जो सियासत में दिखाई देता है, अक्सर कहानी उससे कहीं बड़ी होती है। कभी तबादले चर्चा बन जाते हैं, कभी संगठन के भीतर की खींचतान और कभी प्रशासनिक फैसलों के पीछे उठते सवाल। कोलम में इन्हीं घटनाओं के बहाने सत्ता, संगठन और व्यवस्था की अनकही परतों को समझने का प्रयास किया है।
किसानों ने महीनों आंदोलन कर एमएसपी बचाई, लेकिन क्या किसानों के नाम पर जारी करोड़ों रुपये का लाभ किसी और ने उठा लिया? हनुमानगढ़ मंडियों से जुड़ी यह पड़ताल केवल अनियमितताओं की कहानी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है, जो किसानों की सुरक्षा के लिए बनाई गई थी। पूरी रिपोर्ट पढ़िए।
राजनीति की असली कहानी अक्सर सुर्खियों के पीछे छिपी होती है।इस सप्ताह..भटनेर के झरोखे से... में एक्सप्रेस-वे की सियासत, रिफाइनरी से बदला राजनीतिक समीकरण और पूर्व सीएम की सक्रिय भूमिका, तीनों पर एक साथ विश्लेषण। आखिर प्रदेश की राजनीति किस दिशा में बढ़ रही है?पढ़िए,प्रतिक्रिया दीजिए
क्या यमुना जल समझौता प्यासे राजस्थान के लिए उम्मीद की नई धारा है? यह केवल पानी नहीं, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और जल-सुरक्षा का सवाल है। आज प्रकाशित मेरे आलेख को पढ़ें और अपने विचार साझा करें।@narendramodi@AmitShah@BhajanlalBjp
सियासत में संयोग कम और संकेत ज्यादा होते हैं।जब पुराने समीकरण टूटने लगें, करीबी दूर दिखने लगें और सिस्टम के भीतर बेचैनी बढ़ने लगेतो समझिए कहानी सतह से नीचे जा चुकी है, ..भटनेर के झरोखे से.. में चर्चा उन्हीं सवालों की, जिन पर शहर से लेकर सत्ता तक कानाफूसी जारी है।
Rajasthan politics is witnessing crucial developments. Rajya Sabha polls, organizational reshuffles and farmers’ issues are shaping the state’s political landscape. Read my weekly column ‘Bhatner Ke Jharokhe Se’ in Punjab Kesari and share your views.
राजनीति में कभी-कभी सबसे बड़ी हलचल बिना किसी आधिकारिक घोषणा के शुरू हो जाती है।जिला स्तर से लेकर राजधानी तक, संगठन और सत्ता के बीच चल रही हलचलों, परफॉर्मेंस की कसौटी और बदलते समीकरणों पर आधारित आलेख…क्या सचमुच तैयार हो रहा है नया ‘पावर सेंटर’? पढ़िए मेरा साप्ताहिक कॉलम...
ऊर्जा संकट और बढ़ते खर्चों के बीच सत्ता के गलियारों में सादगी की नई तस्वीर दिखाई देने लगी है। कहीं काफिले छोटे हो रहे हैं, तो कहीं ट्रेन यात्राओं के जरिए संदेश देने की कोशिश हो रही है। क्या यह बदलाव स्थायी राजनीतिक संस्कृति बन पाएगा। इसी विषय पर आज पंजाब केसरी में प्रकाशित आलेख।
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 रद्द होने के बाद शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। आज देश के सर्वाधिक published हिन्दी दैनिक पंजाब केसरी के संपादकीय पेज पर प्रकाशित मेरे आलेख ‘नीट रद्द : सपनों पर लगा विराम, व्यवस्था पर उठे सवाल!
देश के सर्वाधिक प्रकाशित हिन्दी दैनिक पंजाब केसरी में प्रकाशित मेरे साप्ताहिक कॉलम ‘भटनेर के झरोखे से’ में इस बार पढ़िए— ‘प्रदेश प्रभारी की नई शर्त’, ‘महिला आरक्षण पर उठे सवाल’ और ‘इंजीनियर्स प्रकरण से गरमाई सियासत’।