एक भ्रम जिसमे ये लोग स्वयं भी जी रहे है और अपने पूरे समाज को भ्रमित किया हुआ
इनकी कपोल कल्पना देखिए एक भी प्रमाण नही है और इन्हें प्रमाण प्रस्तुत कर रहे है जबकि इन सभी से एकदम साफ सिद्ध होता है कि गुर्जर कोई जाति नही अपितु स्थान एवं क्षेत्र के रूपमे प्रयुक्त है....(1/21)
The Arya Samaj, RSS, VHP, and BJP played central roles in spreading Sanskritization. The Arya Samaj encouraged lower castes to adopt Kshatriya customs and rituals, sometimes even creating fictional histories connecting these castes to Rajput warriors. Hindutva organizations, such as the BJP and RSS, furthered these narratives to create a unified Hindu identity, often using the Rajput heritage for their political advantage.
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#kshatriya #rajput #rajanya #sanskritization #rss #bjp #aryasamaj
A thread on the epigraphic records and literary evidences affirming the Suryavanshi Kshatriya lineage of the Guhilot/Sisodia Rajput & dispelling the erroneous narrative of their purported Brahmin origin.
हमारे कर्म तय करते है कि हम जीवन जीते है या अमर होते है
श्री क्षत्रिय युवक संघ के संस्थापक पूज्य श्री तनसिंह जी की 45 वीं पुण्यतिथि पर उनके चरणों में सादर वंदन। 💐
#kshatriya#Rajput#ShriKYS#ShriTanSinghji
जयंती पर कोटिस वंदन
-बेल्ट खोल दे #रामचंदर
- नही साहेब, मैं नही खोल सकता
- खोल दे, बहुत दर्द हो रहा है ..
रामचंदर कैसे खोलता। थोड़ी देर पहले जब हाथ लगाकर देखा था.. तो समझ गया था कि अंतड़ियां खुल गयी हैं।
बेल्ट ने दबा रखा है।
उसने बेल्ट खोल दी तो...
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साहेब बेहोशी के दौरे में चले जाते, फिर सचेत होते। फिर एक बार बुदबुदाये ..
- अच्छा, एक बात मानेगा मेरी
- हां साहेब
- तू बटालियन चला जा। कहना कि पूरी पलटन शहीद हो गयी। लेकिन कोई पीछे नही हटा
- आपको छोड़कर नही जाऊंगा साहब
पर साहब फिर बेहोश हो चुके थे।
अब जेसीओ रामचन्दर यादव ने उन्हें उठाया, और पहाड़ी के नीचे लाने लगा। रास्ते मे उसे अहसास हुआ। मेजर शैतान सिंह दम तोड़ चुके थे।
बर्फ अब भी गिर रही थी।
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राम चन्दर वहां पहुँचा जहां बटालियन का कैम्प था। पर वहाँ बहुत थोड़े लोग थे। जीप में बिठाकर उसे हेडक्वार्टर लाया गया। उसने कहानी बताई..
