वे परिवार की जिम्मेदारी निभा सकें।
2. वेतन विसंगति (Pay Anomaly)
अन्य विभागों की तुलना में पुलिस का ग्रेड पे (विशेषकर 2000 ग्रेड पे) और कार्य के घंटों का अनुपात सही नहीं है।
4200 की जगह 2800 को मजबूर ?
लेखा वित्त हो गए सब कार्यकारी बल भी ?
3. TA/DA (यात्रा और दैनिक भत्ता)
पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के लिए एक जिले से दूसरे जिले या लंबी दूरी तय करने पर मिलने वाला यात्रा भत्ता (TA) और दैनिक भत्ता (DA) बहुत पुराना और कम है।
4. तबादला नीति (Transfer Policy)
पुलिस विभाग में तबादलों में पारदर्शिता की कमी।
अक्सर प्रभावशाली लोगों के तबादले मनचाही जगह हो जाते हैं, जबकि आम सिपाही सालों तक एक ही जगह पड़ा रहता है।
पति पत्नी विभाग में हैं तो कई बार अलग अलग pोस्टिंग से त्रस्त और अवसाद में रहने को मजबूर ?
19 वर्ष की सेवा पर अतिरिक्त मानदेय
मुद्दा: पुलिस विभाग के पुराने नियमों के तहत एक निश्चित सेवा अवधि (जैसे 19 या 20 वर्ष) पूरी करने पर मिलने वाले विशेष वित्तीय लाभ या मानदेय में विसंगतियां हैं। कोर्ट से आदेश लेने को मजबूर ?
अंतिम 3 वर्षों की चॉइस पोस्टिंग
सेवानिवृत्ति (Retirement) से पहले के अंतिम 3 वर्षों में पुलिसकर्मी को उसके गृह जनपद या मनचाही जगह पोस्टिंग देने का नियम कागजों पर तो है, लेकिन इसका लाभ सबको नहीं मिल पाता।
आपके द्वारा घोषित भत्ते भी कई जिलों में या नहीं लागू हुए अब तक ?
बाकी सब देश के लिए मॉडल ही हैं क्योंकि इन्हें मानव तो मानता नहीं कोई ?
@dgpup@yadavakhilesh@homeupgov@myogioffice
*पुलिस कर्मी अपनी नौकरी छोड़ रहे हैं — एक कड़वी सच्चाई*
“ *पुलिस कर्मचारी अब जा रहा है* ” — पुलिस की कार्यप्रणाली में बदलावो को देखते हुए मेरे अंतरात्मा का दुख इस प्रकार है —
आज देशभर के थानों में एक शांत लेकिन गहराई तक परेशान करने वाला बदलाव हो रहा है —
वह है कर्मचारियों के मन में बढ़ती थकान, बेबसी और मोहभंग।
पुलिस कर्मी अपनी नौकरियां छोड़ रहे हैं — *कुछ चुपचाप और कुछ भीतर ही भीतर टूटकर।*
वहीं, पुलिसकर्मी अपनी संतानों को अब पुलिस में भर्ती नहीं करना चाहते।
*ऐसा क्यों हो रहा है?*
🔹 1. *थानों के चारों ओर फैला नौकरशाही का जाल*
📍 आम जनता की जान माल की सुरक्षा के बजाय पुलिस अब रिपोर्ट भरने, फॉर्म भरने और डाटा अपलोड करने में उलझे रहते हैं।
📍 “फोटो भेजो”, “प्रमाण दो”, “रिपोर्ट अपलोड करो” ई- साक्ष्य अपलोड, सीडी ऑनलाइन, cctns अपडेशन, ITSSO, eDAR अपलोड — यही उनका रोज़मर्रा का काम बन गया है।
📍 अब बीट में उनकी उपस्थिति घट रही है, जबकि स्क्रीन के सामने बिताया समय बढ़ रहा है।
🔹 2. *तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता*
📍 हर विषय में डिजिटल टूल, ऐप्स और स्मार्ट बोर्ड थोपे जा रहे हैं।
📍 विषय, कार्य स्थल की परिस्थितियां, सामाजिक संस्कृति, क्षेत्रीय विषमताएं या संदर्भ को बिना समझे आदेश दिए जाते हैं — “तकनीक का उपयोग करो।”
📍 पुलिस कार्य प्रणाली से मानवीय स्पर्श, मूलभूत कार्य अब गायब हो गया है; पुलिस अब मशीन-केंद्रित बन गई है।
🔹 3. *पुलिस कर्मी बन गए हैं ‘इवेंट मैनेजर’*
📍 हर दिन कोई न कोई दिवस मनाना होता है — योग दिवस, मातृभाषा दिवस, पर्यावरण दिवस आदि।
📍 अब पुलिसिया गुणवत्ता नहीं, बल्कि कार्यक्रमों की संख्या और दिखावा सफलता का पैमाना बन गया है।
