The 980 CE Gwalior Inscription of "Madhavavanshi Vachchhilla Abhira" of the Nandakula, a Minister of the Kachchhapa Dynasty: The Earliest Epigraphically Attested Claimant of Krishna Descent Whose Tribe Still Exists Today - A Thread 🧵
Keyword- Informative
Ancestry Test (DNA) results of Ahir (Aheer) of 'Gwalvansh' Subdivision (Kuri/Khaap) from Gorakhpur, Eastern Uttar Pradesh.
Paternal Haplogroup (Y-DNA): R1a-Z93
Ancestry Composition:
• Steppe_MLBA: 26.6%
• Iran_N: 41.0%
• AASI: 32.2%
Genetic Distance Analysis:
Based on genetic distance metrics, the closest population match is with the Rajasthani Ahir of Jaipur, followed by the Gwalvanshi Ahirs of Chandauli (Varanasi region).
Following the academic DNA samples of Gwalvanshi Ahirs/Yadavs from Chandauli (Varanasi region), this is the first private DNA sample from a Gwalvanshi Ahir individual, bringing the total sample size for this subdivision to 4 (3 academic + 1 private).
विश्वकप विजेता भारतीय स्पिनर कुलदीप यादव और वंशिका को शादी की हार्दिक बधाइयां। आज 14 मार्च 2026 को मसूरी की खूबसूरत वादियों में कुलदीप ने अपनी बचपन की दोस्त वंशिका के साथ सात फेरे लिए।
#KULDEEPYADAV#Kuldeepyadavwedding#GwalvanshiAhir
Leaving "Yadav" surname may be the only practical option left for the community.
Given existing socio-political prejudices,acting pragmatically to minimize unnecessary discrimination may be the wiser approach.
Until meaningful reforms ensure fairness in the institutions.
Feeling sad for Surbhi Yadav AIR 14 .
She scored a massive 862 marks in UPSC Mains written, one of the highest in the list.
But her interview score was only 165, bringing her final total to 1027.
Now compare this with AIR 1 Anuj Agnihotri:
• Anuj Agnihotri:
Mains Written – 867
Interview – 204
Final Total – 1071
• Surbhi Yadav:
Mains Written – 862
Interview – 165
Final Total – 1027
Just 5 marks difference in written, but 39 marks difference in interview changed the final outcome significantly.
She will go down in UPSC history as most unfortunate topper
An Abhira country known as Abiria or Abhiria was situated between Scythia on the lower Sindhu (Indus) and the coast country of Saurashtra, as described by Ptolemy in his 1st century AD text Periplus of the Erythraean Sea.
Key Word - Informative
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले, बदलापुर तहसील के ग्राम सीढ़ की रश्मि यादव – एक किसान की बेटी, जिन्होंने सपनों को हकीकत बना दिया।
सरकारी स्कूल से पढ़ाई, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से https://t.co/PZlXPOPYdF., फिर लगातार दो साल UPPCS में सफलता!
2021: आबकारी निरीक्षक (Excise Inspector) बनीं।
2022: 26वीं रैंक लेकर सीधे SDM!
एक्साइज जॉइन करने के महज 2 दिन बाद PCS रिजल्ट आया और जिंदगी पलट गई। आज बस्ती में SDM के तौर पर राजस्व मामलों का तेज़-निष्पक्ष निस्तारण कर रही हैं – सबकी तारीफ हो रही है।
ये सफर बताता है – जहां से शुरूआत हो, मंजिल वही तय करनी है जो दिल में हो। ग्रामीण बेटियों, ये आपका भी रास्ता है!
यादवों के एक बड़े तबके का समर्थन आज भी मुख्यमंत्री योगी के साथ है,बशर्ते!