बारामूला से उन्हें 2 दिन पहले ही चुशुल सेक्टर में भेजा गया था। वहां LAC के पास रेजांग ला पर एक मोर्चा लगाया गया था। कम्पनी वहीं डटी हुई थी।
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18 नवम्बर की भयंकर सर्दी थी। लेकिन भारतीय सैनिक चौकस थे। रात साढ़े तीन बजे कुछ चीनियों को आते देखा गया। मेजर साहब ने रेंज में आते ही उन पर फायर करने का आदेश दिया।
पहला रेला आते ही एक टुकड़ी ने धुआंधार फायरिंग हुई। चीनी गिरने लगे। वे चींटियों की तरह चढ़े आ रहे थे, मरते जा रहे थे। तीन घण्टे तक लड़ाई चली। फिर थम गई।
सुबह साढ़े छह बजे, रोशनी होते ही बंकरों पर गोले बरसने लगे। मानो बरसात हो रही हो। हर पोस्ट, हर बंकर फटने लगी। आधे घण्टे की शेलिंग के बाद नजारा बदल चुका था।
धुआं छंटते ही चीनी फिर आने लगे। हमारी कई पोस्ट खामोश हो चुकी थी। जो बचे थे, गोलियां दाग रहे थे। मेजर शैतान सिंह को भी शेल का टुकड़ा लगा था।
मगर वे पोस्ट से पोस्ट भागते रहे, जवानों का हौसला बढ़ाते। इसी दौरान गोलियों का एक बर्स्ट लगा। गिर गए, राम चन्दर उन्हें उठाकर ओट में ले आया।
खून तेजी से बह रहा था। साहब बेहोश हो गए। फिर होश में आये। तो जानकारी ली। फिर कहा
- बेल्ट खोल दे रामचंदर
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बर्फबारी कुछ दिन बाद रुकी। सीजफायर हो चुका था, मगर बर्फ की मोटी तह हो चुकी थी। सारे निशान मिट चुके थे।
पूरे तीन माह के बाद बाद जब बर्फ पिघली, इनकी तलाश शुरू हुई।। एक चरवाहे को पहाड़ी पर लाशों के ढेर दिखा।
हैवी शेलिंग से उड़े हुए हाथ पैर, हाथों में अब भी बंदूक, कोई यूँ पड़ा है जैसे अभी उठ कर गोली चलाने लगेगा। गुड्डे गुड़ियों की तरह जहां तहां बिखरे शरीर..
कुमाऊं रेजिमेंट ने अपने 113 सैनिकों की लाशें इकट्ठा की। 18 नवंबर 1962 की उस काल रात्रि में चीनी सेना ने भी अपने 1200 से ज्यादा सैनिक खोए। बाद में आई रिपोर्ट्स बताती है कि चीन को सबसे ज्यादा नुकसान रेजांग ला में हुआ था।
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उस रात, चीनियों नें आसपास की कई पहाड़ियों को बिना लड़े कब्जा किया था। भारतीय सेना के कम फौजी होने के कारण उन्हें पीछे हटकर रिग्रूप होने को कहा गया था।
यह आदेश, रेजांगला में मेजर शैतान सिंह भट्टी को भी मिले थे। मगर उनकी कम्पनी में अपने रिस्क पर, पोस्ट न छोड़ना तय किया था।
नतीजा शहादत होगा, वे जानते थे।
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मेजर शैतान सिंह को परमवीर चक्र मिला। रेजांगला में उस पहाड़ी पर एक स्मारक बनाया गया। जहां कुमाऊं रेजिमेंट के 113 वीर अपनी जान दे गए।
स्मारक 60 सालों तक चीन की ओर देखकर फुसफुसाता था- यहां न किसी को घुसने दिया गया, न आने दिया गया है।
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60 साल बाद वह इलाका, आखिरकार बिना लड़े हम हार गए। इलाका "बफर जोन" हो गया है।
स्मारक तोड़ दिया गया। मेजर शैतान सिंह की हार आज हुई है। यह खबर भारतीय अखबारों में नही है।
आज मेजर साहब की जयंती है पुनः जयंती पर कोटिस वंदन
1962 के भारत-चीन युद्ध में अदम्य साहस एवं शौर्य का प्रदर्शन करने वाले, परमवीर चक्र से विभूषित मेजर शैतान सिंह जी भाटी की जयंती पर सादर नमन।
मातृभूमि की रक्षा के लिए आपके सर्वोच्च बलिदान का राष्ट्र सदैव ऋणी रहेगा।
#ShaitanSinghBhati
आज जनपद देवरिया में विगत दिनों युवा नौजवान छात्र विशाल सिंह की निर्ममता से हुई हत्या की घटना ने मुझको झकझोर दिया था,उस माता पिता के दुःखों का अंत नहीं जिन्होंनेअपने नौजवान पुत्र को खो दिया,इसलिए मैंने आज हौली बलिया गांव श्रद्धांजलि सभा मेंपहुँच कर,अपनी विनम्रश्रद्धांजलि अर्पित की
FACT CHECK ⚠️
The source that has been employed to tarnish the reputation of Maharana Sangram Singh I is none other than Tarikh i Salatin i Afghaniyah, a composition from a later period authored by Ahmad Yadgar.