📍 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी दोनों इस प्रदर्शन संस्कृति के जाल में फंसे हुए हैं।
🔹 4. *ग्रामीण थानों की दयनीय स्थिति*
📍 कम नफरी होते हुए थाने के काम के साथ सारे इवेंट मैनेज करने के लिए मजबूर हैं।
📍 मूल जान माल की सुरक्षा के साथ-साथ उन्हे विद्यालयों में आत्म रक्षा प्रशिक्षण, साइबर जागृति अभियान, पॉक्सो जानकारी देना, ऑपरेशन गरिमा, सीएलजी मीटिंग्स, सुरक्षा सखी, ग्राम रक्षा दल, ट्रांसजेंडर लोगो के सम्मेलन करवाना, भिक्षा वृत्ति उन्मूलन, सड़क सुरक्षा, अभय कमांड कैमरों की निगरानी, सरकारी रिपोर्ट्स सब संभालनी पड़ती हैं।
📍 *अब वास्तविक पुलिस कार्य से अधिक महत्व “डाटा भेजने” को दिया जा रहा है।*
🔹 5. *मानसिक तनाव और आत्म-सम्मान की हानि*
📍 लगातार ऊपर से निगरानी ने पुलिस कर्मियों का आत्मविश्वास तोड़ दिया है।
📍 *हर काम का सबूत मांगा जाता है — विश्वास समाप्त हो गया है।*
📍 तनाव और व्यवहारिक समस्याओं से जूझते-जूझते पुलिस कर्मी भावनात्मक रूप से थक चुके हैं।
📍 माता-पिता, परिवार की परवरिश तो दूर मिलने के भी लाले रहते है, सामाजिक कार्यक्रमों में उपस्थिति तो नगण्य ही रहती है, और इसके बावजूद इन सभी की अवास्तविक अपेक्षाएं जिससे हर समय मानसिक दबाव झेलना पड़ता है।
🔹 6. *पुलिस का असली उद्देश्य खो गया है*
📍 थानों पर आंकड़े पूरा करने का भारी दबाव है।
📍 अनर्गल कार्यों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, चाहे उसकी जरूरत हो या नहीं, चाहे वे पुलिस से संबंधित है या नहीं।
📍 *अब पुलिस थाने “अपराध नियंत्रण की जगह राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने एवं सत्ता के आंकड़े प्रदर्शित करने के अखाड़े बन गए हैं।*
📍 आज की पुलिस कार्य प्रणाली प्रदर्शन दिखाने की परियोजना बनकर रह गई है।
📍 पुलिस का मूल उद्देश्य अपराध नियंत्रण एवं अपराधियों में भय पैदा करने का था जो अब डाटा ऑनलाइन और डेडलाइन के नीचे दब गया है।
📍 अब मूलभूत कार्यों से भटकाव से आम जनता पुलिस को लीपापोती कर समय पास करने और दिलासा देने के केन्द्र समझने लगी है, पुलिस का वास्तविक सम्मान भी खत्म सा हो गया है।
🔹 *अब विचार करने का समय है...*
पुलिस का असली केंद्र (थानों) को फिर से अपराध नियंत्रण के केन्द्र बनाने की आवश्यकता है, वहीं उच्चाधिकारियों को पुलिस कर्मियों से योग्यता से परे कई गुना अनर्गल कार्यों से बचा कर डिप्रेशन दूर करने पर विचार करना चाहिए,
ना कि सभी विभागों का कार्य पुलिस के जिम्मे थोप कर डाटा और रिपोर्ट मांग कर परेशानी बढ़ाने का कार्य करें।
यदि पुलिस को मूलभूत कार्यों से दूर कर समाज कल्याण पर ही केंद्रित करना हो तो पुलिस विभाग को समाज कल्याण विभाग के अधीन कर देना चाहिए ।
पुलिस की धुरी से इतर कार्य भार से पुलिस को स्वतंत्र नहीं किया गया तो आज के समय की माँग के अनुसार अपराध नियंत्रण नहीं होने से *आम जन में असुरक्षा की भावना पैदा होकर समाज में अराजकता का माहौल बनेगा* जिसके दूर गामी परिणाम बड़े
वीभत्स होंगे जिसके लिए इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।
देश में स्थिति ये है कि जी का अधिकार है वो खुलेआम अधिकार और अपने हक को मारता देख रहे प्रतिदिन ?
जो सरकार सुपाच्य गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं दे सकती पुलिसकर्मियों को वो सरकार देश की सबसे बड़ी जीडीपी होने का दावा करती है ?