जातिवादी टिप्पणियों से परहेज़ किया जाए,
विधानसभा में दिए गए “सद्भावना एक्सप्रेस” जैसे वक्तव्य अनावश्यक रूप से एंटी-योगी ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं,राजनीतिक असहमति अपनी जगह है,लेकिन सम्मानजनक भाषा ही स्थायी सामाजिक समर्थन का आधार बनती है।
अगर भाजपा सिर्फ इतना करने में कामयाब हो जाए कि उनकी सरकार से यादव समाज का कोई नुकसान नहीं होगा, तो एक बड़ा तबके के पास उनके विरोध में वोट करने की वजह नहीं बचेगी क्योंकि सच यही है कि यादव समाज भी सिर्फ अपने "विकाश और हितों" के आधार पर वोट करता है, हमारी अपनी कोई विचारधारा नही है,एक आम यादव को बस अपना हित दिखता है,और उसी के आधार पर वोट करता है।
भौगोलिक दृष्टि से देखें तो यादवों की घनी आबादी कासगंज से लेकर गाजीपुर तक फैली है,दुर्भाग्यवश लंबे समय तक इन क्षेत्रों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिली,अखिलेश यादव के कार्यकाल में कुछ पहलें हुई जिससे आलू बेल्ट में विकास भी देखने को मिला,पर फिर भी अवध-पूर्वांचल,जहाँ प्रदेश के लगभग 60% यादव निवास करते हैं,समग्र औद्योगिक और आधारभूत ढांचे के विस्तार से अपेक्षाकृत दूर रहा।
हमारा समाज भी यह स्वीकार करता है कि पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में पूर्वांचल-अवध क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे,कनेक्टिविटी, मूल सुविधाओं और प्रशासनिक सक्रियता में कुछ ठोस बदलाव दिखाई दिए हैं,और इनके लाभार्थियों में यादव समाज भी शामिल है, साथमें वर्षों बाद ऐसा अवसर बना है कि हमारे क्षेत्र का कोई नेता देश के बड़े पद जैसे प्रधानमंत्री का दावेदार बन सकता है,यह मौका भी समाज हल्के में नहीं लेना चाहता।
क्योंकि ओपोजिशन की पार्टियां ज्यादा से ज्यादा हमे क्या दे देंगी? सरकारी नौकरी? कुछ ठेके? और समाज के कुछ चुनिंदा राजनेता मजबूत हो जाएंगे, जिससे समाज के 90% लोगो से कोई मतलब नहीं है,लेकीन वहीं दुसरी तरफ़ यदि कोई नेतृत्व क्षेत्र में उद्योग आकर्षित कर सके, इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करे और समग्र आर्थिक गतिविधि बढ़ाए, तो उसका लाभ समाज के व्यापक तबके,विशेषकर युवाओं को लंबे समय तक मिल सकता है, और जब पूरब में विकास होगा, लखनऊ कानपुर जैसे शहर उपर आयेंगे तो इटावा मैनपुरी वाला आलू बैल्ट अपने आप विकसित हो जाएगा।
इसीलिए अगर मुख्यमंत्री योगी,सिर्फ इन बातों पर ध्यान देने में कामयाब हो जाए तो यकीनन 27 में ही यादव समाज का एक बड़ा तबका उन्हे अपना समर्थन देगा।
यादवों के एक बड़े तबके का समर्थन आज भी मुख्यमंत्री योगी के साथ है,बशर्ते!
जातिवादी टिप्पणियों से परहेज़ किया जाए,
विधानसभा में दिए गए “सद्भावना एक्सप्रेस” जैसे वक्तव्य अनावश्यक रूप से एंटी-योगी ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं,राजनीतिक असहमति अपनी जगह है,लेकिन सम्मानजनक भाषा ही स्थायी सामाजिक समर्थन का आधार बनती है।
अगर भाजपा सिर्फ इतना करने में कामयाब हो जाए कि उनकी सरकार से यादव समाज का कोई नुकसान नहीं होगा, तो एक बड़ा तबके के पास उनके विरोध में वोट करने की वजह नहीं बचेगी क्योंकि सच यही है कि यादव समाज भी सिर्फ अपने "विकाश और हितों" के आधार पर वोट करता है, हमारी अपनी कोई विचारधारा नही है,एक आम यादव को बस अपना हित दिखता है,और उसी के आधार पर वोट करता है।
भौगोलिक दृष्टि से देखें तो यादवों की घनी आबादी कासगंज से लेकर गाजीपुर तक फैली है,दुर्भाग्यवश लंबे समय तक इन क्षेत्रों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिली,अखिलेश यादव के कार्यकाल में कुछ पहलें हुई जिससे आलू बेल्ट में विकास भी देखने को मिला,पर फिर भी अवध-पूर्वांचल,जहाँ प्रदेश के लगभग 60% यादव निवास करते हैं,समग्र औद्योगिक और आधारभूत ढांचे के विस्तार से अपेक्षाकृत दूर रहा।