I was commissioned into Second Battalion of The Rajput Regiment in june 1970. An illustrious unit which is 226 years old today. The history of the unit is replete with bravery a nd glory in all the wars it has participated in. It is also popularly called as Kali Chindi Paltan. I Wish the Kali Chindi Family, The Paltan and all who have been associated with the Paltan the very best on 226th Raising Day of the Paltan. I pray for continued Success and Glory for the Paltan and May the indomitable spirit of Kali Chindi always prevail.
द्वितीय बटालियन राजपूत रेजिमेंट में, मैं जून 1970 में कमिशन हुआ और वह मेरा परिवार है। आज पलटन का 226वां स्थापना दिवस है। पलटन का इतिहास गौरवपूर्ण और शौर्य से भरा रहा है । हर युद्ध में पलटन का पराक्रम सराहा गया है । मैं काली चिन्दी परिवार को शुभकामनाएं देता हूँ और प्रार्थना करता हूँ कि पलटन हमेशा गौरवशाली बनी रहे।
"बजरंग बली की जय"
"हनुमान के हूँ प्यारे "
पंडित जगन्नाथ जी, यह वही पोस्टर है जो दिवाल पर लगवाये गये थे कि, जो भी चंद्रशेखर आजाद की सुचना देगा उसे 5,000 रुपये इनाम दिया जाएगा!
• सत्यता लिखिए कि, इसी 5,000 रूपये की लालच में "पंडित वीरभद्र तिवारी" ने चंद्रशेखर आजाद के अल्फ्रेड पार्क में होने की सुचना अंग्रेजो को दिया था !
क्यों फर्जी में मिठाई वाले को बदनाम कर रहे, सच्चे ग'द्दारो का नाम क्यु नहीं लिख रहें??
• इलाहाबाद म्युजिअम के क्यूरेटर डा. राजेश मिश्र के मुताबिक, चंद्रशेखर आजाद को अल्फ्रेड पार्क में घेरने वाले 40 लोगों की आर्म्ड फोर्स के हिस्सा रहें अफसर कि 'डायरी' में चंद्रशेखर आजाद की सुचना देने वाले का नाम स्पष्ट पंडित वीरभद्र तिवारी दर्ज है !
• इस डायरी में गौड़ लिखते हैं- 27 फरवरी 1931 को आजाद अल्फ्रेड पार्क पहुंचने से पहले आनंद भवन पंडित जवाहर लाल नेहरू से मिलने गए थे, इसके बाद वे सुखदेव राज के साथ सुबह 9 बजे अल्फ्रेड पार्क पहुंचे। यहां भगत सिंह को छुड़ाने और बिखर रहे संगठन को फिर खड़ा करने पर बातचीत चल रही थी।
डायरी में दर्ज जानकारी के मुताबिक वीरभद्र तिवारी ने आजाद और सुखदेव राज को पार्क में देख लिया था। वह तुरंत पुलिस अधिकारी शंभूनाथ के पास पहुंचा और कहा- पंडितजी (चंद्रशेखर आजाद) अल्फ्रेड पार्क में हैं।
शंभूनाथ ने अंग्रेज अफसर मैजर्स को आजाद के पार्क में होने की सूचना दी। रिजर्व पुलिस लाइंस इलाहाबाद में सुबह की परेड के बाद सार्जेंट टिटर्टन रिजर्व इंस्पेक्टर्स अपनी फोर्स के साथ पहुंचकर चंद्रशेखर आजाद पर फायरिंग शुरु किया ! डटकर लड़ते हुए जब चंद्रशेखर आजाद जी को लगा कि वह अब नहीं बचेंगे तो स्वयं अपने आपको गो'ली मारकर शहीद हो गये !
चंद्रशेखर आजाद जैसे स्वतंत्रता सेनानी का जाना समस्त स्वतंत्रता सेनानी व देश के लिए सबसे बड़ी क्षति था !
