पूर्व RTDC चेयरमैन श्री @DharmendraR_INC जी के साथ राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री श्री @ashokgehlot51 से मिलकर उन्हें शादी में पधारने का निमंत्रण दिया और बईया गाँव में माँ आईनाथ रोहिड़ाला ओरण को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने को लेकर चल रहे आंदोलन के बारे में अवगत करवाया ।
राजपूत हॉस्टल बचाओ महाआंदोलन
176 की क्षमता, फिर भी सिर्फ 33 छात्रों को प्रवेश! राजपूत सभा जयपुर की लचर व्यवस्था और तानाशाही के खिलाफ बड़ा आंदोलन
9 अक्टूबर
समय: प्रातः 11:00 बजे
प्रारंभ स्थल: 206 बीघा, कालवाड़ रोड से राजपूत सभा भवन (पाँच बत्ती, जयपुर)
@crosschat_wala
मैं राजेन्द्र राठौड़ का बहुत धन्यवाद देता हूँ इन्होंने मेरी बहुत मदद की है ~ ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेन्दु अधिकारी
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हार के पीछे राजस्थान के नेता का हाथ, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ की रणनीति काम आई । अमित शाह ने राठौड़ को सौंपी थी भवानीपुर सीट की जिम्मेदारी @Rajendra4BJP
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हार के पीछे राजस्थान के नेता का हाथ, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ की रणनीति काम आई । अमित शाह ने राठौड़ को सौंपी थी भवानीपुर सीट की जिम्मेदारी
@arvindchotia@Rajendra4BJP@8PMnoCM
breaking News
जयपुर VVIP एरिया सिविल लाइन में लेपर्ड
जब भी कहीं दंगा भड़के, लेपर्ड पकड़ना हो आतंकियों का मोर्चा संभालना हो या कंधार में आतंकियों के सामने जाना हो ,राजनीति में बली देनी हो
हमेशा ठाकुर को ही आगे किया जाता है @thebharatpur
RPSC को क्या जल्दी है?
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने 18 अक्टूबर को Assistant Professor 2025 की अधिसूचना जारी की। लेकिन नया syllabus 17 दिन बाद तक भी जारी नहीं हुआ।और अब आयोग कहता है कि परीक्षा 1 से 24 दिसंबर के बीच होगी।यानी अधिसूचना से लेकर परीक्षा तक सिर्फ़ 44 से 67 दिन!
क्या इतनी बड़ी शैक्षणिक परीक्षा जिसमें विश्वविद्यालय स्तर के विषय शामिल हैं सिर्फ़ 40 दिन में पढ़कर दी जा सकती है?
अगर आयोग सिलेबस ही समय पर नहीं दे पा रहा,
तो छात्रों से 40 दिन में तैयारी पूरी करने की उम्मीद कैसे कर सकता है?
मुख्य बिंदु
1.अपर्याप्त तैयारी अवधि:
•अधिसूचना 18 अक्टूबर को जारी हुई, परंतु 17 दिनों तक विषयवार नया पाठ्यक्रम (syllabus) वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया।
•इस कारण अभ्यर्थियों की तैयारी प्रारंभ तक नहीं हो सकी।
•अब यदि परीक्षा दिसंबर के प्रारंभ में रखी जाती है तो प्रभावी अध्ययन अवधि 40 दिन से भी कम रह जाती है।
2.विस्तृत व शैक्षणिक पाठ्यक्रम:
•Assistant Professor परीक्षा का स्तर विश्वविद्यालयीय शिक्षण सेवा के अनुरूप होता है।
•इसमें विषय का गहन अध्ययन, शिक्षण पद्धति, शोध, और समसामयिक विषयों की जानकारी अपेक्षित होती है।
•सामान्यतः किसी विषय का प्रभावी कवरेज (सिर्फ प्रथम बार अध्ययन) करने में कम से कम 3 से 4 माह की अवधि आवश्यक होती है।
•UPSC, NET, SET जैसी परीक्षाओं के लिए भी अभ्यर्थियों को एक वर्ष पूर्व तक तैयारी का अवसर दिया जाता है।
3.सिलेबस जारी करने में विलंब:
•अधिसूचना में स्पष्ट लिखा गया था कि नया पाठ्यक्रम आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा,
परंतु वह 17 दिन बाद तक भी उपलब्ध नहीं कराया गया।
•जब तक पाठ्यक्रम निश्चित न हो, तब तक किसी भी गंभीर अभ्यर्थी की तैयारी प्रारंभ नहीं की जा सकती।
•यह स्वयं आयोग की प्रक्रिया की विलंबता को दर्शाता है।
4.परीक्षा की निष्पक्षता एवं गुणवत्ता:
•इतने सीमित समय में अभ्यर्थी पूरे पाठ्यक्रम को न पढ़ पाएंगे,
जिससे परीक्षा सामान्य जानकारी आधारित (surface-level) बन जाएगी,
न कि गहन विषय-ज्ञान आधारित, जो कि सहायक आचार्य पद की मूल आवश्यकता है।
•यह न केवल विद्यार्थियों के साथ अन्याय होगा बल्कि राज्य के उच्च शिक्षा स्तर की गुणवत्ता को भी प्रभावित करेगा।
5.परीक्षा आगे बढ़ाने के लाभ:
•अभ्यर्थियों को समुचित तैयारी समय मिलेगा।
•आयोग को भी प्रश्नपत्र निर्माण, परीक्षा संचालन, और पारदर्शिता हेतु पर्याप्त व्यवस्था करने का अवसर मिलेगा।
•परीक्षा का स्तर और चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता दोनों बढ़ेगी।
मांग / अनुरोध
1.आयोग को चाहिए कि Assistant Professor परीक्षा 2025 की तिथि को कम से कम 2–3 माह आगे बढ़ाया जाए।
2.विषयवार सिलेबस तत्काल वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाए।
3.छात्रों को कम से कम 90 दिन का न्यूनतम तैयारी काल उपलब्ध कराया जाए।
4.यह निर्णय न केवल छात्र हित में बल्कि आयोग की निष्पक्षता व पारदर्शिता की प्रतिष्ठा हेतु भी आवश्यक है।
Assistant Professor जैसी शैक्षणिक प्रतिष्ठा वाली परीक्षा के लिए
केवल 40–45 दिनों का समय, बिना समय पर सिलेबस दिए,
अभ्यर्थियों की शैक्षणिक तैयारी को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
अतः आयोग से निवेदन है कि परीक्षा तिथियों पर पुनर्विचार कर
उचित विस्तार प्रदान किया जाए, जिससे सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान और न्यायसंगत अवसर मिल सके।
शिक्षा की परीक्षा जल्दबाज़ी में नहीं, न्याय और योग्यता के साथ होनी चाहिए। @RPSC1@thekesari@BhajanlalBjp@DrPremBairwa@arvindchotia@ashokshera94@ashokgehlot51@DharmendraR_INC@KumariDiya@dineshbohrabmr
देवउठनी एकादशी के पावन दिन देव उठे ,हमारे घर आई लक्ष्मीस्वरूपा बेटी और भारत की बेटियों ने महिला विश्वकप जीतकर इतिहास रच दिया! 🇮🇳
#WorldCup2026#india#TeamIndia
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इसका मतलब @thebharatpur सही बोल रहे है
सिनसिवार जाट जो भरतपुर के रूलर है राजस्थान के बाकी जाटों से अलग है
आज जब मैं हरि सिंह जी द्वारा लिखित “गजनी से जैसलमेर” पुस्तक पढ़ रहा था, तो एक अद्भुत ऐतिहासिक तथ्य सामने आया।
पुस्तक में उल्लेख है कि भगवान श्रीकृष्ण के वंशजों की वंशावली में 19वें राजा राजा उदयपसेन हुए, जो गजनी के राजा बने।
उनके दूसरे पुत्र पालसेन के वंशजों से ही भरतपुर के सिनसिवार जाट निकले, जिन्हें “उदयरकरण जाट” भी कहा गया है।
इसका अर्थ यह हुआ कि भरतपुर के जाट (सिनसिवार), वास्तव में भाटी ,जादव (जादौन) ,जडेजा यदुवंशी राजपूत वंशों से ही निकले हुए हैं।
यानी, गजनी के यदुवंशी राजपूत राजाओं से लेकर जैसलमेर के भाटियों और भरतपुर के सिनसिवारों तक एक ही यदुवंशी रक्तधारा प्रवाहित होती रही है।
इतिहास की एक रोचक झलक : “गजनी से भरतपुर तक”(700 पेज की किताब) @arvindchotia@ashokshera94