हमारा समाज भी यह स्वीकार करता है कि पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में पूर्वांचल-अवध क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे,कनेक्टिविटी, मूल सुविधाओं और प्रशासनिक सक्रियता में कुछ ठोस बदलाव दिखाई दिए हैं,और इनके लाभार्थियों में यादव समाज भी शामिल है, साथमें वर्षों बाद ऐसा अवसर बना है कि हमारे क्षेत्र का कोई नेता देश के बड़े पद जैसे प्रधानमंत्री का दावेदार बन सकता है,यह मौका भी समाज हल्के में नहीं लेना चाहता।
क्योंकि ओपोजिशन की पार्टियां ज्यादा से ज्यादा हमे क्या दे देंगी? सरकारी नौकरी? कुछ ठेके? और समाज के कुछ चुनिंदा राजनेता मजबूत हो जाएंगे, जिससे समाज के 90% लोगो से कोई मतलब नहीं है,लेकीन वहीं दुसरी तरफ़ यदि कोई नेतृत्व क्षेत्र में उद्योग आकर्षित कर सके, इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करे और समग्र आर्थिक गतिविधि बढ़ाए, तो उसका लाभ समाज के व्यापक तबके,विशेषकर युवाओं को लंबे समय तक मिल सकता है, और जब पूरब में विकास होगा, लखनऊ कानपुर जैसे शहर उपर आयेंगे तो इटावा मैनपुरी वाला आलू बैल्ट अपने आप विकसित हो जाएगा।
इसीलिए अगर मुख्यमंत्री योगी,सिर्फ इन बातों पर ध्यान देने में कामयाब हो जाए तो यकीनन 27 में ही यादव समाज का एक बड़ा तबका उन्हे अपना समर्थन देगा।
कुछ समय पहले मैंने लिखा था कि योगी आदित्यनाथ को हिंदू-मुस्लिम शब्द को अपने भाषणों में रिप्लेस करके न्यू-ऐज टेक , इकोनॉमी , इंफ्रा और विकास की बातों पर फोकस करना चाहिए। अच्छी बात है कि वह भी इन चीजों को समझ रहे हैं।
स्मार्ट पुलिसिंग और लॉ एंड ऑर्डर के लिए नए इंस्टीटूशन बनाने पर भी उनका फोकस होना चाहिए। यह उनका कोर स्ट्रेंगेथ है।
उनकी राजनीति भी हिंदुओं में वैमस्यता फैलाने पर नहीं है। पिछले मनुस्मृति विवाद के मौसम में भी उन्होंने दोनों पक्षों पर कारवाई कर के UP को शांत रखा था। इसके उलट मोहन यादव ने पहले मनुस्मृति जलाने दिया और फिर अंबेडकर की फोटो जलाने पर अनिल मिश्रा एंड कंपनी पर कारवाई कर दिया।
जबकि मोहन यादव को भी सोशलिस्ट बकैतियाँ छोड़कर इन्हीं सब विषयों पर राजनीति करनी चाहिए। जिस गद्दी पर योगी आदित्यनाथ दांव लगाये हुए हैं। वहाँ तक पहुचने के लिये उनका राह भी आसान है। एकबार वो प्रोग्रेसिव मध्यम-वर्ग तबके को अपने आईडियाज से प्रभावित कर लेते हैं तो उत्तर भारत की यादव आबादी स्वतः उनके दावेदारी में इंपोर्टेंट फैक्टर निभाएगी।
दोनों को कम से कम रोज चंद्रबाबू नायडू और आंध्र में हो रहे IT के कामों के वीडियोज देखने चाहिए।
हमारे छोटे से गांव से निकलकर देश की सबसे ऊंची सीमाओं पर तिरंगा लहराने वाले हीरो! 🇮🇳
बस्ती जिले के मुंडेरवा, उमरी अहरा गांव के श्री सुभाष चंद्र यादव जी—जिनके पिता श्री फूल चंद्र यादव और मां श्री राम लौटी देवी ने सपने देखे थे बेटे के बड़े होने के। आज वो ITBP (इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस) के कमांडेंट हैं, 39वीं बटालियन में।
1999 में असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में जॉइन किया, और 27 सालों में -40 डिग्री की ठंड, ऊंची चोटियां, चीन बॉर्डर की चुनौतियां—सब कुछ झेला। फिर भी मुस्कुराते हुए ड्यूटी निभाई।
राष्ट्रपति द्वारा Republic Day 2026 पर Meritorious Service Medal (MSM) से सम्मानित!
10 पदक
12 प्रशंसा पत्र
61 सराहना पत्र
यह मेडल सिर्फ नाम का नहीं—यह उन मां-बाप की मेहनत, गांव की मिट्टी, और हर उस युवा की कहानी है जो सोचता है "हमारे यहां से क्या होगा?"
सुभाष जी की पत्नी अनीता यादव और बेटी सावनी भी गर्व से देख रही होंगी। हमारे पूर्वांचल के लाखों परिवारों के लिए यह संदेश है: मेहनत करो, पढ़ो, देश के लिए कुछ करो—सपने पूरे होते हैं!
बस्ती के इस योद्धा को सलाम!
ऐसे और सुभाष बनें।
जौनपुर के पहलवान सौरभ यादव ने सीनियर नेशनल फेडरेशन कप 2026 में 79kg वर्ग में रजत पदक जीता है। 🥈
उत्तर प्रदेश के जौनपुर से ताल्लुक रखने वाले सौरभ ने इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया और देश के लिए एक और उपलब्धि जोड़ी।
कड़ी मेहनत और लगन से अखाड़े में कमाया गया ये मेडल जौनपुर और पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है।
बधाई हो सौरभ यादव!