महल-क़िले, ज़र-ज़मीन-जोरू सब राजपूतों ने तलवार की धार पर ली है लेकिन ये बात तेरे जैसे भिखमंगे क्या जाने जिनकी २०-३० पुश्ते इन्ही राजपूतों के अस्तबल में घोड़ों की लीद उठाने में खपा दी ?
सरहद पर लड़ने के लिए भी Reservation लाना चाहिए, फट के 🌸 हो जाएगी।
कुंठा है कि जाती नहीं😂😂
Dr. @SudhanshuTrived सुनो, विश्वनाथ प्रताप सिंह हमारे गुरूर हैं, हमारे सिरमौर हैं, उनका नाम तमीज से लिया करो !!
आप जिसे राजा मांडा कह रहे हो उन्होंने प्रधानमंत्री बनने से बहुत पहले अपनी हजारों एकड़ जमीन विनोबा भावे के भूदान आंदोलन में दान कर खुद को डिक्लास करते हुए भारत के लोकतांत्रिक व्यवस्था को आत्मसात किया था!
1989 में इस देश के ओबीसी, दलित, अकलियत, अहीर, कुर्मी, नायर, वेल्लालर, धानुक, दुसाध, बेलदार समुदाय के लोग वीपी सिंह के लिए नारा लगाते थे-
"राजा नहीं फकीर है, देश की तकदीर है।"
जिस वीपी सिंह को आप सामंतवाद का प्रतीक बता रहे हैं वो नहीं होते तो आपके प्रातः स्मरणीय नरेंद्र मोदी जी जो खुद को ओबीसी का बेटा कहते हैं कभी भारत के प्रधानमंत्री नहीं बन पाते। विश्वनाथ प्रताप सिंह जी के 42 पुस्तों का खतियान निकालने से पहले जान लीजिए आपके 42 पीढ़ी की कुंडली निकाल दिए तो आगे पीछे ताकने लग जाइएगा।
हम लिहाज करते हैं, नहीं तो अटल बिहारी वाजपेई से लेकर नरेंदर मोदी तक सबका काला चिट्ठा हमारे जुबान पर रहता है। क्योंकि हम बलराज मधोक से लेकर विनय सितापति तक सबको पढ़े हैं! किसने दीन दयाल उपाध्याय की ला'श पर चढ़कर प्रधानमंत्री तक का सफर किया? किसने हरेन पांड्या को ठिकाने लगाया? किसने सत्ता हासिल करने के लिए संजय जोशी के व्यक्तिगत सीडी को वायरल करवाया? किस साहब के कहने पर एक महिला आर्किटेक्ट की जासूसी करवाई गई थी? मेरा मुंह मत खुलवाईए।
हम अपना मुंह गंदा करना नहीं चाहते हैं। इसलिए मर्यादा में रहिए। आप जो कह रहे हैं वीपी सिंह जी ने मंडल कमीशन की सिफारिश को अपनी कुर्सी बचाने के लिए लागू किया था तो जान लीजिए वीपी सिंह को दोबारा 1996 में प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला था। हरिकिशन सिंह सुरजीत से लेकर रामविलास पासवान, करुणानिधि से लेकर लालू प्रसाद यादव तक सब लोग 1996 में वीपी सिंह के घर पर उन्हें मानने गए थे ,कि आप प्रधानमंत्री का पद स्वीकार कर लीजिए !