कैसी जीडीपी है जो देश के सुरक्षाकर्मियों को ढंग का भोजन तक नहीं दे सकती ?
#police
#policing
#Law
#Reformation
वादों पे तेरे मारा गया , बंदा ये सीधा साधा,
झूठा है तेरा वादा वादा तेरा वादा वादा तेरा वादा
कभी कभी गाने भी "सच" बयान करते हैं ?
कोई बताएगा ये "गाना" किस फिल्म का है ?
ये पहली बार मेरे संज्ञान में आया की @Uppolice में 19 वर्ष के पश्चात -
24 वर्ष की सेवा पर भी द्वितीय सुपर सिलेक्शन ग्रेड 14430/- है जो विकल्प के आधार पर निर्धारित है ?
लेकिन इस विकल्प की व्याख्या क्या है ?
क्या 24 वर्ष पूर्ण होने पर यह सभी को दिया जा रहा ?
इसपर कोई प्रकाश डाले ?
@Uppolice@dgpup
लगातार पुलिस के आजीवन आत्महत्या कर रहे कारण ???
पारिवारिक तनाव बता दिया जाता रहा ?
अवसाद बता दिया जा रहा ?
इलाज बता दिया जाता रहा ?
लेकिन वास्तविकता से कोसों दूर आज तक।कोई इन मृत आत्महत्या करनेवाले आरक्षियों के मनोवैज्ञानिक मनोभाव की दशा पर काम नहीं कर पाया ? एक ट्रेनिंग प्राप्त उत्कृष्ट शारीरिक दक्षता वाले आरक्षी को आत्महत्या क्यों करनी पड़ी इसका जवाब कोई ढूंढना नहीं चाहता ?
क्या ट्रेनिंग पैटर्न खराब है या विभाग में आंतरिक स्थिति ?
किसी की कोई जवाबदेही तय नहीं बस एक फाइल तैयार हो जाती है ?
@myogiadityanath जी को इसकी समीक्षा करनी चाहिए कि लगातार ये स्थिति क्यों ?
क्यों परिवार उजड़ रहे अगर व्यवस्थाएं इतनी उत्तम है ?
केंद्रीय आयुध भंडार सीतापुर में 24वीं वाहिनी पीएससी मुरादाबाद के जी द्वारा सुरक्षा का ड्यूटी गार्ड ड्यूटी संपादित की जा रही है, जिसमें नियुक्त आरक्षी 210570929 हिमांशु कुमार की ड्यूटी 07.00 बजे से 10.00 बजे तक तक टावर नंबर 01 पर चल रही थी , उक्त सिपाही द्वारा अज्ञात कारण से समय 08.45 बजे स्वयं को सिर में इंसास राइफल बट नंबर 452 से गोली मार ली है!
ॐ शांति ॐ
उत्तरप्रदेश में गजब की सर्कस और हास्यप्रद व्यंग्यात्मक स्थिति बनी हुई है ?
राजकीय सेवाकाल के अंतिम तीन वर्षों या दो वर्षों की चॉइस पोस्टिंग के लिए भी कर्मचारियों को हाइकोर्ट जाना पड़ रहा है और हाइकोर्ट देता है डायरेक्शन विभाग को दो हफ्तों में निर्णय लेने का ?
विडंबना ये है कि कोई अधिकारी किसी कर्मचारी से संतुष्ट न हो तो वैसे भी
वो इगो संतुष्ट करने के लिए
चॉइस ट्रांसफर निरस्त ही कर देगा ?
अब विषय ये है की जब सरकार ही कर्मचारी के हितों का संवर्धन नहीं चाहती तो अंग्रेजों की परिपाटी इसे क्यों मानेगी ?
जीवन के अंतिम वर्ष परिवार कल्याण के लिए होने चाहिए ?
जिस राज्य में आदर्श परिवार नहीं वो राज्य आदर्श नहीं हो सकता !
आदर्श परिवार ही आदर्श राज्यों की परीकल्पना साकार करते हैं ?
सबसे ज्यादा त्रस्त और पीड़ित हैं @Uppolice के वो कमर्चारी
जो अंतिम दो या तीन वर्ष के सेवाकाल
को भुगत रहे ?
@UPGovt के अनर्गल व्यवस्थाओं के कारण न्यायपालिका पर मुकदमों का फर्जी बोझ आ रहा है ? ऐसे मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए स्वैच्छिक पोस्टिंग स्वयं देनी
चाहिए जिससे जनहित की सरकार होने
का सकारात्मक संदेश भी जा सके ???
क्या सही संचालन से समस्या है @homeupgov को ?
@myogiadityanath@jayantrld@RLDparty@dgpup@BJP4UP@ChiefSecyUP@brajeshpathakup