ऐसे ही आगे बढ़ते रहो और नई ऊँचाइयाँ छूते रहो।
जौनपुर के पहलवान सौरभ यादव ने सीनियर नेशनल फेडरेशन कप 2026 में 79kg वर्ग में रजत पदक जीता है। 🥈
उत्तर प्रदेश के जौनपुर से ताल्लुक रखने वाले सौरभ ने इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया और देश के लिए एक और उपलब्धि जोड़ी।
कड़ी मेहनत और लगन से अखाड़े में कमाया गया ये मेडल जौनपुर और पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है।
बधाई हो सौरभ यादव!
ऐसे ही आगे बढ़ते रहो और नई ऊँचाइयाँ छूते रहो।
There was density of Abhira(Ahir) population in post ancient Nepal.
An Abhira settlement, mentioned as “Abhira Pallisiyat i.e. the places where the Abhiras dwell” is found engraved in an inscription located at Thimi, Bhaktapur, Kathmandu, Nepal.
Key Word - Informative
ट्रेंड में सहयोग करने वाले सारे भाइयों को बधाई।
तीनों hashtag Top 10 ट्रेडिंग में रहे।🙏🏻
चौरी चौरा के नायक भगवान अहीर और विक्रम अहीर अमर रहें।
#BhagwanAhir#VikramAhir#चौरीचौरा_दिवस
चौरी चौरा क्रांति में आगे का मोर्चा संभालने वालों में भगवान अहीर और बिक्रम अहीर का नाम है जो भीड़ का नेतृत्व करने के साथ साथ अंग्रेजी फौज से लोहा भी ले रहे थे।
#bhagwanahir#vikramahir#चौरीचौरा_दिवस
भगवान अहीर (1886-1923) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक वीर योद्धा थे, जिन्होंने 4 फरवरी 1922 को हुए ऐतिहासिक चौरी-चौरा कांड में प्रमुख भूमिका निभाई। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के डुमरी खुर्द क्षेत्र के ग्वालवंशी अहीर कुल में जन्मे भगवान प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटिश भारतीय सेना में सैनिक के रूप में सेवा कर चुके थे। युद्ध के बाद वे ब्रिटिश शासन की अन्यायपूर्ण नीतियों से क्षुब्ध होकर असहयोग आंदोलन में शामिल हुए।2 फरवरी 1922 को गौरी बाजार में उच्च खाद्य मूल्यों और शराब बिक्री के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए पुलिस ने उन्हें बुरी तरह पीटा और गिरफ्तार कर लिया। इस घटना ने ग्रामीणों में आक्रोश फैलाया। 4 फरवरी को लगभग 2,000-2,500 प्रदर्शनकारियों ने थाने पर जुलूस निकाला। पुलिस की गोलीबारी के जवाब में भीड़ ने थाने को आग लगा दी, जिसमें 22 पुलिसकर्मी मारे गए।इस हिंसा से व्यथित महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन स्थगित कर दिया। ब्रिटिश अदालत ने भगवान अहीर सहित 19 क्रांतिकारियों को फांसी की सजा सुनाई, जो 1923 में अमल में आई।
#BhagwanAhir
#VikramAhir
#चौरीचौरा_दिवस
विक्रम अहीर, चौरी-चौरा कांड (4 फरवरी 1922) के प्रमुख नेता थे और ग्वालवंशी अहीर कुल से संबंध रखते थे। उनका परिवार स्वतंत्रता संग्राम के लिए पूरी तरह समर्पित था।
2 फरवरी 1922 को गौरी बाजार के प्रदर्शन में उनके पिता शिवचरण अहीर पुलिस की गोलीबारी में शहीद हो गए। उनके भाई सूरजबली अहीर भी चौरी-चौरा थाने पर हुई पुलिस फायरिंग में वीरगति को प्राप्त हुए, जिससे जनआक्रोश और तेज़ हो गया।
विक्रम अहीर के पुत्र नेउर अहीर एक प्रसिद्ध पहलवान थे और असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल रहे। उन्होंने ग्रामीणों को संगठित कर आंदोलन को मजबूती दी।
इस परिवार ने ब्रिटिश अत्याचार के सामने अदम्य साहस दिखाया—पिता और भाई शहीद हुए, पुत्र को कैद हुई और विक्रम अहीर स्वयं फांसी पर चढ़ गए।
ग्वालवंशी अहीरों का यह परिवार चौरी-चौरा के 22 अमर शहीदों में शामिल होकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाला बना। उनका त्याग आज भी अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा देता है।
#BhagwanAhir
#VikramAhir
#चौरीचौरा_दिवस