जहां लोग चपरासी की नौकरी नहीं छोड़ते हैं, विश्वनाथ प्रताप सिंह ने भारत के प्रधानमंत्री का पद ठुकराते हुए कहा कि -
"मैं प्रधानमंत्री की कुर्सी इसलिए छोड़ रहा हूं ताकि आने वाली पीढ़ी मेरे बाल-बच्चे को न कहे कि तुम्हारा बाप पदलोलुप था।" 🙏
खुद में सुधार कर लीजिए सुधांशु त्रिवेदी जी। विश्वनाथ प्रताप सिंह जी फेंकाए नहीं थे। मंडल कमीशन को लागू करने के बाद भी जनता ने उन्हें जिताकर लोकसभा भेजा था।
महात्मा गांधी और विश्वनाथ प्रताप सिंह इस देश में दो ऐसे महान विभूति हुए जिनके कारण आज हिंदू धर्म बचा हुआ है। नहीं तो हिन्दू धर्म हजार टुकड़े में बंट गया होता। ब्राह्मण, ठाकुर, लाला और भूमिहार मिलकर हिंदू धर्म का झाल बजाते। समझे सुधांशु त्रिवेदी जी।
वंचित वर्ग के लिए,विषमता के खिलाफ निर्णायक मण्डल कमीशन की सिफारिश को लागू कर देश को क्षत्रियो के न्यायोचित शासन का प्रमाण देने वाले, क्षात्र धर्म के अनुयायी, गरीबों, वंचितों व असहायों को अधिकार दिलाने वाले स्व. विश्वनाथ प्रताप सिंह जी को नमन् 💐 🙏
Remembering Shri V.P. Singh: The Statesman, Thinker, and Visionary Liberator on his Death Anniversary
Today, we remember the multifaceted genius of Shri Vishwanath Pratap Singh, a man whose intellectual depth and political acumen shaped the course of modern Indian history.
Shri V.P. Singh was not only a remarkable politician but also a writer, poet, painter, and philosopher. His personal interests in the arts and philosophy reflected a mind that was both creative and introspective, which enabled him to view the world through a lens that combined aesthetic sensitivity with a profound understanding of human nature. As a poet, he penned verses that delved into the complexities of life, love, and society, showcasing a reflective and analytical mind. His skills as a painter revealed an eye for detail and a deep appreciation for beauty, which he carried into his political life.
In the realm of politics, V.P. Singh was often compared to the great Machiavelli, with many viewing him as the "real version" of the Italian philosopher and strategist. Like Machiavelli, Shri VP Singh possessed an astute understanding of power dynamics and the complexities of governance. He was known for his pragmatism, unyielding in his ideals while being flexible in his methods. Singh was never one to shy away from bold moves if he believed they would serve the greater good. He understood the art of balancing political forces and was adept at navigating the intricate web of alliances, contradictions, and compromises that defined Indian politics.
Shri V.P. Singh’s approach to politics was strategic and intellectual, grounded in his broader understanding of philosophy and ethics. His leadership was marked by a deep sense of justice and a commitment to addressing the inequalities that plagued Indian society. His remarkable ability to fuse intellectual rigor with political action set him apart as a leader who was both a thinker and a doer, capable of translating complex ideas into real-world policies that resonated with millions.
In commemorating Shri V.P. Singh's death anniversary, we reflect not only on his political legacy, but also on the richness of his personality, his wide-ranging talents, and the unique blend of intellectualism and political savvy that defined him.
Warning ⚠️ Abusive language.
See the hate these Mo₹herFu@kers have for our dogra community and our Maharajas.
Hum issi liye land laws ki demand karte hai taaki iske jaise GB road ki paidaish jammu ke aas paas bhi na dikhe.
Iska naam Vivek Aggarwal hai.
देवरिया में क्षत्रिय युवाओं की ह्त्या पर पक्ष विपक्ष समेत मिडिया बौद्धिक वर्ग की चुप्पी या उनका passive endorsement हो, या गहलोत राजपूतों द्वारा उन्हीं की सांस्कृतिक धरोहर पर उन्हीं के धन से आयोजित उनके नये गादीपति के पगड़ी दस्तूर का विरोध करना हो या विश्वनाथ प्रताप सिंह....
cannot think well, and if they cannot think well, others will do their thinking for them.”
अर्थात "जो समाज तार्किक लिख नहीं सकता , वो ठीक से चिंतन-विमर्श नहीं कर सकता , और जो समाज ठीक से चिंतन-विमर्श नहीं कर सकता दूसरे उन पर अपना चिंतन विमर्श थोपते हैं।"....